आरक्षण पर निबंध

Essay on Reservation In Hindi :आरक्षण शब्द के बारे में आपने जरूर सुना होगा और आए दिन कभी ना कभी आरक्षण को लेकर युवाओं में आक्रोश रहता है और वे विरोध करते रहते हैं। आज इस लेख में हमने आरक्षण पर 250 और 800 शब्दों में निबंध के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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आरक्षण पर निबंध | Essay on Reservation In Hindi

आरक्षण पर निबंध (250 शब्द)

आरक्षण की प्रथा सदियों से चली आ रही है। यह अलग-अलग रूपों में चली आ रही है। प्राचीन काल से दलित वर्ग के लोगों के साथ अत्याचार और भेदभाव हो रहा था। उच्च वर्गों के द्वारा उन पर शोषण हो रहा था, उनका अपमान हो रहा था, उन्हें आजादी से जीवन जीने की स्वतंत्रता ना थी।

आरक्षण की शुरुआत भारत के संविधान के निर्माण के साथ ही हो गया था। भारतीय संविधान में आरक्षण को इसलिए जोड़ा गया था ताकि प्राचीन काल से निम्न और दलित वर्ग के लोगों के साथ हो रहे अत्याचार को दूर किया जा सके और अत्याचारों के कारण दलित और निम्न वर्ग के लोग की स्थिति समाज में काफी पिछड़ चुकी थी।

इसलिए उनकी स्थिति को सुधारने के लिए और उन्हें सहायता प्रदान करने के लिए बी आर अंबेडकर जी ने संविधान में आरक्षण को शामिल किया था। आरक्षण के तहत निम्न वर्ग के लोगों के लिए हर क्षेत्र में कुछ प्रतिशत की छूट दी जाती है फिर चाहे वह नौकरी के मामले में हो या फिर किसी सेवा के क्षेत्र में हो। वैसे तो भारत के संविधान में सबको समानता का अधिकार दिया गया है लेकिन आरक्षण समाज के एक विशेष वर्ग के लिए ही लागू है।

हालांकि जब संविधान का निर्माण हो रहा था तब संविधान निर्माता जानते थे कि इस तरह की व्यवस्था देश के दीर्घकालीन हित में नहीं हो सकता इसीलिए उन्होंने आगामी 10 वर्ष के लिए आरक्षण की व्यवस्था रखने की बात कही थी।  लेकिन 10 वर्ष पूर्ण होने के बाद आरक्षण को हटाने की बात आई तो देश में कई राजनीतिक दलों ने अपने स्वार्थ के लिए इसे चुनावी मुद्दा बना

लेकिन आज आरक्षण देश की बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है।आधुनिक समय में समय-समय पर आरक्षण को लेकर विरोध होते आ रहे हैं। इस विरोध के कारण देश में अशांति का माहौल पैदा हो रहा है। साथ ही युवाओं के बीच की एकता भी टूट रही है।  

आरक्षण पर निबंध (850 शब्द)

प्रस्तावना

भले ही हमारे संविधान में लोगों को समानता का अधिकार दिया गया हो, लेकिन विशेष जाति के लोगों के लिए लागू किया गया आरक्षण आज कहीं ना कहीं असमानता, अशांति फैलाने और एकता को तोड़ने का कार्य कर रहा है। आज रेलवे के सफ़र से लेकर चिकित्सा सेवा यहां तक कि नौकरी के हर क्षेत्र और राजनीतिक पदों में भी आरक्षण का काफी महत्व हो चुका है।

विशेष जाति के लिए इन हर क्षेत्रों में कुछ जगह सुरक्षित रखी जाती है जिसके कारण समाज के उच्च वर्ग में आने वाला योग्य व्यक्ति जिस की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, वह इन पदों का लाभ नहीं उठा पाता। आज कुछ प्रतिशत के कम अंकों के कारण एक योग्य व्यक्ति नौकरी नहीं पा पाता, वही उससे कम अंक पाने वाला निम्न जाति का व्यक्ति आसानी से नौकरी पा लेता है फिर भले ही उसे उस नौकरी की आवश्यकता उससे अधिक ना हो।

आरक्षण का अर्थ

आरक्षण का अर्थ होता है सुरक्षित करना। आरक्षण हर क्षेत्र में विशेष जाति के लिए सुरक्षित जगह रखती हैं। हालांकि हर क्षेत्र में अपनी सुरक्षित जगह रखने की इच्छा तो सबकी होती है फिर चाहे वह रेल के डिब्बे में यात्रा करना हो या किसी अस्पताल में अपनी चिकित्सा करानी हो या सरकारी विभाग में नौकरी पाना हो या फिर विधानसभा या लोकसभा का चुनाव लड़ना हो।

पहले समय में आरक्षण अपने अधिकारों की ऐसी लड़ाई थी, जिसके लिए आवाज उठाना उन लोगों के लिए बहुत जरूरी हो गया था जो निम्न जाति में आते थे और जिन पर सदियों से अत्याचार हो रहा था, उच्च वर्गों के द्वारा उनका शोषण हो रहा था। सभी को समानता और स्वतंत्रता से जीवन जीने के लिए आरक्षण की आवश्यकता पड़ी। इसीलिए आरक्षण लाया गया।

आरक्षण के उद्देश्य

व्यक्ति को जब सामान्य अधिकार भी नहीं मिल पाता है तो वह विशेष अधिकारों की मांग करता है। आरक्षण का मुख्य उद्देश्य यही है कि सभी क्षेत्रों में समानता किसी के भी अधिकार का हनन ना हो सके और ना ही कोई अपने अधिकार का दुरुपयोग कर सके। आरक्षण को समाज के पिछड़े वर्ग के उत्थान के उद्देश्य से ही लाया गया था। लेकिन आज आरक्षण का दुरुपयोग हो रहा है।

आज आरक्षण को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उत्पन्न हो गया है कि क्या आज आरक्षण की आवश्यकता सही मायने में है और यदि है तो किस निती में इसे लागू किया जाना चाहिए? आज आरक्षण की आवश्यकता उस व्यक्ति को है जो सही मायने में इसका हकदार है।

आरक्षण का हकदार वही व्यक्ति है जिस की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है परंतु वह योग्य है, पर अपनी आर्थिक स्थिति के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहा। आज आरक्षण का सही उद्देश्य इन्हीं व्यक्तियों को समाज में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करने का होना चाहिए।

आरक्षण के लाभ

सबसे पहले बात करें आरक्षण के लाभ की तो आरक्षण से उन लोगों को फायदा हो सकता है जो समाज में पिछड़े हैं और निम्न जाति के हैं। आरक्षण को निम्न जाति के उत्थान के लिए ही लाया गया था। प्राचीन समय से ही निम्न जातियों के साथ जाति के नाम पर हो रहे उच्च-निच्च के भेदभाव से समाज में उनकी स्थिति काफी पिछड़ चुकी थी।

उनकी उस स्थिति को ध्यान में रखते हुए बीआर अंबेडकर और अन्य संविधान निर्माताओं ने भारत के संविधान में आरक्षण को जोड़ने का निर्णय लिया था। आरक्षण के कारण निम्न जाति के लोगों के साथ होने वाले हैं ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म हो चुका है और समाज में उनकी स्थिति सुधर चुकी है और उनके जीवन शैली विकसित हो रहे हैं।

आरक्षण के हानि

आरक्षण को इस उद्देश्य से लाया गया था कि समाज में निम्न वर्ग के लोगों का उत्थान किया जाएगा और उनके जीवन शैली में सुधार हो पाएगा। हालांकि आज निम्न वर्ग के लोगों की जीवनशैली तो सुधर चुकी है। लेकिन आरक्षण उन लोगों के लिए समस्या बन चुकी है जो उच्च वर्ग के हैं और वे योग्य हैं।

आरक्षण को जाति के आधार पर लागू किया गया है जिसके कारण उच्च वर्ग का यदि कोई व्यक्ति गरीब परिवार से आता है, तो योग्य होने के बावजूद भी उसे कई बार आरक्षण के कारण नौकरी नहीं मिल पाती। वही जाती के आधार पर लागू किए गए आरक्षण की बैसाखी की मदद से निम्न वर्ग का अयोग्य व्यक्ति को भी आसानी से नौकरी मिल जाती है।

जिसका एक ही उपाय है कि सरकार आरक्षण को जाति के आधार से हटाकर उसे आर्थिक आधार पर लागू कर दे ताकि आरक्षण किसी विशेष जाति के लिए लागू ना होकर उन लोगों के लिए लागू हो जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है लेकिन वे योग्य है।

युवा में आरक्षण का विरोध

संविधान निर्माण के समय आरक्षण की व्यवस्था निम्न जाति के लोगों के लिए की गई थी क्योंकि उस समय निम्न जाति के लोग समाज में काफी पिछड़े थे जिसका कारण उनके साथ होने वाला ऊंच नीच का भेदभाव था। लेकिन आज इस आधुनिक समय में सब कुछ बदल चुका है आज पहले की तरह निम्न जाति के लोगों के साथ उस तरीके का व्यवहार नहीं होता जिसके कारण आज आरक्षण को लेकर समय-समय पर विरोध होते हैं।

आरक्षण के कारण योग्य व्यक्ति को नौकरी नहीं मिल पाता जिसके कारण वह बेरोजगार रह जाता है। सरकार को इस व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाकर आरक्षण को निम्न जाति के लिए लागू न करके योग्य और गरीब लोगों के लाभ के लिए शुरू किया जाना चाहिए। गरीबी निम्न और उच्च जाति को देखकर नहीं आती। गरीबी तो किसी भी जात में हो सकती है।

ऐसे में निम्न जाति का अयोग्य व्यक्ति जो आर्थिक रूप से विकसित है उसे भी आरक्षण का फायदा मिल जाता है। वहीं उच्च जाति में गरीब और पिछड़े लोगों के पास योग्यता होने के बावजूद नौकरी नहीं मिल पाती। इसीलिए अब समय आ गया है कि आरक्षण को जातियों के आधार से अलग रखकर उसे आर्थिक आधार पर लागू करना चाहिए।

निष्कर्ष

आरक्षण की बैसाखी के सहारे यदि कोई अयोग्य व्यक्ति किसी पद पर पहुंचता है, तो उससे देश का विकास नहीं हो सकता। देश का विकास तभी होगा जब योग्य व्यक्ति पद पर आएगा और यह तभी संभव है जब इस आरक्षण को हटाया जाए या तो आर्थिक आधार पर लागू किया जाए। ताकि सभी जातियों के लिए एक समान तरीके से रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सके और योग्य व्यक्ति का चयन हो सके।

अंतिम शब्द

आरक्षण एक ऐतिहासिक, सामाजिक एवं संवैधानिक ज़िम्मेदारी है। लेकिन उसे युवा के सुनहरे भविष्य में बड़ा रूप नहीं बनाना चाहिए। तो हमें उम्मीद है कि आज के लेख में आरक्षण पर निबंध ( Essay on Reservation In Hindi) आपको पसंद आए होंगे। लेख से संबंधित कोई भी समस्या हो तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।‌

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