मातृ दिवस पर निबंध

Essay On Mother’s Day In Hindi: मातृ दिवस क्या होता है? इसके बारे में सभी जानते हैं और मातृ दिवस कब मनाते हैं, इसके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी होगी । हम यहां पर मातृ दिवस पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में मातृ दिवस के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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मातृ दिवस पर निबंध | Essay On Mother’s Day In Hindi

मातृ दिवस पर निबंध (250शब्दों में)

एक मां बच्चे की पहली शिक्षक होती है और सबसे अच्छी दोस्त भी होती है क्योंकि वह अपने बच्चे की समस्त आवश्यकताओं का ध्यान रखती है, जिसकी हमको आवश्यकता होती है। प्रत्येक मां को आदर और सम्मान देने के लिए वर्ष में एक दिन मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है। एक मां कई रूपों में अपने बच्चे के जीवन को संभालती है। कभी शिक्षक कभी मित्र के रुप में वह सारे दायित्वों का वहन करती है। बच्चे की खुशी में ही उसकी खुशी और बच्चे के दुख में ही उसका दुख शामिल होता है।

इसके लिए बच्चों का भी दायित्व बनता है कि वह अपनी मां का सम्मान करें, उनका ख्याल रखें। इसके लिए मातृ दिवस हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। ताकि हम अपनी मां को विशेष महसूस करा सकें इस दिन बच्चे अपनी मां को उपहार देते हैं। अच्छे व्यंजनों को तैयार कर अपनी मां के लिए अपना प्यार दिखाते हैं। एक माँ का पूरा संसार उसके बच्चे के आसपास ही होता है। वह हमें कभी डांटती  है, तो कभी प्यार दिखाती है, लेकिन एक बच्चे को अपनी मां से हमेशा प्यार एवं सम्मान के साथ पेश आना चाहिए, उन्हें  कभी भी दुखी ना होने दें। 

मां के पास कई जिम्मेदारियां होने के बावजूद भी वह हमेशा अपने बच्चे के लिए उपलब्ध होती है। उसकी हर छोटी जरूरतों को पूरा करती है। बिना थके अपने बच्चे का ख्याल रखती है। हम उनका यह योगदान किसी भी तरह से नहीं चुका सकते लेकिन, हम अपने छोटे-छोटे प्रयासों से उन्हें कुछ खुशी जरूर दे सकते हैं। प्रत्येक  बच्चे का यह कर्तव्य है कि वह अपनी मां का सम्मान करें इसके लिए मातृ दिवस या वर्ष में किसी एक दिन ऐसा करने की जरूरत नहीं है।

मातृ दिवस पर निबंध (800 Word)

प्रस्तावना

जैसा कि हम सब जानते हैं, बच्चों के मन में माँ के लिए सबसे खास जगह होती हैं क्योंकि वह इस काबिल होती हैं। एक अपने बच्चे का हर समय ध्यान रखती हैं। उसके लिए बच्चा छोटे से बूढ़ा ही क्यों ना हो जाए पर माँ के लिए वह हमेशा बच्चा ही रहता हैं| और वह हमेशा उसकी फिक्र करती हैं।

माँ नौ महीने बच्चे को अपनी कोख में रखती है। नौ महीने बाद असहनीय पीड़ा सहकर के बच्चे को जन्म देती है और इस दुनिया में लाती हैं। इन नौ महीनों में माँ और बच्चे का एक अदृश्य गहरा रिश्ता बन जाता हैं। यह रिश्ता शिशु के जन्म के बाद साकार होता है और जीवन पर्यंत चलता रहता है जब शिशु जन्म लेता है। उसका सबसे पहला रिश्ता माँ से बनता है।

माँ और बच्चे का रिश्ता इतना गहरा और प्रेम भरा होता है, कि अगर शिशु थोड़ा सा भी रोए यदि बीमार हो जाए। तो मां बैचेन हो उठती हैं। वही तकलीफ से समय शिशु भी माँ को ही याद करता हैं। माँ का दुलार उसकी प्यार भरी पुचकार ही शिशु के लिए दवा का कार्य करती हैं। इसीलिए ममता व प्रेम के इस रिश्ते को सबसे श्रेष्ठ माना जाता हैं। दुनिया का कोई भी रिश्ता इतना मर्मस्पर्शी नहीं हो सकता।

मातृ दिवस

मातृ दिवस हर वर्ष मई माह के दूसरे रविवार को मनाया जाता हैं। मातृ दिवस विश्व की सभी माताओं को समर्पित दिवस हैं। एक माँ बच्चे की सबसे अच्छी मित्र होती हैं और वही उसकी प्रथम शिक्षिका होती हैं। वह हमारी हर जरुरत का ध्यान रखती हैं। उसके बिना हमारा जीवन अधूरा है। उसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
हम माँ के प्यार के और उसकी देखभाल के बिना नहीं जी सकते है। माँ की दुनियां उस के बच्चों और पति तक सीमित होती हैं। माँ अपने बच्चों के लिए हर तरह के दुख दर्द सह लेती हैं। जब बच्चा खुश होता हैं, तो माँ भी खुश हो जाती हैं। जब बच्चा दुखी होता है, तो माँ उससे भी ज्यादा दुखी हो जाती है।

माँ की देखभाल

इस दुनिया में केवल माँ ही हमें कभी अकेला नहीं छोड़ती। उसकी दुनिया हमारे बिना अधूरी होती हैं। माँ पूरी तरह अपने बच्चे के पैसे निष्ठावान होती हैं। माँ की ममता की तुलना किसी भी रिश्ते से नहीं कि जा सकती। माँ हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह होती हैं। वह हमेशा हमें खुश रखने की कोशिश करती हैं। वह हमेशा अपने दु:ख तकलीफ भूल जाती हैं।
हमेशा हमारी देखभाल में लगी रहती हैं। बच्चा जब छोटा होता हैं। स्कूल जाता हैं तब माँ उसे जल्दी उठाती हैं। नहलाती, दातून करवाती हैं, कपड़े पहनाती हैं। स्कूल के लिए तैयार करती हैं। वह स्कूल ले जाती है। स्कूल से वापस लेने आती हैं। हमें खाना खिलाती है और हमारा ग्रहकार्य करवाती हैं। हमारे कपड़े धोती हैं।


हमारे लिए लजीज पकवान बनाती हैं। उसकी पूरी दिनचर्या ऐसे ही चलती रहती हैं। इस प्रकार हम माँ के कार्यों की गिनती नहीं कर सकते। वह सुबह- शाम दिन- रात बिना थके बिना रुके हमारे लिए कार्य करती हैं। सबको सप्ताह में छुट्टी मिलती हैं, पर माँ के लिए कोई भी दिन छुट्टी का नहीं होता है।

माँ की ममता

मातृ दिवस मनाने की शुरुआत गृीस देश में हुई। यहाँ पर देवताओं की माता को पूजने का चलन शुरू हुआ। इसके बाद यह त्यौहार की तरह मनाए जाने तथा माँ अपना पूरा जीवन बच्चो को समर्पित कर देती हैं। माँ की ममता का कोई मौल नहीं होता, उसके प्यार को हम माप नहीं सकते। सम्मान के प्रकट करने के लिए हम मातृ दिवस मनाते हैं।

एक माता का प्यार बच्चे के लिए बहुत अधिक होता है। मां के प्यार को कभी भी किसी से तोला नहीं जा सकता है। मां की ममता अनोखी होती है। बच्चे के लिए उसकी प्रथम अध्यापक भी उसकी मां ही होती है। क्योंकि बच्चे को हर बात मां से शुरुआत में सीखने को मिलती है। उसके पश्चात बच्चा बड़ा होकर विद्यालय पहुंचता है और उसके नए शिक्षक बनते हैं। लेकिन जब तक विद्यालय नहीं जाता है। तब तक बच्चे की प्रथम शिक्षक उसकी मां ही होती है।

निष्कर्ष

बच्चे के लिए रोजाना ही मातृ दिवस रहता है। लेकिन ऐसे मातृ दिवस को प्रतिवर्ष मई महीने के दूसरे रविवार के दिन मनाया जाता है। आज के इस आर्टिकल में हमने मातृ दिवस से संबंधित कुछ जानकारी आप तक साझा की है। मातृ दिवस क्यों मनाया जाता है और मातृ दिवस क्या है इसके बारे में भी इस आर्टिकल में संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई गई है।

अंतिम शब्द

आज का हमारा यह आर्टिकल जिसमें हमने मातृ दिवस पर निबंध( Essay On Mother’s Day In Hindi)आपके सामने पेश किया है। मुझे पूरी उम्मीद है, कि हमारे द्वारा दी गई यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से संबंधित कोई सवाल या सुझाव है। तो वह हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकता है।

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