गणेश चतुर्थी पर निबंध

Essay On Ganesh Chaturthi In Hindi: गणेश चतुर्थी का त्यौहार हिन्दुओं के लिए बहुत खास है। आज के आर्टिकल में गणेश चतुर्थी पर निबंध के बारे में बात करने वाले है।

Essay On Ganesh Chaturthi In Hindi

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गणेश चतुर्थी पर निबंध | Essay On Ganesh Chaturthi In Hindi

गणेश चतुर्थी पर निबंध (250 शब्दों में)

यह त्यौहार हिन्दू धर्म के लिये बहुत महत्वपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म के सभी लोग गणेश चतुर्थी का त्यौहार बड़े धूम-धाम से बैंड बाजे के साथ मनाते है। गणेश चतुर्थी का त्यौहार विघ्न हर्ता गणेश भगवान की जयंती रूप में मनाया जाता है और भगवान गणेश हर साल सभी के जीवन में बाधाओं को दूर करने के लिये आते है और सभी के जीवन में कष्टों को दूर करते है।

गणेश चतुर्थी का त्यौहार 11 दिनों का त्यौहार होता है, सभी लोग गणेश चतुर्थी शुरु होने के पहले दिन में भगवान गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने के लिये पांडाल लगते है, अच्छी तरह सजावट करते है, फिर मिल -जुलकर गणेश जी की मूर्ति लेकर आते है और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते है। गणेश भगवान को नये वस्त्र, मुकुट, माला पहनाकर उनको सजाते है।

11 दिन का गणेश भगवान का चलने वाले इस त्यौहार को लोग बहुत श्रद्धा पूर्वक मनाते है और 11 दिन तक लगातार रोज़ सुबह गणेश जी की आरती करना, फूल माला चढ़ना, दीपक जलाना और लोग रोज़ उनके चरणों मे प्रसाद के तौर मे नरियल, मीठा, केला, सेव चढ़ाते थे। अपने जीवन के सारे कष्टों से मुक्ति पाने के लिये गणेश जी से प्रार्थना करते थे। गणेश जी के 108 नाम है, लेकिन इतने नामों का उल्लेख करना मुश्किल होता है, उनके 12 नामों के उल्लेख करते है -गजानद, भलाचंद्र, गणाध्यक्ष, धेमकेतु, विघ्ननाशक, विनायक, लम्बोदर, विकट, कपिल, सुमुख, एकदन्त, गजकर्ण आदि नामों से गणेश जी को पुकारते थे।

गणेश चतुर्थी पर निबंध (800 शब्दों में)

प्रस्तावना

गणेश चतुर्थी भारत के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। गणेश चतुर्थी को गणेश उत्सव अथवा विनायक चतुर्थी आदि नामों से भी जाना जाता है। इस उत्सव को बेहद भक्तिभाव और खुशी से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। गणेश यह भगवान शिव और पार्वती के पुत्र हैं। गणेश चतुर्थी एक भारतीय त्योहार है, जिसे संपूर्ण भारत में हर्षो उल्लास से मनाया जाता है। परंतु महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी को ज्यादा धूमधाम से मनाते हैं।

शिवपुराण मैं गणेश की तिथि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बताया गया है और गणेश पुराण के अनुसार गणेश का उत्पन्न भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुआ था। गणेश उत्सव यह पर्व 11 दिन का होता है। 10 दिन इनकी प्रतिमा को घर पर रखा जाता है और 11 वें दिन विसर्जन करते हैं।

गणेश चतुर्थी के त्यौहार की कहानी

इनके जन्म से जुड़ी हुई कई कहानियां प्रचलित है और यह सबसे अधिक माना जाता है कि गणपति का निर्माण देवी पार्वती द्वारा हुआ था। देवी पार्वती ने 1 दिन स्नान करने से पहले अपने शरीर के मैल का उपयोग करके एक बालक का पुतला बनाया और उससे द्वारपाल बनने को कहा और वे बोली कि जब तक कि वह स्नान करके नहीं आ जाती, किसी भी पुरुष को भीतर प्रवेश करने की अनुमति ना दे।

थोड़ी देर पश्चात् जब शिवजी भीतर प्रवेश करने जा रहे थे, तब उस बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। अंत में शिव जी को क्रोध आ गया और उन्होंने क्रोध में अपने त्रिशूल से गणेश का सर उसके शरीर से काटकर अलग कर दिया। कुछ देर बाद जब यह पार्वती जी को ज्ञात हुआ, तब वे बहुत क्रोधित हो गई और उन्होंने प्रलय करने का दृढ़ निर्णय बना लिया।

उस समय सभी देवता बहुत डर गए थे और अंत में शिव जी ने उत्तर दिशा में सबसे पहले कोई भी बालक मिले तो उसका मुख काटकर लाने का आदेश दे दिया। शिव जी को सबसे पहले एक हाथी का बच्चा ही मिला तो उन्होंने उसके सिर को काट कर ला दिया और उस गज के मस्तक को गणेश जी के शरीर से जोड़कर उन्हें पुनर्जीवित कर दिया गया।

उस दिन से सभी देवताओं ने मिलकर गणेश जी को सर्वर प्रधान होने का वरदान दे दिया। शिवजी ने उन्हें सबका पूज्य बनने का आशीर्वाद भी दिया क्योंकि गणेश जी का निर्माण भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी को हुआ था। शंकर जी ने आशीर्वाद दिया जो भी व्रत करेगा, उसके सारे विघ्न समाप्त हो जाएंगे। 

गणेश जी को आराध्य देव माना जाता है

हिंदू धर्म में किसी भी धार्मिक उत्सव या यज्ञ पूजन इत्यादि या कोई विवाह उत्सव या कोई भी कार्य को निर्विघ्न रुप से संपन्न करने के लिए सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। गणेश जी को हिंदुओं की आराध्य देव कहते हैं। इस दिन गणेश जी को तिल के लड्डुओं का भोग चढ़ाया जाता है। वैसे तो इसे भारत के महाराष्ट्र में विशेष रूप से मनाया जाता है किंतु पुणे का गणेश उत्सव जगत प्रसिद्ध है।

गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है?

यह पर्व अगस्त या सितंबर महिने में आता है। अलग-अलग जगह पर अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है। जैसे कि महाराष्ट्र में इन्हें मंगलकारी देवता व मंगल मूर्ति के नाम से पूजा जाता है। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेश उत्सव को एक ऐसा स्वरूप दिया, जिससे गणेश राष्ट्रीय एकता के प्रतीक माने जाते हैं।

ऐसा भी माना जाता है कि गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाने की परंपरा महाराष्ट्र के पेशवा ने सर्वप्रथम की थी। जब शिवाजी महाराज छोटे थे तब जीजाबाई, उनकी मां ने गणपति की स्थापना की थी। गणेश जी बुद्धि और समृद्धि के भगवान है तो इन दोनों को पाने के लिए लोग आज भी गणेश जी की पूजा करते हैं। इनके कई नाम है इन्हें गणपति अथवा विघ्नहर्ता के नाम से भी बुलाया जाता है।

गणेश चतुर्थी के दिन ध्यान रखने योग्य बातें

गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय इस बात का ध्यान दे कि गणेश जी की सूड़ बाये ओर घूमी हुई होती है, तो ऐसे में उन गणेश भगवान जी को लाने पर सारी मनोकामना पूरी होती है और जिन गणेश भगवान जी सूड़ दाये ओर घूमी हुई होती है तो उन गणेश भगवान को लाने पर हमारी मनोकामना को पूरा होने मे थोड़ा वक़्त लगता है। गणेश जी हाथो में दाँत अंकुश और मोदक लिये होना चाहिये और एक हाथ में वरदान देते हुये प्रतीत हो और उनके वाहन मूषक उनके साथ होना चाहिये क्योंकि गणेश जी का आवाहन इसी रूप मे रहता है।

इस बात ध्यान रखे कि गणेश भगवान को ज़ब भी लाते है तो अपने घर में जिस जगह गणेश जी को विराजमान करने के लिये उनकी स्थापना करनी होती है, उस जगह किसी भी गणेश जी की मूर्ति पहले से विराजमान नहीं होनी चाहिये। क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो इससे आपको काफ़ी नुकसान भी पहुंच सकता है और गणेश जी विराजमान करते समय पंडित जी की राय लेकर ही उनको सही दिशा मे मूर्ति को स्थापित करें।

शिवजी ने गणेश जी को एक वरदान दिया कि इस संसार में ज़ब भी कोई नये कार्य की शुरुआत की जायेगी, वहां पर भगवान गणेश जी का नाम सबसे पहले लिया जायेगा और शिवजी ने आशीर्वाद दिया कि गणेश जी की पूजा, अर्चना करने वाले भक्तों के जीवन में सभी कष्टों और दुख दूर होंगे। इसी लिये भारत में सभी लोग ज़ब भी किसी शुभ अवसर में चाहे व्यापार, विवाह, कोई भी परेशानी आने पर गणेश जी को जरूर याद किया जाता है, चाहे दुख हो या सुख।

निष्कर्ष

यह एक विश्व प्रसिद्ध हिन्दू पर्व है, जिसे भारत में मनाया जाता है। इस दिन भारत में हिंदू अपने घर या मंदिर में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते हैं और अनंत चतुर्दशी पर यह पर्व गणेश विसर्जन के साथ समाप्त हो जाता है। इस दिन भक्त प्रार्थना करते हैं, अपने लिए आशीर्वाद मांगते हैं और मोदक और लड्डू चढ़ाते हैं। गणेश उत्सव के दौरान रोज सुबह शाम आरती की जाती है और विसर्जन के बाद सभी भक्तों अगले साल फिर से इस पर्व का बहुत ही बेसब्री से इंतजार करते हैं।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने आपको गणेश चतुर्थी पर निबंध (Essay On Ganesh Chaturthi In Hindi) के बारे में सम्पूर्ण जानकरी आप तक पहुंचाई है। मुझे उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गयी जानकारी आपको पसंद आई होगी। यदि आपको इस आर्टिकल से जुड़ा हुआ कोई सवाल है तो वह हमें कमेंट में हमको बता सकता है।

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