सिंदबाद जहाजी की सातवीं यात्रा (अलिफ लैला की कहानी)

सिंदबाज ने राज्य में सभी को बुलाया, अपनी सातवीं जहाजी की यात्रा के बारे में बताना शुरू कर दिया। सिंदबाज ने कहा कि मैंने अपनी छठी जहाजी यात्रा करने के दौरान मैंने जो कुछ भी झेला है, उसके बाद मैंने यह सोच लिया था कि मैं कभी भी जल की यात्रा नहीं करूंगा। लेकिन मेरी किस्मत मे कुछ और ही लिखा था।

एक दिन जब मैं अपने घर पर बैठकर खाना खा रहा था तभी अचानक से हारू राशिद का एक नौकर मेरे घर आया और मेरे से बोलने लगा कि सिंदबाज तुमको हमारे महाराजा ने बुलाया है, जिसके बाद मैं खलीफा हारू राशिद के दरबार पहुंच गया।

खलीफा हारु रसीद ने मुझसे कहा कि सिंदबाज मैंने तुम्हें यहां एक बहुत ही बड़े काम के लिए बुलाया है। महाराजाधिराज के द्वारा भेजे गए उपहार और मित्रता लिए भेजे गए प्रस्ताव को मैंने स्वीकारने का निर्णय लिया है और मैं यह चाहता हूं कि मैं भी उनके लिए एक पत्र और उपहार भेजू, जिसको लेकर महाराजाधिराज के पास तुम जाओगे।

खलीफा हारु राशिद के द्वारा दिए हुए आदेश को सुनकर मैं थोड़ा भयभीत हो गया। तभी मैंने खलीफा हारू रशीद को बताया कि सरकार मैंने तो जल की कोई भी यात्रा ना करने का निर्णय ले लिया। जिसके बाद मैंने खलीफा हारु राशिद को एक-एक करके अपनी सभी यात्राओं का वर्णन करना शुरू कर दिया।

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जिसके बाद मैंने खलीफा हारू राशिद को बताया कि सरकार मैंने अभी तक जितनी भी जहाजी यात्रा की है, सब में मैं अपनी जान गवाते गवाते बचा हूं। इसीलिए मैंने अब कोई भी जल की यात्रा ना करने का निर्णय ले लिया है। लेकिन मेरी सारी बातें सुनने के बाद भी खलीफा हारू राशिद ने मेरी बात नहीं मानी और मुझे यात्रा करने के लिए कहां।

जिसके लिए उन्होंने मुझे बहुत सारा पैसा दिया और कहने लगे कि आज के बाद कोई यात्रा मत करना, बस यह यात्रा कर लो। जिसके बाद मैंने हारु राशिद की आज्ञा का पालन करते हुए एक नई यात्रा करने का निर्णय लिया।

महाराजाधिराज के लिए दिया हुआ उपहार और पत्र को लेकर मैं जहाज के पास पहुंच गया। जहां से मैंने अपनी सातवीं में यात्रा करना शुरू कर दी। कुछ दिन यात्रा करने के बाद मैं सकुशल लंका पहुंच गया, जहां पहुंचकर मैंने महाराजाधिराज को हारू राशिद द्वारा दी हुई भेट और पत्र को महाराजाधिराज को सौंप दिया।

हारू राशिद ने जो भेट महाराजाधिराज को दी थी, एक लाल रंग का कालीन और मडियो से सुसज्जित से एक बहुत ही प्यारा कलश था और बहुत सारी वस्तुएं जो बहुत सुंदर लग रही थी। महाराजाधिराज को भेंट के रूप में भेजी थी। भेंट को स्वीकार करने के बाद महाराजाधिराज में हारू राशिद द्वारा दिए गए पत्र को पढ़ना प्रारंभ कर दिया।

पत्र में लिखा था मुझे आपका पत्र और भेट सकुशल मिल गया था, जिस को पाकर मैं बहुत आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं और मैं इसके बदले में आपको कुछ भेज भेज रहा हूं, जिसको आप स्वीकार कर लीजिएगा। महाराजाधिराज पत्र पढ़कर बहुत खुश हुए।

थोड़ी ही देर बाद मैंने महाराजाधिराज से वापस जाने की आज्ञा मांगी। लेकिन महाराजाधिराज मुझे वापस नहीं जाने की अनुमति दे रहे थे, जिसके बाद मैंने उनसे दो तीन बार आग्रह करने के बाद महाराजाधिराज ने मुझे वापस जाने की अनुमति दे दी और साथ में कई वस्तुएं और इनाम भी दिया। मैं महाराज द्वारा दी हुई भेंट को लेकर जहाज की ओर वापस आ गया।

कुछ दिन यात्रा करने के दौरान हमारे जहाज को समुद्री लुटेरों अपने चारों ओर से घेर लिया और हम सब को बंदी बना लिया। अपने साथ ले जाकर अपना गुलाम बना कर हम लोगों को एक दूसरे टापू पर जाकर बेच दिया।

एक अमीर व्यक्ति ने मुझे खरीदा और अपने साथ अपने घर ले जाकर मुझे खाने के लिए कुछ खाना पीना दिया और मुझसे पूछने लगा कि तुम्हें कुछ करना आता है। तब मैंने उस अमीर व्यक्ति को बताया कि मेरा नाम सिंदबाद है और मुझे इन समुद्री लुटेरों ने लूट लिया है और आपके पास लाकर आपको बेच दिया है।

जिसके बाद उस अमीर व्यक्ति ने मुझसे कहा कि क्या तुमको तीर चलाना आता है क्या? तो मैंने उस अमीर व्यक्ति की बात का उत्तर दिया। हां मुझे तीर चलाना आता है। उसके बाद उस अमीर व्यक्तियों ने मुझे अपना धनुष और बाण दिया और कहने लगा जंगल में जाकर आ जाओ, हाथी का शिकार करो।

जिसके बाद मै उस अमीर व्यक्ति की आज्ञा का पालन करते हुए जंगल की ओर चला गया और एक बड़े वृक्ष पर जाकर बैठ गया। वृक्ष पर बैठे-बैठे दो-तीन दिन बीतने के बाद मुझे एक बड़ा हाथियों का झुंड आता दिखा। जिसके बाद मैंने अपने धनुष  बाण से उन हाथियों के झुंड पर प्रहार किया, जिससे एक हाथी बहुत बुरी तरीके से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा।

बाकी सारे हाथी डर कर भाग गए। इसके बाद मैंने उस घायल हुए हाथी को मार कर उस हाथी को जमीन पर दफना दिया और उसके दांत को निकाल कर अपने मालिक के पास लेकर आया। जैसा मेरे मालिक ने मुझसे करने के लिए कहा था। कुछ दिन तक मैंने यही काम किया। फिर एक दिन अचानक हाथियों का बहुत बड़ा झुंड सामने से आ रहा था।

मैं पेड़ पर बैठकर उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। हाथियों के झुंड ने मुझे पेड़ पर बैठे हुए देख लिया, जिसके बाद उन्होंने पेड़ को उखाड़कर मुझे जमीन में गिरा दिया और अपनी पीठ पर बैठा कर मुझे एक ऐसी जगह ले गए, जहां पर बहुत सारे मरे हुए हाथी पड़े हुए थे।

जिसको देखकर मुझे यह एहसास हो गया कि हाथी मुझसे यह कहना चाह रहे हैं कि तुम हमको मत मारो और तुमको जितने दांत चाहिए वहीं से ले लो। मैं सारे हाथियों के दांत लेकर मैं वापस अपने मालिक के पास चला गया। मेरा मालिक मुझे बहुत ढूंढ रहा था, जो मेरे पहुंचते ही बहुत खुश हो गया।

उसने बताया कि मैं तुम्हें ढूंढते हुए जंगल में गया था, लेकिन वहां पर मैंने एक पेड़ को टूटे हुए देखा। जिसको देख कर मैं डर गया कहीं, तुमको हाथियों ने मार तो नहीं दिया। लेकिन तुम को जीवित देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।

तुम हाथियों से कैसे बचे, तुम मुझे इस बारे में बताओ। मैंने अपने मालिक को पूरी बात बताई और हाथियों के लाए हुए दांत को अपने मालिक को सौंप दिया। जिसके बाद मेरा मालिक मुझसे बहुत खुश हो गया और उसने मुझे अपने बंधन से मुक्त कर दिया।

इतना ही नहीं उन्होंने मुझे बहुत सारा धन देने का निर्णय लिया और कहने लगे कि मैं तुम्हें समुद्री लुटेरों के बंधन से जुड़वा कर तुम्हें तुम्हारे देश पहुंचाऊंगा। क्योंकि तुमने हम लोगों को इतना अमीर कर दिया है कि हम कई वर्षों तक इस धन को समाप्त नहीं कर पाएंगे।

मालिक की बात सुनकर मैं बहुत ही खुश हो गया और जहाज के आने का इंतजार करने लगा। कई दिनों के बाद एक जहाज वहां आया, जो मेरे घर की ओर जा रहा था। जिसमें मुझे उन समुद्री लुटेरों ने बैठा दिया, जहाज पर कई दिनयात्रा करने के बाद मैं अपने घर वापस पहुंच गया।

वापस पहुंचकर मैं खलीफा हारू राशिद के पास गया और उनसे कहने लगा कि आपके द्वारा दी हुई भेंट और पत्र मैंने सकुशल महाराजाधिराज को सौंप दिया है। जिसको सुनकर खलीफा हारू रशीद बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने मुझे बहुत सारा इनाम दिया। उनके दिए हुए ईनाम को लेकर मैं अपने घर वापस पहुंच गया और खुशी-खुशी अपना जीवन बिताने लगा।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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