जमाना शायरी

Zamana Shayari in Hindi

Zamana Shayari in Hindi
Zamana Shayari in Hindi

जमाना शायरी |Zamana Shayari in Hindi

ज़माना चाहता है क्यों,
मेरी फ़ितरत बदल देना,
इसे क्यों ज़िद है
आख़िर,फूल को पत्थर बनाने की..

[vw_copy_text]

औकात नहीं थी ज़माने की
जो हमारी कीमत लगा सके
पर कमबख्त इश्क में
क्या गिरे मुफ्त में नीलाम हो गये

[vw_copy_text]

वो किताबो में दर्ज था ही नहीं,
जो पड़ाया सबक जमाने ने।

[vw_copy_text]

वही ज़मीन है
वही आसमान वही हम तुम,
सवाल यह है
ज़माना बदल गया कैसे।

[vw_copy_text]

कुछ तुम ले गए….
कुछ जमाना…!
इतना सुकून…
हम लाते भी कहाँ से….!!

[vw_copy_text]

कौन हमारे दर्द को समझा
किसने गम मे साथ दिया,
कहने को साथ हमारे तुम क्या
एक ज़माना था..

[vw_copy_text]

फोन से करने लगे हैं
मुलाकात आजकल के आशिक
वो गालों से जुल्फों को
हटाने का जमाना अब नहीं रहा

[vw_copy_text]

***

यहाँ सब कुछ बिकता है दोस्तो
रहना जरा सभल के,
बेचने वाले हवा भी बेच देते हैं
गुब्बारों में डाल के।

[vw_copy_text]

Zamana Shayari in Hindi

कभी तो अपने अन्दर भी कमियां ढूढ़े,
ज़माना मेरे गिरेबान में झाँकता क्यूँ हैं।

[vw_copy_text]

सुन पगली जब तू चलती है
तो ज़माना रूक जाता है,
लेकिन मैं जब चलता हूं
तो ज़माना झुक जाता है

[vw_copy_text]

ज़माना तो बड़े शौक से सुन रहा था,
हम ही रो पड़े दास्ताँ कहते कहते..

[vw_copy_text]

अपने किरदार पर डालकर परदा
हरकोई कह रहा है जमाना ख़राब है

[vw_copy_text]

एतराज है ज़माने को जो
लबों पे मुस्कुराहट आ जाये
मुस्कुराये ज़माना जो
निगाहों में गम के बादल छा जाएं

[vw_copy_text]

ऊँची इमारतों से
मकान मेरा घिर गया​,
​कुछ लोग मेरे
हिस्से का सूरज भी खा गए।

[vw_copy_text]

थोड़ा हट के चलता हूँ
ज़माने की रिवायत से,
कि जिनपे मैं बोझ डालूँ
वो कंधा याद रखता हूँ..

[vw_copy_text]

Read Also : लम्हा शायरी

बहुत कुछ सिखाया है जमाने ने
मैं कैसे कह दूं जमाना खराब है

[vw_copy_text]

रहते हैं अस-पास ही
लेकिन साथ नहीं होते,
कुछ लोग मुझसे जलते हैं
बस ख़ाक नहीं होते।

[vw_copy_text]

नीम का पेड़ था बरसात थी
और झूला था
गांव में गुज़रा ज़माना
भी ग़ज़ल जैसा था

[vw_copy_text]

मैं अपना रक़्स-ए-जाम तुझे भी दिखाऊँगा,
ऐ गर्दिश-ए-ज़माना मेरे दिन अगर फिरे..
फ़ना निज़ामी

[vw_copy_text]

निकाल देते हैं औरो मै ऐब
जैसे ख़ुद नैकियो के नवाब है
अपने गुनाह पर डालकर परदा
कहते है जमाना खराब है

[vw_copy_text]

उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर न उठाना लोगो,
जिसको शक हो वो मुझे निभा कर देखे।

[vw_copy_text]

****

सारी फितरत तो
नकाबों में छुपा रखी थी​,
​सिर्फ तस्वीर उजालों में लगा रखी थी।

[vw_copy_text]

सच को मैंने सच कहा,
जब कह दिया तो कह दिया,
अब ज़माने की नज़र में
ये हिमाकत है तो है..

[vw_copy_text]

परवाह ना करो चाहे
सारा जमाना खिलाफ हो
चलो उस रास्ते पर जो
सच्चा और साफ हो

[vw_copy_text]

सच्चाई थी पहले के लोगों की जुबानों में,
सोने के थे दरवाजे मिट्टी के मकानों में।

[vw_copy_text]

मासूम मोहब्बत का
बस इतना फसाना है,
कागज़ की हवेली है
बारिश का ज़माना है..

[vw_copy_text]

क्या लूटेगा जमाना खुशियों को हमारी
हम तो खुद अपनी खुशियाँ
दूसरों पर लुटा कर जीते है

[vw_copy_text]

खोटे सिक्के जो अभी अभी चले हैं बाजार में,
वो कमियां निकाल रहें हैं मेरे किरदार में।

[vw_copy_text]

अपना ज़माना आप बनाते हैं
अहले-दिल,
हम वे नहीं कि
जिसको ज़माना बना गया..
ज़िगर

[vw_copy_text]

सिर्फ तूने ही मुझे
कभी अपना न समझा
जमाना तो आज भी
मुझे तेरा दीवाना कहता है

[vw_copy_text]

Zamana Shayari in Hindi

क़र्ज़ ग़म का चुकाना पड़ा है,
रो के भी मुस्कराना पड़ा है,
सच को सच कह दिया इसी पर,
मेरे पीछे ज़माना पड़ा है।

[vw_copy_text]

मेरा कमाल-ए-शेर
बस इतना है ऐ “जिगर”,
वो मुझ पे छा गए
मैं ज़माने पे छा गया..

[vw_copy_text]

मैं अपनी तारीफ तो खुद ही करता हूं
क्योंकि मेरी बुराई करने के लिए
तो पूरा जमाना तैयार बैठा है

[vw_copy_text]

चीखें भी यहाँ कोई गौर
से सुनता नहीं फ़राज़,
अरे किस शहर में
तुम शेर सुनाने चले आये।

[vw_copy_text]

Read Also :जुदाई शायरी

रूठा हुआ है
मुझसे इस बात पर ज़माना
शामिल नहीं है
मेरी फ़ितरत में सर झुकाना..

[vw_copy_text]

मुझे उचाईओं पर
देखकर हैरान हैं बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरों के छाले नहीं देखे।

[vw_copy_text]

भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागार से हम
ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम..
साहिर

[vw_copy_text]

तू जिसको कह रहा है पुराना लगा है मुझे
ये घर खरीदने में जमाना लगा मुझे

[vw_copy_text]

जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है,
मेरा दिल तोड़कर मुझे हँसाना चाहता है,
जाने क्या बात है मेरे चेहरे में,
हर शख्स मुझे अजमाना चाहता है।

[vw_copy_text]

दबा के चल दिए सब क़ब्र में,
दुआ न सलाम,
ज़रा सी देर में
क्या हो गया ज़माने को..

[vw_copy_text]

हमारा जिक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,
दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,
ख्याल था के ये पथराव रोक दे चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।

[vw_copy_text]

हमीं पे ख़त्म हैं जौर-ओ-सितम ज़माने के,
हमारे बाद उसे किस की आरज़ू होगी..
फ़सीह अकमल

[vw_copy_text]

भूल कर भी अपने दिल
की बात किसी से मत कहना,
यहाँ कागज भी जरा सी
देर में अखबार बन जाता है।

[vw_copy_text]

सबसे अलग सबसे न्यारे हो आप,
तारीफ कभी पुरी ना हो इतने प्यारे हो आप,
आज पता चला कि जमाना क्यों जलता है हमसे,
क्यों कि दोस्त तो आखिर हमारे हो आप..

[vw_copy_text]

खामोश बैठे तो लोग कहते है
उदासी अच्छी नहीं,
हंस ले तो लोग
मुस्कराने की वजह पूछ लेते हैं।

[vw_copy_text]

आज आई बारिश तो
याद आया वो जमाना,
वो तेरा छत पे रहना
और मेरा सडको पे नहाना..

[vw_copy_text]

****

बे-मतलब की अच्छाई
का सिल सिला ख़तम,
अब जिस तरह की
दुनिया उस तरह के हम।

[vw_copy_text]

कर लो एक बार याद मुझको,
हिचकियाँ आए भी ज़माना हो गया..

[vw_copy_text]

दुनिया ये मोहब्बत को मोहब्बत नहीं देती,
इनाम तो बड़ी चीज़ है कीमत नहीं देती,
देने को मैं भी दे सकता हूँ गाली उसे,
मगर मेरी तहजीब मुझे इज़ाज़त नहीं देती।

[vw_copy_text]

ये जमाना जल जायेगा
किसी शोले की तरह,
जब उसके हाथ में खनकेगा
मेरे नाम का कंगन..

[vw_copy_text]

सच बिकता है झूठ बिकता है
बिकती है हर कहानी,
तीनों लोक में फैला फिर भी
बिकता है बोतल में पानी।

[vw_copy_text]

लगाई है जो ये सीने में
आग तुमने मेरे,
अब वही आग
ज़माने को लगा दूँ क्या मैं..

[vw_copy_text]

Zamana Shayari in Hindi

बेवफा दुनिया में कौन
सारी ज़िन्दगी साथ देगा तेरा,
लोग तो दफना कर भूल जाते हैं
के कब्र कौन सी थी।

[vw_copy_text]

पहले तराशा उस ने
मेरा वजूद शीशे से “फ़राज़”,
फिर ज़माने भर के हाथों में
पत्थर थमा दिए..

[vw_copy_text]

हम से खेलती रही दुनिया,
तास के पत्तों की तरह,
जिसने जीता उसने भी फेका,
जिसने हारा उसने भी फेंका।

[vw_copy_text]

Read Also : दोस्ती पर शायरी

चालाकियां ज़माने की देखा
किये सहा किये,
उम्र भर लेकिन
वही सादा-दिल इंसान से रहे..

[vw_copy_text]

हमारे नक्शे पा पे चलते-चलते,
जमाना हमसे आगे निकल गया..
सईद सय्यद अख्तर

[vw_copy_text]

देख कर दिल-कशी ज़माने की,
आरज़ू है फ़रेब खाने की..

[vw_copy_text]

उन से एक पल में
कैसे बिछड़ जाए हम,
जिनसे मिलने मैं
शायद ज़माने लगे..

[vw_copy_text]

बड़ा जालिम जमाना है
यहां हर शख्स सयाना है,
यह मैं नहीं कहता ये
भी कहता जमाना है..

[vw_copy_text]

ज़माना एक दिन मुझको
इन्हीं लफ़्ज़ों में ढूँढेगा,
वो हर एहसास जो
लफ़्ज़ों में ढाला छोड़ जाऊँगा..

[vw_copy_text]

तुम फिर उसी अदा से
अंगड़ाई लेके हँस दो
आ जाएगा पलट कर
गुज़रा हुआ ज़माना..

[vw_copy_text]

जमाना हो गया है
देखो मेरी चाहत नही बदली,
उसकी जिद नही बदली
मेरी आदत नही बदली..

[vw_copy_text]

चलो कि हम भी ज़माने के साथ चलते हैं,
नहीं बदलता ज़माना तो हम बदलते हैं..
सदा अम्बालवी

[vw_copy_text]

रुके तो गर्दिशें
उसका तवाफ़ करती हैं
चले तो उसको
ज़माने ठहर के देखते हैं..

[vw_copy_text]

परवाह नहीं चाहे
जमाना कितना भी खिलाफ हो,
चलूँगा उसी राह पर
जो सीधी और साफ हो..

[vw_copy_text]

बस एक ख़ुद से ही
अपनी नहीं बनी वरना,
ज़माने भर से
हमेशा बना के रखतें हैं..

[vw_copy_text]

चिरागों के बदले मकाँ जल रहे है,
नया है जमाना नई रौशनी..
खुमार बाराबंकवी

[vw_copy_text]

मोहब्बत मे ऐसे कदम डगमगाए,
ज़माना यह समझा के हम पी के आए..
हसरत जयपुरी

[vw_copy_text]

*****

नहीं बिकता हूँ
मैं बाज़ार की मैली नुमाइश में
ज़माने में मुझे तो
बस मेरे हक़दार पढ़ते हैं..

[vw_copy_text]

खुद से जीतने की जिद है मुझे
खुद को ही हराना है,
मै भीड़ नहीं हूँ दुनिया की,
मेरे अन्दर एक ज़माना है..

[vw_copy_text]

Zamana Shayari in Hindi

ज़माना याद करे
या सबा करे ख़ामोश,
हम इक चराग़-ए-मोहब्बत
जलाए जाते हैं..

[vw_copy_text]

बदला हुआ वक़्त है,
ज़ालिम ज़माना है,
यहां मतलबी रिश्ते है,
फिर भी निभाना है..

[vw_copy_text]

ये अपनी कहानी ज़माने में “हसरत”
सभी को पता है, सभी को ख़बर है..

[vw_copy_text]

बरसात की भीगी रातों में
फिर कोई सुहानी याद आई,
कुछ अपना ज़माना याद आया
कुछ उनकी जवानी याद आई..

[vw_copy_text]

मैने देखा है
ज़माने को शराबें पी कर,
दम निकल जाये
अगर होश में आकर देखूँ..

[vw_copy_text]

दुश्मनी एक पल में होतीं है,
दोस्ती को जमाने लगते हैं..
खुरशीद अख्तर

[vw_copy_text]

कहते हैं
कि उम्मीद पे जीता है ज़माना,
वो क्या करे जिसे कोई उम्मीद ही नहीं..

[vw_copy_text]

क्या खाक़ तरक्की की है
ज़माने ने,
मर्ज़े-इश्क़ तो
अब भी ला-इलाज है..

[vw_copy_text]

मोहब्बत तेरा मेरा मसला था,
ये ज़माना बीच में क्यूँ आ गया..

[vw_copy_text]

Read Also

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here