जल ही जीवन है पर निबंध

Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh: दोस्तों पृथ्वी पर जल महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। हमारे जीवन में जल का एक मत्वपूर्ण स्थान होता है। इस निबंध को आप अंत तक पढ़िएगा।

हम आपको Jal hi Jeevan hai Par Nibandh बहुत आसान भाषा में समझाने का प्रयत्न करेंगे, अधिकतर परीक्षा में यह निबंध पूछा जाता है। आप सभी के लिए यह मददगार होगा।

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जल ही जीवन है पर निबंध | Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh

जल ही जीवन है पर निबंध (200 शब्द)

जैसा कि आप सभी को पता है इस संसार मे जितनी महत्वपूर्ण वायु है उतना ही महत्वपूर्ण जल भी है, पृथ्वी पर जितने भी जीव जंतु, मनुष्य हैं उन सभी के लिए जल बहुत ही ज़्यादा महत्वपूर्ण तत्व है।

हमारे इस संसार मे चाहें जीव जंतु हो कीड़े मकोड़े हो या पेड़ पौधे इन सब के लिए जल अमृत के समान काम करता है, इस पृथ्वी पर जब कुछ भी नही था तब जल था, जल के बिना हम इस संसार की कल्पना ही नहीं कर सकते और जल हम सब के लिए प्रकृति का अमूल्य तोहफा है।

आज के समय लोगों ने जल को प्राथमिकता देना ही बंद कर दिया है और हमारे वैज्ञानिकों ने तो साफ साफ यह कह दिया है अगर जल का बचाव नहीं किया गया तो बहुत जल्द हम सभी को इसका अभाव देखना पड़ेगा। बढ़ती जनसँख्या और बढ़ते जल के उपयोग से हम जल को उतनी महत्त्ता नहीं दे रहे जितनी हमें देनी चाहिए।

आपको ज्ञात होगा कि हमारे द्वारा किये गए कृत्यों से हमें नुकसान नहीं होगा अपितु पूरी प्रकति को होगा और सभी सजीव वस्तुओं को इसका अभाव झेलना पड़ेगा। तलाबों, नदियों, झरनों में जल दूषित होना शुरू हो गया है, वह अब पीने योग्य नहीं रह गया है हमने अगर जल्द से जल्द कुछ न किया तो यह आगे बहुत बड़ी मुसीबत बन जाएगी, वक़्त रहते हमें जल को बचाने के उपाय करने चाहिए और दूसरे लोगों को जरूर प्रेरित करना चाहिए।

जल ही जीवन है पर निबंध (800 शब्द)

प्रस्तावना

जल हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण तत्व है, जिसके बिना हम इस धरती पर रहने की कल्पना तक नही कर सकते, पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु, पेड़ पौधें और प्रकृति से जुड़ी विभिन्न तत्वों का जल एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जल के बिना इस धरती पर जीवन काट पाना न के समान है जल भगवान के द्वारा दिये गए इस जीवन का आधार है।

पृथ्वी पर जल की मात्रा तेज़ी से नीचे की ओर बढ़ रही है जल हमे तलाबों, झरनों, कुआं, झील आदि स्थानों से प्राप्त होता है और अब तो अधिकतर तालाब, कुएं, झील सूखने लगे हैं, आपको बताते चले कि हमे इस पृथ्वी पर जितना जल प्राप्त होता है उसका २.५ प्रतिशत जल ही पीने योग्य होता है बाकी का खारा जल होने की वजह से पीने में उपयोग नहीं करते हैं।

पृथ्वी में जल की कमी महसूस होने के साथ साथ एक और समस्या है, जिसका समाधान स्वयं मनुष्य ही कर सकता है। हम बात कर रहे हैं जल प्रदूषण की। जल प्रदूषण आज के समय बहुत ही बड़ी समस्या है। आज लगभग हर तरफ जल तालाबों झरनों कुओं आदि का जल प्रदूषित हो रहा है वह पीने योग्य नही बचा है। हमें जल्द से जल्द अनेक उपाय करने चाहिए और हर संभव प्रयास करना चाहिए कि जल प्रदूषित न हो।

जल संरक्षण का तात्पर्य

जल संरक्षण से तात्पर्य यह है कि हमें जल अव्यय को रोकना चाहिए आज के समय मे हमे जल अधिक से अधिक मात्रा में बचाना चाहिए, वर्षा के दौरान बेवजह बह जाने वाले जल या किसी अनावश्यक कार्य के लिए उपयोग में लाया गया जल उसे हम सब को बचाना चाहिए जितनी मात्रा में उसका उपयोग करना है उतना ही करना चाहिए और कोशिश करना चाहिए कि उससे कम में ही हो जाये।

हमारे पृथ्वी का तीन चौथाई भाग जल से घिरा हुआ है परन्तु यह भी सच्चाई है कि पीने योग्य जल की मात्रा बहुत कम सीमित रह गयी है, जल का संरक्षण करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है आपको बताते चलते हैं। पृथ्वी के भीतर स्तिथ जल की अधिक मात्रा में खिंचाई होने के कारण जल का स्तर और गिरता चला जा रहा है, इसके अलावा प्रदूषित जल होने के कारण उपयोग में नही आ पा रहा है, यह आने वाले समय मे घोर संकट का संदेश है। इसलिए हमें अभी से जागरूक हो जाना चाहिए और जल को अधिक से अधिक बचाना चाहिए।

जल प्रदूषण से होने वाली बीमारियां व उपाय

जैसा कि आपको ज्ञात होगा कि जल प्रदूषण से बहुत सी बीमारियों का सामना करना पड़ता है, जल प्रदूषण से मानव जाति को ही नुकसान नही पहुचता अपितु जलीय जीव पशु पक्षियों आदि को भी इसका सामना करना पड़ता है। अनेक से ऐसे कारखाने हैं, जिनमे विषैला जल निकलता है और सीधे नदियों नहरों तालाबों आदि में जाकर मिलता है और प्रदूषित हो जाता है जिस कारण लोगों हैजा, मलेरिया, टाइफाइड, हैपेटाइटिस, दस्त और भी अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

बहुत सी ऐसी बीमारियां होती हैं जो प्रदूषित जल के कारण ही होती है, आज के समय लगभग 80 प्रतिशत बीमारियां प्रदूषित जल के कारण हो रही हैं अगर ऐसे ही रहा तो हमें इससे होने वाले और नही दुष्प्रभावों को झेलना पड़ेगा, हमें जल्द से जल्द इस बीमारी से निजात पाने के लिए अनेक उपाय करने चाहिए और प्रकति से जुड़े रहना चाहिए।

उपाय

आज के इस दौर में बढ़ते जल प्रदूषण को देखते हुए सरकार द्वारा बहुत से अभियान चलाए जा रहे हैं। हर जगह नदियां तालाब आदि का विशेष ध्यान रखा जा रहा है तो हमारा भी यह कर्तव्य बनता है कि हमें अपनी तरफ से जल बचाना चाहिए उसकी बर्बादी नही करनी चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए।

सबसे पहले तो जो लोग नदियों तालाबों नहरों कुओं आदि के किनारे बैठकर नहाते और कपड़े धुलते हैं, उसके पश्चात साबुन का इस्तेमाल करते हैं वह जल में जाकर मिलता है जिससे जल प्रदूषित होता हैं उन्हें रोकना चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए और इसके अलावा हमें बड़े बड़े गड्डों में जल को एकत्रित करना होगा।

लोगों को जल बचाने के लिए जागरूक करना होगा वर्षा में हो रहे जल को भी एकत्रित करना होगा। कारखानों से आ रहे दूषित जल को नदियों तलाबों आदि में मिलने से रोकना होगा और सभी को आवश्यकता अनुसार की जल को खर्च करने की सलाह देनी होगी। इन प्रयासों से हम जल दूषित होने और जल कम होने से कुछ मात्रा में रोक सकते हैं।

उपसंहार

जल वह महत्वपूर्ण तत्व है, जिसके बिना हम और हमारा जीवन दोनों अधूरे हैं। जल ही जीवन है (Jal Hi Jeevan Hai par Nibandh) जल के बिना पृथ्वी पर गुज़र बसर कर पाना संभव नहीं है। जल मानव जाति ही नही बल्कि संसार मे सजीव तत्वों को भी जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण भूमिक अदा करती है।

आज जल की हो रही इस कमी को देखते हुए हम सबको मिलकर अनेक प्रयास करने चाहिए और जैसा कि हमने बताया लोगों को जागरूक करना चहिये इन समस्याओं से बचने के लिए जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने चाहिये।

भूमंडल के निचले स्तर के गर्म होने के कारण नदियों के जमीनी सतह के ग्लेशियर तेज़ी से गर्म हो रहे हैं परन्तु अगर हम जल संरक्षण को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे तो हम अधिक से अधिक मात्रा में जल का स्तर बढ़ा लेंगे और अनेक बीमारियों से बचेंगे।

अंतिम शब्द

दोस्तों इस ब्लॉग के माध्यम से हमने देखा कि जल ही जीवन है पर निबंध (Jal Hi Jeevan Hai Par Nibandh) उम्मीद करते हैं आपके लिए यह ब्लॉग कामगार सिद्ध हुआ होगा और आप इसे अपने दोस्तों के साथ साझा कर उनकी भी मदद कर सकते हैं ।

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