भारत कब आजाद हुआ था?

भारत कब आजाद हुआ था? इस प्रश्न का उत्तर प्रत्येक भारतीय को पता होना चाहिए क्योंकि भारत की आजादी के बाद ही भारत का असली स्वरूप देखने को मिलता है। आज हम जिस आजाद‌ और खुशहाल भरी जीवन के साथ अपना जीवन यापन कर रहे हैं, यह भारत की आजादी की वजह से ही संभव है।

जब भारत अंग्रेजों के गुलाम था, उस समय लोग अत्यधिक कठिन परिश्रम करते थें और अंग्रेजों की गुलामी करते थें। उस समय लोगों को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता था। इसीलिए आजादी का अर्थ संपूर्ण भारतीयों को पता होना चाहिए।

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अंग्रेजों की गुलामी के दौरान भारत की स्थिति अत्यंत खराब हो गई थी। उस समय लोग कुपोषण का शिकार हो जाते थे। भुखमरी की वजह से लोग मर जाते थे, अत्यंत गरीबी और भुखमरी फैलने से भारत का संपूर्ण ढांचा बिगड़ चुका था। परंतु जैसे ही भारत को आजादी मिली, धीरे-धीरे भारत ने प्रगति की।

आज दुनिया के प्रमुख देशों में भारत का नाम आता है। वर्तमान समय में भारत अत्यंत तेजी से बढ़ता हुआ एक प्रमुख और आकर्षक देश है। लेकिन इन सभी के पीछे अनेक सारे क्रांतिकारियों, वीरो, वीरांगनाओं और सेनाओं का बलिदान है। इन सभी के बलिदान की बदौलत ही आज हमें यह आजादी मिल पाई है।

भारत कब आजाद हुआ था?

भारत की आज़ादी

भारत 15 अगस्त 1947 के दिन आजाद हुआ था। इस दिन संपूर्ण भारत में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। सन् 1947 को इसी दिन ब्रिटेन का शासन भारत से समाप्त हो गया था। लगभग 200 से भी अधिक वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया था। इस दौरान भारत की अकूत संपत्ति और भारत का खजाना अंग्रेजों ने लूटकर इंग्लैंड भेज दिया था। अंग्रेजों ने अपने शासनकाल में भारत में अनेक सारे जुल्म ढाए और लाखों करोड़ों की संख्या में सैनिकों क्रांतिकारियों और आम नागरिकों को मौत के घाट उतार दिया।

भारत की आजादी का अमृत महोत्सव संपूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि इसी आजादी ने करोड़ों भारतवासियों की सूरत पर मुस्कान लाई थी। इससे पहले अंग्रेजों ने अपनी मनमर्जी से इस देश पर शासन किया था। भारत की सभ्यता, संस्कृति, समृद्धि और इतिहास को अंग्रेजों ने कुचल दिया था। सब कुछ तहस-नहस कर दिया था। भारत एक अत्यंत प्राचीन और संस्कृति सभ्यता वाला देश है, जो आजादी के बाद अपना रंग रूप प्रदर्शित कर रहा है।

आज के समय में हम भले ही आजादी का अमृत महोत्सव धूमधाम से मना रहे हैं लेकिन हमें इस बात का अंदाजा नहीं है कि यह आजादी हमें कैसे मिली? क्योंकि अंग्रेजों ने भारत पर लगभग 200 से अधिक वर्षों तक शासन किया था। भारत अंग्रेजों का गुलाम रहा था। इस दौरान अनेक सारे क्रांतिकारियों ने, सेनाओं ने, वीर योद्धाओं ने, यहां के लोगों ने, स्थानीय लोगों ने, अपना बलिदान दिया, अपना रक्त बहाया। अंग्रेजों ने लाखों और करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया। तब जाकर यह आजादी मिली है। इस आजादी के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से हर भारतीय को जाने चाहिए। तो आइए शुरू करते है।

भारत में ब्रिटिश शासन

अंग्रेजों ने लगभग संपूर्ण दुनिया पर अपना आधिपत्य स्थापित कर दिया था। अंग्रेजों ने अपनी व्यापार नीति के अंतर्गत सभी देशों में अपना शासन किया था। अंग्रेज जहां पर भी जाते हैं, जिस भी देश और दुनिया के कोने में जाते हुए व्यापार करने की बात करते और धीरे-धीरे वहां पर अपना आधिपत्य विस्थापित कर देते थे। भारत में भी ऐसे ही अंग्रेजों ने व्यापार के जरिए रास्ता बनाया और भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने भारत का और सीमित खजाना लूट कर ब्रिटेन भेज दिया था।

सबसे पहले भारत में अंग्रेजों ने सन 1600 ईसवी में ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत की थी। इस कंपनी का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार संबंध स्थापित करना था। अंग्रेजों ने उस समय भारत के तत्कालीन मुगल शासक जहांगीर से स्वीकृति लेकर इस कंपनी की शुरुआत की थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के अंतर्गत अंग्रेज भारत से मसाले, नील, रेशम, अफीम, कपास, कपड़े, पीतल इत्यादि कीमती और जरूरी वस्तुओं की खरीद फरोख्त करते थे और उनका निर्यात करते थें। धीरे-धीरे अंग्रेजों की नजर भारत की शासन व्यवस्था पर पड़ी और उन्होंने संपूर्ण भारत को लूटने और भारत पर राज करने की रणनीति बनाई।

अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के जरिए भारत पर अपना शासन जमाना शुरू कर दिया। लोगों पर अत्याचार करने शुरू कर दिए थे। हर तरह की लूटमार और शोषण करने लगे थे। अंग्रेजों ने ब्रिटेन से सेना बुलाई और यहां पर अपना शासन स्थापित कर दिया। कुछ समय शासन करने के बाद उन्होंने अंतिम मुगल शासक को भी देश निकाला दे दिया। अब अंग्रेजों के हाथ में पूरे भारत की कमान आ चुकी थी। संपूर्ण भारत के कोने कोने में अंग्रेजों ने अपनी ईस्ट इंडिया कंपनी की शाखाएं स्थापित कर दी और अपने शासक को बिठा दिया था।

संपूर्ण भारत में पहली बार भारतीयों ने इतने सफेद रंग के लोगों को देखा था। अंग्रेज पेंट और कमीज पहनते थे, जूते पहनते थे, तरह-तरह के बाल रखते थे, पेंट सूट पहनते थे। इस तरह का पहनावा देखकर यहां के लोग आश्चर्यचकित रह गए। धीरे-धीरे यहां के लोगों ने भी अंग्रेजों का पहनावा पहनना शुरू किया और वर्तमान समय में संपूर्ण भारत में लगभग सभी लोग ऐसा ही पहनावा पहन रहे हैं। अंग्रेजों ने तरह-तरह की बंदूकें और तरह-तरह के आधुनिक हथियारों का प्रयोग करके संपूर्ण भारतीयों को अपना गुलाम बना लिया।

अंग्रेजों के बढ़ते अत्याचार और भारत को गुलाम बनाने के बाद यहां के स्थानीय नेता, क्रांतिकारी, आंदोलनकारी और स्वतंत्रता सेनानियों ने धीरे-धीरे आंदोलन करना शुरू किया। देश के कोने कोने में विद्रोह होना शुरू हुआ और देखते ही देखते संपूर्ण देश से विद्रोह की आवाज उठने शुरू हुई। ऐसे में अनेक सारे संगठन और अनेक सारी पार्टियों और आंदोलन किए गए हैं। जिनकी वजह से ही आज हम आजाद है। हमारी आजादी में नेता, स्वतंत्रता सेनानी और प्रमुख विद्रोह और क्रांतिया शामिल हैं, जिन्होंने अंग्रेजों की नींव हिला दी थी।

अंग्रेजो के खिलाफ 1857 की क्रान्ति

अंग्रेजों के खिलाफ 1857 से पहले अनेक सारे छोटे-छोटे विद्रोह और क्रांतियां हुई थी, लेकिन उनसे अंग्रेजों को कोई खास आंच नहीं आई थी। इसीलिए अनेक सारे लोग और स्वतंत्रता सेनानी का अधिकारी लोग मिलकर 1857 में स्वतंत्रता संग्राम के तौर पर अंग्रेजों से आजादी लेने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध एक ऐसा विद्रोह किया, एक ऐसी क्रांति की जिसने अंग्रेजो की जड़ें हिला कर रख दी थी।

1857 में अंग्रेजों ने गाय की चर्बी से बने हुए कारतूस बनाने शुरू कर दिए, जिससे लोगों का गुस्सा और अधिक बढ़ गया और 1857 की क्रांति का एक विशाल रूप उत्पन्न हो गया। इस क्रांतिकारी में अनेक सारे स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारियों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी। इस क्रांति में अनेक सारे क्रांतिवीर स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए थें।

इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना

सन् 1857 ईसवी की क्रांति के बाद लोगों में गुस्सा उफान पर आ गया था। संपूर्ण देश के कोने-कोने से लोग अंग्रेजों के खिलाफ होने शुरू हो गए थे और 1857 ईस्वी की क्रांति में अंग्रेजों ने भी भारतीयों की ताकत देख ली थी। इसी बात को देखते हुए सन 1885 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना की गई। इसमें अनेक सारे बड़े नेता शामिल थे, जिसमें महात्मा गांधी भी शामिल थें। महात्मा गांधी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस के अंतर्गत अनेक सारे आंदोलन किए थे, जो कारगर साबित हुए थें।

इंडियन नेशनल कांग्रेस बनने के बाद महात्मा गांधी की छवि संपूर्ण देश में प्रचलित होने लगी और लोग महात्मा गांधी के साथ आजादी की लड़ाई में भाग लेने लगे। आजादी की लड़ाई जोर-जोर से मजबूती के साथ आगे बढ़ने लगी। इसी को देखते हुए अंग्रेजों ने अनेक बार महात्मा गांधी के आंदोलन में हिंसा की लोगों को मौत के घाट उतारा, अनेक क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी की सजा दे दी। फिर भी महात्मा गांधी ने अपने आंदोलन को जारी रखा और चंपारण, सत्याग्रह, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, जैसे अनेक सारे लोकप्रिय और कारगर साबित हुए आंदोलन किए थें।

प्रमुख क्रांतिकारी योद्धा

भारत की आजादी के लिए लाखों ही नहीं बल्कि करोड़ों क्रांतिकारी योद्धाओं, स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं ने अपना बलिदान दिया। अंग्रेजों ने हजारों स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी की सजा दे दी। लेकिन कुछ नाम आज भी लोगों की जुबां पर आते हैं, जो संपूर्ण भारत में लोकप्रिय है। लोग आज उनकी पूजा करते हैं। इन सभी क्रांतिकारियों ने बिना अपने घर परिवार की चिंता किए, अंग्रेजों से लड़ाइयां लड़ी भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

भारत की आजादी के लिए अपना बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों में चंद्रशेखर आजाद, वीर भगत सिंह, लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, वीर सावरकर, बटुकेश्वर दत्त, सूर्य सेन, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, औरोबिंदो घोष, गोपाल कृष्णा गोखले, महात्मा गांधी, निवेदिता, मातंगिनी, एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, रविंद्र नाथ टैगोर, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, जगदीश चंद्र बोस, इत्यादि अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों, आंदोलनकारियों और नवजागरण कर्ताओं ने आजादी का अलख जगाया और अपना बलिदान दे दिया। इनकी बदौलत ही आज भारत स्वतंत्र है और स्वतंत्रता से हर दिन प्रगति की ओर बढ़ रहा है।

आजाद हिंद फौज की स्थापना

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी की तरह देश की आजादी के लिए एक अलग रास्ता चुना और आजाद हिंद फौज की स्थापना की। आजाद हिंद फौज में देश के कोने कोने से युवाओं और युवतियों ने अपना योगदान दिया। आजाद हिंद फौज में लोगों को भर्ती किया गया और उन्हें ट्रेनिंग दी गई। आजाद हिंद फौज के लोगों को हथियार दिए गए। बंदूकें दी गई और उन्हें युद्ध लड़ने की कला सिखाई गई। आजाद हिंद फौज को उस समय अनेक सारे आसपास के देशों ने मान्यता दी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस को प्रधानमंत्री भी मान गया था।

महात्मा गांधी हमेशा से ही अहिंसा का पाठ पढ़ाते थें, इसीलिए वे बिना हिंसा के आंदोलन करते थे। उनके आंदोलन में हिंसा होने पर वे आंदोलन को वापस ले लेते थे, जिससे अंग्रेजों को कोई खास फर्क नहीं पड़ता था।

इसी बात को देखते हुए चंद्रशेखर आजाद, वीर भगत सिंह, वीर सावरकर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे क्रांतिकारी और वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने हिंसा का रास्ता चुना और अंग्रेजों को चुन-चुन कर मारना शुरू किया। इन स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दी। लेकिन इससे अंग्रेजों की नींव हिल गई। अंग्रेजी शासन में हड़कंप मच गया, जिसकी बदौलत ही आज हमें आजादी मिली है।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के अंतर्गत जापान के साथ गठबंधन किया था। जापान ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उस समय भारत का प्रधानमंत्री मान‌ लिया था और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सरकार को मान्यता भी दे दी थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत से बाहर रहकर भी अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ते रहे और अत्यधिक मजबूती के साथ आजाद हिंद फौज का विकास किया। जिससे अंग्रेजों में हड़कंप मच गया और अंग्रेजों को अपनी सत्ता बचाना काफी मुश्किल होने लगा।

महात्मा गांधी का सविनय अवज्ञा आंदोलन

अंग्रेजों ने भारत में नमक की महत्वता को देखते हुए एक नमक कानून बनाया था, जिसके अंतर्गत कोई भी भारतीय ना तो नमक बना सकता है और ना ही नमक बेच सकता है। इस नमक कानून का विरोध करने के लिए महात्मा गांधी ने अनेक तरह के कार्यक्रम आयोजित किए और 12 मार्च 1930 को साबरमती से दांडी तक पैदल चलकर समुद्र के पानी से नमक बनाकर अंग्रेजों का नमक कानून तोड़ दिया था, जिसके बाद संपूर्ण देश के कोने कोने में आंदोलन और विद्रोह की आग लगनी शुरू हो गई।

इतिहास में इस आंदोलन को नमक आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है। इस आंदोलन के बाद महात्मा गांधी को जेल भी जाना पड़ा था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद अंग्रेजों ने महात्मा गांधी को छोड़ दिया था। जेल से छूटने के बाद महात्मा गांधी ने फिर से स्वतंत्रता के कार्यक्रम शुरू किए और नए नए आंदोलन करने शुरू कर दिए। इस कार्यक्रम और आंदोलन के जरिए सरकारी शिक्षा व संस्थानों का बहिष्कार किया गया। विदेशी कपड़ों को जलाया गया। विदेशी सरकार की सभी नीतियों और नियमों का पालन नहीं किया गया।

अंग्रेजो के खिलाफ “भारत छोडो आन्दोलन”

अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान अनेक सारे कर और अत्याचार लोगों पर शुरू कर दिए थें। किसानों और मजदूरों पर तरह तरह के टैक्स लगा दिए थें, जिसे भर पाना उनके लिए अत्यधिक मुश्किल था। उस समय लोग भुखमरी से मर रहे थे और उन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा था। इसीलिए महात्मा गांधी ने “भारत छोड़ो आंदोलन” अंग्रेजो के खिलाफ शुरू कर दिया जिसमें अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर जोर दिया गया।

भारत छोड़ो आंदोलन 9 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था। इस आंदोलन के अंतर्गत महात्मा गांधी ने “करो या मरो” का नारा दिया था, जिससे अनेक तरह की हिंसा हुई लोगों ने हिंसा का मार्ग अपनाकर अंग्रेजों का विरोध करना शुरू कर दिया। इस आंदोलन के बाद अनेक सारे क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी और हजारों की संख्या में लोगों को मौत के घाट उतार दिया था‌ अंग्रेजी सरकार अपने शासनकाल के दौरान तरह तरह के टैक्स वसूलना शुरू कर दी थी, जिससे लोग भूखे मरने लगें।

द्वितीय विश्वयुद्ध का समय

एक तरफ संपूर्ण दुनिया पर ब्रिटेन का शासन था। संपूर्ण दुनिया लगभग अंग्रेजो के कब्जे में थी, अंग्रेज संपूर्ण दुनिया पर अपने पैर पसारे हुए थे। लोगों पर अत्याचार कर रहे थे, क्रांतिकारी आंदोलनकारी स्वतंत्रता सेनानी और विद्रोहियों को मौत के घाट उतार रहे थे। लोगों पर तरह-तरह के टैक्स लगाकर उनसे पैसा वसूल कर रहे थे। संपूर्ण दुनिया भर की धन संपत्ति और खजाना अपने देश भेज रहे थे। उसी समय दुनिया के 1 बड़े देश जापान में हिटलर शक्तिशाली हो रहा था। हिटलर को अंग्रेजों का शासन मंजूर नहीं था और उसने संपूर्ण दुनिया से अंग्रेजों का विनाश करने के लिए बहुत बड़ी सेना बनाई, तरह तरह के हथियार बनाए और अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध का आरंभ कर दिया।

उस समय भारत अंग्रेजों के अधीन था, इसलिए भारत ने भी द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लिया था। विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर इतना ताकतवर हो गया था कि संपूर्ण दुनिया पर अंग्रेजो का कब्जा होने के बावजूद भी ब्रिटेन को संपूर्ण दुनिया की बजाए अपने खुद के देश पर भी खतरा मंडराने लगा। इसी को देखते हुए अमेरिका बीच में आया और अमेरिका ने अपने गुप्त “परमाणु बम” को जापान के ‘हिरोशिमा और नागासाकी’ दो शहरों पर गिरा दिया, जिससे संपूर्ण सेना और पूरा जापान तहस-नहस हो गया। पहली बार दुनिया ने परमाणु बम देखा था और परमाणु बम की ताकत को जाना था।

अमेरिका के द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लेने से द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हो गया। लेकिन इस युद्ध में अनेक सारे भारतीयों ने भी अपना बलिदान दिया था। अंग्रेजों की हुकूमत से भारतीय सेना ने भी अंग्रेजों की तरफ से इस युद्ध में भाग लेकर वीरगति पाई थी। इस विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन की ताकत कमजोर पड़ गई, जिससे धीरे-धीरे अंग्रेजों ने संपूर्ण दुनिया से अपने पैर वापस किसने शुरू किए। उस समय भारत की भी आजादी का समय नजदीक आने लग गया।

भारत की आजादी

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद संपूर्ण दुनिया में अनेक सारा नुकसान हुआ, जिससे लोगों का जीवन यापन करना भी मुश्किल हो गया था। ऐसी स्थिति में अंग्रेजों को संपूर्ण दुनिया पर कब्जा करके रखना काफी मुश्किल हो रहा था, इसीलिए धीरे-धीरे अंग्रेजों ने संपूर्ण दुनिया से अपने पैर को वापस खींचना शुरू किया। एक तरफ अमेरिका भी इस बात पर जोर दे रहा था कि ब्रिटेन जल्द से जल्द पूरी दुनिया से अपना शासन वापस ले।

दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया आर्थिक तंगी से गुजर रही थी। पूरी दुनिया में अत्यधिक जन और धन का नुकसान हुआ था। पूरी दुनिया कमजोरी की राह पर खड़ी थी। इसीलिए अंग्रेजों को भी अपना शासन वापस लेने का फैसला करना पड़ा। उस दौरान अंग्रेजों को भारतीय स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी और विद्रोहियों का सामना करना पड़ता था। अमेरिका का दबाव भी चलना पड़ता था और आर्थिक स्थिति से भी गुजरना पड़ता था। इसीलिए ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को आजाद करने का फैसला लिया।

ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को आजाद करने का फैसला लिया, जिससे संपूर्ण भारत खुशी से झूम उठा। भारतीयों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि लगभग 2 से अधिक शताब्दियों से लगातार क्रांतिकारी, स्वतंत्रता सेनानी, विद्रोही और संपूर्ण भारतीय लोग अंग्रेजों से आजादी चाहते थे। अंग्रेजों से छुटकारा चाहते थे, अंग्रेजों ने अपने शासनकाल के दौरान लोगों पर अनेक सारे अत्याचार किए थे, जुल्म ढाए थे और लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसीलिए अंग्रेजों द्वारा भारत को आजाद करने की घोषणा पर संपूर्ण भारत की खुशी का ठिकाना नहीं रहा था।

भारत का बंटवारा

भारत को आजाद करने की घोषणा के साथ ही भारत के बंटवारे की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी क्योंकि उसे समय भारत के मुसलमानों के नेता मोहम्मद अली जिन्ना थे। जिन्होंने भारत को आजाद होने से पहले ही मुसलमानों के लिए एक अलग देश बनाने की बात कही, जिससे भारत के उस समय के मुसलमानों ने जोर पकड़ लिया और धीरे-धीरे यह बात बढ़ गई।

महात्मा गांधी इस बात का हमेशा विरोध करते थे, लेकिन इससे हिंसा हो गई। मुसलमान अलग देश बनाने की बात करते थे। अंग्रेजों ने भारत को सन 1948 में आजाद करने की घोषणा की थी, लेकिन उन्हें 1 वर्ष पूर्व 1947 में ही आजाद करना पड़ा, क्योंकि भारत में हिंदू मुस्लिम के संप्रदायिक दंगे होने शुरू हो गए थे।

उस समय भारत के वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने सन 1947 को 14 अगस्त को भारत का एक टुकड़ा अलग करके पाकिस्तान को अलग देश घोषित कर दिया और बाकी बचे हिस्से को स्वतंत्र भारत घोषित कर दिया। देश की आजादी के समय भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में एक बड़े नेता के रूप में मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान और पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के लोकप्रिय नेता थे।

भारत से 1 दिन पहले पाकिस्तान को आजाद घोषित किया गया था। इसीलिए हर वर्ष 14 अगस्त के दिन पाकिस्तान आजादी का अमृत महोत्सव बनाता है जबकि 15 अगस्त के दिन भारत आजादी का अमृत महोत्सव बनाता है।

स्वतंत्रता दिवस का महत्व

भारत को आजादी मिलने के बाद से लेकर आज तक हर वर्ष हमारे देश में 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जाता है। 15 अगस्त के दिन संपूर्ण भारत के सरकारी और प्राइवेट शिक्षण संस्थान और संस्थानों में हर्षोल्लास के साथ आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान अनेक सारे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, मिठाइयां बांटी जाती है, भारतीय सेना द्वारा परेड की जाती है। तरह तरह के कार्यक्रम और प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था लेकिन इस आजादी के पीछे लाखों लोगों का बलिदान था, हजारों और लाखों की संख्या में अंग्रेजों ने उन लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। अनेक सारे लोगों को फांसी दे दी गई थी, अनेक सारे लोग शहीद हो गए थे, उन लोगों को याद करने के लिए 15 अगस्त 1947 का दिन याद रखते हुए हर वर्ष 15 अगस्त के दिन आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जाता है।

अंग्रेजों के भारत में शासन स्थापित करने के बाद अंग्रेजों ने भारतीयों पर अनेक सारे अत्याचार किए थे, भारतीयों पर जुल्म ढाए थे, तरह तरह के टैक्स लगाए गए थे, लोग भुखमरी का शिकार हो गए थे, कुपोषण और भूख से लोग भरने लगे थे। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अनेक सारे भारतीय शहीद हो गए थे।

अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए अनेक सारे स्वतंत्रता सेनानी विद्रोही और आंदोलनकारी मारे गए थे। उन सभी की याद में उन सभी को याद रखने के लिए हर वर्ष भारत में 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस आयोजित किया जाता है।

स्वतंत्रता दिवस मनाने का अर्थ और महत्व यह है कि आने वाली पीढ़ी को इस बात का पता रहेगी। आज हम जितनी आजादी और समृद्धि के साथ जीवन यापन कर रहे हैं, वह आजादी हमें कैसे मिली है? उस आजादी के पीछे कितना खून बहा है? कितना बलिदान हुआ है? कितना संघर्ष था? क्या कुछ घटित हुआ था? यह सभी जानना जरूरी है।

इस आजादी का मतलब, महत्व और अर्थ आने वाली पीढ़ी और आने वाले भविष्य को जागना अत्यंत आवश्यक है। इसलिए हर वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव आयोजित किया जाता है। उस दिन सभी भारतीय गर्व से यह पर्व मनाते है।

FAQ

भारत कब आजाद हुआ था?

भारत 15 अगस्त 1947 के दिन आजाद हुआ था।

भारत किससे आजाद हुआ था?

भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ था।

भारत को आजादी कैसे मिली?

भारत को आजादी मिलने के पीछे हजारों और लाखों की संख्या में स्वतंत्रता सेनानी, आंदोलनकारी, क्रांतिकारी और विद्रोहियों का बलिदान है। अनेक सारे लोगों ने अपना बलिदान दिया था और तरह तरह के कष्ट सहे थे! तभी जाकर भारत को आजादी मिली है।

भारत का बंटवारा क्यों किया गया?

मुस्लिम नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए अलग देश बनाने के लिए पाकिस्तान नामक स्वतंत्र देश बना कर भारत का बंटवारा करना चाहा, जिस पर अंग्रेजों ने स्वीकृति दे दी।

निष्कर्ष

भारत को 15 अगस्त 1947 के दिन आजादी मिली थी, जिसके बाद अब तक हर वर्ष 15 अगस्त के दिन स्वतंत्रता दिवस के रूप में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जाता है। इस दिन ध्वजारोहण करके राष्ट्रगान गाया जाता है और आजादी के लिए लड़ने वाले सभी स्वतंत्रता सेनानी एवं वीर योद्धा को नमन किया जाता है, याद किया जाता है।

आज इस आर्टिकल में हमने भारत कब आजाद हुआ था? इसके बारे में विस्तारपूर्वक माहिति प्रदान की है आर्टिकल पसंद आये तो उसे लाइक और शेयर जरुर करें। आर्टिकल के सम्बंधित कोई भी सुझाव हो तो हमें कमेंट करके जरुर बताएं।

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