नमामि गंगे पर निबंध

Essay on Namami Gange in Hindi: भारत की लोकप्रिय नदी गंगा के बारे में संपूर्ण देश अच्छी तरह से वाकिफ है। हम यहां पर नमामि गंगे पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में नमामि गंगे के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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नमामि गंगे पर निबंध | Essay on Namami Gange in Hindi

नमामि गंगे पर निबंध (250 शब्द)

भारत के हिमालय से निकलने वाली गंगा नदी, जो बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। हिमालय से निकली हुई यह गंगा बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने से पहले लाखों लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करवाती है। इसके अलावा गंगा नदी के पानी से सिंचाई कार्य भी संपन्न होता है। गंगा नदी देश की काफी बड़ी नदी है। जिसमें देश की अन्य छोटी छोटी नदियां आकर सम्मिलित होती है। गंगा नदी का सबसे बड़ा घाट हरिद्वार को माना जाता है। गंगा नदी की लंबाई बहुत बड़ी है।

गंगा नदी के हरिद्वार घाट पर अस्थि विसर्जन का कार्य किया जाता है। गंगा नदी में सफाई को लेकर भी सरकार द्वारा कई मुख्य कदम उठाए गए। गंगा नदी में बढ़ रहे प्रदूषण के पश्चात स्वच्छ गंगा नाम का मिशन सरकार द्वारा चलाया गया और इस मिशन के तहत गंगा नदी को पूरी तरह से साफ किया गया।

गंगा नदी में स्नान करना काफी पवित्र माना जाता है। गंगा नदी के पानी को लोग गंगाजल के रूप में पवित्र जल मांग कर उसे कई प्रकार के पूजनीय कार्य में काम लेते हैं। गंगा नदी के पानी को गंगाजल के रूप में कई प्रकार की वस्तुओं को शुद्ध करने में प्रयोग किया जाता है। गंगा नदी में स्नान करने से मारा जाता है, कि इंसान द्वारा किए गए सारे पाप गंगा नदी में धुल जाते हैं। गंगा नदी का पानी पीने में काफी स्वादिष्ट होता है। इसके अलावा गंगा नदी के पानी में कभी भी नील हरित शैवाल नहीं पैदा होते हैं।

नमामि गंगे पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

भारत की यह नदि हिमालय से निकलती हैं और बंगाल की घाटी में विसर्जित होती हैं। यह निरंतर प्रवाहित होने वाली नदी हैं। यह पापियों का उद्गार करने वाली नदी हैं। भारतीय धर्मग्रंथों मे इसे पवित्र नदी माना गया हैं और इसे माता का दर्जा दिया गया हैं। गंगा केवल नदी ही नहीं एक संस्कृति हैं। गंगा नदी के तट पर अनेक पवित्र तीर्थों का निवास हैं।

गंगा की उत्पत्ति

गंगा को भागीरथी भी कहा जाता हैं। गंगा का नाम राजा भगीरथ के नाम पर पड़ा हैं। राजा भागीरथ के साठ हजार पुत्र थे, श्रापवश सभी पुत्र भस्म हो गए थे। तब राजा ने कठोर तपस्या की इसके फलस्वरूप गंगा शिवजी की जटा से निकलकर देवभूमि भारत पर अवतरित हुई।
जिससे भगीरथ के साथ हजार पुत्रों का उद्धार हुआ। तब से लेकर गंगा अब तक ना जाने कितनी पापियों का उद्गार कर चुकी हैं। लोग यहां स्नान करने आते हैं। इसमें मृतकों के शव बहाए जाते हैं। इसके तट पर शवदाह के कार्यक्रम होते हैं।गंगा तट पर पूजा- पाठ,भजन कीर्तन आदि के कार्यक्रम चलते रहते हैं।

गंगा का उद्गम स्थान

गंगा हिमालय में स्थित गंगोत्री नामक स्थान से निकलती हैं। हिमालय की बर्फ पिघलकर इसमें आती रहती हैं, अतः इस नदी में पूरे वर्ष जल रहता हैं। इस सदानीरा नदी का जल करोड़ों लोगों की प्यास बुझाता हैं। करोड़ों पशु -पक्षी इसके जल पर निर्भर हैं। लाखो एकड़ जमीन इस जल से सिंचित होती हैं। गंगा नदी पर फरक्का आदि कई बांध बनाकर बहुउद्देशीय परियोजना लागू की गई हैं।

नदी के तट पर स्थित विभिन्न तीर्थ स्थान

गंगा तट पर अनेक तीर्थ हैं। बनारस, काशी प्रयाग, इलाहाबाद ,हरिद्वार आदि इनमें प्रमुख के प्रयाग में गंगा यमुना और सरस्वती का संगम हैं। यहां प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ का विशाल मेला लगता हैं। लोग बड़ी संख्या में यहां आकर संगम स्नान करते हैं।

बनारस और काशी में तो पूरे वर्ष भी भक्तों का समागम होता हैं। पवित्र तिथियों पर लोग निकटतम गंगा घाट पर जाकर स्नान करते हैं और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। विभिन्न अवसरों पर यहां मेले लगा करते हैं। भारतीय धर्म गंगा देवी के रूप में पूजी जाती हैं- भारत में गंगा हिंदू धर्म में एक देवी के रूप में पूजा जाती हैं। यह भारतीयों के जीवन चक्र पर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह भारत की सबसे लंबी नदी हैं और दुनिया की सबसे लंबी नदियों में से एक हैं।

गंगा का आकार तथा विस्तार

भारत में इसका सबसे बड़ा नदी बेसिन हैं। जो लगभग 8,38,200वर्ग किमी में फैला हैं और इसके प्रवाह के तीन महत्वपूर्ण मार्ग हैं। मध्यम मार्ग ,ऊपरी मार्ग और निचला मार्ग यह एक पूर्ण नदी हैं। जो हिमालय से निकलती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। इस की कहीं सहायक नदी हैं। जैसे घागरा ,यमुना ,रामगंगा आदि भागीरथी, हुगली इसके वितरक हैं।

गंगा नदी बांग्लादेश और भारत दोनों से होकर बहती हैं। इसकी लंबाई लगभग 2525 किमी हैं और इसका मुंह गंगा डेल्टा हैं। इसके बहुत सारे स्रोत हैं और उनमें से कुछ ग्लेशियर हैं। जिनमें सतोपंथ ग्लेशियर भी शामिल हैं। नदी का ऊपरी हिस्सा अपने स्रोत से हरिद्वार तक फैला हैं। नदी का मध्यम हिस्सा हरिद्वार से बिहार के राजमहल पहाड़ियों से शुरू होता हैं।

इस क्रम में नदी उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से होकर गुजरती हैं और विभिन्न सहायक नदियों जैसे घागरा, राम गंगा, गोमती, कोसी और गणपत भाई और से चंबल जमुना आदि से दाई और से जुड़ी हुई हैं। जमुना, गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदियो का जल मार्ग पश्चिम बंगाल से शुरू होता हैं। यह राज महल पहाड़ियों से दक्षिण की ओर बहती हैं।

गंगा नदी का मुख्य घाट

यह नदी देश की काफी लोकप्रिय और चर्चित नदी है। इस नदी का मुख्य घाट हरिद्वार को माना जाता है। हरिद्वार जिसे प्रभु और हरी का वास मानते हुए इस स्थान को हरिद्वार के नाम से जाना जाता है। हरिद्वार गंगा घाट को सबसे बड़ा और लोकप्रिय घाट इसलिए माना जाता है। क्योंकि हरिद्वार गंगा घाट पर अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न होती है।

गंगा नदी का अंतिम मिलन

गंगा नदी काफी बड़ी नदी है। इस नदी में कई अन्य छोटी छोटी नदियां आकर भी मिलती है। गंगा नदी जो कश्मीर से शुरू होकर बंगाल की खाड़ी में आकर गिरती है। गंगा नदी का आज अंतिम मिलन के बारे में बात की जाए तो गंगा नदी देश के कई राज्यों से गुजरती हुई बंगाल की खाड़ी में आकर गिरती है।

निष्कर्ष

हिंदू अपने पापों को मिटाने के लिए गंगा नदी का उपयोग करते हैं। उनका मानना है कि देवी गंगा नदी के रूप में पृथ्वी पर आई और अगर वे इसमें स्नान करते हैं। तो उनके पाप साफ हो जाएंगे। लाखों हिंदू हर साल नदी में खुद को साफ करने तथा अपने पापों को धोने के लिए और स्वर्ग प्राप्ति के लिए लंबा रास्ता तय करके आते हैं।

अंतिम शब्द

नमामि गंगे के बारे में संपूर्ण जानकारी इस आर्टिकल में हमने निबंध के रूप में आप तक पहुंचाई है। आज का यह आर्टिकल जिसमें हमने नमामि गंगे पर निबंध( Essay on Namami Gange in Hindi) आपके सामने पेश किया है। हमें पूरी उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से संबंधित कोई जुड़ा सवाल है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है।

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