अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध

Essay On Freedom Of Speech In Hindi: आज का यह आर्टिकल जिसमे हम अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध के बारे में बात करने वाले है। अभिव्यक्ति की आजादी क्या होती है। इसके बारे में जानना जरुरी है। आज के आर्टिकल में Essay On Freedom Of Speech In Hindi के बारे में जानकारी मिलने वाली है।

Essay On Freedom Of Speech In Hindi
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अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध | Essay On Freedom Of Speech In Hindi

अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध (200 शब्द)

प्रस्तावना

भारत सरकार द्वारा भारत के सभी नागरिकों को बोलने लिखने आदि का स्वतंत्र अधिकार दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने विचार व्यक्त करता है, चाहे वह सोशल मीडिया हो या कोई अन्य माध्यम हो, तो उसे हम उसकी अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के माध्यम से वह अपने विचार व्यक्त कर सकता है।

अभिव्यक्ति की आजादी से मतलब है, कि हम अपने विचारों को खुलकर दूसरों के सामने प्रकट कर सकते हैं, जिसमें हमें कोई भी रोका टोकी नहीं कर सकता है।

अभिव्यक्ति की आजादी की उत्पत्ति

अभिव्यक्ति की आजादी की उत्पत्ति सर्वप्रथम इंग्लैंड से मानी जाती है, क्योंकि वही पर सर्वप्रथम इस अधिकार को संविधानिक अधिकार घोषित किया गया था, जो कि  1689 में किया गया था। भारत में भी अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है, जो कि मौलिक अधिकारों में सम्मिलित है।

मौलिक अधिकारों में सम्मिलित करने का मुख्य कारण है, कि वह अधिकार जो व्यक्ति के स्वयं के हो उस पर कोई पाबंदी नहीं लगा सकता, जिससे कि किसी व्यक्ति को उसके बोलने का अधिकार वह लिखने का अधिकार कोई भी नहीं छीन सकता।

अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग

भारत जैसे देश में अनेक राजनेता आए दिन अभिव्यक्ति की आजादी का बहाना करके शब्दों की मान मर्यादा को लांग कर अपने विचार व्यक्त करते हैं, जिससे कि अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग होता है। दिल्ली विश्वविद्यालय में आए दिन ही अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर शब्दों की सीमा को लांग आ जाता है, जो कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर हमने देखा है, कि लोग मुंह में जो आए वही लिख देते हैं और बोल देते हैं, जो कि अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकारों का हनन है, लेकिन मानव अधिकारों की दुहाई देखकर उन्हें कुछ नहीं बोला जाता है।

अभिव्यक्ति की जरूरत क्यों है?

यदि अभिव्यक्ति की आजादी नहीं मिलती, तो कोई भी व्यक्ति अपने ऊपर हो रहे अत्याचार के बारे में खुलकर नहीं बोल सकता, जिसके कारण वह घुट घुट कर मर सकता था और एक प्रगतिशील राष्ट्र के लिए अभिव्यक्ति की आजादी की बहुत ही जरूरत है, क्योंकि वहां के नागरिक उस सरकार के खिलाफ बोल सकते हैं जो सही ढंग से कार्य नहीं कर रही है।

अभिव्यक्ति की आजादी के माध्यम से सज्जन व्यक्ति अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, जिससे कि लोगों को भी नए-नए विचार सुनने को मिले और राष्ट्र प्रगति करता रहे। अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के माध्यम से हम सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी स्वागत व विरोध कर सकते हैं, चाहे वह प्रिंट मीडिया हो या सोशल मीडिया हो।

निष्कर्ष

अभिव्यक्ति की आजादी हमें अन्याय के खिलाफ बोलने की आजादी प्रदान करती है, जिससे कि हम किसी भी अन्य के खिलाफ बोल सकते हैं। किसी भी देश के नागरिकों को हमेशा किसी नागरिक के विचारों का हमेशा स्वागत करना चाहिए और उसे हमेशा हौसला देना चाहिए जिससे कि हमारा देश एक प्रगति की ओर बढ़ सके।

अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध (600 शब्द)

प्रस्तावना

अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार हमें हमारे मौलिक अधिकारों में दिया गया है। अभिव्यक्ति की आजादी से तात्पर्य है, कि जब कहीं अपने अधिकारों का हनन हो रहा हो, तो हम उसके खिलाफ आवाज उठा सकते हैं। लेकिन उसमें भी कुछ मान मर्यादा होती है। हम सीमा को लांग कर नहीं बोल सकते हैं, क्योंकि हमारे संविधान के खिलाफ है।

अभिव्यक्ति की आजादी की उत्पत्ति

अभिव्यक्ति की आजादी की उत्पत्ति सर्वप्रथम इंग्लैंड में हुई थी। अभिव्यक्ति की आजादी को संवैधानिक  अधिकार के रूप में इंग्लैंड में सन 1689 को लागू किया गया था और इंग्लैंड में अभी भी यह लागू है। अभिव्यक्ति की आजादी में कहा जाता है, कि मनुष्य के सोच और विचार वह किसी के सामने भी प्रकट कर सकता है, उस पर कोई पाबंदी नहीं है। हर नागरिक यहां हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार स्वतंत्र होकर बोल सकता है। प्रिंट मीडिया को भी स्वतंत्र छापने का अधिकार अभिव्यक्ति के अधिकार के कारण ही मिला है।

यदि कोई व्यक्ति अभिव्यक्ति के अधिकार का उल्लंघन करता है, तो वह सजा का हकदार होगा। उसमें कही भी कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी, यह भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है। अभिव्यक्ति की आजादी सार्वभौमिक घोषणा बन गई है, इसके अनुसार कोई भी व्यक्ति अपनी राय व विचारों को सबके सामने प्रकट कर सकता है, लेकिन वह शब्दों की सीमा को नहीं लांग ना चाहिए।

अभिव्यक्ति की आजादी – लोकतंत्र का अधिकार

एक देश में वहां की लोकतांत्रिक सरकार अपने नागरिकों को विभिन्न अधिकार प्रदान करती है उनमें से एक अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार भी होता है।अगर चुनी गई सरकार शुरू में अपने मानकों पर खरी नहीं उतरती हैं तो वहां की जनता उस सरकार के खिलाफ आवाज उठा सकती है जो अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार में आती है।

अभिव्यक्ति की जरूरत क्यों है?

अभिव्यक्ति की आजादी की जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि केवल नागरिकों को ही नहीं हर देश को भी विकास की जरूरत होती है तो उसकी आवाज उस देश का नागरिक ही उठाता है इसलिए अभिव्यक्ति की आजादी का होना बहुत ही जरूरी है। हम किसी को डरा कर या धमका कर उसका मुंह बंद नहीं कर सकते हैं यदि ऐसा करेंगे तो देश के विकास में बाधा उत्पन्न होगी और देश आगे नहीं बढ़ सकेगा।

अभिव्यक्ति की आजादी के शब्द से ही चर्चाओं का दौर शुरू हो जाता है जिससे हम किसी भी विषय पर चर्चा कर सकते हैं और अपने विचार प्रकट कर सकते हैं।हम अपने देश की राजनीतिक व्यवस्था के बारे में भी चर्चा कर सकते हैं और खुलकर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं जिस पर कोई पाबंदी नहीं है, जिससे कि उस देश की सरकार को यह पता चल जाता है कि हम जो भी कदम उठा रहे हैं उसका जनता को पता है हम गलत कदम उठा रहे हैं या सही कदम उठा रहे।यदि किसी देश की सरकार गलत कदम उठा रही तो हम अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का प्रयोग कर हम उसके खिलाफ बोल सकते हैं और अपने देश को सही दिशा में ले जा सकते हैं।

अभिव्यक्ति की आजादी के दुरुपयोग             

अभिव्यक्ति की आजादी के दुरुपयोग भी बहुत देखने को मिले हैं। भारत जैसे देश में जहां सांस्कृतिक सौहार्द हमेशा बना रहता है, उस देश में ऐसे गद्दार भी पैदा होते हैं, जो अपने ही देश के खिलाफ बोलने में संकोच नहीं करते हैं।

पिछले कुछ ही दिनों पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर भारत तेरे टुकड़े होंगे का नारा दिया था। उस पर कटाक्ष करते हुए भारत-तिब्बत सीमा पर तैनात, जवान भारत की जवान बेटी खुशबू चौहान ने उसे बहुत ही अच्छा उत्तर दिया था।

निष्कर्ष

हर देश चाहे वह कोई सा भी देश हो अपने देश के नागरिकों को स्वतंत्र बोलने का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन संविधान में संशोधन करके इसको स्पष्ट करना चाहिए। जिससे कि लोगों को समाज में परिवर्तन लाने में मदद कर सके और कोई भी सामान्य कार्य में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं हो।

अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकारी इसलिए दिया जाता है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति अपने विचार प्रकट कर सकता है, जो एक बहुत ही अच्छा विकल्प है।

अंतिम शब्द

आज के आर्टिकल में हमने अभिव्यक्ति की आजादी पर निबंध (Essay On Freedom Of Speech In Hindi) के बारे में बात की है। उम्मीद करता हु, कि इस आर्टिकल में दी गयी जानकारी आपको अच्छी लगी होगी। यदि किसी व्यक्ति को इस आर्टिकल से सम्बंधित कोई सवाल है, तो वह हमें कमेंट में बता सकता है।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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