भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा हैं?

राष्ट्र की पहचान और विरासत को परिभाषित करने के लिए भारत सरकार ने कई तत्वों को प्रतीक के रूप में चुना है जैसे कि मोर को राष्ट्रीय पक्षी माना है वही बाघ को भारत का राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया है, तो कमल को राष्ट्रीय फूल का दर्जा दिया गया है।

इन सभी प्रतीकों का कुछ ना कुछ महत्व है, जो भारत की संस्कृति और इसके इतिहास के महत्व को बताती है। इसके अतिरिक्त हम हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल मानते हैं। वैसे अब तक तो हम यही जानते थे कि हॉकी भारत का खेल है, भले ही इसे क्रिकेट जितना प्यार ना मिला हो।

Bharat ka rashtriya khel kaun sa hai

जितना ज्यादा क्रिकेट के प्रति लोगों का क्रेज रहता है, उतना हॉकी के लिए नहीं देखा जाता। फिर भी हॉकी को लोग भारत का राष्ट्रीय खेल मानते हैं क्योंकि यह भारत का अत्यंत पुराना खेल है। लेकिन क्या असल में हॉकी ही भारत का राष्ट्रीय खेल है क्योंकि अमेरिका या इंग्लैंड जैसे देशों में उनके देश में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले खेल को राष्ट्रीय खेल का दर्जा दिया गया है।

तो फिर हमारे देश में सबसे अधिक क्रिकेट के प्रति लगाव होने के बावजूद लोग हॉकी को राष्ट्रीय खेल का दर्जा क्यों देते हैं? यदि आप इन सब प्रश्नों का जवाब जानना चाहते हैं तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें। जिसके बाद आप भारत का राष्ट्रीय खेल असल में क्या है उसके बारे में जान पाएंगे।

भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा हैं?

हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों कहा जाता है?

चूंकि अब आपको पता चल चुका है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है, तो फिर हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों कहा जाता है? बचपन से ही पढ़ते आ रहे हैं कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है। दरअसल जब कोई खेल देश में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय हो और वह ऐतिहासिक संबंध रखे तो उसे देश का राष्ट्रीय खेल माना जाता है।

हालांकि भारत सरकार द्वारा कभी भी इस प्रकार की घोषणा नहीं की गई थी लेकिन हॉकी भारत का काफी प्राचीन खेल है और लंबे समय से इसने ओलंपिक और अन्य कई आयोजित टूर्नामेंट में खिलाड़ियों ने इस खेल में बहुत अच्छा प्रदर्शन दिखाया है।

हॉकी का इतिहास काफी रोचक रहा है। इसकी टीम अब तक आठ गोल्ड 1 सिल्वर और 3 रजत मेडल जीत चुके हैं। 1928 से लेकर 1956 तक तो इस खेल का स्वर्णिम दौर रहा, जब इस खेल ने लगातार छह गोल्ड हासिल किए।

यहां तक कि इस खेल के कारण भारत को बेहतरीन खिलाड़ी जिनमें से हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद, धनराज पिल्ले और बलबीर सिंह सीनियर शामिल है, जिन्होंने हॉकी के जरिए देश का नाम रोशन किया है।

हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों नहीं है?

जब हमें पता चल चुका है कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है, तो यह प्रश्न निश्चित ही हमारे मन में आता है कि आखिर हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों नहीं है? क्योंकि इस खेल का इतिहास बहुत ही रोचक रहा है और उसकी लोकप्रियता भी प्राचीन समय से ही काफी रही है।

यहां तक कि अब तक इसी खेल को ज्यादातर लोग राष्ट्रीय खेल की तरह मानते थे। अचानक लोगों को कब पता चला कि भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है? दरअसल साल 2020 में महाराष्ट्र राज्य के धुले जिले के एक स्कूल शिक्षक ने सरकार के साथ याचिका दायर की, जिसके जरिए वह जानना चाहता था कि हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल कब घोषित किया गया था?

जिसके बाद युवा मामले और खेल मंत्रालय ने इसका जवाब देते हुए कहा कि “भारत सरकार ने अब हॉकी या फिर किसी अन्य खेल को भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं घोषित किया है ” क्योंकि भारत सरकार का उद्देश्य युवाओं को उसके पसंदीदा खेल के प्रति बढ़ावा देना है।

क्या हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल बनाया जाएगा?

हमें अब तक यही पता था कि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है। यहां तक कि अभी भी बहुत से लोगों को यही लगता हैं कि हॉकी ही भारत का राष्ट्रीय खेल है। क्रिकेट की लोकप्रियता भारत में अन्य खेलों की तुलना में कहीं ज्यादा है, तो क्या हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल बनाया जाएगा या फिर क्रिकेट को उसकी लोकप्रियता देखते हुए भारत का राष्ट्रीय खेल बनाया जाएगा?

इसके बारे में अभी तो कुछ कहा नहीं जा सकता परंतु 2021 के टोक्यो ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम ने शानदार प्रदर्शन दिखाया। इस खेल में पुरुष की टीम ने कांस्य पदक जीता 41 सालों में यह भारत का पहला ओलंपिक मेडल था, वही महिला टीम जीत के करीब थी।

इस प्रदर्शन के बाद लोग हॉकी को राष्ट्रीय खेल घोषित करने की मांग कर रहे है। यहां तक कि हॉकी को राष्ट्रीय खेल बनाने के लिए एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर कर दी है, जिसके जरिए वह पूर्व गौरव को वापस लाने में मदद करने का निर्देश देने का आग्रह सरकार को कर रहा है।

हालांकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस याचिका को खारिज कर दिया गया और अब जब तक सरकार आधिकारिक तौर पर हॉकी को राष्ट्रीय खेल होने की घोषणा नहीं करती, तब तक यह भारत का राष्ट्र खेल नहीं माना जाएगा।

FAQ

हॉकी क्या होता हैं?

हॉकी एक प्रकार का खेल है, जिसमें 2 टीम होती है और वे लकड़ी या किसी कठोर फाइबर से बनी स्टिक की सहायता से रब्बर या प्लास्टिक के बने गेंद को अपने विरोधी टीम से बचाते हुए नेट या गोल में डालने का प्रयत्न करते हैं।

हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल क्यों नहीं माना जाता?

हॉकी क्या भारत का कोई भी राष्ट्रीय खेल नहीं है। युवा मामले और खेल मंत्रालय का कहना है कि भारत में किसी भी खेल को राष्ट्रीय खेल की तरह घोषित नहीं किया है। सरकार का उद्देश्य सभी खेलों समान बढ़ावा देना है।

क्या हॉकी का जन्म भारत में हुआ है?

भले ही हॉकी को भारत का राष्ट्रीय खेल माना जाता हो लेकिन हॉकी का प्रारंभ मूल रूप से भारत से नहीं हुआ है बल्कि 4000 वर्ष पूर्व मिस्र में इस खेल का प्रारंभ हुआ था और बहुत से देशों में इसका आगमन हुआ लिकिन भारत के अतिरिक्त अन्य किसी भी देश में इसे स्थान ना मिल सका। इस प्रकार कह सकते हैं कि भारत में हॉकी का प्रारंभ 150 वर्ष पहले ही हो चुका था।

हॉकी का सबसे पहला टूर्नामेंट कब खेला गया था?

हॉकी का सबसे पहला टूर्नामेंट 1895 में कोलकाता में आयोजित हुई थी जिसका नाम बीटन कप था।

ओलंपिक खेलों में भारत के हॉकी टीम ने कब से हिस्सा लेना शुरू किया?

1928 में ओलंपिक खेलों में भारत के हॉकी टीम की शुरुआत हुई थी और उस समय भारत में हॉकी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इस तरह ओलंपिक खेलों में हॉकी टीम प्रसिद्ध हो गई।

अब तक भारत ने ओलंपिक खेलों में हॉकी खेल कर कितने पदक हासिल किए हैं?

भारत की हॉकी टीम ने ओलंपिक में अब तक कुल 11 पदक जीते हैं, जिसमें से आठ स्वर्ण, दो कांस्य पदक और एक रजत है।

हॉकी का खेल कितने समय में खेला जाता है?

फील्ड पर खेली जाने वाली हॉकी मैच की अवधि 60 मिनट की होती है और इसे 4 क्वार्टर में खेला जाता है पहले और तीसरे क्वार्टर के बाद 2 मिनट का ब्रेक लिया जाता है। इसके अतिरिक्त हाफ टाइम के बाद भी 15 मिनट का अंतराल होता है।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने आपको भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा हैं? के बारे में बताया हालांकि हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल नहीं है। अब तक हम यही जानते थे कि हॉकी भारत का खेल है। लेकिन हमें उम्मीद है कि इस लेख को पढ़कर आप समझ गए होंगे कि भारत का कोई भी राष्ट्रीय खेल नहीं है क्योंकि भारत सरकार युवाओं को विभिन्न प्रकार के खेलो में अपना भविष्य बनाने के लिए बढ़ावा देती है।

इनका उद्देश्य किसी एक खेल को उत्कृष्ट बनाना नहीं है बल्कि सभी खेलों को सामान बढ़ावा देना है। हमें उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित हुआ होगा।

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