गनीम और फितना की कहानी (अलिफ लैला की कहानी)

बहुत समय पहले एक शहर में एक बहुत बड़ा व्यापारी रहा करता था, जो आए दिन व्यापार के चक्कर में बड़े-बड़े देशों की यात्रा किया करता था। उस व्यापारी के दो बच्चे थे एक लड़का था और एक लड़की। लड़के का नाम गनीम था और लड़की का नाम अलंकित था। व्यापारी की लड़की बहुत ही सुंदर थी, उस व्यापारी का नाम अयूब था।

व्यापारी की बाजार में बहुत जान पहचान थी, जिसके कारण लोग उसका सम्मान किया करते थे। व्यापारी का बेटा थोड़ा बड़ा हुआ था तब व्यापारी की अचानक से तबीयत खराब हो जाने के कारण उसका निधन हो गया था। जिसके बाद उसके लड़के गनीम के ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई।

उसने अपने पिता का अंतिम संस्कार बहुत धूमधाम से किया और फिर उसमें अपने पिता का व्यापार बहुत अच्छी तरीके से संभालने लगा। जब एक दिन गनीम अपने गोदाम में गया तब उसने देखा कि गोदाम के अंदर बहुत सारे झोले रखे हैं, उन झोलों में एक बड़े शहर का नाम लिखा हुआ है।

तभी गनीम को यह जानने की लालसा हुई कि झोले यहां क्या कर रहे है और यह किसके है। तभी गनीम ने अपनी मां से इसके बारे मे बात की, जिसके बाद उसकी मां ने बताया कि यह झोले जो तुम देख रहे हो, वह तुम्हारे पिताजी के थे, जिन्होंने व्यापार करने के लिए बाहर ले जाने के लिए रखे थे।

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लेकिन वहां जाने से पहले ही उनका निधन हो गया। जिसके बाद गनीम ने कहा कि मैं इन झोले को बाहर व्यापार करने के लिए ले जाऊंगा। जिसके बाद गनीम की मां ने गनीम को जाने के लिए मना कर दिया। लेकिन गनीम ने अपनी मां की बात नहीं मानी और चुपचाप समान लेकर बगदाद की ओर निकल पड़ा।

कुछ दिन यात्रा करने के बाद वह बगदाद पहुंच गया। बगदाद पहुंचने के बाद उसने एक घर लिया। यहां पर उसने दो-तीन दिन तक आराम किया। फिर उसने धीरे-धीरे अपने सारे सामान को बेच दिया और बहुत सारा धन कमाया। एक दिन बाजार में एक बहुत बड़े व्यापारी का निधन हो जाने के कारण पूरा बाजार बंद था।

तब गनीम ने उस व्यापारी की अंतिम यात्रा पर जाने का निर्णय लिया। जिसके बाद वह उन लोगों के साथ व्यापारी की अंतिम यात्रा पर निकल गया। अंतिम यात्रा का सारा कार्यक्रम खत्म होने के बाद गनीम ने वापस घर आने का निर्णय लिया और वहां से चला आया। थोड़ी दूर चलने के बाद वह अपने घर का रास्ता भूल गया और इधर उधर भटकने लगा।

जब राजा के दिए हुए आदेश का पालन करते हुए उसका मंत्री गनीम के घर पहुंचा तो उसने देखा कि वहां पर सिर्फ फितना के अलावा कोई नहीं है। उसने फितना से पूछा की गनीम कहा है। फितना ने बताया कि उसको तो गए हुए यहां से काफी दिन हो गए हैं। जिसके बाद राजा के मंत्री ने चारों तरफ उसकी खोज करवाना शुरू कर दिया और फितना को लेकर महल में चला गया और राजा के सामने ले जाकर फितना को पेश कर दिया।

राजा हारूरसीद फितना को देख कर बहुत क्रोधित हुआ और उसने अपने मंत्री से पूछा कि गनीम कहां गया, उसको क्यों नहीं पकड़ कर लाए। तब राजा के मंत्री ने बताया कि गनीम अपने घर दशमिक का वापस चला गया है।

जिसको सुनकर राजा हारून राशिद बहुत क्रोधित हुआ और उसने तुरंत ही दसमिक के राजा को पत्र लिखकर कहा कि तुम्हारे नगर में एक व्यापारी रहता है, जिसका नाम गनीम है। वह हमारी प्रेमिका को लेकर भाग गया है। जिसके कारण तुम उसको और उसके परिवार को ढूंढ कर मेरे पास भेज दो। अगर वहां पर गनीम ना मिले तो उसकी मां और उसकी बहन को तीन दिन तक पूरे नगर में नंगा कर के घुमाओ और उनको कठोर से कठोर दंड दो।

जिसके बाद दशमिक के राजा ने वही किया, जो बगदाद के राजा हर राशिद ने उनसे करने के लिए कहा। उसने गनीम की मां और उसकी बहन को पूरे नगर में घुमाया और उन पर बहुत अत्याचार किया। तीन-चार दिन तक अत्याचार करने के बाद गनीम की मां और उसकी बहन अपने भाई को ढूंढने के लिए शहर से निकल आई।

कुछ दिन यात्रा करने के पश्चात व बगदाद शहर पहुंच गई। बगदाद शहर में एक किसान की लड़की ने उनको अपने घर में पनाह दी और उसने उन दोनों को खाने पीने के लिए और बहुत सारे कपड़े पहनने के लिए दिए। उधर राजा हारून राशिद ने फितना को एक कारागार में बंद करके रखा था।

जहां पर वह रोज जाया करता था। जब एक दिन वह उस कारागार के पास गया, जहां पर उसने फितना को बंद करके रखा था। तभी वहां पर उसने इतना कि रोने की आवाज सुनाई दी है तो फितना की रोने की आवाज सुनकर वह पास जाकर सुनने लगा। फितना ने राजा से कहा कि तुमने बहुत बड़ा पाप किया है, जिसकी सजा भगवान तुमको देगा।

यह सुनकर राजा बहुत डर गया। तभी उसने अपने मंत्री से कहकर फितना को अपने दरबार में बुलाया और तभी उसने फितना से कहा कि तुम मुझे पूरी बात बताओ कि मेरे जाने के बाद यहां क्या क्या हुआ था। इतना नहीं पूरी बात राजा हरुरासिद को शुरू से लेकर अंत तक बता दी।

फितना की सारी बात सुनकर राजा हारु राशिद को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने फितना से कहा कि मैंने बहुत बड़ा अपराध किया है। मैं इसके लिए गनीम और उसकी मां और उसकी बहन के साथ अब न्याय नहीं करना चाहता हूं और मैं तुम्हारी शादी में उसके साथ करवा दूंगा।

यह सुनकर फितना बहुत खुश हो गई और वह तुरंत गनीम को ढूंढने के लिए निकल गई। कुछ दिन इधर उधर भटकने के बाद फितना को पता लगा कि गनीम की मां और उसकी बहन एक घर पर रुकी हुई है। वह तुरंत उनसे मिलने के लिए उनके पास पहुंच गई, जहां पहुंचकर फितना में बताया कि मेरे ही कारण आपका बेटा और आप लोग बहुत बड़े संकट में पड़ गए हैं। लेकिन अब मैंने आपको और गनीम को इस संकट से मुक्त करा दिया है।

जिसको सुनकर गनीम की मां और बहन बहुत खुश हो गए और उसने तुरंत कितना को अपने गले से लगा लिया। थोड़ी ही देर में एक व्यक्ति एक बीमार व्यक्ति को लेकर सामने से आ रहा था। तभी फितना ने उस बीमार व्यक्ति को देखने की इच्छा व्यक्त की। जब फितना, गनीम की मां और उसकी बहन ने उस बीमार व्यक्ति को देखा तो वह कोई और नहीं बल्कि गनीम ही था।

जिसको देखकर वह लोग बहुत खुश हुए और उन लोगों ने गनीम को गले लगा लिया। तभी फितना ने गनीम को बताया कि राजा हारु राशिद ने हम लोगों को माफ कर दिया है और वह हम लोगों से माफी मांगना चाहते हैं तथा उन्होंने हम लोगों की शादी करने का निर्णय लिया है।

यह सुनकर गनीम बहुत खुश हुआ और सभी लोग राजा हारु राशिद के दरबार में पहुंच गए। राजा ने गनीम और उसके परिवार से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगी और उनको बहुत सारा धन भी दिया तथा अपने वादे अनुसार फितना और गनीम की शादी करवा दी।

जुबैदा ने वही किया, जो उसकी बचपन की सहेली ने उससे करने के लिए कहा। उसने पूरे शहर में यह फैसला दिया कि फितना मर चुकी है। सभी लोग मातम बनाने लगे और जब यह बात गनीम को पता लगी तो उसने जाकर फितना को बताया कि तुम्हारी मरने की खबर चारों तरफ फैल चुकी है।

अब तुमको और ही सावधान होने की जरूरत है। कुछ दिनों में राजा हारु राशिद शिकार से वापस आ गया। तब उसने सभी को रोता हुआ देख पूछा कि यहां पर क्या हुआ है। तब उसकी पत्नी जुबैदा ने बताया कि आपकी प्रियतम का निधन हो गया है। राजा जुबैदा की बात सुनकर जोर जोर से रोने लगा और कहने लगा कि यह क्या हो गया। मेरे जाते ही मुझे छोड़कर क्यों चली गई।

फिर उसने फितना की कब्र पर जाने का फैसला लिया, जहां पर जाकर राजा ने मातम मनाना शुरू कर दिया और कब्र के पास कर बैठकर जोर जोर से रोने लगा। तभी अचानक से उसने कब्र को ध्यान से देखा तो उसको शक हुआ कि कहीं मेरी पत्नी ने कुछ किया तो नहीं है, जो मुझे दिखाई ना दे रहा हो। लेकिन फितना के शोक के उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और कई दिनों तक मातम बनाया

कई दिन गुजर जाने के बाद उसने वापस से अपना राज काज शुरू कर दिया। राजा एक दिन सो रहा था तब उसकी दो नौकरानी ने उसके पास आकर फितना की जीवित होने की खबर राजा को दी, जो फितना ने गनीम के द्वारा एक पत्र के जरिए राजा तक पहुंचाने के लिए कहा था।

तभी गनीम ने वह पत्र नौकरानी को दिया था, उस पत्र में फितना ने अपने और गनीम के बारे में सब कुछ लिख रखा था कि कैसे उसने मेरी जान बचाई है और मैं इसके घर पर अपनी जान बचा कर रुकी हुई हूं। राजा पत्र को पढ़कर बहुत खुश हो गया। लेकिन तभी राजा के मन में यह सवाल आया कि इतने दिनों से साथ में रहने के कारण इन दोनों के बीच में जरूर कुछ ना कुछ हुआ होगा।

यह सोचकर बहुत ही क्रोधित होने लगा। जिसके बाद राजा ने दोनों को बंदी बनाकर लाने के लिए अपने मंत्री से कहा। जब यह खबर गनीम को पता चली तो वह बहुत डरने लगा। तभी फितना ने उससे कहा कि तुम एक गुलाम को लेकर यहां से चले जाओ। मैं राजा के पास जाकर उनसे माफी मांग लूंगी। कुछ दिनों बाद तुमको भी माफ करवा दूंगी। फितना की बात मानकर गनीम ने वही किया और गुलाम का रूप लेकर वहां से निकल गया।

कुछ दूर इधर उधर भटकने के बाद गनीम एक ऐसी जगह पर पहुंच गया, जहां पर कोई भी उसको जानता नहीं था। गनीम ने कुछ दूर चलने के बाद अत्यधिक रात हो जाने के कारण उसने एक कब्रिस्तान पर सोने का फैसला लिया। कब्रिस्तान पर वह सोने ही जा रहा था कि अचानक से तीन व्यक्ति आते हुए नजर आए, जिसको देखकर वह डर गया।

तुरंत पेड़ पर चढ़ गया। उसने देखा कि वह तीनों व्यक्ति एक बड़ा सा बक्सा ला रहे हैं, जिसको उन्होंने एक बड़ा सा गड्ढा खोदकर दफना दिया और उसके बाद वहां से चले गए। जिसके बाद गनीम में पेड़ से उतर कर उस गड्ढे में से खोल कर देखा कि उसके अंदर एक बहुत ही सुंदर सी स्त्री लेटी हुई है।

जिसको देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया। उसने तुरंत उस लड़की को गड्ढे से बाहर निकाल लिया। लड़की के बेहोश होने के कारण गनीम ने उसके होश में आने का इंतजार किया। जैसे ही वह लड़की होश में आ गई, उसने उससे पूछा तुम कौन हो और तुम यहां कैसे आ गई।

तब उस लड़की ने बताया कि मेरा नाम फितना है और मैं माहराजा हारू रशीद की प्रेमिका हूं। जिसको सुनकर गनीम डर गया और उसने डरते हुए फितना से पूछा कि तुम्हे यहां कैसे लाया गया है। तब फितना ने बताया कि मेरे महाराजा शिकार पर बाहर गए हैं और उनकी एक पत्नी है जिसका नाम जुबैदा है वह मुझसे बहुत जलती है ।

क्योंकि बादशाह मुझे उससे ज्यादा स्नेह करता है, जिसके कारण उसने मुझसे बदला लेने के लिए मुझे यहां कब्रिस्तान में दफना दिया है। अगर लेकिन उसको यह पता चलेगा कि तुमने मुझे बचाया है तो वह हम दोनों को मरवा देगा। इसलिए तुम मुझे अपने साथ अपने घर ले चलो।

जिसके बाद गनीम ने फितना को अपने घर में जा कर छुपा दिया और गली में फितना के खाने के लिए बहुत सारे व्यंजनों की व्यवस्था की। कुछ दिन गुजर जाने के बाद गनीम और फितना एक दूसरे से प्रेम करने लगे थे। उधर जुबैदा को पता लग गया कि फितना अपनी कबर से भाग गई है।

जिसके बाद उसने हर जगह उसकी खोजबीन शुरू कर दी और वह डर गई थी। अगर महाराज वापस आएंगे तो मुझे जान से मार देंगे। जिसके बाद उसने अपनी बचपन की सहेली से मदद मांगी। तब उसने उपाय बताया कि तुम फितना का एक पुतला बनवा कर उसकी कमर में रखवा दो और वहां पर एक मस्जिद बनवा दो। जब राजा वापस आएगा तो उससे कह देना आपकी प्रेमिका का अचानक से स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण निधन हो गया।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।

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