सिन्ड्रेला की कहानी

Cinderella ki Kahani: एक समय की बात है। एक शहर में बहुत अमीर व्यापारी रहता था। उसकी एक सुंदर बेटी थी, जिसका नाम ‘एला’ था। एला की माँ नहीं थी लेकिन उसके पिता उसको बहुत प्यार-दुलार करते थे। एला के पिता उसका बहुत ध्यान रखते थे।  एला को किसी भी चीज की जरूरत होती तो उसके पिता झट से खरीद कर उसे दे देते थे।

एला भी अपने पिता से बहुत प्यार करती थी। पर उसको अपनी मां की बहुत याद आती थी। वह सोचती थी कि उसकी मां अगर उसके साथ होती तो कितना अच्छा होता, पर उसकी मां तो इस दुनिया में नहीं थी। एला अपनी मां को याद करके रोया करती थी।

एला के पिता एला के बारे में बहुत चिंतित रहते थे, इसलिए उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी ताकि मां की कमी पूरी हो जाए। लेकिन सौतेली मां दुष्ट स्वभाव की थी। एला के पिता के पीठ पीछे वह एला को बहुत सताती थी। उसकी सौतेली मां की दो बेटियां थीं, जो बहुत बदसूरत थी और सुंदर ऐला से वे दोनों बहुत नफरत करती थीं।

एला के पिता अक्सर व्यापार के सिलसिले में शहर से बाहर जाते थे। तब एला की सौतेली मां मौका पाकर एला को बहुत सताती थी। सौतेली मां की पहले से 2 बदसूरत बेटियां थीं और अपनी मां की तरह दुष्ट स्वभाव की थीं।

दुष्ट स्वभाव की वह औरत सोचती थी कि एला के पिता के धन दौलत और ऐशोआराम का आनंद केवल वह और उसकी बेटियां ही लें। इसी सोच के कारण उसकी सौतेली मां और उसकी बेटी एला से ईर्ष्या करती थी।

एक बार की बात है। एला के पिता को व्यापार के काम से शहर के बाहर जाना पड़ा। उन्हें वहां पर कई महीने रुकना पड़ा। घर पर एला अपने पिता की प्रतीक्षा करती रही लेकिन वे लौटे नहीं। उसकी सौतेली मां और उसकी बेटियां एला को अकेली पाकर खूब सताती थीं।।उसकी सौतेली मां और उसकी बदसूरत बेटियां एला को प्रताड़ित करती थीं।

नौकरानी जैसा उससे काम करवाती थीं। उसकी सौतेली मां इला को ना अच्छा खाने को देती थी और ना ही अच्छा कपड़ा पहनने को देती थी लेकिन वह फटे पुराने कपड़े में भी सुंदर लगती थी, जिसे देखकर दोनों बदसूरत बहनें जला करती थीं।

उदास अकेली एला के दुख को समझने वाला कोई नहीं था। उस घर में एला के तीन दोस्त थे। दो चूहे और एक चिड़िया। जब दिन भर काम करने के बाद समय मिलता तो वह उनके साथ खेला करती थी। रात को थककर वह अंगीठी के पास ही सो जाती। सोते समय अंगीठी की राख छिटककर उस पर गिरने लगती।

जब सिंड्रेला सुबह उठती तो उसके चेहरे पर अंगीठी की राख लगी होती थी, जिसे देखकर उसकी सौतेली बहनें उसे ‘सिंडर-एला’ के नाम से चिढ़ाती (राख को अंग्रेजी में सिंडर कहते हैं)। इस तरह से धीरे-धीरे लोग उसे सिंड्रेला नाम से बुलाने लगे।

उस देश के राजा ने घोषणा करवाई कि राजमहल में एक भव्य रंगारंग जलसे आयोजन करवाया जाएगा। यह घोषणा पूरे राज्य में जगह-जगह पर ढोल पीट पीटकर राजा के कर्मचारियों ने बताया कि इस जलसे में आने वाली लड़कियों में से ही एक लड़की को राजकुमार शादी के लिए चुनेंगे। फिर क्या था! राज्य की सभी लड़कियां इस जलसे में बुलाई गईं।

इधर जब इस घोषणा को सिंड्रेला की सौतेली बहनों ने सुना तो वे दोनों सौतेली बदसूरत बहनें जलसे में जाने की जोर शोर से तैयारियां करने लगीं। सिंड्रेला भी खुश थी कि उसे भी जलसे में उसकी सौतेली मां ले जाएंगी। पर उसकी सौतेली मां ने साफ मना कर दिया कि सिंड्रेला उस राजमहल में आयोजित होने वाले जलसे में नहीं जाएगी।

Cinderella ki Kahani
Cinderella ki Kahani (cinderella stories in hindi)

उसने जानबूझकर ऐसा किया। उसने सोचा कि सिंड्रेला बहुत सुंदर है और वह राजमहल चली गईं तो राजकुमार उसे पसंद कर लेगा। फिर उसकी बदसूरत बेटियों का राजकुमार से शादी करने का सपना टूट जाएगा। इसी जलन में उसकी मां ने सिंड्रेला को वहां जाने की आज्ञा नहीं दी।

जलसे का दिन नजदीक आया और उस दिन उसकी सौतेली मां और उसकी बेटियां सज-धज कर जलसे की ओर जाने लगी और कहने लगी कि तुम पूरा घर का काम अच्छे से करना और ढेर घर सारा काम सिंड्रेला को सौंप दिया।

बिचारी सिंड्रेला उदास हो गई और दिन भर घर का काम करती रही और जलसे के बारे में सोचती रही। उसने अपना काम कर लिया और अंगीठी के पास बैठ गई। सिंड्रेला के तीनों दोस्त नन्हीं चिड़िया और दोनों चूहे उसके पास आकर बैठ गए। उदास सिंड्रेला को देखकर मन बहलाने की कोशिश करने लगे। पर उदास सिंड्रेला का मन कहां लगता, वह अपनी मां को याद करके रोने लगी और सोचने लगी कि अगर उसकी मां होती तो वह भी इस जलसे में जा पाती।

सिंड्रेला यह सोच ही रही थी कि अचानक एक परी प्रकट हुई। परी ने सिंड्रेला से उसकी उदासी का कारण पूछा तो सिंड्रेला ने सब कुछ बता दिया। फिर परी ने कहा कि मैं तुम्हें जल्दी में भेजने के लिए तैयार कर रही हूं और उसने अपनी जादुई छड़ी उसके फटे पुराने कपड़े पर जैसे ही रखा पुराने कपड़े नए बेशकीमती खूबसूरत कपड़े में बदल गया।

परी ने सिंड्रेला से कहा “जाओ रसोई में रखा हुआ कद्दू लेकर आओ!” सिंड्रेला बड़ी खुश होकर रसोई से कद्दू लेकर आई। सिंड्रेला कद्दू जैसे ही परी के सामने जमीन पर रखा, परी ने छड़ी घुमाई और कद्दू ख़ूबसूरत बग्गी बन गई और फिर दोनों चूहे बन गए, घोड़े और चिड़िया बन गई कोचवान। सिंड्रेला के पैर में तो कोई जूते नहीं थे तो फिर परी ने छड़ी घुमाई और एक जोड़ी कांच के सुंदर जूतियाँ बना दिया। सिंड्रेला पैरों में जूतियां पहली और आंखों पर नकाब चढ़ा लिया।

सिंड्रेला बग्गी पर बैठ गई और जलसे के लिए जाने लगी, तब परी ने कहा कि उसका यह जादू रात 12:00 बजे तक ही रहेगा। इसलिए 12:00 बजे से पहले उसे किसी भी कीमत पर लौट आना है। अगर वह ऐसा नहीं करेगी तो जादू का असर खत्म हो जाएगा और फिर सिंड्रेला अपने फटे पुराने कपड़े में दिखने लगेगी। सिंड्रेला ने परी से वादा किया कि वह 12:00 बजे से पहले जलसे से वापस आ जाएगी। सिंड्रेला जलसे में शामिल होने के लिए रवाना हो गई।

सिंड्रेला जलसे में पहुंची तो उसकी खूबसूरती देखकर वहां सभी लोग आश्चर्यचकित में पड़ गए। वह जलसे में सबसे सुंदर लड़की थी। लेकिन उसकी सौतेली बहनों ने जब उसे देखा तो नकाब के कारण उसे पहचान नहीं पाई लेकिन उसकी खूबसूरती देखकर जल भुन कर रह गई। इधर राजकुमार की निगाहें सिंड्रेला की खूबसूरती को निहार रहे थे। एक टक सिंड्रेला को राजकुमार देखे जा रहे थे।

राजकुमार को पहली नजर में सिंड्रेला से प्रेम हो गया था और उसे नाचने के लिए आमंत्रित किया। सिंड्रेला और राजकुमार देर शाम तक एक साथ नाच रहे थे। जलसे में हर एक लड़की यह सब देखकर सिंड्रेला से ईर्ष्या करती रही।  सिंड्रेला के साथ नाचते हुए राजकुमार ने जब उससे पूछा कि तुम्हारा क्या नाम है? क्या पहचान है? तो सिंड्रेला ने कुछ नहीं बताया, अपनी पहचान छुपा ली।

आज सिंड्रेला बहुत खुश थी। बहुत दिनों बाद उसकी खुशी उसके चेहरे पर झलक रही थी लेकिन जैसे उसने घड़ी पर देखा कि 12:00 बजने वाला है तो उसके दिमाग में परी की बात गूंजने लगी कि 12:00 बजते ही, उसे वहां से हर कीमत पर वापस लौट जाना है। अचानक सिंड्रेला ने राजकुमार से अपना हाथ छुड़ा लिया और बग्गी की ओर भागी।

राजकुमार सिंड्रेला को नहीं जाने देना चाहता था, इसलिए उसने सिंड्रेला का पीछा किया। जैसे ही सिंड्रेला महल के दरवाजे के पास अपनी बग्गी की ओर पहुंची तो उसकी एक जूती पैर फिसलने की वजह से निकल गई। राजकुमार दरवाजे के पास पहुंचा तब तक सिंड्रेला बग्गी में बैठकर जा चुकी थी। पड़ा था तो सामने सिंड्रेला का कांच का एक पैर की जूती। राजकुमार ने उस जूती को उठा लिया।

सिंड्रेला घर पहुंची और परी का जादू खत्म हो चुका था। फिर वह फटे पुराने कपड़े में आ गई और उसके तीनों मित्र  दोनों चूहे और चिड़िया अपने असली रूप में आ गए। बग्गी भी फिर कद्दू बन गया था। पर आज सिंड्रेला राजकुमार से मिलकर बहुत खुश थी। उसने परी को सारी बात बताई और सिंड्रेला ने परी को धन्यवाद दिया। परी ने उसे ढेर सारा आशीर्वाद दिया और वहां से चली गई।

इधर कई दिन बीत गए राजकुमार का मन तो सिंड्रेला में ही डूबा था। वह मन ही मन सिंड्रेला को भूल नहीं पाया था। उसने मन बना लिया कि किसी भी कीमत पर वह सिंड्रेला को खोज लेगा और उससे शादी करेगा। राजकुमार के पास सिंड्रेला की एकमात्र निशानी उसके एक पैर का कांच की जूती थी तो राजकुमार ने ढिंढोरा पिटवा दिया कि जिस भी लड़की के पैर में काँच की वह जूती आ जायेगी। वह उससे शादी करेगा।

राज्य के सभी नगरों की सारी लड़कियां राजकुमार से शादी करने के लिए इच्छुक थी। हर लड़की कांच की जूती को अपना बताकर इसे पहनने की कोशिश करने लगी। परंतु वह जूती किसी के पैर में नहीं आई। राजकुमार और उनके सेवक नगर-नगर घूमते घूमते एक दिन सिंड्रेला की गली में पहुंचे। सिंड्रेला की सौतेली मां ने राजकुमार को अपने यहां बुलाया और उनका स्वागत करने लगी और फिर अपनी दोनों बेटियों से मिलवाया। लेकिन सिंड्रेला को राजकुमार के सामने आने नहीं दिया।

सिंड्रेला की मां ने अपनी बेटियों से कहा कि जूती को अपने पैर में पहनो। बार-बार कोशिश करने पर दोनों के पैरों में वह जूती नहीं आई। राजकुमार दुखी हो गया और जब वहां से जाने लगा तो पर्दे के पीछे खड़ी सिंड्रेला पर राजकुमार की निगाह पड़ी तो उसने कहा कि यह भी आपकी बेटी है, इसे भी बुलाओ और यह जूती पहन कर दिखाएं।

सिंड्रेला की मां ने मना किया लेकिन राजकुमार के कई बार कहने को वह कैसे टाल सकती थी। बेमन से उसने सिंड्रेला को बुलाया। सिंड्रेला के पैर में बहुत ही आसानी से वह जूती आ गई और उसने दूसरी जूती भी निकालकर राजकुमार के सामने पहन ली। यह देख कर सौतेली मां और उसकी सौतेली बहनों की स्थिति ऐसी हो गई कि आँखें आश्चर्य और जलन से फटी की फटी रह गई।

सौतेली मां और सौतेली बहनों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था लेकिन राजकुमार समझ गया कि सिंड्रेला ही वह लड़की थी, जो उस दिन जलसे में मिली थी और उसी से प्रेम हो गया था। राजकुमार ने उसी समय सिंड्रेला से प्रणय निवेदन किया, “क्या तुम मुझ से शादी करोगी?”

राजकुमार इस निवेदन को सिंड्रेला ने प्रसन्नता के साथ स्वीकार कर लिया और फिर राजकुमार और सिंड्रेला की शादी हो गई। दोनों सुख पूर्वक जीवन बिताने लगें। सिंड्रेला का जीवन बदल गया था। अब उसके जीवन में दुख नहीं, सुख ही सुख था।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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