शीतयुद्ध किसे कहते हैं? उत्पत्ति, चरण, कारण और परिणाम

Sheet Yuddh Kya Hai: इतिहास के सबसे लंबे युद्ध की अगर बात की जाए तो शीत युद्ध का नाम आता है। हम इसे कूटनीति युद्ध कह सकते है। इसमें अप्रत्यक्ष रूप से लड़ाई लड़ी जाती है। वर्तमान में शीत युद्ध किसके साथ चल रहा है और शीत युद्ध किसे कहते है, परिभाषा उत्पत्ति, चरण, कारण जैसे कुछ आवश्यक सवाल जो ना केवल सामान्य ज्ञान के तौर पर बल्कि प्रतियोगिता परीक्षा में अंक प्राप्त करने की दृष्टि से भी आवश्यक है, उन्हें आज के लेख में सरल शब्दों में आपके समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

हम इस युद्ध के बारे में इतना कह सकते है कि यह एक ऐसा युद्ध है, जिसमें किसी भी प्रकार के हथियार का इस्तेमाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जाता। यह एक कूटनीति युद्ध है, जिसमें किसी सैनिक या नागरिक को घायल या मारने का प्रयास भी नहीं किया जाता।

Sheet Yuddh Kya Hai
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इस कूटनीति युद्ध को आप शांतिपूर्ण युद्ध समझने की गलती बिल्कुल ना करें। कुछ आंकड़ों से यह पता चला है कि शीत युद्ध एक ऐसा युद्ध है, जिस वजह से विश्व में सबसे अधिक जान माल की हानि हुई है। यह युद्ध कब हुआ और कैसे होता है इसके बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी नीचे बताई गई है।

शीतयुद्ध किसे कहते हैं? उत्पत्ति, चरण, कारण और परिणाम | Sheet Yuddh Kya Hai

शीतयुद्ध किसे कहते है? (Sheet Yuddh Kise Kahate Hain)

जैसा कि हमने आपको पहले बताया शीत युद्ध दो देशों के बीच लड़े जाने वाली एक कूटनीति लड़ाई होती है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार के हथियार का इस्तेमाल किए बिना अप्रत्यक्ष रूप से अपने प्रतिद्वंदी को परास्त करने का प्रयास किया जाता है।

इस युद्ध को समझने के लिए सरल शब्दों में हम यह कह सकते है कि जब दो देश आपस में इस प्रकार युद्ध करते है, जिसमें किसी भी हथियार का इस्तेमाल ना करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से उन्हे राजनीतिक तौर पर या देश के अंदर और बाहर व्यापारिक स्थिति बिगाड़ कर देश को कमजोर करने का प्रयास किया जाता है तो उसे शीत युद्ध कहा जाता है।

यह एक कूटनीति युद्ध होता है, जिसमें हथियार का इस्तेमाल आमने सामने ना करने की वजह से युद्ध बहुत लंबे दिनों तक चलता रहता है और प्रत्यक्ष रूप से अपने प्रतिद्वंदी के आसपास के देश को अपनी तरफ आकर्षित किया जाता है ताकि अपने प्रतिद्वंदी देश में राजनीतिक और व्यापारिक स्थिति को बिगाड़ा जा सके और देश की आंतरिक स्थिति खराब करके देश को पछाड़ा जा सके।

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद रूस और अमेरिका दो ऐसे देश थे, जिन्होंने विश्व को दिखाया कि वर्तमान समय में वह आर्थिक और सैन्य ताकत में सबसे बलशाली है। मगर यूनाइटेड नेशन और द्वितीय विश्वयुद्ध के समाप्त हो जाने की वजह से दोनों देश आमने सामने लड़ाई कर नहीं पाए और दोनों के अंदर एक दूसरे के प्रति खुन्नस भर गई।

परिणामस्वरूप दोनों ने कई सालों तक एक दूसरे के देश की आंतरिक स्थिति को खराब करने के लिए विभिन्न चाल चले और कूटनीति का इस्तेमाल किया, जिसे हम वर्तमान समय में सबसे लंबे शीत युद्ध के नाम से जानते हैं।

शीत युद्ध की परिभाषा

अगर आप इस युद्ध की कार्य प्रणाली को ऊपर बताई गई जानकारी से समझा है तो परिभाषा के रूप में हम यह कह सकते है कि दो देशों के बीच हुई ऐसी मुठभेड़ जिसमें हथियार का इस्तेमाल या प्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार की लड़ाई ना लड़ते हुए अपने प्रतिद्वंदी देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को खराब करने के लिए विभिन्न चाल चला जाता है तो इससे शांति से षड्यंत्र भरे युद्ध को हम शीत युद्ध कहते हैं।

कई इतिहासकारों के अनुसार रसिया और अमेरिका के बीच हुए ऐसी युद्ध जिसमें दोनों ने किसी भी प्रकार के हथियार का इस्तेमाल ना करते हुए केवल एक दूसरे को वैश्विक स्तर पर नीचा दिखाने का कार्य किया, उस युद्ध को हम शीत युद्ध कहते हैं। इस युद्ध में अपने प्रतिबंधी को कमजोर दिखाने के लिए अलग-अलग षड्यंत्र का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अप्रत्यक्ष रूप से हथियारों का इस्तेमाल किया गया।

शीत युद्ध के कारण

आज से कई साल पहले शीत युद्ध मुख्य रूप से सोवियत संघ या रसिया और अमेरिका के बीच शुरू हुआ। इस युद्ध में हमारे पूरे व्यापारिक और भौगोलिक स्थिति को बदल कर रख दिया, यह क्यों उत्पन्न हुई, इसकी कुछ मुख्य कारण है, जिसे सरल शब्दों में सूचीबद्ध किया गया है।

  • पूंजीवाद और संप्रदायवाद विचारों का मतभेद की तरह बढ़ना। दूसरे विश्व युद्ध में यह साफ हो गया कि आने वाला समय मशीन और तकनीक का होने वाला है, जिसने पूंजीवाद की परंपरा की शुरुआत की। मगर कुछ देशों में संप्रदायवाद के विचार को ज्यादा महत्व दिया जाता था, जिस वजह से शीत युद्ध होने का एक कारण हुआ।
  • दूसरे विश्व युद्ध में रसिया और अमेरिका दोनों विश्व के सबसे ताकतवर देशों में से एक थे, वह यह बात जान गए रसिया और अमेरिका वर्तमान समय में सबसे ताकतवर सैन्य और आर्थिक बल है। दोनों में से कौन ज्यादा बेहतर है, इसकी होड़ ने दोनों को एक दूसरे का प्रतिबंध ही बना दिया।
  • सोवियत संघ का एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अचानक से उभरना और यूनाइटेड नेशन में बार-बार वीटो पावर का इस्तेमाल करना। लोगों को इस देश की सफलता और ताकत दर्शाने लगा था, जिस वजह से अमेरिका और रूस के बीच खुन्नस बढ़ने लगी।

शीत युद्ध का उदय

शीत युद्ध का उदय 1917 में दिखने लगा था जब उस समय की दो महाशक्ति अमेरिका और रूस अपनी ताकत का बढ़-चढ़कर प्रदर्शन कर रहे थे। धीरे-धीरे दोनों के बीच संप्रदायवाद और पूंजीवाद को लेकर मतभेद तीव्र होने लगे और शीत युद्ध का एक भयंकर रूप बनने लगा।

इस तरह के युद्ध का उदय किसी असमर्थन वाले विचार से होता है, जब दो देश या संगठन इतने शक्तिशाली होते है कि दोनों अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हो और दोनों के बीच किसी विचार को लेकर मतभेद शुरू हो जाए तो दोनों एक दूसरे के विचार का विरोध करना शुरू करते हैं, जो एक कूटनीति का रूप लेते हुए शीत युद्ध का रूप ले लेता है। ऐसा ही वैश्विक स्तर पर अमेरिका और रूस के बीच 19वीं सदी में हो रहा था।

आज इस शीतयुद्ध का असर हम अमेरिका और चीन के बीच देख सकते हैं, जहां चीन धीरे-धीरे विश्व का सर्वश्रेष्ठ बाजार बनता जा रहा है और पूंजीवाद का समर्थन करते हुए विश्व में एक अमीर देश के रूप में अपनी छाप छोड़ रहा है, वहीं अमेरिका के साथ इसके संबंध बिगड़ते जा रहे हैं।

दोनों देश एक दूसरे का विरोध करने का कोई मौका नहीं छोड़ते, जो धीरे-धीरे शीतयुद्ध का रूप ले लेता है और उसके बाद दोनों देश में राजनीतिक और आर्थिक स्थिति बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है, जिस संदर्भ में आतंकवादी संगठनों को भी बढ़ावा मिलता है।

शीत युद्ध के चरण

मुख्य रूप से अमेरिका और रूस के शीत युद्ध को कुछ चरण में विभाजित किया गया है। जैसे कि हमने आपको बताया शीत युद्ध एक बहुत ही बड़ा युद्ध है, जो लंबे समय तक चला था। इसकी शुरुआत 1917 में हो गई थी। धीरे-धीरे कुछ मुख्य समय पर यह बड़ा रूप लेने लगा और उन सभी मुख्य चरण को हमने नीचे सूचीबद्ध किया है।

  • शीत युद्ध का विकास 1917 में हल्का दिखने लगा था जब इन दोनों देशों ने छोटी-छोटी जगहों पर एक दूसरे की खिंचाई शुरू कर दी थी। पूरे विश्व में भय का माहौल उसी वक्त से शुरु हो गया था क्योंकि दोनों एक महाशक्ति थी और दोनों के बीच हुआ। युद्ध वैश्विक स्तर पर लोगों को काफी हानि पहुंचाता।
  • शीत युद्ध को औपचारिक रूप से 1946 में माना जाता है जब रेडियो और पत्रकारों द्वारा अपने प्रतिद्वंदी देश की बुराई शुरू हुई। पत्रकारों और रेडियो में प्रतिबंधी देश की बुराई करना 1953 तक लगातार चलता रहा।
  • इसके बाद शीत युद्ध का दूसरा चरण 1953 से 1963 तक माना जाता है। इस चरण में इन दोनों देशों ने अपने आसपास के देशों को अपने साथ एक गुट में शामिल करना शुरू किया।
  • शीत युद्ध का तीसरा चरण 1963 से 1979 के बीच माना जाता है जब विश्व भर में व्यापारिक उथल पुथल का माहौल चल रहा था।
  • शीत युद्ध का अंतिम और चौथा चरण 1979 से 1991 तक माना जाता है। इस चरण में भी दोनों देशों के द्वारा बनाए गए गुटों में विभिन्न प्रकार की लड़ाइयां लड़ी गई, जिसे व्यापारिक या आतंकवादी की लड़ाई से जोड़कर देखा गया।

शीत युद्ध के परिणाम

प्रत्येक युद्ध के कुछ कारण और परिणाम होते हैं। शीत युद्ध के कुछ भयंकर परिणाम रहे तो कुछ ऐसे परिणाम रहे, जिनकी वजह से कुछ देशों को फायदा भी हुआ, जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे।

  • शीत युद्ध का सबसे बड़ा परिणाम हुआ कि हमें आतंकवादी संगठन देखने को मिले।
  • विश्व भर में बहुत सारे देशों की आर्थिक स्थिति इसलिए चरमरा गई क्योंकि प्रतिबंधी देशों ने उस पर विभिन्न प्रकार के टैक्स लगा दिए।
  • जैसा कि हमने आपको बताया शीत युद्ध ने पूरी दुनिया को दो अलग भागों में विभाजित कर दिया, जो देश रसिया का समर्थन करता था, उसे अमेरिका के द्वारा व्यापारिक टैक्स, आतंकवादी गतिविधि और विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र का सामना करना पड़ा। दूसरी तरफ जो देश अमेरिका का समर्थन करता था, उसे दूसरी दुनिया का नाम दिया गया और उसे रसिया के तरफ से व्यापारिक टैक्स, आतंकवादी गतिविधि और विभिन्न प्रकार के षड्यंत्र का सामना करना पड़ा।
  • शीत युद्ध की वजह से विश्व स्तर पर होने वाले फैसले दो देशों पर निर्भर करने लगे।
  • शीत युद्ध की वजह से प्रत्येक देश अपनी सुरक्षा के बारे में चिंता करने लगा और अधिक हथियार की बिक्री बढ़ी।

शीत युद्ध के फायदे

बहुत कम ऐसे लोग हैं, जो शीत युद्ध से होने वाले फायदों पर विचार करते हैं। हम इस युद्ध से होने वाले कुछ मुख्य फायदे के बारे में आपको जानकारी देने वाले हैं।

  • शीत युद्ध की वजह से कमजोर से कमजोर देश अपने स्थिति पर विचार कर उसे बेहतर बनाने का प्रयास किया।
  • शीत युद्ध की वजह से दोनों देशों में कंपनी को अपनी तरफ आकर्षित करने की होड़ चली, जिस वजह से बहुत सारी कंपनियों को कम से कम टैक्स में अच्छे मजदूर और जमीन की सुविधा मिली और औद्योगिक करण एक बड़े स्तर पर आ पाया।
  • शीत युद्ध में एक अहम भूमिका अखबार और रेडियो की रही, जिस वजह से प्रतीक देश में मीडिया के महत्व को भी एक नई दिशा मिली।
  • सेना को मजबूत करना और आसपास के देश को अपनी सैन्य ताकत दिखाने के लिए आदमी सेना में भर्ती हुए और औरतों को बाहर निकल कर काम करने का मौका मिला, जिस वजह से औरतों को आर्थिक रूप से मजबूत और समाज को एक नया रूप रंग मिला।

शीत युद्ध से नुकसान 

शीत युद्ध की वजह से बहुत सारे नुकसान ना केवल रूस और अमेरिका बल्कि विश्व के अन्य देशों में भी देखने को मिला, जिन नुकसान को सूचीबद्ध तरीके से समझाया गया है।

  • शीत युद्ध एक ऐसा युद्ध है, जिसकी वजह से विश्व में सबसे अधिक लोगों की जान गई।
  • इस कूटनीति युद्ध की वजह से विश्व के विभिन्न देशों में आतंकवादी संगठनों का जन्म हुआ।
  • इस कूटनीति युद्ध ने लोगों को अपनी ताकत बढ़ाने पर मजबूर किया, जिस वजह से रूस और अमेरिका जैसे देशों का हथियार विश्व भर में बिक पाया।
  • शीत युद्ध ने पूरे विश्व को दो भागों में विभाजित कर दिया। पहला जिसे पहली दुनिया कहा गया, जिसमें अमेरिका का समर्थन करने वाले देश शामिल थे तो दूसरी तरफ दूसरी दुनिया जिसमें रूस का समर्थन करने वाले देश शामिल थे। भारत और इजिप्ट जैसे कुछ देश थे, जिन्होंने निरपेक्ष गुट की बात कही।
  • शीत युद्ध में दो देश के बीच मतभेद इस स्तर पर बड़ गए कि इसका असर उस देश के आसपास मौजूद छोटे-मोटे देश के आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को भुगतना पड़ा।

FAQ

शीत युद्ध कब से कब तक चला था?

शीत युद्ध मुख्य रूप से दो देशों के बीच कूटनीति में हुए मनमुटाव को कहा जाता है, जिस वजह से इसे लिखित रूप से सालों के जरिए नहीं दर्शाया जाता। मगर कुछ इतिहासकारों का मानना है कि अमेरिका और रूस के बीच शीतयुद्ध मुख्य रूप से 1946 से 1991 तक चला।

शीत युद्ध किसे कहते हैं?

शीत युद्ध एक ऐसी कूटनीति घटना है, जिसमें प्रत्यक्ष रूप से मुठभेड़ ना करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से दो देश का विरोध किया जाता है। इसमें किसी भी प्रकार के हथियार का इस्तेमाल नहीं किया जाता, केवल सामने वाले देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति बिगाड़ने के लिए षड्यंत्र रचा जाता है।

वर्तमान समय में किस देश के बीच शीत युद्ध चल रहा है?

आज भी अमेरिका और रूस के बीच वैश्विक स्तर पर तनातनी दिख सकती है, जिस वजह से हम यह कह सकते हैं कि इन दोनों देशों में शीत युद्ध चल रहा है। इसके अलावा अमेरिका और चीन के बीच शीत युद्ध की संभावनाएं देखने को मिलती है।

निष्कर्ष 

हमने अपने आज के इस महत्वपूर्ण लेख में शीत युद्ध किसे कहते हैं (Cold War in Hindi), परिभाषा, उत्पत्ति, चरण, कारण के बारे में विस्तार पूर्वक से जानकारी प्रदान की है। हमें उम्मीद है कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आप लोगों के लिए काफी ज्यादा यूज़फुल और हेल्पफुल साबित हुई होगी।

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