अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी (अलिफ लैला की कहानी)

अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी (अलिफ लैला की कहानी) | Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani

हेलो दोस्तों नमस्कार अलिफ लैला की कहानियों की श्रृंखला में आपका स्वागत है। आज हम आपके लिए अलिफ लैला की प्रसिद्ध अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी को लेकर आएं हैं आप इस कहानी को अंत तक पढ़िएगा।

प्राचीन समय में एक शहर में एक बहुत ही अमीर व्यापारी रहता था, जो बहुत ही बुद्धिमान और तेजस्वी था। पूरे नगर में लोग उसका बहुत मान सम्मान किया करते थे। जिसकी वजह से उसका व्यापार बहुत जोरों से चल रहा था क्योंकि वह व्यक्ति खलीफा हारू रशीद का बहुत खास था।

जिसके कारण पूरे नगर की महिलाएं उससे बहुत सारी वस्तुएं लिया करती थी। फारस देश के राजा महाराजाओं में से एक बहुत बड़े राजा का बेटा उसका बहुत ही घनिष्ठ मित्र था जिसका नाम अबुल हसन था। अबुल हसन बहुत ही सुंदर था और बहुत ही टैलेंटेड था। उसको गाना गाने का और कविता सुनाने का बहुत शौक था।

वह जब भी अपने मित्र की दुकान पर आकर बैठा करता था तब वहां पर अपनी कला का प्रदर्शन किया करता था। जिसके चक्कर में वहां पर बहुत से लोग उसको सुनने के लिए एकत्र हो जाया करते थे।

तभी अचानक से वहां पर एक सुंदर सी कन्या अपनी दस नौकरानीयों के साथ आती हुई नजर आ रही थी। बहुत सुंदर सी कन्या दिखने में बहुत बड़े घराने से प्रतीत हो रही थी। उसने बहुत से मोतियों और हीरो से जड़े आभूषण पहन रखे थे। देखते ही देखते कुछ ही देर में है सुंदर सी कन्या कुछ सामान लेने के लिए व्यापारी के पास आ गई।

Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani
Image: Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani

जिसके बाद उस व्यापारी ने उस सुंदर सी कन्या का स्वागत बहुत जोरदार से किया और उसको वह व्यापारी अपने कमरे में ले गया। जिसके पीछे पीछे उस व्यापारी का मित्र अबुल हसन भी आ गया और अबुल हसन ने भी कुछ सुंदर सी कन्या का स्वागत जोर से करना शुरू कर दिया कुछ ही देर में उस सुंदर सी कन्या कन्या ने अपना नकाब हटा दिया।

जिसको देखने के बाद अबुल हसन उस कन्या को देखता ही रह गया और उस सुंदर सी कन्या ने भी जैसे ही अबुल हसन को देखा वह भी अबुल हसन को देखती ही रह गई और थोड़ी देर बाद सुंदर सी कन्या ने अपने मतलब की सारी वस्तुएं खरीदने के बाद उसने व्यापारी से कहा यह सुंदर सा लड़का कौन है और यह कहां रहता है?

मुझे इसके बारे में बताओ। तभी व्यापारी ने उस सुंदर सी कन्या को बताया कि यह बहुत बड़े राजा का बेटा है जिसका नाम अबुल हसन है। जिसको सुनकर वह सुंदर सी कन्या बहुत खुश हो गई और कहने लगी कि कल मैं तुम्हारे पास एक नौकरानी भेजूंगी। जिसके साथ तुम और तुम्हारा यह मित्र मेरे घर आ जाना। जिसके बाद व्यापारी ने कहा ठीक है।

जैसा आप कहती हैं वैसा ही होगा। मैं अपने मित्र को आपके घर ले आऊंगा और थोड़ी देर में वह सुंदर सी कन्या अपने घर चली गई। जिसके बाद अबुल ने अपने दोस्त से कहा कि यह सुंदर सी कन्या कौन है और इसका क्या नाम है? तभी उसके दोस्त ने उसको बताया इस सुन्दर सी कन्या का नाम शमसुन्निहार है और यह हमारे नगर के सबसे बड़ी खलीफा हारू राशिद की दासी है, जिसको वह अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करता है।

जिसके बाद सुंदर सी कन्या ने उस व्यापारी को बुलाया और कहने लगी तुमने हम लोगों को मिलवाकर बहुत बड़ा काम किया है। मैं आपका यह एहसान कभी नहीं भूलूंगी थोड़ी देर में वहां पर एक दरबारी आया और कहने लगा की खलीफा आप की ओर आ रहे हैं, जिसको सुनते ही अबुल हसन और व्यापारी दोनों के होश उड़ गए।

जिसके बाद उस सुंदर सी कन्या ने उनसे कहा कि तुम लोग डरो मत। मैं तुमको ऐसी जगह छुपा दूंगी जहां पर तुम्हें कोई भी पकड़ नहीं पाएगा और थोड़ी ही देर में शसुन्नीहार ने व्यापारी और अबुल हसन को ऐसी जगह छुपा दिया है, जहां पर उनको कोई देख भी नहीं सकता था और फिर शसुन्नीहार ने उस दरबारी को अंदर बुलाया और कहने लगी क्या आदेश है?

जिसके बाद उस दरबारी ने बताया कि खलीफा आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं। वह आपसे मिलना चाहते हैं। शसुन्नीहार ने कहा यह तो मेरा बहुत ही सौभाग्य है कि खलीफा ने मुझे याद किया है। तुम जाओ उनको मेरे पास ले आओ। जिसके बाद वह दरबारी वहां से चला गया और दरबारी के जाने के तुरंत बाद शसुन्नीहार ने व्यापारी और अबुल हसन को बाहर निकालने के लिए अपनी नौकरानी उसने कहा कि तुम इन दोनों को उस कमरे में ले जाओ।

जहां पर पीछे की ओर नदी बहती है और मौका पाते ही इन लोगों को वहां से निकाल देना। जिसके बाद उन नौकरानियों ने वही किया जो शसुन्नीहार ने उसने करने के लिए कहा और थोड़ी ही देर में वहां पर खलीफा हारू राशिद आ गया। जिसके बाद उसने शसुन्नीहार को गले से लगा लिया और अपने बगल में बैठा लिया।

खलीफा ने अपने गाना गाने वाले व्यक्तियों से कहा कि मधुर मधुर गीत सुनाए जाएं। उन गीत को सुनकर शसुन्नीहार बेहोश हो गई और गाने की आवाज सुनकर अबुल हसन भी वहां पर बेहोश हो गया।

मौका पाते ही शसुन्नीहार की नौकरानी व्यापारी और अबुल हसन को महल से बाहर निकाल कर पीछे के रास्ते से नदी में एक नाव के जरिए उन दोनों को नदी पार करने के लिए कहा और कुछ ही देर में अबुल हसन और व्यापारी एक ऐसे ही स्थान पर पहुंच गए, यहां पर व्यापारी का एक बहुत ही घनिष्ट मित्र रहता था जिसके बाद वह अबुल हसन को उसके घर ले गया।

 उस व्यापारी ने अपने दोस्त को समझाया कि तुम इस सुंदर सी कन्या के चक्कर में मत पड़ो क्योंकि हमारा खलीफा इसको अपनी जान से ज्यादा प्यार करता है और अगर तुम इस सुंदर सी कन्या के चक्कर में पड़ोगे तो, तुम्हारी जान भी जा सकती है। लेकिन व्यापारी के बहुत समझाने के बाद भी उसका मित्र अबुल हसन नहीं माना और देखते ही देखते कुछ ही देर में उस सुंदर सी कन्या की एक नौकरानी दोनों को लेने के लिए आ गई।

 वह उन दोनों को खलीफा के महल ले गई और वहां पर उस नौकरानी ने सभी लोगों से बचाते हुए महल के अंदर ले जाकर एक कमरे में बैठा दिया और उनका आदर सम्मान करने लगी और उनके खाने पीने के लिए बहुत सारे व्यंजन लाके उनके सामने रख दिए।

जिसको खाने के बाद वह व्यापारी और अबुल हसन को एक ऐसे स्थान पर ले गई, जहां पर बहुत सारी वस्तुएं रखी हुई थी और वहां पर पक्षियों की बहुत मधुर आवाज सुनाई दे रही थी। जिसको देखकर व्यापारी और अबुल हसन बहुत आश्चर्यचकित हो रहे थे। थोड़ी ही देर में वहां पर कुछ नौकरानीयों ने सुंदर सी कन्या का आदेश मिलते ही गाना बजाना शुरू कर दिया।

जिसको देखकर अबुल हसन बहुत ही खुश हो गया और थोड़ी ही देर में वहां पर नौकरानीयों ने आकर राजा हारु राशिद की दासी शमसुन्नीहार के आने का ऐलान करने लगी और देखते ही देखते थोड़ी देर में वहां पर शमसुन्नीहार सामने से आती हुई नजर आई, जिसने बहुत से हीरो और मोतियों से जड़े आभूषण पहन रखे थे।

 जिसको देखकर अबुल हसन बहुत ही ज्यादा मंत्रमुग्ध हो गया था और थोड़ी ही देर में सुंदर सी कन्या अबुल हसन के समीप आकर बैठ गई और उस सुंदर सी कन्या ने अपनी सिंगर से कहा कि एक बहुत ही प्रेम भरा गीत सुनाओ। जैसे ही उस सिंगर ने गाना गाना शुरू किया।

देखते ही देखते अबुल हसन और वह सुंदर सी कन्या उस गाने में खो गए जिसके बाद अबुल ने भी बांसुरी से एक मधुर संगीत बजाना शुरू कर दिया। जिसको सुनकर शमसुन्नीहार बहुत खुश हुई और  उनसे अबुल से बांसुरी लेकर खुद भी उसी बांसुरी से उसको बजाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में वह एक दूसरे के प्यार में खो गए  जिसके बाद वह सुंदर सी कन्या शमसुन्नीहार अबुल हसन को अपने साथ एक कमरे में ले गई। 

वहां पर उन दोनों ने एक दूसरे को इतना प्यार किया कि वह कब एक दूसरे के साथ संभोग करते हुए बेहोस हो गए। उनको पता ही नही चला। उनकी नौकरानी और ने उन दोनों को होश में लाया। यह सब देख कर वहां पर बैठा व्यापारी बहुत ही ज्यादा डरा हुआ था और बार-बार यह सोच रहा था कि इन दोनों ने जो एक दूसरे के साथ सम्भोग किया है खलीफा उसका क्या दंड देंगे?

वहां पर पहुंचकर उस व्यापारी ने अपने मित्र को बताया कि यह मेरा दोस्त है। यह बहुत बीमार है। जिसके कारण आज रात हम लोग यही रुकेंगे और सुबह होते ही यहां से निकल जाएंगे। व्यापारी के मित्र ने उन दोनों के सोने के लिए बिस्तर लगवा दिए। थोड़ी ही देर में दोनों लोग सो गए और जैसे ही सवेरा हुआ वह व्यापारी और अबुल हसन दोनों अपने घर की ओर निकल पड़े।

घर पहुंचने के बाद व्यापारी ने बताया कि अचानक से बहुत जरूरी काम आ जाने के कारण मुझे बाहर जाना पड़ा था और वहां पर अबुल की तबीयत अचानक से खराब हो गई थी, जिसके बाद हम लोगों को वापस आना पड़ा और यह कह कर व्यापारी ने अपने घर वालों को सांत्वना दी। कुछ ही दिन में अबुल हसन के घरवाले उसको लेने के लिए आ गए।

तभी उसने व्यापारी ने कहा कि अगर शसुन्नीहार के बारे में कुछ भी पता लगे तो मुझे जरूर बताना। इसके बाद व्यापारी ने कहा ठीक है। मुझे कुछ भी पता लगेगा तो मैं तुमको खबर कर दूंगा। कुछ दिन बीतने के बाद वह व्यापारी अपने मित्र अबुल हसन के घर गया। वहां पर उसने देखा कि उसका मित्र अब बिस्तर पर बीमार पड़ा हुआ है।

और उसके चारों ओर चिकित्सक बैठे हैं। अबुल व्यापारी को देखकर हंसने लगा और सोचने लगा कि यह जरूर मेरे लिए शसुन्नीहार का समाचार लाया होगा। जिसके बाद अबुल हसन ने अपने घरवालों से कहा कि मुझे अपने मित्र के साथ कुछ वार्तालाप करनी है। जिसके लिए आप लोग यहां से चले जाएं। अबुल ने व्यापारी से पूछा कि शसुन्नीहार का कुछ पता लगा कि नहीं। व्यापारी ने कहा नहीं। जिसको सुनकर अबुल हसन बहुत जोर जोर से रोने लगा।

व्यापारी ने उसको समझाया कि तुम्हारे रोने से क्या फायदा होगा? एक ना एक दिन वह दासी जरूर आएगी और अपने मित्र को समझा कर वापस अपने घर आ गया। घर आकर उस व्यापारी ने देखा कि शसुन्नीहार की नौकरानी उसका इंतजार कर रही है। उसने व्यापारी से पूछा कि तुम लोग कैसे हो? जिस के बाद व्यापारी ने बताया कि अबुल की हालत बहुत खराब है।

जिसको सुनकर उस नौकरानी ने कहा कि बिल्कुल यही हाल शसुन्नीहार कभी है। तुम लोगों के आने के बाद वह बेहोश हो गई थी। जिसके बाद खलीफा ने हम लोगों से बहुत पूछा कि यहां पर क्या हुआ है? और यह कैसे बेहोश हो गई है? लेकिन हम लोगों ने उनको कुछ नहीं बताया।

और शसुन्नीहार ने उनको अपनी बातों में घुमा लिया और कहने लगी मैं आपको देखकर बेहोश हो गई थी और जब खलीफा शसुन्नीहार के कमरे से चले गए। उन्होंने मुझे भेज कर आप लोगों का हाल-चाल पूछने के लिए कहा। व्यापारी ने कहा कि आप शसुन्नीहार से कह दीजिए कि आपका प्रेमी ठीक है जिसके बाद वह नौकरानी वहां से चली गई।

व्यापारी शमसुन्नीहर की खबर लेकर तुरंत अपने मित्र अबुल हसन के पास गया और वहां जाकर उस व्यापारी ने बताया कि शमसुन्नीहर की नौकरानी मेरे पास आई थी और उस व्यापारी ने नौकरानी के द्वारा कही गई सारी बातें अबुल हसन को बता देना। रात भर वही बिताने के बाद वापस अपने घर आ गया।

घर आने के बाद उसने सोचा कि अगर मुझे और इस नौकरानी को किसी ने देख लिया तो, इस नगर में मेरा मान सम्मान खराब हो जाएगा। उसने बसरा जाने का निर्णय ले लिया और अपना सामान बांधकर बसरा की ओर प्रस्थान कर गया। जिसके बाद वहां पर मौजूद जौहरी ने व्यापारी की जगह ले ली।

और वह व्यापारी के सारे काम करने लगा। में जौहरी अबुल हसन के पास गया और कहने लगा मैं आपकी और खलीफा की दासी के बारे में सब कुछ जानता हूं। मैंने कई बार खलीफा के यहां काम करने वाली नौकरानी को आपके घर आता जाता देखा है, जिसको सुनकर अबुल हसन बहुत डर गया ।

कहने लगा कि तुमको यह सब कुछ सच में पता है। जिसके बाद जौहरी ने कहा हां मुझे सब कुछ पता है। आप मुझे अपना सेवक ही समझिए। जिसके बाद अबुल हसन ने जोहरी को सब कुछ बताया और व्यापारी की जगह जौहरी ने शमसुन्नीहर और अबुल हसन के पत्रों का आदान प्रदान करना शुरू कर दिया।

और कुछ दिन बाद जौहरी ने अबुल हसन और शमसुन्नीहर के मिलने का प्रबंध किया। वह दोनों छुपते छुपाते एक घर में मिले। उनके मिलने के कुछ देर बाद वहां पर कुछ डाकुओं ने घर आक्रमण किया। अबुल हसन शमसुन्नीहर और जौहरी को अपने साथ नदी के उस पार ले गए।

घर का सारा सामान लूट कर ले गए। जौहरी ने उन लोगों को अबुल हसन और शमसुन्नीहर के बारे में पूरी बातें बताएं। बातें सुनने के बाद उन डाकुओं ने उन दोनों से क्षमा मांगी और सकुशल तीनों लोगों को नदी के पार छोड़ दिया और तीनो लोग सकुशल अपने अपने घर चले गए।

जिसके कुछ दिनों बाद अबुल हसन की तबीयत खराब हो जाने के कारण उसका निधन हो गया। अबुल हसन के निधन की खबर सुनते हुए शमसुन्नीहर भी बहुत जोर जोर से रोने लगी और कुछ ही दिनों में उसने भी अपने प्राण त्याग दिए।

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