लाला लाजपत राय पर निबंध

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लाला लाजपत राय पर निबंध | Essay On Lala Lajpat Rai In Hindi

लाला लाजपत राय पर निबंध (250 शब्द)

हर कोई व्यक्ति लाला लाजपतराय के बारे में जानता है। लाला लाजपतराय का जन्म 28 जनवरी 1865 में हुआ था और इनकी मृत्यु 17 नवम्बर 1928 में हुई थी। लाला लाजपत राय, जो भारत देश के मुख्य स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने जाते है। इन्होंने देश की स्वतंत्रता में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसकी स्वतंत्रता से पहले जितने भी आंदोलन हुए उनमें लाला लाजपत राय द्वारा अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया गया। लाला लाजपत राय ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस मैं भी अपना योगदान दिया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्य नेता के रूप में लाला लाजपत राय जाने जाते थे।

सन 1928 में साइमन कमीशन के खिलाफ लाला लाजपत राय प्रदर्शन कर रहे थे और साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने की वजह से ब्रिटिश सरकार द्वारा लाठीचार्ज किया गया और लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय पूरी तरह से घायल हो गए थे। इस घटना के पश्चात लाला लाजपत राय और 17 नवंबर 1928 को इनकी मृत्यु हो गई लाला लाजपत राय के नाम से भी जाना जाता था।

पंजाब के मोगा जिले में जैन परिवार में लाला लाजपत राय का जन्म हुआ था। लाला लाजपत राय हरियाणा से लेकर 4 तक कई शहरों में वकालत का कार्य किया। राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चन्द्र पाल जाने जाते थे। इन तीनों प्रमुख नेताओं को भारतीय कांग्रेस पार्टी के लाल बाल पाल के नाम से जाना जाता था।

3 अक्टूबर 1928 में लाहौर में लाला लाजपत राय ने साइमन कमीशन के विरोध में भयंकर प्रदर्शन भी किया था। द्वारा ब्रिटिश सरकार द्वारा लाठीचार्ज किया गया और उस लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें कई चोटें भी आई और चोटों की वजह से लाला लाजपत राय का देहांत हो गया था।

लाला लाजपतराय पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

उनका जन्म पंजाब के फिरोजाबाद जिले के धूदेके में 28 जनवरी 1865 को हुआ था। उनके पिता लाला राधा कृष्ण एक स्कूल शिक्षक थे। उन्होंने 1880 में अंबाला से मैट्रिक किया।

उन्होंने कानून की पढ़ाई का हिसार में अभ्यास करना प्रारंभ किया और वह काफी सफल वकील थे। समाज सेवा करना और लोगों की मदद करना उनकी बचपन से आदत थी। उनकी शैक्षिक क्षेत्र में रूचि थी। उन्होंने आकाल पीड़ितों की मदद के लिए बहुत सारे सामाजिक कार्य किए। वह ना केवल एक अच्छे लेखक थे बल्कि वह बहुत अच्छे वक्ता भी थे।
उन्होंने युवा भारत नामक एक मासिक पत्रिका प्रारंभ की और ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता की मांग की और भारत के युवाओं को उत्तेजित करने के लिए बहुत सी किताबें भी लिखी।

वह एक महान संघवादी थे। उन्हें साहित्य के साथ-साथ राजनीति का भी शौक था। लाला लाजपत राय को पंजाब केसरी और पंजाब के शेर के नाम से भी जाना जाता हैं। वह महान पैदा नही हुए थे बल्कि अपनी देशभक्ति की भावना से उन्होंने महानता प्राप्त की। उन्होंने एक वकील के रूप में अपने करियर की शुरुआत की परंतु गांधीजी के प्रभाव आकर उन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। वह महान समाज सुधारक तथा समाजसेवी थे। उन्होंने अछूतों तथा महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया और इसके लिए कई कार्य किए। वह कहीं शिक्षण संस्थानों के संस्थापक थे। वह एक महानसंचालक थे।

लाला लाजपत राय की उपलब्धियां

लाला लाजपत राय बहुत ही छोटी आयु में स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़े। उन्होंने 23 साल की उम्र में 1888 मे प्रयाग में कांग्रेस के सम्मेलन में भाग लिया। 1907 में उन्हें अपनी राजनीतिक गतिविधियों के कारण 6 महीने के लिए निर्वासित कर दिया गया। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने भारत के स्वतंत्रता के पक्ष में अमेरिकी जनता की राय लेने के लिए अमेरिका का दौरा किया।

वह ब्रिटिश सरकार के महान आलोचक थे उन्हें 1907 को बर्मा भेज दिया गया था। वापस आने पर गांधी जी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन मैं हिस्सा लिया। उन्हें कई बार जेल में डाला गया कांग्रेस द्वारा साइमन कमीशन का बहिष्कार करने का फैसला किया गया। जब वह लाहौर ने प्रदर्शन कर रहे थे। तब उन पल कई बार लाठीचार्जकिया गया। वारों के परिणाम स्वरुप 3 सप्ताह बाद उनकी मृत्यु हो गई।

पूरे देश में शोक की लहर फैल गई वह देश के प्रति समर्पित थे। उनमें भगवान के प्रति विश्वास था वह बहुत ही ज्यादा उदार व्यक्ति थे। उनकी मृत्यु स्वतंत्रता आंदोलन के लिए बहुत ही बड़ा आघात था। उनके साहस के लिए उनको आज भी याद किया जाता हैं।

लालाजी की मौत का बदला

लालाजी की मृत्यु से सारे देश मे आक्रोश था। भगत सिंह ,सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद ने उनकी मृत्यु का बदला लेने का निश्चय कर लिया।इन देशभक्तों ने अपने प्रिय नेता की मृत्यु का बदला लेने के लिए उन पर लाठी चलाने वाले अंग्रेजी अफसर सांडस को गोली से उडा दिया। उस पर गोली चलाने के लिए ही इन तीनो भगत सिंह सुखदेव ओर राजगुरू को फासी की सजा दी गई।

लाला लाजपत राय की रचनाएँ

लाजपत राय ने कई पुस्तकें लिखी-1.यंग इंडिया 2.अनहेपपी इंडिया 3.आर्यसमाज 4.इंगलैंडस डैबट टू इंडिया 5. लालाजी ने हिंदी मे शिवाजी तथा कई महापुरुषों की जीवनी लिखी।

लाला लाजपत राय का योगदान

लालाजी ने लाहौर में तिलक राजनीति शास्त्र स्कूल नाम की एक स्कूल की स्थापना की। लोग सेवक संघ नामक समाज सेवक संस्था शुरु की। 1925 मे कोलकता मे हिन्दू महासभा के आंदोलन के अध्यक्ष का स्थान लालाजी ने देखा। वंदे मातरम नामक उर्दू दैनिक संपादक के रूप मे काम किया। वह महान स्वतंत्रता सेनानी,महान देशभक्त और समाजसुधारक थे। उनको उनके कार्यों व उनके बलिदान के लिए सदैव याद रखा जायेगा।

निष्कर्ष

लाला लाजपत राय जो देश के लिए मुख्य स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेता रहे थे। उन्होंने अपने जीवन चक्र में भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कई प्रकार से महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लाला लाजपत राय जिन्होंने साइमन कमीशन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया था।

अंतिम शब्द

आज का हमारा यह आर्टिकल जिसमें हमने लाला लाजपत राय पर निबंध (Essay On Lala Lajpat Rai In Hindi) के बारे में संपूर्ण जानकारी आप तक पहुंचाई है। हमें उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से संबंधित कोई भी सवाल या सुझाव है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है। हम आपके कमेंट का जवाब जल्द से जल्द देगा प्रयास करेंगे। धन्यवाद,

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