शनिवार वाड़ा किले की रहस्यमयी कहानी और इतिहास

शनिवारवाड़ा किला पुणे शहर में स्थित है, यह किला भारत के प्राचीनतम किलो में से एक है। इसकी किले ने अनेक सारे युद्ध झेले हैं। शनिवारवाड़ा किला के पास ही लाल महल बना हुआ है, जहां पर छत्रपति शिवाजी महाराज रहा करते थे। शनिवार वाड़ा का किला वर्तमान समय में पर्यटकों की दृष्टि से आकर्षक का प्रमुख केंद्र है। महाराष्ट्र के पुणे शहर में स्थित शनिवारवाड़ा का भारतीय पुरातात्विक की देखरेख में है।

मध्यकालीन भारत में बना हुआ यह किला अपने अंदर अनेक सारी कहानियां, किस्से तथा इतिहास को समेटे हुए है। यह किला मराठा साम्राज्य की शान हुआ करता था, लेकिन यहां पर रहस्यमई तरीके से आग लगी, जिससे सब कुछ नष्ट हो गया।‌ यहां पर अनेक सारी रहस्यमई कहानियां प्रचलित है, स्थानीय लोग इस किले को भूतिया किला भी कहते हैं।

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बता दें कि शाम होते ही इसके लिए के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं, क्योंकि शाम होते ही यहां पर एक बच्चे की आत्मा दिखाई पड़ती है। तो आइए इस आर्टिकल में शनिवारवाड़ा से संबंधित पूरी जानकारी विस्तार से जानते हैं।

शनिवार वाड़ा से संबंधित रहस्यमई और भूत प्रेत की कहानियां प्रचलित है, नारायणराव की बाल्यावस्था में हत्या कर देने से उनकी आत्मा इस किले में भटकती है। रात होते ही यहां पर आवाजें सुनाई देती है, किसे समय मराठा शासक नारायण राव को मारने लगे तभी वे किले में दौड़ते हुए बचाने के लिए कहा। लेकिन उन्हें किसी ने नहीं बचाया और मात्र 17 वर्ष की उम्र में मार दिया गया। इसलिए आज भी उनकी आत्मा यहीं पर रहती है, ऐसा लोगों का कहना है।

शनिवार वाड़ा किले की रहस्यमयी कहानी और इतिहास

शनिवारवाड़ा किला (पुणे) महाराष्ट्र

शनिवार वाड़ा फोर्ट भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है। यह किला कभी मराठाओं की राजधानी हुआ करता था, जो आज भूतिया तथा डरावनी कहानियों में विलुप्त है। आज भी इस किले में अनेक सारे पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। खास तौर पर इस किले में देखने के लिए मुख्य द्वार और चारदीवारी है। 7 मंजिला इमारत से बना हुआ, यहां किला आग लगने से पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गया।

यह मध्यकालीन भारत का ऐतिहासिक किला है, जो अपने गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। लेकिन अब इस किले का नाम भारत के रहस्यमय और डरावने किलो की सूची में शामिल हो चुका है। भारत में अनेक सारे ऐसे किले, महल, गढ़, हवेलियां, दुर्ग वह है, जो प्रेत आत्मा का गढ़ है।‌ वहां पर भूत प्रेत के रहने की बातें प्रचलित हैं, वहां पर लोग जाने से भी कतराते हैं। ऐसा ही शनिवारवाड़ा किला के बारे में कहा जाता है।

शनिवार वाड़ा किले का निर्माण

शनिवार वाड़ा किले का निर्माण तत्कालीन मराठा शासक बाजीराव प्रथम ने 10 जनवरी 1730 को शनिवार के दिन इस किले की नींव रखी थी। इसीलिए इस किले को “शनिवार वाड़ा” नाम से जाना जाता है। 18वीं शताब्दी के दौरान बना हुआ यह किला अपने अंदर अनेक सारे राज संजोय खड़ा है। शनिवार वाड़ा किले में मराठा तथा मुगल वास्तुकला का मिश्रण देखने को मिलता है।

अत्यंत विशालकाय दिखने वाला यह किला बड़े-बड़े काले पत्थरों से बनाया गया है।‌ पूर्ण योजनाबद्ध तरीके से बना हुआ यह किला मराठा साम्राज्य का इतिहास बयां करता है। वर्तमान समय में इस किले के बारे में लोग भूत प्रेत की कहानियां बयां करते हैं, जो इस किले के इतिहास से जुड़ी हुई है।

शनिवार वाड़ा किले का निर्माण का कार्य राजस्थान के “कुमावत राजपूत” को सौंपा गया था, उन्होंने काले पत्थरों से शनिवार वाड़ा किले का निर्माण शुरू कर दिया। लेकिन बीच में ही यह कार्य रुकवा दिया गया, क्योंकि पत्थरों से बना हुआ भवन केवल राजाओं का ही होता है, जबकि यह किला पेशवाओं के लिए बन रहा था।

इसीलिए किले का जमीनी स्तर पर कार्य होने के बाद इसे इंटो से बनाना शुरू किया। इस किले का निर्माण शुरू होने के बाद साहु ने पैसों को पत्र लिखकर इस बात की सूचना दी, जिसके बाद पेशवा के आदेशानुसार सात मंजिला इमरती किले को ईटो से बनाया गया।

उस समय इस किले को बनाने का ₹16,1000 का खर्च आया था, इस किले निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद 12 जनवरी सन 1732 को शनिवार के दिन ही इस किले का उद्घाटन किया गया। इस किले का निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद पेशवा ने राजस्थान के कारिगरो को ‘नाईक’ की उपाधि दी थी।

7 मंजिला इमारत से बना हुआ यह किला अत्यंत विशाल और अद्भुत था, लेकिन सन 1828 में इस किले में आग लग गई, जिससे यह किला पूरी तरह से जलकर नष्ट हो गया। वर्तमान समय में इस किले के कुछ अवशेष ही बचे हैं, जो इस किले की दर्दनाक दास्तां का इतिहास बयां करता है। कहा जाता है कि इस किले के सबसे ऊपरी मंजिला पर खड़े रहकर 20 किलोमीटर तक संपूर्ण पुणे शहर को देखा जाता था।

पूर्ण योजना बंद तरीके तथा सुनियोजित तरीके से बने हुए इस किले में साथ में सभी लोगों के रहने के उच्चतम और उचित व्यवस्था थी, जिसमें राजा-रानी, राजकुमार, सैनिक, सेनापति काम करने वाले, राज परिवार के लोग इत्यादि सभी लोगों के रहने की उत्तम व्यवस्था थी। किले की सुरक्षा के लिए मजबूत दीवारे, किले की खूबसूरती के लिए आकर्षक कलाकृतियां भी बनाई गई थी।

शनिवार वाड़ा केले का इतिहास

वर्तमान समय में शनिवार वाड़ा फोर्ट में देखने के लिए मुख्य दरवाजा है, जिसे नारायण दरवाजा कहते हैं। इसके अलावा इसी दरवाजे से प्रवेश करने के बाद शनिवार वाड़ा का बाग है, जो हरा भरा और आकर्षक है। इसके अलावा इसकी चार दिवारी जो बड़े-बड़े काले पत्थरों से बनी हुई है। यह दिवारे आपको मराठा साम्राज्य के इतिहास की जानकारी बयां करेगी।

बाजीराव इसी किले में राज किया करते थे। बाजीराव के जीवन पर आधारित फिल्म बाजीराव मस्तानी तो आपने जरूर देखी होगी। मराठा साम्राज्य के शासक बाजीराव ने बुंदेलखंड की राजकुमारी मस्तानी से प्रेम विवाह किया था और वे इसी किले में रहते थे। उसके बाद से ही इतिहास में नया मोड़ आया और वे कहानियां आज तक प्रचलित है, जो लोगों में डर पैदा करती हैं।

भारत के प्राचीन किलो में से एक शनिवारवाड़ा किला का भी नाम आता था, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यहां किला आग के हवाले हो गया। इस किले में लगी आग अब तक रहस्य ही है। कहा जाता है कि यह आग राजकुमार नारायण राव ने लगाई है, जिसकी निर्मम हत्या कर दी गई।

आग लगने के बाद से ही लोगों ने इस किले से संबंधित अनेक सारी बातें प्रचलित कर दी है। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस किले में बालक रूपी भूत को देखा है तथा रात के समय में दर्द भरी चींखें निकालते हैं, क्योंकि उन्हें बचपन के समय मौत के घाट उतार दिया था।‌ उस समय वे स्वयं को बचाने के लिए चिलाते रहे, लेकिन उन्होंने किसी ने नहीं बचाया।

शनिवारवाड़ा किला महाराष्ट्र के मराठा साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था, मराठा साम्राज्य के शासक पेशवा के पांचवे शासक नारायण राव की 17 वर्ष की उम्र में ही, इसी किले में हत्या कर दी गई। उनकी हत्या के बाद से ही इस किले में उनकी चीखें सुनाई देती है।

लोग कहते हैं कि शाम ढलते ही उनकी आत्मा इस किले में दिखाई पड़ती है और वह तरह तरह की आवाज निकालते हैं। इसलिए अब इसके लिए को भारत की सबसे रहस्यमई और डरावनी जगहों में शामिल कर दिया गया है।

शनिवार वाड़ा का किला ऐतिहासिक काल में भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखता था, क्योंकि इस किले पर समय-समय पर मुगलों ने तथा अंग्रेजों ने अनेक सारी आक्रमण किए, जिनमें वे कई बार विफल रहे। बता दें कि यह किला महाराष्ट्र के पुणे शहर के बीचोंबीच स्थित है, जहां पर मराठा साम्राज्य के शासक राज किया करते थे।

शनिवार वाड़ा किले का रहस्य

पेशवा बाजीराव प्रथम के 2 पुत्र बालाजी बाजीराव तथा रघुनाथ राव जिन्हें नानासाहेब के नाम से भी जानते हैं। पेशवा नाना साहिब के 3 पुत्र थे, जिनके नाम विशव राव, महादेव राव तथा नारायण राव था। सबसे बड़े पुत्र पानीपत के तीसरे युद्ध में युद्ध करने गए, जहां वीरगति को प्राप्त हो गए।

उसके बाद उनके द्वितीय पुत्र मराठा राज्य के शासक बने, जिन्होंने 27 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उसके बाद तीसरे पुत्र नारायण राव को गद्दी पर बिठाया गया। नारायण राव मराठा साम्राज्य के 17 साल के शासक थे, जिन्हें उनके काका रघुनाथ तथा काकी आनंदी बाई मारना चाहते थे, क्योंकि रघुनाथ राव खुद गदी पर बैठना चाहता था।

इसलिए उन्होंने अनेक बार नारायण राम को मारने की योजना बनाई, लेकिन नारायणराव को इस बारे में पता चल गया और वह सावधान हो गए। इसलिए उन्होंने अपने काका रघुनाथ राव को किले में ही नजर बंद करवा दिया।

नजर बंद करवाने के बाद रघुनाथ राव ने अपने सहयोगी सुरेंद्र सिंह को पत्र लिखा, सबसे पहले यह पत्र आनंदीबाई ने देखा तो उन्होंने जानकारी को बदलकर नारायण राव को मारने की बात लिख दी। मराठी भाषा में नारायण राव को पकड़ना (नारायण राव ला धरा) होता है, इस पर आनंदी बाई ने नारायण (राम राव रा मारा) लिख दिया। इसका अर्थ नारायणराव को मारो था।

यह पत्र सुरेंद्र सिंह को मिलते ही उन्होंने अपने सैनिकों के साथ शनिवार वाड़ा किले पर आक्रमण कर दिया और भी नारायण राव तक पहुंचने में सफल रहे। इसके बाद वे तलवार लेकर नारायण राम को मारने दौड़े तो नारायण राम बचाने के लिए चिलाने लगे। परंतु कोई भी नारायण राव को बचाने के लिए नहीं आया।

मात्र 17 वर्ष की आयु में शासक बने नारायणराव को शनिवार वाड़ा के किले में मौत के घाट उतार दिया गया, जिसके बाद रहस्यमई तरीके से तरीके से 27 फरवरी 1823 को आग लग गई। कई दिनों तक आग पर काबू नहीं पाया गया और 7 दिनों के भीतर सब कुछ जलकर राख हो गया।

शनिवार वाड़ा किले की रहस्यमयी कहानियां

शनिवारवाड़ा किला भारत की मुख्य और बहुचर्चित डरावनी और रहस्यमई जगहों में शामिल हो चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलने के बाद यहां बालक के रूप में भूत दिखाई देता है तथा कुछ अजीब सी आवाजें भी आती है।‌ लंबे समय से इस प्रकार की कहानियां कई जाती हैं।

लोगों का कहना है कि अमावस्या की रात को दर्द भरी गूंज पूरे महल में सुनाई देती है। इस बात से लोग हैरान है। इसके लिए की रहस्यमई और डरावनी बातें इसके लिए के इतिहास से जुड़ी हुई है।

इस किले की रहस्यमई कहानी यह है कि इसके लिए पर शासन करने वाले मराठा साम्राज्य के पेशवा नारायण राव की इसी किले में हत्या कर दी गई थी। इस किले में नारायण राव की हत्या करने के बाद से ही आत्मा भटकने की बातें कही जाती है।

लोग कहते हैं कि नारायणराव की चीज इस किले में सुनाई देती है। नारायण राव अपने आपको बचाने के लिए पुकारते थे, इसीलिए लोगों में डर और भय पैदा हुआ है।

निष्कर्ष

शनिवार वाड़ा का किला अपने समय में भारत की राजनीति में प्रमुख स्थान रखता था, लेकिन आज यह भारत के डरावनी और रहस्यमई जगहों में प्रमुख स्थान रखता है। बता दें कि इस किले में 17 वर्ष के शासक को मार दिया गया था, जिसके बाद लोगों ने कहा कि उनकी आत्मा यहां पर भटकती है।

इस किले के बारे में पूरी जानकारी हमने आपको इस आर्टिकल में विस्तार से बताई है। उम्मीद करते हैं कि आप को यह आर्टिकल काफी ज्यादा पसंद आया होगा। यदि आपका इस लेख से जुड़ा कोई सवाल या सुझाव है तो कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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