हवा महल का इतिहास और रोचक तथ्य

Hawa Mahal History in Hindi: नमस्कार दोस्तों आ जाओ आप सभी लोगों को अपने इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से बताने वाले हैं भारत के राजस्थान राज्य में जयपुर शहर में स्थित एक ऐसे महल के विषय में। जिसकी दीवारें इतनी ज्यादा ऊंची बनाई गई थी कि महल के सभी महिलाएं महल के बाहर हो रहे हैं, सभी त्योहारों को बड़ी ही आसानी से देख सके और उनका लुफ्त उठा सकें, क्योंकि प्राचीन समय में महिलाओं को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी।

अतः जिसके कारण वहां के राजा ने महिलाओं के लिए निर्मित करवाया। यह महल राजस्थान के जयपुर सिटी में स्थित सिटी पैलेस के कुछ ही दूरी पर या यू कहे तो सिटी पैलेस के किनारे पर ही बना हुआ है। हमारे इतना कहने के बाद आप सभी लोग तो समझ गए होंगे कि हम राजस्थान के जयपुर में स्थित किस महल की बात कर रहे हैं, जी हां! आप सभी लोगों ने बिल्कुल सही अनुमान लगाया हम बात कर रहे हैं हवा महल के विषय में।

Image: Hawa Mahal History in Hindi

आज हम आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से हवा महल के विषय में संपूर्ण जानकारी बड़े ही आसानी से और सुगमता पूर्वक प्राप्त हो जाएगी। आज आप सभी लोगों को इस लेख में जानने को मिलेगा कि हवा महल क्या है? हवा महल को किसने बनवाया? हवा महल के निर्माण के पीछे क्या इतिहास है? हवामहल को लेकर कुछ महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य इत्यादि।

यदि आप हवा महल के विषय में संपूर्ण जानकारी (Hawa Mahal History in Hindi) प्राप्त करना चाहते हैं तो कृपया इसलिए को अंत तक अवश्य पढ़े तो चलिए शुरू करते है अपना यह महत्वपूर्ण लेख।

हवा महल का इतिहास और रोचक तथ्य | Hawa Mahal History in Hindi

हवा महल का निर्माण किसने करवाया?

हवा महल भारत के प्राचीन राज महलों में से एक है। हवामहल का निर्माण प्राचीन भारत वर्ष के महाराजा सवाई प्रताप सिंह के द्वारा करवाया गया था। हवामहल का निर्माण प्राचीन राजा महाराजा सवाई सिंह के द्वारा 1799 ईस्वी में किया गया। हवामहल का निर्माण लालचंद उस्ताद ने भगवान श्री कृष्ण के मुकुट के आकार में हवामहल का निर्माण करवाया।

हवा महल लगभग 5 मंजिला ऊंची इमारत है। इस पांच मंजिला ऊंची इमारत के बाहर की ओर एक ही आकार की मधुमक्खियां भी लगाई गई हैं, अतः हवा महल में लगभग 553 छोटी खिड़कियां है। इन खिड़कियों को प्राचीन समय से ही झरोखा खिड़कियां कहा जा रहा है। हवा महल की सभी खिड़कियों को बहुत ही बढ़िया कलाकृति एवं बेहतरीन नक्काशी के साथ सदैव सजाया गया रहता है।

हवा महल के निर्माण पीछे का इतिहास

जैसा कि हमने आप सभी लोगों को ऊपर बताया कि हवामहल का निर्माण भारत के प्राचीन राजा महाराजा सवाई प्रताप सिंह के द्वारा राजस्थान के जयपुर शहर में 1799 ईस्वी में बनवाया गया। हवा महल का निर्माण महाराजा सवाई सिंह ने प्राचीन समय की सभी महिलाओं को महलों के बाहर हो रहे सभी क्रिया वीडियो को नजर में रखने के लिए इस महल का निर्माण करवाया। महिलाएं मात्र कुछ ही समय के लिए अपने कमरों से बाहर आती हैं और हवा महल के ऊपर से अपने दैनिक जीवन का निरीक्षण करती हैं।

हवामहल का निर्माण के समय इस महल का नाम हवा महल नहीं था। इस महल पर बनाए गए सभी जालों की मदद से ठंडी ठंडी एवं ताजी हवा महल के अंदर प्रवेश करती है और हमेशा गर्मियों के मौसम में भी हवामहल सदैव ठंडा रहता है। हवा महल में ठंडी ठंडी हवाओं के प्रवेश और सभी मौसम में ठंडी ठंडी हवाओं के आने से बाद में चलकर इस महल का नाम हवा महल रख दिया गया।

हवा महल के निर्माण के बाद कई बार इस महल का की मरम्मत की जा चुकी है। अतः इस महल का अंतिम बार मरम्मत करने के बाद लगभग 50 वर्षों के बाद ही वर्ष 2006 में हवा महल की फिर से मरम्मत की गई। हवामहल को विश्व की धरोहर के रूप में भी शामिल किया जा चुका है। हवा महल के निर्माण में अलग-अलग शहरों से लाल बलुआ पत्थर एवं विशेष प्रकार के गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया है, जिसके कारण हवा महल की नक्काशी संरचना और भी ज्यादा आकर्षक हो जाती है।

हवा महल में अनेकों प्रकार के स्मारक भी स्थापित किए गए हैं। अतः 2006 में की गई मरम्मत के दौरान इन सभी स्मारक का मूल्य निर्धारण भी किया गया, अतः उस समय में इन सभी स्मारकों का लगभग 4568 मिलीयन रुपए मिल रहे थे। हवा महल की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखने का जिम्मा कॉरपोरेशन सेक्टर के द्वारा उठा लिया गया है और यह कॉरपोरेशन सेक्टर हवा महल की सभी सुरक्षा में अपना पूर्ण योगदान देता है और सदैव हवा महल की सुरक्षा करता भी करता था, परंतु बाद में यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने हवा महल के सुरक्षा का जिम्मा उठाया और वर्तमान समय में यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया ही हवा महल के सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा रही है।

हवामहल धीरे-धीरे इतना विकसित हो गया कि संपूर्ण विश्व भर में इसे जाना जाने लगा और हवा महल को विश्व का धरोहर भी शामिल कर दिया गया है। हवा महल को देखने के लिए देश दुनिया से प्रतिदिन हजारों लाखों की संख्या में लोग आते हैं, इसी कारण प्रसिद्ध होने के बाद हवा महल का परिसर भी विकसित किया गया जिससे, कि लोग हवा महल में बड़ी आसानी से घूम फिर सकें। बड़ी प्राचीन समय से ही विद्यमान हवा महल में पर्यटकों की भीड़ को आप सभी लोग किसी भी दिन देख सकते हैं।

हवा महल अपने नक्काशी इमारत और ठंडी हवाओं के कारण संपूर्ण विश्व भर में प्रसिद्ध है और इस महल में एक बहुत ही विशाल एवं आकर्षक घुमावदार पक्ष वाला दीवार भी बनाया गया है। जयपुर में बने इस विश्व प्रसिद्ध इमारत की में बने अन्य स्मारकों की तरह ही यह स्मारक भी बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है, क्योंकि इसे पूरी तरह से गुलाबी रंगों के बलुआ पत्थर एवं लाल रंगों के बलुआ पत्थर के मिश्रण के द्वारा एक नक्काशी संरचना देते हुए बनाया गया है।

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कैसे पहुंचे हवा महल

यदि आप सभी लोगों में से कोई भी व्यक्ति हवा महल पहुंचना चाहता है तो उन सभी लोगों को अनेकों प्रकार के रास्ते अपने स्थानीय क्षेत्रों से मिल जाएंगे, जिनका उपयोग करके आप बड़ी आसानी से राजस्थान के जयपुर राज्य में स्थित हवामहल तक पहुंच सकते हैं। आप सभी लोगों को हवामहल तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग, हवाई मार्ग एवं इन सभी के साथ साथ रेल मार्ग भी देखने को मिल जाएगा। आप सभी लोग बड़ी ही आसानी से किसी भी मार्ग का उपयोग करके बड़ी आसानी से हवा महल देखने के लिए जा सकते हैं।

  1. हवाई मार्ग: किसी भी स्थान तक बड़ी ही आसानी से एवं सुगमता पूर्वक पहुंचने के लिए यदि कोई सबसे अच्छा मार्ग माना जाता है तो वह होता है हवाई मार्ग। आप सभी लोग हवाई मार्ग का उपयोग करके बहुत ही कम समय में और बड़ी ही आसानी से जयपुर पहुंच सकते हैं और वहां से कैब, रिक्शा या बस के माध्यम से हवामहल तक बड़ी ही आसानी से पहुंच सकते हैं। हवाई मार्ग केवल कुछ प्रसिद्ध एवं मशहूर शहरों में ही देखने को मिलेगा, अतः आपके पास में यदि कोई एयरपोर्ट होता है, तो आप सभी लोगों के लिए सबसे अच्छा मार्ग हवाई मार्ग ही होगा, हालांकि आपको कुछ अधिक पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
  2. सड़क मार्ग: आप सभी लोगों के पास यदि कोई खुद का कोई एक ऐसा साधन है, जिसके माध्यम से आप सड़क रास्ते का उपयोग करके ही जयपुर तक पहुंच सके, तो आप सभी लोगों के लिए हवाई मार्ग से अच्छा रास्ता यह होगा। हालांकि हवाई मार्ग के द्वारा आप आसानी से राजस्थान के जयपुर पहुंच सकते हैं और बड़े ही कम समय में हवा महल तक भी पहुंच सकते हैं, परंतु यदि आप हवाई मार्ग से जाते हैं, तो आपको राजस्थान राज्य में स्थित अन्य किसी भी महल या किसी अन्य पर्यटन स्थल इत्यादि को देखने के लिए जाने के लिए समय समय पर गाड़ियां बुक करनी पड़ेगी और इसके लिए आपको काफ़ी पैसे खर्च करने पड़ेंगे। यदि आप खुद की गाड़ी लेकर जाते हैं, तो आप सभी लोगों को किसी में महल को देखने जाने के लिए केवल अपने गाड़ी में तेल भरवाना होगा और आप कहीं भी जा सकते हैं।
  3. रेल मार्ग: आप सभी लोग रेल मार्ग का उपयोग करके भी बड़ी ही आसानी से राजस्थान राज्य तक पहुंच सकते हैं और वहां से लोकल ट्रेन का उपयोग करके जयपुर पहुंच सकेंगे और इसके बाद आप जयपुर से बड़ी ही आसानी से हवामहल तक भी पहुंच जाएंगे। आप सभी लोगों को रेल मार्ग का उपयोग करके हवामहल तक पहुंचने के लिए बहुत ही कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे, परंतु आपको सुविधाएं पूरी तरह से नहीं मिल पाएंगे, ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार आपको हवाई यात्रा में होती है। अतः हमारी यही सलाह होगी कि आप सभी लोगों के लिए सबसे अच्छा मार्ग यदि कोई है, तो वह है सड़क मार्ग। सड़क मार्ग आप सभी लोगों के लिए सभी सबसे अच्छा मार्ग माना जाएगा जब आपका खुद का कोई वाहन होगा।

हवा महल के विषय में कुछ महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य

  • जब आप सभी लोग हवामहल को देखेंगे तो आपको ऐसा लगेगा कि 70 से 80 डिग्री के कोण पर खड़ा है और यह वास्तव में लगभग 87 डिग्री के कोण पर स्थित है।
  • हवामहल दुनिया का सबसे ऊंचा महल है, वह भी बिना किसी आधार का।
  • हवा महल के निर्माण के समय लगभग कुल 953 खिड़कियां लगाई गई हैं, खिड़कियों के माध्यम से हवामहल सदैव ठंडा रहता है।
  • हवामहल का निर्माण विशेष रूप से जयपुर शहर की शाही महिलाओं के लिए करवाया गया था।
  • हवा महल के सामने की तरफ कोई भी प्रवेश द्वार नहीं है, आप सभी लोगों को हवा महल के अंदर जाने के लिए पीछे के रास्ते से ही प्रवेश लेना होगा।
  • हवामहल मुगल एवं राजपूतों के सत्यापन शैली में निर्मित किया गई एकमात्र महल है।
  • हवा महल के सबसे ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए केवल ढलान वाला एक रास्ता है ना कि कोई सीढ़ी।
  • हवा महल को एक अन्य नाम पैलेस ऑफ़ विंड से भी संपूर्ण विश्व भर में जाना जाता है।
  • हवा महल में कुल 5 मंजिलें बनाई गई हैं और प्रत्येक मंजिलों पर अनेकों खिड़कियां है।
  • हवा महल की नक्काशी एवं अद्भुत संरचना का श्रेय लालचंद उस्ताद को जाता है, इन्होंने ही इस महल की नक्काशी संरचना का निर्माण किया।
  • हवामहल का निर्माण राजस्थानी राजपूत राजा महाराजा सवाई प्रताप सिंह के द्वारा वर्ष 1999 में किया गया।
  • हवा महल को भगवान श्री कृष्ण के राजमुकुट के आकृति के समान ही बनाया गया है।
  • हवा महल का निर्माण गुलाबी एवं लाल रंग के उच्च क्वालिटी के बलुआ पत्थर की मदद से किया गया है।
हवा महल कहां पर स्थित है?

राजस्थान राज्य के जयपुर शहर में

हवामहल का निर्माण किसके द्वारा किया गया था?

राजपूताना शासक महाराजा सवाई प्रताप सिंह के द्वारा

हवामहल का निर्माण कब और कैसे पत्थरों का उपयोग करके किया गया?

वर्ष 1799 ईस्वी में लाल बलुआ पत्थर एवं गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग करके

हवामहल का नक्काशी निर्माण किसके द्वारा बनाया गया?

लालचंद उस्ताद

हवा महल का निर्माण कैसी आकृति में किया गया है?

भगवान श्री कृष्ण के मुकुट की आकृति में

निष्कर्ष

हम उम्मीद करते हैं कि आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखा गया यह महत्वपूर्ण लेख “हवा महल का इतिहास और रोचक तथ्य (Hawa Mahal History in Hindi)” अवश्य ही पसंद आया होगा, यदि आप सभी लोगों को यह लेख पसंद आया हो, तो कृपया इस लेख को अवश्य शेयर करें, यदि आपके मन में इस लेख को लेकर किसी भी प्रकार का कोई सवाल है, तो कृपया कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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