बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय

Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi: नमस्कार दोस्तों, आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे समाज सुधारक के बारे में जिन्होंने अपने संपूर्ण जीवन भर में देश की स्वतंत्रता और समाज को सुधारने के बारे में सोचा। आज हम बात करने वाले हैं, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के जनक के बारे में।

अब आप तो समझ ही गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे हैं। जी हां, आपने बिल्कुल सही समझा! हम बात कर रहे हैं, बाल गंगाधर तिलक के विषय में जो कि भारत वर्ष के पहले राष्ट्रीय आंदोलन करने वाले व्यक्ति थे। आज आप सभी लोगों को इस लेख के माध्यम से बाल गंगाधर तिलक की संपूर्ण जीवन के विषय में विस्तार पूर्वक से जानकारी जानने को मिलेगी।

Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi
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आज आप सभी लोगों को हमारे द्वारा लिखे गए इस महत्वपूर्ण लेख के माध्यम से बाल गंगाधर तिलक के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी। यदि आप बाल गंगाधर तिलक के विषय में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप हमारे द्वारा लिखे गए इस बायोग्राफी के साथ अंत तक बने रहे।

बाल गंगाधर तिलक का जीवन परिचय | Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi

बाल गंगाधर तिलक के विषय में संक्षिप्त जानकारी

नामबाल गंगाधर तिलक
उपनामलोकमान्य तिलक
जन्म23 जुलाई 1856
जन्म स्थानरत्नागिरी (महाराष्ट्र)
शिक्षाबीए और एलएलबी
माता का नामपार्वती बाई
पिता का नामगंगाधर तिलक
पत्नी का नामतापीबाई
पत्नी का उपनामसत्यभामा बाई
बच्चों के नामरमाबाई वैद्य, रामभाऊ बलवंत तिलक, श्रीधर बलवंत तिलक, विश्वनाथ बलवंत तिलक, पार्वतीबाई केलकर और रमाबाई साडे
पुरस्कार या उपाधिलोकमान्य
मृत्यु1 अगस्त 1920 मुंबई (महाराष्ट्र)

बाल गंगाधर तिलक कौन थे?

बाल गंगाधर तिलक भारत के प्रथम समाज सुधारक के रूप में संपूर्ण भारतवर्ष में विख्यात है। इसके साथ-साथ बाल गंगाधर तिलक को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के जनक के रूप में संपूर्ण विश्व भर में जाना जाता है। बाल गंगाधर तिलक को बहुमुखी प्रतिभा का धनी कहा जाता था।

बाल गंगाधर तिलक अनेक संस्थाओं में अध्यापक, सामाजिक कार्यकर्ता, नेशनल लीडर, वकील, स्वतंत्रता संग्रामी इत्यादि के रूप में प्रतिष्ठित थे। इन सभी के साथ साथ बाल गंगाधर तिलक भारत के प्रथम राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे पहले लीडर थे।

बाल गंगाधर तिलक को महात्मा गांधी की तरह है, सत्य अहिंसा के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कहां जा रहा था, परंतु उनके संदर्भ में अहिंसा को अपना ना पूरी तरह से सही नहीं है। बाल गंगाधर तिलक को आवश्यकता के अनुसार हिंसा का भी उपयोग करना पड़ता था।

बाल गंगाधर तिलक का जन्म

बहुमुखी प्रतिभा के धनी कहे जाने वाले बाल गंगाधर तिलक का जन्म भारत के महाराष्ट्र में स्थित कोंकड़ प्रदेश (रत्नागिरी) में स्थित चिखली नामक गांव में हुआ था। यदि हम बात करें बाल गंगाधर तिलक के जन्मतिथि के विषय में, तो बाल गंगाधर का जन्म 23 जुलाई 1856 ईसवी में हुआ था। बाल गंगाधर तिलक का जन्म एक चितपावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

बाल गंगाधर तिलक को प्राप्त शिक्षा

बाल गंगाधर तिलक का रुझान बचपन से ही पढ़ाई लिखाई की तरफ अधिक था। बाल गंगाधर तिलक को गणित विषय काफी अच्छी लगती थी और गणित विषय में काफी अच्छे भी थे। ऐसा कहा जाता है कि बाल गंगाधर तिलक जब केवल 10 वर्ष के ही थे, तभी उनके पिता रत्नागिरी को छोड़ कर के मुंबई के पुणे में चले आए थे।

बाल गंगाधर तिलक का पढ़ाई की तरफ रुझान देखते हुए उनके पिता ने उन्हें एंग्लो वर्नाकुलर स्कूल में ज्वाइन करा दिया। जब बाल गंगाधर तिलक ने जब मैट्रिक्स की पढ़ाई करने के लिए एडमिशन लिया था तो इनकी पढ़ाई के दौरान ही उनका विवाह एक 10 वर्षीय कन्या तापीबाई के साथ हो गया।

अब बाल गंगाधर तिलक ने अपनी मैट्रिक्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद डेक्कन कॉलेज में दाखिला ले लिया। यहां से बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1987 में बीए की डिग्री प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की। बाल गंगाधर तिलक भारतीय इतिहास के ऐसे नागरिक थे, जिन्होंने भारत में मॉडर्न पढ़ाई की शुरुआत की। अपनी बीए की शिक्षा प्राप्त करने के बाद बाल गंगाधर तिलक ने अपनी पढ़ाई को जारी रखा और बाद में उन्होंने एलएलबी की भी डिग्री हासिल कर ली।

बाल गंगाधर का पारिवारिक संबंध

बाल गंगाधर तिलक का संबंध उनके परिवार के सभी लोगों से काफी अच्छा था। बाल गंगाधर तिलक के पिता का नाम गंगाधर तिलक था, जो कि पेशे से एक स्कूल में अध्यापक थे। बाल गंगाधर तिलक की माता का नाम पार्वतीबाई था, जोकि एक कुशल गृहणी थी। बाल गंगाधर तिलक की माता के देहांत सभी हो गया था, जब यह केवल 16 वर्ष की आयु के थे। उनकी माता के मृत्यु के बाद उन्हें उनके पिता के द्वारा काफी प्रेम प्राप्त हुआ।

बाल गंगाधर तिलक का वैवाहिक जीवन

बाल गंगाधर तिलक एक विवाहित पुरुष थे। बाल गंगाधर तिलक का वैवाहिक जीवन काफी अच्छा रहा। बाल गंगाधर तिलक की पत्नी का नाम तापीबाई था, जो कि बाद में बदलकर सत्यभामा बाई कर दिया गया था। बाल गंगाधर तिलक का विवाह सत्यभामा बाई श्वेता भी हो गया था, जब सत्यभामा केवल 10 वर्ष की थी।

बाल गंगाधर तिलक के पत्नी से उन्हें 6 पुत्रों की प्राप्ति हुई। बाल गंगाधर तिलक की तीन बेटियां और तीन बेटे थे, जिनके नाम निम्न है

  1. विश्वनाथ बलवंत तिलक
  2. श्रीधर बलवंत तिलक
  3. रामभाउ बलवंत तिलक
  4. पार्वती बाइक केलकर
  5. रमाबाई साडे
  6. रमाबाई वैद्य

बाल गंगाधर तिलक का प्रोत्साहन नारा

बाल गंगाधर तिलक का स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक नारा दिया गया जो कि लोगों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाया गया था। बाल गंगाधर तिलक ने लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए कहा था कि “स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम इसे पाकर ही रहेंगे।”

बाल गंगाधर तिलक का राजनीतिक जीवन

बाल गंगाधर तिलक का राजनीतिक जीवन 1890 ईस्वी में शुरू हो गया था। बाल गंगाधर तिलक अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाले पहले समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। 18 वीं सदी में अंग्रेज महात्मा गांधी के पहले भारतीय राजनेता के रूप में बाल गंगाधर तिलक कोही जानते और पहचानते थे। इसके अलावा बाल गंगाधर तिलक पुणे के मुंशी पाल एवं बम्बई विधान मंडल (वर्तमान में मुंबई विधानमंडल) के सदस्य भी रह चुके हैं।

इन सभी के पश्चात वर्ष 1897 में चार्ट सीट फाइनल हुई और बाल गंगाधर तिलक के विषय में भाषण और सरकार के विरोध में बोला गया, जिसके बाद बाल गंगाधर तिलक को जेल भी जाना पड़ा था। बाल गंगाधर तिलक जेल से लगभग डेढ़ वर्षो के बाद रिहा हुए। अब ब्रिटिश शासन के द्वारा बाल गंगाधर तिलक को “भारत की अशांति का पिता” कह कर पुकारा जाने लगा।

जेल से रिहा होते ही बाल गंगाधर तिलक ने एक नए आंदोलन की शुरुआत कर दी, जिसका नाम स्वदेशी आंदोलन था। बाल गंगाधर तिलक अखबार एवं भाषण के माध्यम से अपने मन की बात महाराष्ट्र के गांव-गांव तक पहुंचाते थे। इन सभी के अलावा बाल गंगाधर तिलक ने अपने घर के सामने एक बड़ा स्वदेशी मार्केट भी बनाया था, जहां से लोग स्वदेशी चीजों को खरीद सकते थे। स्वदेशी आंदोलन के तहत सभी लोग विदेशी सामानों का बहिष्कार करने लगे, जिससे कि अंग्रेजी सरकार एकदम से हिल गई।

इन दिनों इस पार्टी को दो गुटों में विभक्त कर दिया गया, नरम दल एवं गरम दल। नरम दल को संचालित करने के लिए गोपाल कृष्ण को नियुक्त किया गया। नरम दल का अर्थ यह था कि शांति और अहिंसा पूर्वक देश को आजाद कराना है और किसी के विपरीत गरम दल को बाल गंगाधर तिलक स्वयं संचालित कर रहे थे। गरम दल का अर्थ यह था, कि आवश्यकतानुसार हिंसा और अहिंसा का उपयोग करना अर्थात समय पड़ने पर हिंसा के साथ मुकाबला करना और परिस्थितियां सामान्य होने पर अहिंसा के साथ।

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बाल गंगाधर तिलक के द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य

बाल गंगाधर तिलक के द्वारा बहुत से ऐसे कार्य किए गए हैं, जिनको भूलना किसी भी भारतवर्षीय के मन में नहीं हो सकता। आइए जानते हैं बाल गंगाधर तिलक के द्वारा किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्यों के विषय में।

  • बाल गंगाधर तिलक एक महान समाज सुधारक के रूप में कार्य करने वाले पहले व्यक्ति थे।
  • बाल गंगाधर तिलक ने संपूर्ण भारतवर्ष में फैले जाति प्रथा, बाल विवाह, अग्नि प्रथा इत्यादि जैसे बुरे विकारों को दूर किया।
  • बाल गंगाधर तिलक ने महिलाओं की शिक्षा और उनके विकास पर काफी जोर दिया, जिसका परिणाम आज हमें देखने को मिल रहा है।
  • पुणे में स्थित न्यू इंग्लिश स्कूल की स्थापना बाल गंगाधर तिलक के द्वारा किया गया था।
  • बाल गंगाधर तिलक ने लोगों के लिए एकता की भावना का निर्माण किया और सार्वजनिक रूप से गणेश उत्सव और शिव जयंती इत्यादि पर्वों को मनाया।

बाल गंगाधर तिलक के द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण किताबें

बाल गंगाधर तिलक को समाज सुधार और स्वतंत्रता के अलावा लेखनी करना भी काफी अच्छा लगता था। लोकमान्य तिलक ऐसे किताबें लिखी, जिनसे लोग प्रेरित हुए और स्वतंत्रता सेनानी आंदोलन में भाग लिए। आइए एक टेबल के माध्यम से समझते हैं बाल गंगाधर तिलक की रचनाओं के विषय में।

1893ओरियन
1903दी आर्केटिक होम इन द वेद
1915गीता रहस्य

बाल गंगाधर तिलक के संदर्भ में स्मारक

  • पुणे में स्थित तिलक म्यूजियम, तिलक रंगा मंदिर नाम और फिल्म थिएटर बाल गंगाधर तिलक के याद में बनाए गए हैं।
  • वर्ष 2007 में उनके स्मारक के रूप में एक सिक्का भी जारी किया गया।
  • बाल गंगाधर तिलक को “लोकमान्य: एक युगपुरुष” नाम की फिल्म अभी प्रकाशित की गई।
  • बाल गंगाधर तिलक के नाम पर मुंबई में स्थित कुर्ला टर्मिनस का नाम बदलकर लोकमान्य तिलक टर्मिनस कर दिया गया।

बाल गंगाधर तिलक की मृत्यु

जलियांवाला बाग हत्याकांड की घटना की खबर सुनकर बाल गंगाधर तिलक को काफी दुख हुआ और उनका स्वास्थ्य काफी खराब रहने लगा। धीरे-धीरे बाल गंगाधर तिलक की बीमारी बढ़ती गई और उन्हें मधुमेह अर्थात डायबिटीज हो गया। बाद में उनकी हालत बेहद खराब होने के कारण 1 अगस्त 1920 ईस्वी को उनकी मृत्यु हो गई।

निष्कर्ष

बाल गंगाधर तिलक बायोग्राफी को पढ़ने के बाद हमें यह सीख मिलती है कि हमें सभी लोगों को समान दृष्टिकोण से देखना चाहिए और उनका सम्मान करना चाहिए। इसके साथ साथ हमें अभी सीख मिलती है कि हमें हमारी जन्मभूमि की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।

हमें उम्मीद है कि आपको हमारे द्वारा लिखी गई यह “बाल गंगाधर तिलक बायोग्राफी (Biography of Bal Gangadhar Tilak in Hindi)” पसंद आई होगी। यदि आपके मन में किसी भी प्रकार का सवाल या फिर सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में अवश्य शेयर करें।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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