बालगोबिन भगत पाठ के प्रश्न उत्तर (कक्षा 10)

बालगोबिन भगत पाठ के प्रश्न उत्तर (कक्षा 10) | Balgobin Bhagat Class 10 Questions and Answers

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प्रश्न 1. बाल गोबिन भगत पाठ के लेखक कौन है और उन्होंने खेतिहर व गृहस्थ भगत जी को साधू क्यों कहा है?

उत्तर – बाल गोबिन भगत पाठ के लेखक लेखाकार श्री रामवृक्ष बेनीपुरी जी है और उन्होंने भगत जी को साधू इसीलिए कहा है क्योंकि भगत जी किसान व्यक्ति थे और खेती बाड़ी पेशा था। उनका परिवार बेटे और बहू से परिपूर्ण था, उनके पास सुन्दर मकान था।

इन सब के बावजूद वे सभी कार्य साधुओ वाले करते थे। उनकी नियमित दिनचर्या थी, वे प्रतिदिन नदी में स्नान करने जाया करते थे। उनका व्यवहार और आचरण सामान्य और सरल था। वे साधू के समान वस्त्र धारण करते और माथे पर चन्दन लगाते तथा मंत्रमुग्ध स्वरों वाला गीत गाया करते थे।

प्रश्न 2. बाल गोबिन भगत की वेश – भूषा और उनके व्यक्तित्व की विशेषताओ का उल्लेख कीजिये?

उत्तर – बाल गोबिन भगत जी (bal govind bhagat) की उम्र लगभग 60 वर्ष होगी, उनके बाल बिलकुल सफेद हो चुके थे। मध्यम कद और वस्त्र के नाम पर सिर्फ लंगोटी धारण करते थे, सर्दियों में सिर्फ एक कम्बल से उनका काम चल जाता था। सिर पर कनफटी टोपी पहना करते थे।

गले में तुलसी के जड़ो की माला धारण करते थे और माथा सदैव रामनंदी टीके से सुसज्जित रहता था। भगत जी हमेशा सच बोलते और सही का साथ देते चाहे सामने कोई भी व्यक्ति हो उनका मन सोने सा खरा था। हालांकि वो बेकार में ही किसी से बैर कभी मोल नही लेते थे।

प्रश्न 3. भगत जी किसे अपना आदर्श मानते थे और अपने आदर्श के प्रति वे किस प्रकार समर्पित थे?

उत्तर – भगत जी कबीर दास को अपना आदर्श मानते थे और उनके सीधे सादे पदो को भी ऐसे गाते थे कि वह सबसे उत्तम संगीत लगने लगता था। वह हर साल 4 कोस दूर कबीरपंथी मठ में अपना कमाया हुआ सारा अनाज, धन स्वयं लाद कर ले जाते और दान कर आते, मठ में भेंट चढ़ा आते और फिर मठ से जो भी प्रसाद के रूप में प्राप्त किया, उसे घर लाते, उसी से अपना और अपने परिवार का जीवन बसर करते।

कबीर के सिद्धांत उनके जीवन में पूरी तरह उतर चुका थे। सर्दी गर्मी बरसात बदल जाते लेकिन उनका मिजाज कभी नहीं बदलता।

प्रश्न 4. बाल गोबिन जी की दिनचर्या में ऐसी क्या विशेष बात थी कि लोग आश्चर्यचकित हो जाते थे?

उत्तर – कार्तिक के महीने में जब प्रभातिया आरम्भ होती तब वे गाँव से दो मील की दूरी पर स्थित नदी में तडके स्नान करने जाया करते थे। अपना कमाया हुआ धन कबीर पंथी मठ में दे आते वहां से जो प्रसाद पाते वही अपने घर परिवार के लिए उपयोग करते। मौसम कैसा भी हो, वह हमेशा गुनगुनाया करते थे। साठ साल की उम्र में भी सिद्धांतो और नियमों के बहुत पक्के थे भगत जी। यह सब देखकर सभी आश्चर्य से भर जाते थे।

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प्रश्न 5. अपने एकलौते बेटे की मृत्यु पर भगत जी की क्या प्रतिक्रिया थी उनपर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर – भगत जी अंदर से टूटे हुए थे लेकिन अपना दर्द किसी को नही दिखा रहे थे। उन्होंने बेटे के शव को घर के आंगन में पड़ी चटाई पर लिटा दिया और उसके शरीर को सफेद कपड़े से ढंक दिया। फूल और तुलासी के पत्ते बिखेर कर वही शव के पास बैठ गए और ऐसी तल्लीनता के साथ राग शुरू किया, सभी की आंखे भर आई।

पहले जब भगत जी गीत गाते थे तो प्रकृति भी झूम उठती थी। वही भगत जी आज शोक में गीत गाए जा रहे थे और वहा मौजूद सभी लोगों से उत्सव मनाने को कह रहे थे। कह रहे थे कि आज यह नश्वर शरीर प्रभु से जाकर मिलेगा, इसीलिए दुःख में रहने का कोई कारण नहीं है सब लोग खुशियां मनाओ।

प्रश्न 6. पुत्र की मृत्यु के बाद उन्होंने बहू के लिए क्या निर्णय लिया?

उत्तर – बहू भगत जी के साथ रहकर उनकी सेवा करना चाहती थी लेकिन भगत जी ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते थे। उन्होंने बहू को उसके भाई के साथ भेज दिया और उसके भाई को आदेश दिया कि “इसका पुनर्विवाह करा देना”। वह नहीं चाहते थे कि बहू उनके लिए अपना जीवन अकेले निर्वाह करें, वह स्वार्थी कदापि ना थे।

प्रश्न 7. “इसका पुनर्विवाह करा देना” यह वाक्य भगत जी के चरित्र का कौन सा पक्ष दर्शाता है?

उत्तर – बाल गोबिन भगत ने अपनी बहू से ही बेटे का अंतिम कर्म कराया। विधवा बहू को दुबारा शादी करने का आदेश भी दिया जो कि उस समय की सामाजिक मान्यता के विपरित थी। इससे यह पता चलता है कि वे समाज की कुरीतियों पर तथा गलत मान्यताओं को नही मानते थे।

प्रश्न 8. धान रोपाई के समय भगत जी के स्वर से कैसे सारा वातारण बदल जाता था, पाठ के अनुसार लिखिए?

उत्तर – वह दृश्य बड़ा ही सुन्दर होता है जब आषाढ़ के महीने धान रोपने का समय होता हैं, रिमझिम बारिश में सभी किसान खेत रोपने में लगे होते हैं। कहीं किसान द्वारा हल चलाए जाते हैं तो कहीं धान के पौधो की खेत में रोपाई हो रही हैं। बच्चे बारिश में झूम रहे है और पानी से भरे खेतो में कूद रहे हैं और घर की महिलाएं अपने किसान पतियों के लिए खाना (कलेवा) लेकर खेत की मेड़ पर बैठकर प्रतीक्षा कर रही होती हैं।

वही भगत जी भी अपने खेतों में रोपनी करने में व्यस्त होते जब आसमान में काले बदलो का संग्रह होता हैं। ठंडी पुरवइया की हल्की हल्की बयार बह रही होती है तब कीचड़ से सने बाल गोबिन भगत जी कबीर के जो मधुर पद गाते है, उससे सभी का मन प्रसन्न हो उठता है।

बच्चे उनके मधुर गान पर थिरक उठते है, औरतें भी हल्के हल्के स्वर में गुनगुनाने लगती है, हल चलाने वाला किसान जब पैर उठाता तो लगता वह भगत जी का साथ देने के लिए ताल से ताल मिलाने के लिए ही पैर उठा रहा है। ऐसा प्रतीत होता जो लोग रोपाई कर रहे हैं। वह वीणा बजाने लगे हैं, उनकी उंगलियां कुछ इस क्रम में चलने लगती।

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प्रश्न 9. पाठ के आधार पर भगत जी के गायन की क्या विशेषता थी, अपने शब्दो में लिखिए?

उत्तर – भगत जी के गायन में कुछ ऐसा जादू था की प्रकृति भी उनके संग उनके गान में बह चलती। आषाढ़ मास का दृश्य बड़ा ही मन मोहने वाला होता है जब धान के रोपे का समय होता हैं, मद्धिम वर्षा में सभी किसान खेत की रोपनी में मशगूल होते हैं। कहीं हल चल रहे है तो कही धान के पौधो को रोपा जा रहा है, बच्चे बारिश में कीचड़ में कूद रहे है। आनन्द उठा रहे है और खेत पानी से लबालब भरे है, घर की महिलाएं अपने किसान पतियों के लिए कलेवा लेकर मेड़ पर बैठी उनकी राह देख रही होती हैं।

वही भगत जी भी अपने खेतों में रोपनी कर रहे होते जब आसमान में बादलो का संग्रह होता हैं, ठंडी पुरवइया की बयार बह रही है तब भगत जी के कंठ से कबीर के जो मधुर पद निकलते उससे सभी झूम उठते। बच्चे उनके संगीत पर नाच उठते, औरतें भी धीरे धीरे गुनगुनाने लगती, हल चलाने वाला व्यक्ति जब पैर उठाता तो लगता मानो वह भगत जी का साथ देने के लिए ताल से ताल मिलाने के लिए ही पैर उठा रहा है। ऐसा प्रतीत होता जो लोग रोपाई कर रहे हैं, वह वीणा बजाने लगे हैं उनकी उंगलियां कुछ इस क्रम में चलने लगती।

भादो में जब चारो ओर घना अंधेरा छाया होता, सब सारा संसार गहरे आगोश में सो रहा होता उस समय भी भगत जी का संगीत सजीव होता।

प्रश्न 10. भगत जी कबीर को अपना आदर्श मानते थे, उनकी अपार श्रद्धा थी कबीर के लिए, इसके क्या कारण रहे होंगे अपने अनुसार में लिखिए?

उत्तर – कबीर सदैव ईश्वर की भक्ति ने लीन रहते थे, उनके लिए पदो की रचना किया करते थे। वे भक्तिकाल में निर्गुण शाखा के रचनाकार थे। वे आदर्श पूर्ण और सादा जीवन में विश्वास करते थे, वे मूर्तिपूजा के विरोधी रहे और समाज में व्याप्त बुराइयों का सदैव विरोध किया कबीर का मानना था कि कुछ भी प्राप्त करना हो तो अपने पुरुषार्थ से करो ना कि किसी से मांग कर। इसीलिए भगत जी का उनके प्रति अगाध आस्था, प्रेम और समर्पण था।

प्रश्न 11. उनकी मृत्यु के समय की परिस्थियो का वर्णन कीजिए?

भगत जी अब बूढ़े हो चले, शरीर भी साथ नही देता किंतु अपनी दिनचर्या में उन्होंने कोई बदलाव नहीं आने दिया।
हर वर्ष ही 30 कोस दूर गंगा स्नान करने जाना पैदल ही जाया करते थे, यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
इस साल भी बिना कुछ खाए पिए उपवास रखकर गंगा स्नान करने पहुंचे वापस लौटते समय गाते बजाते हुए लौटे। थकान तो थी ही लेकिन उपवास का नियम नहीं तोड़ा ,हां प्यास लगने पर पानी अवश्य पी लेते।

कई लोगों ने उन्हें सलाह दी कि उन्हें अब धर्म-कर्म छोड़कर आराम करना चाहिए। लेकिन भगत जी टस से मस ना हुए वे हंसकर सब की बातों को अनसुना कर देते थे। लौटने के बाद भी उनकी प्रतिदिन की दिनचर्या जारी रही। शाम के समय फिर से उन्होंने मधुर संगीत गाना शुरू किया। लेकिन सुबह उनका संगीत भी समाप्त हो चुका था और वो भी। आस पास के लोगो ने जब उनका गीत नही सुना तो पास गए। पास जाकर पता चला की बाल गोबिन भगत जी नही रहे, बचा है तो सिर्फ उनका बेजान शरीर।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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