भ्रष्टाचार पर भाषण

Speech on Corruption in Hindi : भ्रष्टाचार देश का एक ऐसा विकलांग भाग कहलाता है, जो देश को लंगड़ा का देता है और इन लंगड़ा करने का श्रेय हमारे देश के बड़े बड़े मंत्रियों राजनेताओं को जाता है।

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हम इस आर्टिकल में आपको भ्रष्टाचार पर भाषण (Speech on Corruption in Hindi) के बारे में बेहद सरल भाषा में माहिति प्रदान करेंगे। यह भाषण हर कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा।

भ्रष्टाचार पर भाषण | Speech on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार पर भाषण (500 शब्द)

आदरणीय शिक्षक गण, मेरे प्यारे मित्रों को मेरा नमस्कार।

सबसे पहले मैं सभी को नमस्कार करना चाहूंगा तथा आप सब को अवगत कराना चाहता हूं कि आज का दिन विशेष तथा महत्वपूर्ण है। आज मैं भ्रष्टाचार के विषय में अपने शब्दों को आपके समक्ष रखना चाहूंगा।

भ्रष्टाचार हमारे देश का एक वह खराब अंग होता है, जो पूरे देश को विकलांग करता जाता है। भ्रष्टाचार कई स्तंभों पर टिका हुआ है, जो देश को लगातार भ्रष्ट करता जाता है। लोकतंत्र के इस देश में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ता है। भारत जैसा देश को सोने की चिड़िया के नाम से जाना जाता था। आज का भ्रष्टाचार जैसे बड़े अपराध की चपेट में बैठा हुआ है।

देश को खोखला तथा मजबूर व आर्थिक रूप से कमजोर करने वाले जो व्यक्ति हमारे देश को पूरी तरह से लूट कर विदेशों में छुप जाते हैं, वह हमारे देश के राजनेताओं तथा बड़े बड़े मंत्रियों से संपर्क होते हैं। हम ऐसा कह सकते हैं या मुझे ऐसा कहना चाहिए कि भ्रष्टाचार को फैलाने वाले व्यक्तियों में सबसे बड़े राजनेता बड़े-बड़े मंत्री भी होते हैं।

जो भ्रष्टाचार को लोगों के बीच इस प्रकार उनकी मानसिकता को परिवर्तित कर देते हैं कि वह लोग तथा आम जनता उन चीजों पर बोल नहीं पाती। भारत जैसे देश में भ्रष्टाचार की सीमा इतनी बढ़ गई है कि आज भारत में समृद्धि तथा अमीर लोग अमीर होते जा रहे हैं तथा गरीब लोग गरीबी रेखा के नीचे अपना दम तोड़ते जा रहे हैं। आर्थिक नीति को कम करते जा रहे है।

अमीर व्यक्तियों का लगातार ग्राफ बढ़ता जाता है और गरीब लोग गरीब ही हो होते जाते हैं। यह अंतर इतना बढ़ चुका है कि इस पर लगाम लगाना काफी समय खर्च करना है तथा यदि इस पर लगाम न लगाया गया तो व्यक्ति व्यक्ति से नफरत तथा समाज में एक अलग नीति जन्म लेगी।

आज लगातार भारत की अर्थव्यवस्था गीरती जा रही है। भारत एक विकासशील देश जिसकी अर्थव्यवस्था इस तरह गिरती जा रही हम यह कह नहीं सकते कि आने वाले सालों में विकसित देश के रूप में उतरेगा।

यदि भ्रष्टाचार के कारणों को गिना जाए तो वह अनगिनत होंगे। भ्रष्टाचार जैसे बड़े अपराध को करने के लिए बड़े-बड़े मंत्री तथा नेताओं का संपर्क ऐसे बड़े अधिकारियों तथा छोटे अधिकारियों तथा कुछ सामान्य लोगों से होता है, जहां पर भ्रष्टाचार को बढ़ाने था, दंगा जैसे बड़े अपराध को करवाने के लिए सजग रहते हैं।

भारत सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के कुछ नियम बनाए जाएं तो क्या जनता के द्वारा इसका पालन किया जाएगा ? मेरा मानना है कि व्यक्ति की समझ अपने तर्क से जब तक इस बात को नहीं समझेगा कि उसका कर्तव्य इस देश के प्रति क्या है? तब तक वह किसी भी कानून को नहीं मानेगा।

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए 1960 में भ्रष्टाचार अधिनियम को पारित किया गया था तथा 1988 में दूसरा भ्रष्टाचार अधिनियम पूरे देश में लागू किया गया था लेकिन इससे भ्रष्टाचार में कमी नहीं देखी गई वह लगातार निरंतर बढ़ता जा रहा है।

सबसे बड़ा कारण आज भ्रष्टाचार का यही होता जा रहा है क्योंकि जो युवा रिश्वत देकर आया वह लगातार उसी माहौल को अपनाता है और वह भी लगातार भ्रष्टाचार की दुनिया की ओर बढ़ जाता है। इस तरह देश के युवा की मानसिकता पर बदलाव आता है। जो हमारे देश की नींव को मजबूत करते हैं, वही नींव खोखली होती जा रही है।

यदि हम सब एकजुट होकर इस भ्रष्टाचार के खिलाफ दृढ़ संकल्प लें तो आने वाले भविष्य में इस भ्रष्टाचार को उखाड़ सकेंगे किसी भी एक इंसान जो तनाव तथा सतर्कता से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता है, वह कभी नहीं जी सकता। हमें इसके लिए हमेशा सतर्क रहना होगा। इसी वाणी से मैं विराम देता हूं। धन्यवाद।

भ्रष्टाचार पर भाषण (500 शब्द)

आदरणीय हमारे प्रधान अध्यापक तथा आए हुए अतिथिगण तथा हमारे सह मित्रों को मेरा नमस्कार।

इतिहास की बहुत बड़ी घटना जो हमारे देश को आजाद कर के चली गई और स्वतंत्रता दिवस के इस पर्व पर मैं आप सभी अध्यापकों और शिक्षक गणों को स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं देना चाहूंगा तथा आज हमारा देश एक ऐसे मुद्दों में फसा है, जहां से उसे निकालना हम भारतीयों का कर्तव्य बन चुका है।

परंतु इस मुद्दे पर बात करना लोगों को बेफिजूल जैसी बात लगती है। आज भ्रष्टाचार जैसे बड़े अपराध में पूरे भारत को विकसित जंजीर में जकड़ लिया है, जिसे तोड़ने के लिए देश के युवा को शिक्षित और इसके विषय में जानने की आवश्यकता है। आज इस विषय पर हम बात करेंगे।

आज से कई वर्षों पहले हमारे स्वतंत्र सेनानियों द्वारा हमारे देश को आजाद कराया गया था। देश आजाद होने के उपरांत देश में गरीबी भुखमरी इत्यादि जैसी समस्याओं का सामना गरीब जनता को गंभीर रूप से करना पड़ा। यह एक बहुत बड़ा मुद्दा था, गरीबों को दूर करना। परंतु देश के कई बड़े नेता इस विषय पर ध्यान नहीं दिए तथा लगातार एक निश्चित अनुपात में मौते बढ़ती जा रही है, भुखमरी और बेरोजगारी एक बहुत बड़ा मुद्दा आज बन चुका है।

हमें उन कारणों को जानना चाहिए जो देश में भ्रष्टाचार को फैलाते जा रहे हैं। उन कारणों को जानकार उनको जड़ से समाप्त करने की कोशिश करना चाहिए। तभी हम स्वतंत्रता का आनंद उठा सकते हैं तथा एक सामाजिक जीवन और नैतिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

समाज में भ्रष्टाचार दूर करने के लिए हमें एकजुट होना चाहिए। हमें शिक्षित होना चाहिए। शिक्षा ही एकमात्र उपाय है, जो हमारी मानसिकता को बदल सकता है, जो आज हमारे देश में लगभग खत्म होते जा रहे हैं।

भ्रष्टाचार का एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि हमारी प्राकृतिक सुंदरता को कुचला जा रहा है। यदि हम इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठा रहे तो यह भविष्य के लिए बहुत ही बड़े घातक और बहुत बड़ी बीमारी के रूप में जन्म लेगी। हालांकि आज कई कारणों से हम इन मुद्दों तथा बातों पर कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं,जिसका पूरा परिणाम हमें भविष्य में देखने को मिलेगा।

हम उन लोगों को प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो इस भ्रष्टाचार को फैलाने में सजग है। निरंतर अपने कार्य को बड़ा रूप देते जा रहे हैं और भ्रष्टाचार का लेवल बढ़ाते जा रहे हैं। इनमें उन व्यक्तियों की कोई गलती नहीं है, जो भ्रष्टाचार को तथा हमारी प्रकृति की सुंदरता को तोड़ मरोड़ रहे हैं। परंतु गलती हमारे राजनेताओं तथा भ्रष्ट तथा वरिष्ठ अधिकारियों की है, जिन पर कार्यवाही की जानी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति इन व्यक्तियों पर कार्यवाही करता है, तो उसकी कोई सुनवाई नहीं होती तथा वह भी एक भ्रष्ट और भ्रष्टाचार जैसे बड़े अपराध के चंगुल में फंस जाता है तथा उस पर कई ऐसे सख्त कानून लगाए जाते हैं। वह दोबारा ऐसे कदम उठाने से डरता है। इसका कारण यह है कि लगातार सकारात्मक विचार को दबाया गया है।

नकारात्मक बुद्धि को अपनाकर कोई भी व्यक्ति किसी दफ्तर में बैठे हो, तो उससे नकारात्मक विचार ही उत्पन्न होंगे और वह भ्रष्टाचार का मूल कारण होता है। वहीं से भ्रष्टाचार की मूल जड़ जुड़ी हुई है, जो रिश्वत जैसे बड़े अपराधियों को घसीट कर उन दफ्तरों पर पटक देती है। आज वरिष्ठ अधिकारी हो या जूनियर अर्थात अपर लेवल से लोअर लेवल तक के सभी अधिकारी भ्रष्टाचार के एक ऐसे चंगुल में हैं, जिनसे निकलने के लिए उनको पूरे जीवन की जमा पूंजी को त्यागना होगा, जो असंभव है।

भ्रष्टाचार शहर में ही नहीं अभी तो गांव में भी बहुत बढ़ता जा रहा है। यही सही मौका है, अपने देश के युवा को जगाने का अपने आप की मानसिकता को बदलने का। यदि हमने आज उसको नहीं रोका तो आने वाली पीढ़ी भ्रष्टाचार मुक्त कैसे हो पाएगी? आज हमें दृढ़ संकल्प लेना होगा, इसको दूर करने के लिए, इस भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने के लिए, एक देश को भ्रष्ट मुक्त बनाने के लिए।

हम सब जानते हैं कि विद्यार्थी देश का भविष्य होता है। यदि विद्यार्थी जीवन में आपने प्रतिज्ञा ले लिया कि ऐसे कोई अवैध या गैरकानूनी कार्यों से आप नहीं जुड़ेंगे। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो वह एक छोटी जड़ बड़े पेड़ के रूप में भ्रष्टाचार को बड़ा कर देगी और जिसका मूल कारण आप होंगे। आपने उस पर पर्दा डालकर उस भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का कार्य किया। अंत शब्दो में, मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार न करना से कई बड़ा भ्रष्टाचार को देखकर न रोकना है धन्यवाद।

भ्रष्टाचार पर भाषण (500 शब्द)

आदरणीय अतिथि महोदय तथा हमारे विद्यालय के प्रधानाचार्य और हमारे सह पाठीयों को मेरा शुभ प्रभात।

आज हमारे देश का बहुत बड़ा राष्ट्रीय पर्व है। आज से कई वर्षों पहले हमारे देश में तथा हमारे देश को लोकतंत्र की एक ऐसे ही जाल में बांधा गया था, जिस में रहकर कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार का अपराध न करे तथा अपराध करने पर उसे कानून कार्यवाही के लिए दंडित किया जाए।

ऐसे संविधान को हमारे भारत देश में 26 जनवरी सन 1950 को लागू होने पर हमारे पूरे भारत देश में गणतंत्र दिवस के रूप में इस दिवस को मनाया जाने लगा था। आप सभी सज्जन तथा आए हुए अतिथि महोदय और हमारे भाई बहनों को मैं गणतंत्र दिवस की ढेरों शुभकामनाएं देता हूं

आज मैं भ्रष्टाचार के विषय पर चर्चा करना चाहूंगा यह एक ऐसा जहर है, जो पूरे व्यक्ति के मस्तिष्क को जला कर खत्म कर देता जा रहा है। उसकी सोचने और समझने की शक्ति को निरंतर खत्म करता जा रहा है।

मेरे दृष्टिकोण से भ्रष्टाचार एक ऐसा कार्य है, जिसका परिणाम हमें अब तथा इससे कई बढ़कर भविष्य में देखने को मिलेगा। मुझे जल्दी थी इसलिए मैंने ज्यादा पैसे देकर अपना काम करवा लिया ऐसे कई कार्यों से भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है लेकिन इसका परिणाम हमारे देश की छवि पर होता है।

क्या आपने कभी सोचा है कि आप ज्यादा पैसे देकर, ज्यादा किसी से ज्यादा रिश्वत लेकर आप ज्यादा पैसा कमा लेते हैं, परंतु आपने कभी नैतिकता तथा अपने हृदय के गुण को पहचानने की कोशिश की है। यदि आपने नहीं किया तो कभी ऐसा महसूस करें, आपको भ्रष्टाचार का अनुमान लगेगा। भ्रष्टाचार एक ऐसी सीढ़ी है, जो आपको खाई में ले जाती है ना कि पहाड़ की ओर।

भ्रष्टाचार का अर्थ है कि सरकार द्वारा बनाए गए नियमों को तोड़कर किसी सार्वजनिक तथा प्राइवेट क्षेत्र में अपराध करना ही भ्रष्टाचार कहलाता है। इसका सबसे बड़ा कारण काला धन है। लोगों द्वारा कमाए गए सरकारी पैसों को छुपा लेते हैं तथा जिसे काला धन के रूप में जानते हैं। यह भी एक भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा कारण है, जो देश की अर्थव्यवस्था को क्षति पहुंचाती है।

बड़े-बड़े राजनेताओं तथा मंत्रियों के भाषण में मैंने सुना है कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए हमें ईमानदारी का रास्ता अपनाना होगा। परंतु मैंने कभी ऐसे भाषण सुनकर उस पर अमल करते हुए उन नेताओं को नहीं देखा। यह सिर्फ एक भाषण में ही अच्छा लगता है। यदि वही इसकी शुरुआत करें तो देश की जनता में सुधार आएगा। वह अलग छाप छोड़ेंगे और बदलाव दिखेगा।

मैं आप सब का धन्यवाद करना चाहूंगा, जो आपने मेरे शब्दों को अपने ह्रदय में उतारा तथा इतनी देर तक मेरे शब्दों को सुन रहे हैं। मैं चाहता हूं कि आप इन शब्दों को सुनकर अपने हृदय में उतारे तथा उनका अनुसरण करें और भ्रष्टाचार को रोकने के खिलाफ आवाज बढ़ा है।

जहां पर भ्रष्टाचार हो रहा, वहां पर कदमों उठाकर उसे रोकने की कोशिश करें तथा उस को जड़ से उखाड़ फेंकने का प्रयास करें। हम एक होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़कर उसे देश से बाहर निकाल सकते हैं।

मैं बस अंतिम शब्दों में इतना कहना चाहूंगा कि भ्रष्टाचार कोई जन्मजात आदत नहीं है। यह देश तथा इस दुनिया में आकर ही हमें उपहार के रूप में मिल जाती है, जो हमारे जीवन को भ्रष्ट कर जाती है धन्यवाद।

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