बसंत पंचमी पर निबंध

Essay On Basant Panchami In Hindi: भारत में साल भर कई तरह के त्यौहार मनाए जाते हैं। ऐसे ही बसंत पंचमी का त्यौहार भी विशेष रूप से मनाया जाता है। बसंत पंचमी का त्योहार मां सरस्वती को समर्पित है। भारत में मनाए जाने वाले हर एक हिंदू त्योहारों के पीछे कुछ ना कुछ धार्मिक मान्यताएं होती है।

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बसंत पंचमी के त्यौहार को भी लेकर धार्मिक मान्यता है। माना जाता है इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था, जिसके कारण अज्ञानता में डूबी हुई सृष्टि में ज्ञान का प्रकाश फैला। मां सरस्वती के कारण ही सृष्टि के सभी जीवो में बुद्धि का विकास हुआ और ध्वनि का संचार हुआ।

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बसंत पंचमी पर निबंध (Essay On Basant Panchami In Hindi)

बसंत ऋतु को भारत की छह ऋतु में से सबसे महत्वपूर्ण ऋतु माना जाता है। क्योंकि इस ऋतु के आगमन से ही पूरी सृष्टि में एक अलग सी उमंग छा जाती है। इसीलिए इस त्यौहार को हर साल काफी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन बच्चों को भी निबंध लिखने के लिए दिया जाता है, इसीलिए आज के इस लेख में हम बसंत पंचमी के त्योहार पर बच्चों के लिए निबंध (basant panchami par nibandh) लेकर आए हैं।

बसंत पंचमी पर निबंध 250 शब्दों में

बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ज्ञान और वाणी की देवी मां सरस्वती इसी तिथि को ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुई थी। इस वजह से ही इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना की जाती है।

बसंत पंचमी के दिन से ही भारत में वसंत ऋतु का आरंभ माना जाता है। इस पूजा की विधि कि यदि बात की जाए तो बसंत पंचमी पर सूर्योदय के पश्चात एवं दिन के मध्य भाग में पूजा की जाती है। इस दिन पीले वस्त्रों को धारण कर मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

बसंत पंचमी सभी शुभ कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त होती है। जैसे विद्यारंभ, गृह प्रवेश आदि इसे पुराणों में भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सरस्वती जी को अन्य नामों से भी संबोधित किया जाता है जैसे- वीणा की देवी सरस्वती, बागेश्वरी, भगवती, शारदा, वीणा वादिनी आदि।

इन सभी नामों का उच्चारण करते हुए इस दिन पूजा की जाती है। मां सरस्वती विद्या और बुद्धि की प्रदाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ही इन्हें संगीत की देवी कहा जाता है।

बसंत पंचमी, वसंत की शुरुआत करने वाला त्यौहार है, जो कई मायनों में खास होता है। लोग रंगीन कपड़े पहनते हैं और मौसमी खाद्य पदार्थ व व्यंजनों का आनंद लेते हैं। इस मौसम में लोग पतंग उड़ाते हैं और अन्य प्रकार के खेल खेलते हैं।

बसंत पंचमी त्योहार में पीला रंग विशेष महत्व रखता है, इसे बसंती रंग के रूप में भी जाना जाता है। यह समृद्धि प्रकाश ऊर्जा का प्रतीक है। इस कारण लोग पीले वस्त्रों को धारण करते हैं और पारंपरिक रूप से पूजा अर्चन कर मां सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Essay On Basant Panchami In Hindi

बसंत पंचमी पर निबंध 300 शब्दों में

विद्या की देवी सरस्वती मां को समर्पित बसंत पंचमी का त्यौहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को बहुत ही हर्ष एवं उल्लास के साथ लगभग पूरे भारत में मनाया जाता है। मां सरस्वती विद्या की देवी है। विद्या से बड़ा इस जीवन में कोई भी धन नहीं नहीं, विद्या से बड़ा कोई शक्ति है।

जिस व्यक्ति के पास विद्या है, वही सबसे बड़ा धनवान है। जिसके पास बुद्धि है, वही सबसे बड़ा शक्तिशाली है। इसीलिए इस दिन मां सरस्वती की पूजा आराधना की जाती है और सदा अपना आशीर्वाद बनाए रखने की प्रार्थना की जाती है।

बहुत जगह पर बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के साथ-साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव ने मां सरस्वती को धन और संपन्नता की देवी होने का वरदान दिया था, इसीलिए इन्हें नील सरस्वती भी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता यह भी है कि बसंत पंचमी के दिन कामदेव एवं रत्ती का आगमन पृथ्वी पर होता है, जिसके कारण पृथ्वी पर चारों तरफ उमंग और उल्लास का संचार होने लगता है। इस कारण बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती के साथ-साथ कामदेव एवं उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है।

बसंत पंचमी के दिन ही सृष्टि के निर्माण के दौरान भगवान ब्रह्मा ने मां सरस्वती को उत्पन्न किया था। जिसके पश्चात उनके द्वारा निर्मित सृष्टि जिसमें कोई भी आवाज नहीं था, उसमें चारों तरफ ध्वनि का संचार हो जाता है।

मां सरस्वती को पीला रंग बहुत ही पसंद है, इसलिए बसंत पंचमी के दिन भक्तजन पीले वस्त्र को धारण करके मां सरस्वती की पूजा करते हैं। यहां तक कि पीले चंदन का तिलक प्रयोग करते हैं एवं पीले मिठाई या फल से मां सरस्वती को भोग लगाया जाता है।

बसंत पंचमी के दिन विद्यालय एवं कॉलेजों में भी सभी शिक्षक गण विद्यार्थियों के साथ मिलकर मां सरस्वती की पूजा आराधना करते हैं, उसके बाद विद्यार्थियों के बीच विभिन्न तरह की प्रतियोगिताओं को आयोजित की जाती है।

बसंत पंचमी के दिन बिहार एवं बंगाल में काफी ज्यादा चहल-पहल होता है। इस दिन वहां पर जगह-जगह पर मां सरस्वती के पंडाल देखने को मिलते हैं और भक्तजन पूरा दिन मां सरस्वती के भक्ति गान में लीन रहते हैं।

बसंत पंचमी पर निबंध इन हिंदी 500 शब्दों में

प्रस्तावना

बसंत पंचमी का त्यौहार हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। बसंत पंचमी का त्यौहार हर मां सरस्वती को समर्पित है, जो हर वर्ष माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।

बसंत पंचमी क्यों मनाया जाता है?

बसंत पंचमी के त्योहार को मनाने के पीछे जो धार्मिक मान्यता यह है कि इसी दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। सृष्टि के निर्माण के समय इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने मां सरस्वती का निर्माण किया था।

मां सरस्वती के प्रकट होते ही जैसे ही उन्होंने अपने वीणा से मधुर ध्वनि निकाला पूरी सृष्टि विभिन्न प्रकार के ध्वनियों से गूंज उठा। चारों तरफ उमंग और संचार फैल गया, सभी प्राणियों और जीव-जंतुओं में उनके कौशलता के अनुसार बुद्धि का विकास हुआ।

वसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी का महत्व धार्मिक एवं ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से है। बसंत पंचमी त्योहार को बसंत ऋतु का शुभारंभ माना जाता है। बसंत पंचमी के आते ही बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है और चारों तरफ उमंग और हरियाली छा जाता है।

पेड़ पौधों में नई-नई पतिया आने लगती है, नई-नई कली खिलने लगते हैं, जिससे वातावरण बहुत की महक उठता है। पशु-पक्षियों में भी एक अलग सा उल्लास आ जाता है। इतना ही नहीं बसंत पंचमी का त्यौहार हर एक कला प्रेमियों के लिए काफी ज्यादा महत्व रखता है। क्योंकि यह त्योहार मां सरस्वती से संबंधित है, जिस कारण हर एक विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत महत्व रखता है।

धार्मिक दृष्टि से भी बसंत ऋतु का काफी ज्यादा महत्व है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान श्री राम अपनी परम भक्त शबरी के आश्रम पहुंचे थे। शबरी के स्वयं के प्रति परम भक्ति को देखकर भगवान श्री राम ने शबरी के जूठे बेर को भी स्वीकार लिया था।

इतना ही नहीं कहा जाता है कि कालिदास जो भारत के महान साहित्यकार माने जाते हैं, इसी दिन उन्हें भी ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जब उनके मूर्खता के कारण उनकी पत्नी ने उन्हें त्याग दिया था तब कालिदास नदी में डूब कर आत्महत्या करने का निर्णय ले चुके थे। लेकिन उसी समय नदी से मां सरस्वती निकलती है और उन्हें उस नदी में स्नान करने के लिए कहती है। उस नदी में स्नान करते ही कालिदास विद्वान बन जाते हैं।

ऐतिहासिक दृष्टि से बसंत ऋतु का महत्व चौहान वंश के लिए भी काफी ज्यादा है। कहा जाता है कि चौहान वंश के शासक पृथ्वीराज चौहान ने वसंत पंचमी के दिन ही मोहम्मद गौरी की हत्या की थी।

बसंत पंचमी कैसे मनाया जाता है?

भारत के हर एक राज्यों में अलग-अलग मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है। लेकिन उत्तरी भारत में बसंत पंचमी के त्यौहार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है। बहुत जगह पर इस दिन मां सरस्वती का पंडाल बनाया जाता है, मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

इस दिन हर कोई सुबह जल्दी उठकर पीला वस्त्र धारण करता है। माना जाता है कि पीला रंग मां सरस्वती का प्रिय रंग है, इसीलिए इस दिन मां सरस्वती को पीले फल एवं पीले लड्डू का भोग लगाया जाता है।

इस दिन सभी विद्यार्थी गण कॉपी किताबों को मां सरस्वती के पंडाल में रख देते हैं और मां सरस्वती से आशीर्वाद लेते हैं कि सदा उनकी कृपा उन पर बनी रहे और ज्ञान के प्रकाश से जीवन के अंधकार को दूर करें। बसंत पंचमी के दिन विद्यालयों एवं कॉलेजों में भी कई तरह की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।

इस दिन हर एक विद्यालय और कॉलेजों में भी मां सरस्वती की पूजा आराधना होती है, उसके बाद बच्चों को बसंत पंचमी के ऊपर निबंध लिखने के लिए दिया जाता है, चित्रकला, भाषण एवं गायन की प्रतियोगिता आयोजित की जाती हैं।

निष्कर्ष

विद्या के बिना पूरी सृष्टि अंधकारमय है क्योंकि विद्या एवं बुद्धि का प्रकाश ही एक व्यक्ति को अंधकारमय जीवन से बाहर निकाल सकती हैं। विद्या एवं बुद्धि व्यक्ति को जीवन जीने का सही तरीका बताती है।

सृष्टि पर विभिन्न तरह के जीव है लेकिन सबसे ज्यादा विद्या एवं बुद्धि इंसानों के पास ही है। इसीलिए इंसान सृष्टि पर सभी जीवो में सर्वोपरि हैं। जिसके ऊपर मां सरस्वती की कृपा बनी रहती है, वह व्यक्ति बुद्धि एवं विद्या से हमेशा भरपूर रहता है।

बसंत पंचमी पर निबंध 800 शब्दों में

प्रस्तावना

यह त्यौहार माघ महीने की शुक्ल पंचमी को मनाया जाता हैं। यह पर्व जनवरी या फरवरी माह में आता हैं। बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी व अन्य सभी लोग सरस्वती जी की पूजा करते हैं। बहुत सारे लोग अनेक स्थानों पर जाकर सरस्वती माता की प्रतिमा के दर्शन करते हैं।

बसंत पंचमी बसंत ॠतु के शुभागमन का प्रतीक मानी जाती हैं। बसंत ॠतु के पांचवे दिन के रूप में बसंत पंचमी मनाई जाती हैं। कई लोगों का मानना है कि बसंत पंचमी के दिन बसंत ॠतु का आगमन होता हैं।

बसंत पंचमी कैसे मानते है?

हिंदी सरस्वती माता की जन्म दिवस की रुप में मनाया जाता हैं। इस दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती हैं। इस दिन मौसम बहुत ही सुहावना होता हैं। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता हैं। कई शुभ कार्य करने के लिये लोग इस दिन का इंतजार करते हैं।

भारत-बांग्लादेश नेपाल में बंसत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता हैं। ग्रामीण क्षेत्रो में सरसों के पिले फूल खिलते हैं, जो कि बहुत ही सुंदर दिखाई देते हैं। इससे धरती और खिल उठती हैं। इस मौसम में पेड़-पौधे खेल उठते हैं। इस मौसम मैं न ज्यादा गर्मी ना हीं सर्दी होती है, इसलिए मौसम बहुत ज्यादा सुहावना लगता हैं।

बसंत पंचमी का मौसम

इस मौसम में कोयल गीत गाती है, पंछी गुनगुनाते हैं, फूल खिलते हैं, जिससे की यह धरती और रंग- बिरंगी हो जाती हैं। बसंत ॠतु को ॠतुराज कहा जाता हैं। बसंत ॠतु का मौसम कृषकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता हैं।

इस समय फसलें पक जाती है, उनको काटने का यह सही समय होता हैं। सब में उमंग की लहर चल पड़ती हैं। सरस्वती माता संगीत की देवी मानी जाती है, इसलिए सभी कलाकार भी इस दिन सरस्वती माता की पूजा करते हैं।

लोग बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र पहनते हैं। सरस्वती माता को पीले पुष्प चठाए जाते हैं। इस दिन सरस्वती माता के नाम का उपवास रखा जाता हैं। बसंत पंचमी के त्यौहार मे पीले रंग का बहुत अधिक प्रभाव होता हैं।

बसंत पंचमी का आयोजन

पीला रंग खुशी, समृद्धि, उर्जा प्रतीक होता है इसीलिए लोग पीले वस्त्र, पीले पुष्प, पीली मिठाई सरस्वती माता को अर्पित करते हैं। बसंत पंचमी के इस अवसर पर बढ़िया- बढ़िया पकवान और भोजन बनाए जाते हैं, जिसे लोग आनंद से खाते हैं।

भारतीय मानयता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन छोटे बालकों को प्रथम बार कोई अक्षर लिखाया जाता हैं। सरस्वती माता बुद्धि और ज्ञान की देवी होती है। सरस्वती माता संगीत व शिक्षा की देवी मानी जाती हैं। इस दिन सुबह के समय लोग अपने घरों में और बच्चे अपने विद्यालय में बसंत पंचमी का त्यौहार मनाते हैं। भारत के सभी विद्यालयों में बसंत पंचमी त्यौहार मनाया जाता हैं।

बच्चों के लिए बसंत पचमी का अवसर

बसंत पंचमी का त्यौहार बच्चे और बड़े पतंग उड़ाकर मनाते हैं। इस दिन लोग बसंती पोशाक पहनकर और बसंती पकवान बनाते है। विद्यार्थी बसंत पंचमी के दिन अपनी सारी पुस्तकें सरस्वती माता की चरणों में रखकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लेते हैं ताकि वह शिक्षा की क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर सके।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुबह उठकर बेसन लगाकर नहाना चाहिए क्योंकि सरस्वती माता को पिला रंग पसंद हैं। प्राचीन समय में राजा हाथी पर विराजमान होकर पूरे नगर में घूमते थे, फिर मंदिर जाते थे, पूजा होती थी। इस मौसम में गेहूं जौ चना सभी फसलें पक जाती हैं। इसलिए सब लोग इस त्यौहार को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं।

बसंत पचमी मनाने का कारण

पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन का संबंध कालिदास से हैं। कालिदास ने एक सुंदर राजकुमारी से विवाह किया। जब राजकुमारी को पता चला कि कालिदास बेवकूफ है तो उसने कालिदास का मजाक बनाया तब कालिदास आत्महत्या करने के लिए जलाशय के पास गये।

तभी सरस्वती माता प्रकट हुई उन्होंने कालिदास तो जलाशय में डूबकी लगाने के लिए कहा। ऐसा करने के बाद से ही कालिदास साहित्य से संबंधित श्रेष्ठ कविताएं लिखने लगे। अपनी पत्नी को गलत साबित किया। इस प्रकार बसंत पंचमी के दिन लोग सरस्वती माता की पूजा करते हैं।

बसंत पचमी का महत्त्व

बसंत पंचमी का त्यौहार लोगों के लिए बहुत खास होता है। यह त्यौहार फसल के पकने की ख़ुशी में मनाया जाता है। यह त्यौहार देश का मुख्य त्यौहार है। भारत में सभी विद्यालयों में इस त्यौहार को मुख्य रूप से मनाया जाता है। स्कूल में इस दिन सभी विधार्थी गण माँ सरस्वती की पूजा करते है। बसंत पंचमी का अवसर के दिन स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

निष्कर्ष

बसंत पंचमी का अवसर माँ सरस्वती दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन होता है। स्कूल के अलावा सभी सरकरी कार्यालयों में इस दिन छुट्टी रहती है। यह त्यौहार हिन्दू धर्म के लोगो के लिए काफी खास है। इस दिन का महत्व इसलिए ज्यादा हो गया है क्योंकि इस दिन को फसल पकने के उपलक्ष में भी मनाया जाता है।

अंतिम शब्द

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