ग्वालियर किले का इतिहास और रोचक तथ्य

Gwalior Fort History in Hindi: भारत के मध्य प्रदेश में एक ऐसा किला स्थित है, जो कि संपूर्ण विश्व में पर्यटन स्थल की दृष्टि से बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है। मध्यप्रदेश में स्थितियां किला मध्य प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों में से बहुत ही ज्यादा प्रसिद्ध है, अतः प्रतिवर्ष इसे देखने के लिए लाखों करोड़ों की संख्या में लोग आते हैं। भारत के मध्य प्रदेश में स्थित किला मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित पर्वत गोपाल चंद्र पर स्थित है।

ग्वालियर में स्थित इसके लिए कौन मध्य प्रदेश शहर से बाहर से ही देखा जा सकता है, अतः यह किला बहुत ही बड़ा किला है। यह किला इस किले में एक बहुत ही ऐतिहासिक संग्रहालय मौजूद है, अतः यह संग्रहालय ना केवल मध्य प्रदेश बल्कि संपूर्ण भारत में मशहूर संग्रहालयों में से एक है।

अब आप समझ गए होंगे कि हम किस किले की बात कर रहे हैं। जी हां! आप सभी लोगों ने बिल्कुल सही अनुमान लगाया हम बात कर रहे हैं, मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित ग्वालियर किले के विषय में। मध्य प्रदेश में स्थित यह ग्वालियर का किला संपूर्ण विश्व में अपनी विशालकाय स्वरूप के कारण मशहूर है।

Image: Gwalior Fort History in Hindi

आज आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख में जानने को मिलेगा, कि ग्वालियर किले का निर्माण कब और किसने करवाया, ग्वालियर किले का इतिहास (Gwalior Fort History in Hindi) और ग्वालियर किले के विषय में रोचक तथ्य। यदि आप ग्वालियर किले के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं, तो कृपया आप हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख को अंत तक अवश्य पढ़ें।

ग्वालियर किले का इतिहास और रोचक तथ्य | Gwalior Fort History in Hindi

ग्वालियर किले का इतिहास

हमारे भारत के इतिहास में दर्ज आंकड़ों के अनुसार क्या पता चलता है कि ग्वालियर में स्थित ग्वालियर किले का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था। ग्वालियर किले का निर्माण आठवीं शताब्दी के एक सरदार सूर्य सेन ने करवाया था। सूर्य सेन ने इस किले को एक घर के जैसे किया था अर्थात यह किला तो इतना बड़ा था।

परंतु इसकी ऊंचाई और कमरों की संख्या बहुत ही ज्यादा कम थी। बाद में लगभग 15 मी सदी में राजपूत शासक राजा मानसिंह तोमर के द्वारा ग्वालियर किले का निर्माण वास्तविक स्वरूप में किया गया, अतः इन्हीं के द्वारा ग्वालियर किले को वर्तमान समय की स्वरूप प्राप्त हुई है।

ग्वालियर किले पर बहुत से राजपूत राजाओं ने अपना शासन किया। इन राजाओं के बाद लगभग 989 वर्षों तक इस किले पर पाल वंश के शासकों ने राज किया और पाल वंश के राजाओं के बाद इसके लिए प्रतिहार वंश के शासकों ने राज किया। 1023 ईस्वी में मुगल वंश के राजा मोहम्मद गजनी ने इसके पर आक्रमण कर दिया और हार गया।

इस हार के बाद बहुत ही ज्यादा दुखी हुआ, अतः अपने इस विचार को बदल दिया। मोहम्मद गजनी के बाद मुगल बादशाह कुतुबुद्दीन ऐबक ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर किले पर आक्रमण कर दिया और विजय प्राप्त करके इसके लिए को अपने अधीन कर लिया।

इन सभी के बाद वर्ष 1211 में कुतुबुद्दीन ऐबक को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें इस महल को त्यागना पड़ा। इसके बाद वर्ष 1231 ईस्वी में मुगल वंश के संस्थापक के पुत्र इल्तुतमिश अर्थात कुतुबुद्दीन ऐबक के पुत्र इल्तुतमिश ने इस किलो को पुनः अपने अधीन कर लिया। महाराजा देववरम ने ग्वालियर में ही रहकर तोमर राजवंश की स्थापना की।

तोमर राजवंश के सबसे प्रसिद्ध राजा मानसिंह माने जाते थे। मानसिंह ने अपनी पत्नी मृगनयनी के लिए गुजारी महल बनवाया था। मान सिंह ने ही 1398 से 1505 ईसवी के मध्य इस किले को वास्तविक रूप दिया। अतः 1398 ईसवी से लेकर 1505 ईसवी तक ग्वालियर के किले पर तोमर वंश के राजा का ही राज रहा।

तोमर वंश के शासनकाल में ही 16 वीं शताब्दी में इब्राहिम लोदी के द्वारा किए गए आक्रमण में मानसिंह ने पहले ही इब्राहिम लोदी की अधीनता को स्वीकार कर लिया अतः बाद में इब्राहिम लोदी की मृत्यु के बाद मान सिंह के बेटे विक्रमादित्य को बाबर के पुत्र हुमायूं के द्वारा दिल्ली के दरबार में बुला लिया गया और विक्रमादित्य दिल्ली जाने से मना कर दिया।

इस बात से हुमायूं को काफी ज्यादा गुस्सा आया और बाबर की सेना के साथ हुमायूं ने ग्वालियर पर हमला कर दिया और ग्वालियर पर अपना कब्जा जमा लिया। इसके बाद फिर से शेरशाह सूरी के द्वारा हुमायूं को हरा दिया गया और ग्वालियर के किले पर एक नए वंश की स्थापना हुई जो कि सूरी वंश था।

इसके बाद वर्ष 1736 ईस्वी में जाट राजा महाराज भीम सिंह के द्वारा सूरी वंश को हराकर जाटों के द्वारा आधिपत्य जमा लिया गया। इसके बाद वह 1756 ईस्वी तक ही इस किले पर जाटों का अधिकार रहा। इसके बाद वर्ष 1789 से लेकर 18 से 44 ईसवी के मध्य इस किले पर अंग्रेजों और सिंधिया के मध्य लगातार नियंत्रण बदलता रहा, इसके बाद जनवरी अट्ठारह महाराजा पुर की लड़ाई रूप से सिंधिया के कब्जे में आ गया।

इन सभी के बाद भारत वर्ष के इतिहास के सबसे वीरांगना महिला महारानी लक्ष्मी बाई जिन्हें हम झांसी की रानी के नाम से जानते हैं इन्होंने मराठा ओं के साथ मिलकर ग्वालियर के किले पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए हमला कर दिया, अतः 16 जून को जनरल ह्यूज के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना के द्वारा उन्हीं पर हमला कर दिया गया।

झांसी की रानी ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए लड़ाइयां लड़ी और ब्रिटिश सेना को किले पर कब्जा नहीं करने दिया परंतु इसी दौरान उन्हें गोली लग गई और अगले ही दिन 17 जून को महारानी लक्ष्मी बाई की मृत्यु हो गई। यही वह लड़ाई थी, जिसे भारत के इतिहास में ग्वालियर की लड़ाई का नाम दे दिया गया। महारानी लक्ष्मी बाई की मृत्यु के बाद केवल 3 दिनों में ही ब्रिटिश सैनिकों ने ग्वालियर किले पर अपना कब्जा जमा लिया।

कुछ महत्वपूर्ण शहरों से ग्वालियर किले तक की दूरी

शहरशहर से ग्वालियर किले की दूरी
दिल्ली327 किलोमीटर
आगरा119 किलोमीटर
चेन्नई1867 किलोमीटर
मुंबई महाराष्ट्र1080 किलोमीटर
कोलकाता1261 किलोमीटर

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ग्वालियर किले तक कैसे पहुंचे?

आप सभी लोगों को ग्वालियर तक पहुंचने में मुख्य रूप से दो मार्ग बहुत ही ज्यादा सरल पढ़ सकते हैं, पहला मार्ग हवाई मार्ग है और दूसरा रेल मार्ग। यदि आप सड़क मार्ग का उपयोग करते हैं तो आपको काफी ज्यादा दूरी तय करनी पड़ सकती है।

क्योंकि सड़कें काफी ज्यादा घुमावदार होती हैं और मध्यप्रदेश में इसके लिए तक पहुंचने के लिए आपको बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि रास्ते काफी ज्यादा पथरीले हैं और आपको कई पहाड़ियों से होकर गुजरना पड़ सकता है तो ग्वालियर के लिए तक पहुंचने के लिए आप रेल मार्ग या हवाई मार्ग का ही उपयोग करें।

1. हवाई मार्ग

यदि आप ग्वालियर शहर तक हवाई मार्ग के द्वारा पहुंचना चाहते हैं, तो आपके लिए यह काफी अच्छा साबित हो सकता है। यदि आप हवाई मार्ग के माध्यम से ग्वालियर किले तक पहुंचना चाहते हैं, तो आपको ग्वालियर शहर के हवाई अड्डे से लगभग 8 किलोमीटर तक की दूरी तय करने के बाद ग्वालियर के लिए तक जाना होगा। आप इस हवाई अड्डे से एक कैब, रिक्शा, ऑटो कुछ भी बुक करके ग्वालियर किले तक पहुंच सकते हैं।

आप सभी लोग दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उपयोग करके ग्वालियर लगभग कुछ ही मिनटों में पहुंच सकते हैं, क्योंकि ग्वालियर की दूरी दिल्ली से मात्र 327 किलोमीटर ही है। आप चाहे तो आपने नजदीकी हवाई अड्डे से ग्वालियर तक पहुंच सकते हैं, अतः पुनः आप ग्वालियर किले तक जाने के लिए किसी अन्य साधन का उपयोग कर सकते हैं।

2. रेल मार्ग:

संपूर्ण देश के किसी भी क्षेत्र से आप ग्वालियर किले तक पहुंच सकते हैं, क्योंकि संपूर्ण देश भर में ट्रेन के आवागमन की सुविधा बना दी गई है, अतः आप अपने नजदीकी रेलवे स्टेशन से ट्रेन में बैठ कर बड़ी आसानी से ग्वालियर तक पहुंच सकते हैं। आप सभी लोगों को अपने शहर से ग्वालियर तक की दूरी के हिसाब से कुछ समय तक ट्रेन में ही रहना होगा। अतः आप सभी लोग ट्रेन का उपयोग करके ग्वालियर किले तक पहुंच सकते हैं।

ग्वालियर के लिए के विषय में कुछ महत्वपूर्ण एवं रोचक तथ्य

  • कोहिनूर हीरा विश्व का सबसे कीमती हीरा है, अतः यह हीरा केवल ब्रिटेन में पाया जाता है। आप लोगों को यह जानकर का हैरानी होगी, कि कोहिनूर हीरे का अंतिम संरक्षक ग्वालियर का राजा हुआ करता था।
  • प्राचीन समय में कोहिनूर हीरा गोकुल कुंडा की खान से निकाला जाता था, परंतु वर्तमान समय में इस जाहिरा समाप्त हो चुका है।
  • देश के ऐतिहासिक किले में ग्वालियर किले का बहुत ही ज्यादा महत्व है, ग्वालियर के किले को हिंद किले का मोती भी कहा जाता है।
  • आप सभी लोगों को ग्वालियर के किले का प्रवेश द्वार हाथी पुल के नाम से देखने को मिल जाएगा यह द्वार सीधा मान मंदिर महल की ओर ले जाएगा एवं इसके दूसरे द्वार का नाम बदालगढ़ द्वार है।
  • आप सभी लोगों को ग्वालियर के लिए में प्रवेश करने के लिए दो रास्ते देखने को मिल जाएंगे पहला रास्ता ग्वालियर गेट जिसमें आपको पैदल ही जाना पड़ेगा और दूसरा रास्ता उरवाई गेट है, जहां पर आप गाड़ी के साथ-साथ पैदल भी जा सकते हैं।
  • आप सभी लोगों को ग्वालियर किले में बहुत से ऐतिहासिक स्मारक, बुध एवं जैन मंदिर और कुछ अन्य महल जैसे कि मानसिंह महल करण महल गुजारी महल जहांगीर महल शाहजहां महल इत्यादि देखने को मिल जाएंगे।
  • आप सभी लोगों को इस किले के अंदर परिसर में तामचीनी वृक्ष देखने को मिल जाएगा, इस वृक्ष को देश में जाने-माने संगीतकार तानसेन के द्वारा लगाया गया था।
  • ग्वालियर किला दो भागों में बटा हुआ है पहला गुजारी महल और दूसरा मन मंदिर।
  • ग्वालियर किले का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से किया गया था।
ग्वालियर किले का निर्माण कब हुआ था?

8वीं शताब्दी से लेकर 15वी शताब्दी के मध्य

ग्वालियर किले का निर्माण कब पूरा हुआ?

1505 ईसवी में

ग्वालियर किले के निर्माण कार्य को किसने पूरा किया?

मानसिंह तोमर

ग्वालियर किले के निर्माण की नींव कब रखी गई थी?

आठवीं शताब्दी में

ग्वालियर किले की नींव किसने रखी थी?

सरदार सूर्यसेन

निष्कर्ष

हम उम्मीद करते हैं, कि आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखा गया यह महत्वपूर्ण लेख “ग्वालियर किले का इतिहास और रोचक तथ्य (Gwalior Fort History in Hindi)” अवश्य ही पसंद आया होगा, यदि हां! तो कृपया हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण को अवश्य शेयर करें, यदि आपके मन में इसलिए को लेकर किसी भी प्रकार का कोई सवाल है, तो कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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