बेटी पर कविता

Hindi Poem on Betiyan: नमस्कार दोस्तों, बेटियां हमारे समाज के लिए और देश लिए अनमोल होती है। इनके रहने से हर घर में खुशियां और रोनक छाई रहती है।

Hindi Poem on Betiyan

इस पोस्ट हम आपके लिए बेटी पर बेहतरीन कवितायें लेकर आये हैं। उम्मीद करते हैं कि ये हिंदी कविताएं आपको बेहद पसंद आएगी। आपको यह कैसी लगी, ये हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

बेटी पर कविता – Hindi Poem on Betiyan

घर की जान होती हैं बेटियाँ

घर की जान होती हैं बेटियाँ
पिता का गुमान होती हैं बेटियाँ
ईश्वर का आशीर्वाद होती हैं बेटियाँ
यूँ समझ लो कि बेमिसाल होती हैं बेटियाँ।

बेटो से ज्यादा वफादार होती हैं बेटियाँ
माँ के कामों में मददगार होती हैं बेटियाँ
माँ-बाप के दुःखको समझे, इतनी समझदार होती हैं बेटियाँ
असीम प्यार पाने की हकदार होती हैं बेटियाँ।

बेटियों की आँखे कभी नम ना होने देना
जिन्दगी में उनकी खुशियाँ कम ना होने देना
बेटियों को हमेशा हौसला देना, गम ना होने देना
बेटा-बेटी में फर्क होता हैं, ख़ुद को ये भ्रम ना होने देना।

Poem on Daughter in Hindi

लडकें की तरह लड़की भी, मुट्ठी बांध के पैदा होती हैं।
लडकें की तरह लड़की भी, माँ की गोद में हसती रोती हैं।।

करते शैतानियाँ दोनों एक जैसी।
करते मनमानियां दोनों एक जैसी।।

दादा की छड़ी दादी का चश्मा तोड़ते हैं।
दुल्हन के जैसे माँ का आँचल ओढ़ते हैं।।

भूक लगे तो रोते हैं, लोरी सुन कर सोते हैं।
आती हैं दोनों की जवानी, बनती हैं दोनों की कहानी।।

दोनों कदम मिलकर चलते हैं।
दोनों दिपक बनकर जलते हैं।।

लड़के की तरह लड़की भी नाम रोशन करती हैं।
कुछ भी नहीं अंतर फिर क्यूँ जन्म से पहले मारी जाती हैं।।

बेटियां बेटियां बेटियां…
बेटियां बेटियां बेटियां…

बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।

बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।
निश्छल मन के परी का रूप होती हैं।
कड़कती धुप में शीतल हवाओ की तरह।
वो उदासी के हर दर्द का इलाज़ होती हैं।

घर की रौनक आंगन में चिड़िया की तरह।
अन्धकार में उजले की खिलखिलाहट होती है।
सुबह सुबह सूरज की किरण की तरह।
चंचल सुमन मधुर आभा होती हैं।

कठनायियोंको पार करती हैं असंभव की तरह।
हर प्रश्न का सटीक जवाब होती हैं।
इन्द्रधनुष के साथ रंगों की तरह।
कभी माँ, कभी बहन, कभी बेटी होती हैं।

पिता की उलझन साझा कर नासमज की तरह।
पिता की पगड़ी गर्व सम्मान होती हैं।
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।
बेटी जो एक खूबसूरत एहसास होती हैं।

Hindi Poem on Betiyan

बिन बेटी ये मन बेकल है, बेटी है तो ही कल है,
बेटी से संसार सुनहरा, बिन बेटी क्या पाओगे?
बेटी नयनों की ज्योति है, सपनों की अंतरज्योति है,
शक्तिस्वरूपा बिन किस देहरी-द्वारे दीप जलाओगे?
शांति-क्रांति-समृद्धि-वृद्धि-श्री सिद्धि सभी कुछ है उनसे,
उनसे नजर चुराओगे तो किसका मान बढ़ाओगे?
सहगल-रफ़ी-किशोर-मुकेश और मन्ना दा के दीवानों!
बेटी नहीं बचाओगे तो लता कहां से लाओगे?
सारे खान, जॉन, बच्चन द्वय रजनीकांत, ऋतिक, रनबीर
रानी, सोनाक्षी, विद्या, ऐश्वर्या कहां से लाओगे?
अब भी जागो, सुर में रागो, भारत मां की संतानों!
बिन बेटी के, बेटे वालों, किससे ब्याह रचाओगे?
बहन न होगी, तिलक न होगा, किसके वीर कहलाओगे?
सिर आंचल की छांह न होगी, मां का दूध लजाओगे।

बेटी (Hindi Poem on Betiyan)

बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं,
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं,
पिता का तो गुमान होती है बेटी,
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी।

उसकी आंखें कभी नम न होने देना,
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना ,
उन्गली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने,
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने।

बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ,
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास…!!
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी,
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी!

बेटियां (Poem on Beti Hindi me)

कि क्या लिखु की वो परियो का रूप होती है
या कड़कती सर्दियों में सुहानी धुप होती है।।

वो होती है चिड़िया की चचाहट की तरह
या कोई निश्चिल खिलखलाहट।।

वो होती है उदासी के हर मर्ज की दवा की तरह
या उमस में शीतल हवा की तरह।।

वो आंगन में फैला उजाला है
या गुस्से में लगा ताला है।।

वो पहाड़ की चोटी पर सूरज की किरण है,

वो जिंदगी सही जीने का आचरण है
है वो ताकत जो छोटे से घर को महल कर दे।।

वो काफिया जो किसी गजल को मुकम्बल कर दे
जो अक्षर ना हो तो वर्ण माला अधूरी है।।

वो जो सबसे ज्यादा जरूरी है
ये नही कहूँगा कि वो हर वक्त सास-सास होती है
क्योंकि बेटियां तो सिर्फ अहसास होती है।।

उसकी आँखे ना गुड़ियाँ मांगती ना कोई खिलौना
कब आओगे, बस सवाल छोटा सा सलोना।।

वो मुझसे कुछ नही मांगती
वो तो बस कुछ देर मेरे साथ खेलना चाहती है।।

जिंदगी न जाने क्यों इतनी उलझ जाती है
और हम समझते है बेटियां सब समझ जाती है।।

Beti Kavita in Hindi

बेटी की प्यार को कभी आजमाना नहीं
वह फूल है, उसे कभी रुलाना नहीं
पिता का तो गुमान होती है बेटी
जिन्दा होने की पहचान होती है बेटी।

उसकी आंखें कभी नम न होने देना
उसकी जिन्दगी से कभी खुशियां कम न होने देना
उंगली पकड़ कर कल जिसको चलाया था तुमने
फ़िर उसको ही डोली में बिठाया था तुमने।

बहुत छोटा सा सफ़र होता है बेटी के साथ
बहुत कम वक्त के लिये वह होती हमारे पास
असीम दुलार पाने की हकदार है बेटी
समझो भगवान् का आशीर्वाद है बेटी।

क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं

क्या हूँ मैं, कौन हूँ मैं, यही सवाल करती हूँ मैं,
लड़की हो, लाचार, मजबूर, बेचारी हो, यही जवाब सुनती हूँ मैं।।
बड़ी हुई, जब समाज की रस्मों को पहचाना,
अपने ही सवाल का जवाब, तब मैंने खुद में ही पाया,
लाचार नही, मजबूर नहीं मैं, एक धधकती चिंगारी हूँ,
छेड़ों मत जल जाओगें, दुर्गा और काली हूँ मैं,
परिवार का सम्मान, माँ-बाप का अभिमान हूँ मैं,
औरत के सब रुपों में सबसे प्यारा रुप हूँ मैं,
जिसकों माँ ने बड़े प्यार से हैं पाला,
उस माँ की बेटी हूँ मैं, उस माँ की बेटी हूँ मैं।।
सृष्टि की उत्पत्ति का प्रारंभिक बीज हूँ मैं,
नये-नये रिश्तों को बनाने वाली रीत हूँ मैं,
रिश्तों को प्यार में बांधने वाली डोर हूँ मैं,
जिसकों को हर मुश्किल में संभाला,
उस पिता की बेटी हूँ मैं, उस पिता की बेटी हूँ मैं।।

लाड़ली बेटी (Hindi Poem on Betiyan)

लाड़ली बेटी जब से स्कूल जाने हैं लगी,
हर खर्चे के कई ब्योरे माँ को समझाने लगी।

फूल सी कोमले और ओस की नाजुक लड़ी,
रिश्तों की पगडंडियों पर रोज मुस्काने लगी।

एक की शिक्षा ने कई कर दिए रोशन चिराग,
दो-दो कुलों की मर्यादा बखूबी निभाने लगी।

बोझ समझी जाती थी जो कल तलक सबके लिए,
घर की हर बाधा को हुनर से वहीं सुलझाने लगी।

आज तक वंचित रही थी घर में ही हक के लिए,
संस्कारों की धरोहर बेटों को बतलाने लगी।

वो सयानी क्या हुई कि बाबुल के कंधे झुके,
उन्हीं कन्धों पर गर्व का परचम लहराने लगी।

पढ़-लिखकर रोजगार करती, हाथ पीले कर चली,
बेटी न बेटों से कम, ये बात सबको समझ में आने लगी।

बेटी का हर रुप सुहाना

बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का,
ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।।
ममता का आँचल ओढे, हर रुप में पाया,
नया तराना, नया तराना।।

जीवन की हर कितनी भी कठिनाई को, हसते-हसते सह जाना,
सीखा है ना जाने कहाँ से उसने, अपमान के हर घूँट को,
मुस्कुराकर पीते जाना, मुस्कुराकर पीते जाना।।

क्यों न हो फिर तकलीफ भंयकर, सीखा नहीं कभी टूटकर हारना,
जमाने की जंजीरों में जकड़े हुये, सीखा है सिर्फ उसने,
आगे-आगे बढ़ते जाना, आगे-आगे बढ़ते जाना।।

बेटी का हर रुप सुहाना, प्यार भरे हृदय का,
ना कोई ठिकाना, ना कोई ठिकाना।।

मेरी लाडो (Hindi Poem on Beti)

फूलों सी नाज़ुक, चाँद सी उजली मेरी गुड़िया
मेरी तो अपनी एक बस, यही प्यारी सी दुनिया।।

सरगम से लहक उठता मेरा आंगन
चलने से उसके, जब बजती पायलिया।।

जल तरंग सी छिड़ जाती है
जब तुतलाती बोले, मेरी गुड़िया।।

गद -गद दिल मेरा हो जाये
बाबा -बाबा कहकर, लिपटे जब गुड़िया।।

कभी घोड़ा मुझे बनाकर, खुद सवारी करती गुड़िया
बड़ी भली सी लगती है, जब मिट्टी में सनती गुड़िया।।

दफ्तर से जब लौटकर आऊं
दौड़कर पानी लाती गुड़िया।।

कभी जो मैं, उसकी माँ से लड़ जाऊं
खूब डांटती नन्ही सी गुड़िया।।

फिर दोनों में सुलह कराती
प्यारी -प्यारी बातों से गुड़िया।।

मेरी तो वो कमजोरी है, मेरी सांसो की डोरी है
प्यारी नन्ही सी मेरी गुड़िया।।

दुनिया का भी दस्तूर है जुदा (Poem on Beti)

दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा?
लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की?
सब चाहे सुन्दर जीवन संगिनी, फिर क्यों बेटी से मुह फेरे,
लक्ष्मी रूपी बिटिया को छोड़, धन-धान्य को क्यों दुनिया हेरे।
क्या बेटे ही हैं जो केवल, दुनिया में परचम लहरा पाते,
ना होती बेटी जो इस जग में, तो लल्ला फिर तुम कहाँ से आते?
वीरता की कथा में क्यों अक्सर, बेटों की कहानी कही जाती,
शहीदे आज़म जितनी ही वीर, क्यों झाँसी की बेटी भुलाई जाती।
बेटे की चाहत में अँधा होकर,क्यों छीने उसके जीवन की आस,
बेटी जीवन का समापन कर, क्यों भरे बेटे के जीवन में प्रकाश।
इतिहास गवाह उस औरंज़ेब का, शाहजहाँ नज़रबंद करवाया,
क्या भूल गया उस कल्पना को, जिसने चंदा पर परचम लहराया।
पुरुष प्रधान के इस जग में,क्यों बेटे की चाह में तू जीता,
मत भूल ! बेटी के लिए जनने वाली से पहले, पहला प्यार होता है पिता।
सुन ले तू ऐ बेटे के लोभी, बेटी पालन तेरे बस की बात,
खुदा भी कैसे बख़्शे तुझे बेटी, छोटी है बहोत तेरी औकात।
दुनिया का भी दस्तूर है जुदा, तू ही बता ये क्या है खुदा?
लक्ष्मी-सरस्वती, हैं चाह सभी की, क्यों दुआ कहीं ना इक बेटी की?

मैं बोझ नहीं हूँ (Poem on Daughter in Hindi)

शाम हो गई अभी तो घूमने चलो न पापा
चलते चलते थक गई कंधे पे बिठा लो न पापा
अँधेरे से डर लगता सीने से लगा लो न पापा
मम्मी तो सो गई
आप ही थपकी देकर सुलाओ न पापा
स्कूल तो पूरी हो गई
अब कॉलेज जाने दो न पापा
पाल पोस कर बड़ा किया
अब जुदा तो मत करो न पापा
अब डोली में बिठा ही दिया तो
आँसू तो मत बहाओ न पापा
आपकी मुस्कुराहट अच्छी हैं
एक बार मुस्कुराओ न पापा
आप ने मेरी हर बात मानी
एक बात और मान जाओ न पापा
इस धरती पर बोझ नहीं मैं
दुनियाँ को समझाओ न पापा।।

मैं बेटी वरदान हूँ (Beti Par Kavita)

माँ दुर्गा की शक्ति हूँ
मैं भी पढ़ लिख सकती हूँ
मात पिता की सेवा जानूँ
अपने फ़र्ज़ को मैं पहचानूँ
जब थी इस दुनिया मैं आई
सारे शहर में बँटी मिठाई
मुझको लाड प्यार से पाला
स्कूल भेज सिखाई वर्ण माला
मैं अपने घर की शान हूँ
हाँ मैं बेटी वरदान हूँ।।

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