रेड डाटा बुक क्या है?

Red Data Book In Hindi:आज दुनिया इतनी तेज हो गई है कि टेक्नोलॉजी से कोई भी काम किया जा सकता है अर्थात कोई भी काम असंभव नहीं है। जहां मनुष्य के जीवन का आंकड़ा रखना मुश्किल था, आज वहां पशु पक्षी कीड़े मकोड़े जीव जंतुओं के एक निश्चित तथा सटीक आंकड़े रखे जाते हैं और यह सिर्फ टेक्नोलॉजी विज्ञान और नई तकनीकी से ही संभव हो पाया है।

हां दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से हम एक ऐसे निश्चित रिकॉर्ड के बारे में बताने वाली संस्था के बारे में बात करेंगे तथा इससे जुड़े कई इंटरेस्टिंग तथ्य आपको बताएंगे ।कृपया पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।

पृथ्वी पर पशु  पक्षियों ,जीव जंतुओं के संख्या का रिकॉर्ड रखने की संस्था को “रेड डाटा बुक” कहा जाता है। इसे IUCN जारी करती है। IUCN का पूरा नाम International Union Of Conservation Nature है इसका मुख्यालय स्विजरलैंड में है।

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Image : Red Data Book in Hindi

रेड डाटा बुक क्या है? | Red Data Book In Hindi

रेड डाटा बुक क्या है?

रेड डाटा बुक एक ऐसा रिकॉर्ड रखता है जो विलुप्त पशु पक्षी जीव जंतु इस पृथ्वी पर अरबों वर्ष पहले थे।उनका एक निश्चित डाटा लिख कर रखता है और यह पशु सबसे पहले किस स्थान पर तथा किस देश में देखा गया या अंतिम बार कहाँ देखा गया यह सारी जानकारी रेड डाटा बुक में लिखित रूप से उपलब्ध हैं। यह अपनी जानकारी तीन भागों में एकत्रित करके रखता है,जो निम्न है।

  • 1-हरा पेज
  • 2-लाल पेज
  • 3-गुलाबी पेज

हरा पेज

रेड डाटा बुक के अनुसार इस पेज में उन पशु पक्षियों के नाम को लिखित रूप से रखा जाता है जिनको किसी भी प्रकार की कोई भी असुरक्षा नहीं है अर्थात वे इस पृथ्वी पर पूरी तरह से सुरक्षित है

लाल पेज

रेड डाटा बुक के अनुसार इस पेज में पशु पक्षियों के रिकॉर्ड को रखा जाता है जो इस पृथ्वी पर बहुत कम मात्रा में बचे हैं या फिर विलुप्त हो चुके हैं

गुलाबी पेज

रेड डाटा बुक के अनुसार इस पेज में उन सभी पशु पक्षियों को रखा जाता है जिनकी प्रजाति धीरे-धीरे करके विलुप्त होती जा रही है तथा उनका वंश आगे नहीं बढ़ पा रहा है और कुछ वर्षों में उनकी प्रत्येक जातियां इस पृथ्वी से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।

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रेड डेटा बुक के प्रकार

पूरे विश्व में अब तक केवल पांच प्रकार के डाटा बुक को प्रकाशित किया गया है जिसमें प्रत्येक प्रजाति को अलग-अलग भागों में बांटा गया है जो निम्नवत है।

प्रथम चरण: इस चरण में ऐसी प्रजातियों तथा स्तनधारियों को रखा जाता है, जो अपने छोटे-छोटे बच्चों को जन्म देती हैं तथा उन्हें दूध पिलाती है।

दूसरा चरण: इस चरण में ऐसे प्रजाति को रखा जाता है जो हवा में उड़ते हैं जैसे-पक्षी।

तीसरा चरण: रेड डाटा बुक के अनुसार इस चरण में उन सभी जीव को रखा गया है, जो मरुस्थलीय क्षेत्रों में रहते हैं तथा इन्हें उभयचर प्रजाति भी कहा जाता है।

चौथा चरण: पानी में रहने वाले सभी प्रकार के मछलियां तथा अन्य प्रजातियां भी जो जलीय हैं उन्हें इस चरण में रखा गया है

पांचवा चरण: सभी प्रकार के पेड़ पौधे इस चरण से संबंध रखते हैं, तथा पेड़ पौधों के अध्ययन को ही बॉटनी कहा जाता है।

विलुप्त प्राय प्राणियों के प्रकार

विलुप्त प्रजातियों के प्रकार के बारे में बात करें तो निम्न है।

  • आज के पर्यावरण में  विलुप्त होने वाले कई प्रजातियों का संकट बना है तथा वह कुछ वर्षों में उन्हें विलुप्त होने की आशंका जताई जा रही हैं।
  • वन से विलुप्त होने वाले ऐसी प्रजातियां जो वनों से आती हैं वनों में पाई जाती हैं लेकिन उनकी लगातार प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं यदि कुछ बचे हैं तो वह चिड़िया घरों में है।
  • संकटग्रस्त जीव जंतु पेड़ पौधे के कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो लगातार विलुप्त होती जा रही हैं।
  • संगतपन की बात करें तो अभी कुछ ऐसी प्रजातियां हैं जो विलुप्त तो नहीं हुई है परंतु असंका जताई जा रही है कि कुछ वर्षों के पश्चात वे विलुप्त की श्रेणी में आ जाएंगी।
  • संवेदनशील प्रजाति यह एक ऐसी प्रजाति है जिसे बहुत ही सुरक्षित रखना पड़ता है यह बहुत ही  नाजुक होती है यदि उन्हें  असुरक्षित रखा गया तो वह विलुप्त हो जाएंगी।
  • अभी कुछ जातियां ऐसे भी हैं जिनका पूर्ण आकलन नहीं किया गया अर्थात अभी उनके अध्ययन में काफी जानकारी प्राप्त नहीं हुई है।
  • कुछ ऐसे प्रजातियां पेड़ पौधों में पाई जाती हैं जिनका आंकड़ा बताना  अभी मुश्किल है अर्थात उन प्रजातियों के बारे में भी अभी अध्ययन करना शेष बचा है।

विलुप्त होने वाली प्रजातियां

अरबो वर्ष पहले कुछ प्रजातियां विलुप्त हो गई थी जिनके अवशेष आज भी पाए जाते हैं उन प्रजातियों के नाम निम्न है।

  • 1-Dodo
  • 2-TasunTasunanian tiger
  • 3-डायनासोर
  • 4-ब्लू वक

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रेड डाटा बुक को प्रकाशित करने का कारण

आज विज्ञान ने अपने क्षेत्र में काफी उन्नति व विस्तार किया है जिसके कारण कई प्रजातियों को खोजा गया है। रिकॉर्ड के पहले कई ऐसी प्रजातियां थी जिन्हें विलुप्त होने में काफी  कम समय लगा और हम उन्हें बचा भी नहीं सके। परंतु इस रेड डाटा बुक के कारण आज हम ऐसी प्रजातियां जो विलुप्त हो गई हैं या कुछ संख्या में बची हैं अर्थात विलुप्त होने वाली है। इस रिकॉर्ड के अनुसार उनका पता लगाते हैं तथा उनकी सुरक्षा व देखभाल की जाती है जिससे कि वह इस संसार से विलुप्त न हो सकें।

इस रिकॉर्ड के अनुसार पृथ्वी पर बचे वह सभी प्रजातियां जो लगभग विलुप्त होने वाली हैं उनकी देखरेख तथा उनकी संख्या में बढ़ोतरी का पूरा रिकॉर्ड रेड डाटा बुक में ही रखा जाता है।

यदि हमारी पृथ्वी से कोई भी प्रजाति विलुप्त हो जाती है तो हमारा पर्यावरण असंतुलित हो जाता है अर्थात उसका संतुलन बिगड़ जाता है पूरी इकोसिस्टम को प्रभावित करता है। वह फिर प्रजाति जीव जंतु  में हो या पेड़ पौधों में वह इकोसिस्टम को प्रभावित करती है।

यदि कोई भी प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है तो उसे सुरक्षा प्रदान करके बचाया जा सकता है। IUCN के अनुसार पिछले कई वर्षों में कई प्रजातियों की संख्या 90% से अधिक विलुप्त हो गई हैं। इसलिए उनका रिकॉर्ड अति संकट चरण में रखा गया है और उनकी सुरक्षा के लिए कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।

कुछ विलुप्त जीव जंतु

  • गिद्ध
  • हिमालय बटेर – अंतिम समय उत्तराखंड में देखा गया
  • ग्रेट इंडियन बस्टर्ड – भारत के राजस्थान तथा पाकिस्तान के बॉर्डर पर देखा गया जिसकी संख्या बहुत ही कम है अर्थात विलुप्त होने की दिशा की ओर बढ़ रहा है
  • भारतीय चीता – भारतीय चीतों की संख्या बहुत ही कम है परंतु कुछ डाटा के अनुसार इनकी संख्या में बढ़ोतरी हुई है
  • गंगा शार्क –  इनकी संख्या तेजी से घट रही है
  • घड़ियाल –  यह प्रजाति लगभग विलुप्त होने के कगार पर हैं
  • उड़ान गिलहरी –  इसे उड़न गिलहरी भी कहा जाता है और इनकी संख्या काफी कम हो गई है
  • सपून साइबेरियन – सारस  पक्षी के नाम से भी जाना जाता है इनकी संख्या लगातार घट गई है अर्थात यह भारत में बहुत कम दिखाई देते हैं

ऊपर दिए गए नामों में से कई जंतुओं की प्रजाति पूरी तरह से अभी विलुप्त नहीं हुई है। परंतु वह विलुप्त होने के कगार पर हैं यदि उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए तो वे और अधिक समय तक पृथ्वी पर जीवित रह सकते हैं।

निष्कर्ष

दोस्तों आज इस पोस्ट के माध्यम से हमने ऐसे विषय के बारे में बात की जो अत्यधिक में इंटरेस्टिंग तथा जानकारी पूर्ण थी अर्थात हमने अपने पृथ्वी पर पाए जाने वाले उन पशु पक्षी जीव जंतु के बारे में जाना जो आज से अरबों वर्ष पहले इस पृथ्वी पर पाए जाते थे। जिनके अवशेष आज भी इस पृथ्वी में दबे हुए हैं। कई स्थानों पर उनके अवशेषों को खोजा गया है जैसे डायनासोर, ड्रैगन इत्यादि।

दोस्तों इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको रेड डाटा बुक क्या है?( Red Data Book In Hindi)की संपूर्ण जानकारी देने का प्रयत्न किया है यदि आपको यह पोस्ट पसंद आई हो तो अपने मित्रों को अवश्य शेयर करें और हमें फॉलो करना न भूलें धन्यवाद।

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