मजदूर दिवस पर निबंध

Essay On Labour Day In Hindi: आज के आर्टिकल में हम मजदुर दिवस पर निबंध के बारे में बात करने वाले है। मजदुर दिवस को हर साल 1 मई के के दिन मनाया जाता है। इस आर्टिकल के जरिये आपको Essay On Labour Day In Hindi के बारे में जानकारी मिलने वाली है।

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मजदूर दिवस पर निबंध | Essay On Labour Day In Hindi

मजदूर दिवस पर निबंध (250 Word)

यह दिन श्रमिकों और श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए समर्पित दिन है। यह 1 मई को मनाया जाता है। भारत के साथ-साथ बहुत से देश हैं, जो इस दिन श्रमिक दिवस के रूप में मनाते हैं। इसे मनाने का उद्देश्य श्रमिक वर्ग के प्रति अपना आभार व्यक्त करना है। भारत में पहली बार श्रमिक दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया था, जो कि भारतीय श्रमिक किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मद्रास में आयोजित किया गया। भारत में यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या कामगार दिन के रूप में जाना जाता है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसे अलग अलग नाम से जानते हैं।

इसे मनाने के पीछे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह है कि श्रमिकों के ऊपर होने वाले अन्याय पूर्ण व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन करना । ताकि लोगों को यह आभास हो कि श्रमिक वर्ग एकजुट है और वह अपने विरुद्ध किसी भी प्रकार के अन्याय या विसंगति को बर्दाश्त नहीं करेंगे।

प्राचीन समय से ही श्रमिकों के साथ बहुत ही असमानता का व्यवहार हुआ है और एक लंबे संघर्ष के बाद उन्हें यह अधिकार प्राप्त हुए हैं। श्रमिक दिवस के दिन नेताओं और लीडरों के द्वारा भाषण दिए जाते हैं। उन्हें सम्मानित किया जाता है। अलग-अलग संगठनों द्वारा उन्हें अलग अलग तरीके से सम्मानित किया जाता है। श्रमिक दिवस उद्योगपतियों द्वारा किए गए अन्याय पूर्ण व्यवहार के खिलाफ एकजुट श्रमिक संघ और उनके प्रयासों से सरकार द्वारा दिए गए अधिकार का उदाहरण हैं।

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प्रस्तावना

मजदूरों द्वारा  कड़ी मेहनत का सम्मान करने के साथ-साथ श्रमिको के अधिकारों के लिए लड़ने वालों को सम्मान देने के लिये श्रम दिवस मनाया जाता है और हम श्रम दिवस को मजदूर दिवस कहते है। भारत के कई देशों मे 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। बहुत संघर्ष करने के बाद मजदूरों को उनका अधिकार मिलता है। मजदूर दिवस को इंटरनेशनल लेबर डे और श्रमिक दिवस भी कहां जाता है। अंतर्राष्ट्रीय दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है। यह हर साल 1 मई को मनाया जाता है। मजदूर का हमारे समाज में बहुत महत्त्व है।हमारे समाज की आर्थिक उन्नति  मजदूर पर निर्भर है। आज के समय में हर काम के लिये मशीन है। लेकिन मशीन चलाने के लिये मजदूरो की जरूरत पडती है। आज समय में मजदूरों का महत्व कम नहीं हुआ, उनकी जरूत उतनी ही है, जितनी मशीन की जरूरत है।

 मजदूर दिवस की उत्पत्ति

पहले की समय में मजदूरों की हालत बहुत खराब थी। मजदूर लोग बहुत कड़ी मेहनत करते थे और दिन मे 15 घंटे तक काम करते थे और उनके हाथ, पैर में इतनी चोट लगती थी और आर्थिक संकटो का सामना करके काम करते थे,तब उनके काम पैसे दिए जाते थे। लंबे समय तक घंटो भर काम करते थे। स्वास्थय की समस्याओं की बढ़ती हुई संख्या ने इस समस्या को ठीक करने के लिए मजदूरों ने श्रमिक यूनियानो ने इस प्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई।

भारत में मजदूर दिवस समारोह

इस दिन को भारत में ना बल्कि पूरे विश्व में  एक विरोध दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसा तब होता है, जब कोई महिला या पुरुष अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर एकजुट होकर अपने अधिकारों ले लिये  सभी  श्रमिक एक साथ रैली,जुलूस, निकालते है। जिससे उनको उनका सही अधिकार मिले। जुलुस के अलावा बच्चों के लिये तरह – तरह की प्रतियोगिताएं होती है। इससे आगे चलकर बच्चे इसमें आगे बढ़कर  हिस्सा ले और एकजुटता का सही मतलब समझ सके। बहुत संघर्षों के बाद श्रमिकों को उनका अधिकार मिला। उन्होंने इस दिवस के लिए बहुत कड़ी मेहनत किया और इस दिवस को महत्व दिया। यह दिन श्रमिको के लिये बहुत महत्वपूर्ण बना।

स्कूलों में मजदूर दिवस समारोह

1 मई को लगभग सभी कंपनियां विभागों में छुट्टी होती है। लेकिन स्कूलों में मजदूर दिवस के बारे में बच्चों को बताया जाता है और इस दिन बच्चे मजदूरों के प्रति अपनी संवेदनाए व्यक्त करते है और अनेक तरह के नाटक पेश करते है। बच्चे मजदूर दिवस पर अच्छे -अच्छे भाषण लिखते है और मंच पर जाकर भाषण का पाठन करते थे। स्कूलों में टीचर बच्चों को मजदूर दिवस के प्रति जागरूक करते है। साथ ही टीचर बच्चों को यह सिखाते है की मजदूर दिवस के बिना हमारा जीवन अधूरा है क्योंकि मजदूर की जरूत हर जगह होती है। इसलिए हमें मजदूर दिवस को महत्व दिया जाना चाहिए।

हम मजदूर दिवस या मई दिवस को क्यों याद करते हैं?

अमेरिका में 19 फ़ीसदी के अंतर्गत उद्योगपतियों द्वारा मजदूर वर्ग के लोगों पर शोषण किया जाने लगा और मजदूर वर्ग के संपूर्ण लोगों को 15 घंटा तक काम देना शुरू कर दिया था। उस दौरान कानून ने मजदूर लोगों को उद्योगपतियों द्वारा किए जाने वाले शोषण से छुटकारा दिलाने के लिए 1 मई 1886 को एक बैठक का आयोजन किया। जिसमें उचित मजदूरी और उचित ब्रेक की मांग की गई। 1 मई 1886 को बैठक का आयोजन इसलिए किया गया था।

मजदूर वर्ग के लोगों द्वारा श्रमिक आंदोलन चलाया गया। श्रमिक आंदोलन 8 घंटे के रूप में जाना जाता है। इस आंदोलन के पश्चात मजदूर वर्ग के लोगों को 8 घंटे प्रतिदिन कार्य के लिए फिक्स किए गए। सन् 1947 से 1953 के बीच युद्ध के दौरान श्रमिक दिवस पर कई प्रकार की घटनाएं भी हुई। उसके पश्चात मई में श्रमिक दिवस प्रतिवर्ष मनाया जाता है। मजदूर दिवस को प्रतिवर्ष 1 मई के दिन मनाया जाता है।

मई दिवस का इतिहास

हर साल 1 मई को मजदूर दिवस मनाया जाता है। 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का मुख्य कारण यह है कि 4 मई 1886 को एक बम विस्फोट के 7 पुलिस अधिकारी और 4 शिक्षकों के नागरिक मारे गए थे। उस विस्फोट से एक दिन पहले मजदूरों द्वारा उद्योगपतियों के खिलाफ आंदोलन किया गया था और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को इस रिपोर्ट के जरिए मारा गया। बम विस्फोट के बाद आठ आतंकवादियों की शाजिश का पता लगा और उन सभी दोषियों को आतंकवादी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई गई। 3 साल बाद समाजवादी पार्टी ने श्रमिक आंदोलन सम्मान देते हुए 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में चयनित किया गया।

निष्कर्ष

श्रम दिवस या मजदूर दिवस हमें यह सीखता है कि जैसे हम एक साथ जुटकर मजदूर दिवस के खिलाफ रैली, जुलुस निकाल करके मजदूरों को उनका अधिकार दिलवाते है, ठीक इसी प्रकार हमें एक साथ रहकर किसी भी संकट का सामना करना होगा। उद्योगपतियों के द्वारा श्रम वर्ग पर किया गया अन्याय पूर्वक व्यवहार के खिलाफ क़ानून बनाने में सरकार को लम्बा समय लगा। ट्रेड यूनियनो ने संयुक्त प्रयासों से सरकार श्रमिको के लिये कानून बनाने के लिये  मजबूर किया।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने मजदुर दिवस पर निबंध (Essay On Labour Day In Hindi) के बारे में बात की है। उम्मीद करता हु, की हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सवाल है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से बता सकता है।

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