परी के वरदान की कहानी

परी के वरदान की कहानी | Angel Boon Story In Hindi

पुराने समय की बात है। एक बार एक गांव में जगिया नाम का किसान अपनी पत्नी ममता के साथ रहता था। जगिया पूरे दिन खेतों में मेहनत करके शाम को अपनी फसल शहर में बेचकर अपने घर का गुजारा करता था। ममता भी अपने पति जगिया का हाथ बटाती थी। उनकी जिंदगी अच्छे से गुजर रही थी। एक दिन उनके घर में बेटी का जन्म हुआ, जगिया और ममता बहुत खुश थे।

उन्होंने अपनी बेटी का नाम मनु रखा, सब ठीकठाक चल रहा था। लेकिन एक दिन अचानक जगिया की तबियत बिगड़ गई। डॉक्टर ने बताया कि जगिया को हैजा बीमारी हो गई है। जगिया ने कुछ दिन मुश्किल से बीमारी में निकाले और एक दिन जगिया की मौत ही गई।

ममता जगिया को इस प्रकार देख रोने और चिल्लाने लगी। अब ममता बहुत अकेली और गरीब हो गई। लेकिन उसने खुद को संभाला और अपने दुःख से उबर कर खेतों में काम करना शुरु किया। उसके दिन रात मेहनत करने के बाद भी वह केवल दो वक्त का खाना ही जुटा पाती थी।

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Image: Angel Boon Story In Hindi

इस तरह से वक्त बीतता गया और 15 साल बीत गए। अब ममता बूढ़ी हो गई और मनु बड़ी हो चुकी थी। मनु ने स्कूल जाना शुरू कर दिया।

एकदिन मनु स्कूल से वापस आकर अपनी माँ से कहती है “माँ आपको पता है आज मेरी सहेली मीना का जन्मदिन था, उसकी माँ ने उसे स्मार्टफोन दिया है। माँ मेरा भी जन्मदिन आने वाला है, आप भी मुझे स्मार्टफोन दोगे क्या?”

उसकी माँ ने निराश होकर कहा- “बेटी तुम्हे तो पता है मैं तुम्हारी फीस भी मुश्किल से भर पाती हूँ, स्मार्टफोन कहाँ से लाऊंगी। मनु दुखी मन से वहाँ से चली जाती है। कुछ दिन बाद मनु अपनी माँ के पास आती है।

माँ- क्या हुआ मनु तुम इतनी उदास क्यों हो?
मनु- कुछ नहीं।
माँ- कुछ तो हुआ है वरना तुम्हारा चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है?
मनु कहती है- माँ हम इतने गरीब क्यों है, हमारे पास अच्छे कपड़े और अच्छा घर क्यों नही है और मेरे पापा क्यों नहीं है?
माँ कहती है- बेटी आज तुम ये सारे बातें क्यों बोल रही हो, हम गरीब है ये तो ऊपर वाले की मर्जी है।

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मनु कहती है- माँ तुम हमेशा ऊपर वाले का बहाना करती हो, मेरी सारी सहेलियों के पास अच्छे-अच्छे कपड़े और महंगी चीजें है और मेरे पास कुछ नहीं, आपने आजतक मेरे लिए दो वक्त के खाने के अलावा किया ही क्या है। आपकी वजह से में भी गरीब हूँ, आप किसी काम की नहीं हो, मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं करती हो।

ऐसा कहकर मनु वहाँ से रोकर भाग जाती है और एक पेड़ के नीचे जाकर रोने लगती है और कहती है “हे भगवान! आपने हमारे साथ ऐसा क्यों किया? आप हम जैसे गरीबों की मदद क्यों नहीं करते हो? और वो फिरसे जोर-जोर से रोने लगती है।

उसी समय परीलोक से निकलकर माया परी आसमान में उड़ रही थी तभी उसने मनु की सारी बातें सुन ली।

माया परी नीचे उतरकर मनु से कहती है कि बेटी तुम्हें रोना नहीं चाहिए अमीर या गरीब होना ये सब तो नियति का खेल है। इसे कोई नहीं बदल सकता है। तुम रोना बन्द करो।

मनु परी से कहती है कि मेरी माँ मेरी कोई भी इच्छा पूरी नहीं कर पाती है और हम हमेशा गरीब ही रहेंगे। मनु फिर से रोने लगती है।

मनु को रोता देख परी मनु से कहती है तुम रोना बन्द करो और मेरी बात ध्यान से सुनो। मैं तुम्हें एक वरदान देती हूं कि तुम्हारी माँ जब-जब रोयेगी तो उसके आंसू मोतियों में बदल जाएंगे और उन्हें बेच कर तुम अमीर बन जाना। लेकिन एक बात हमेशा याद रखना कि अगर तुम कभी रोई तो तुम पहले जैसी स्थिति में वापस आ जाओगी।

परी की बात सुनकर मनु खुशी-खुशी घर चली जाती है और अपनी माँ को भला बुरा कहती है कि माँ तुम दुनिया की सबसे बुरी माँ हो, तुम कभी मेरे बारे में नही सोचती हो। सदैव अपने बारे में सोचती हो।

ऐसा सुनने के बाद मा की आंखों में आंसू आ जाते है और माँ जोर-जोर से रोने लगती है। जैसे ही माँ के आंसू जमीन पर गिरते है, वो कीमती मोतियों में बदल जाते है। मनु ये सब देख कर बहुत खुश हुई और उन मोतियों को लेकर शहर में बेच आई।

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अब ये काम रोज का हो गया था। मनु रोज अपनी माँ को रुलाती और मोतियों को बेचकर महंगे कपड़े और महंगी चीजे आदि सब खरीद लेती थी।

अब मनु और उसकी माँ काफी अमीर हो गए थे। मनु रोज बाहर घूमने जाती और महंगे महेंगे फोन आदि खरीदती। अब धीरे-धीरे उसे महंगी वस्तुओं की आदत सी हो गई।

एक दिन मनु की माँ बहुत बीमार हो गई, वो खाँसने लगी। तभी उसने मनु को आवाज लगाई की बेटी जरा यहाँ आओ। मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।
मनु बोली क्या हुआ माँ? बोलो और थोड़ा जल्दी बोलना। मुझे अपने दोस्तों के साथ घूमने जाना है।

मां- “बोली बेटी मुझे लगता है कि मेरा अंत आने वाला है, अब मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।”

मैं तुम्हे बताना चाहती थी कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं और तुम मेरी और तुम्हारे पिता की इकलौती खुशी और सबसे खास हो। बेटी मुझे माफ़ करदो। क्योकि में तुम्हे ऐशोआराम की जिंदगी नहीं दे पाई। मैंने तुम्हे पालने के लिए बहुत मेहनत की। लेकिन अफसोस की मैं असफल रही। इतना कहकर माँ जोर-जोर से रोने लगी।

ये सब सुनकर मनु का दिल भर आया और उसकी आँखों से आंसू बहने लगे। जैसे ही उसके आंसू गिरे, सबकुछ पहले जैसा हो गया। वहीँ गरीबी और टूटा फूटा घर। मनु अपनी माँ के पैरों में गिरकर रोने लगी और बोली- “माँ मुझे माफ़ कर दो। मैने तुम्हे बहुत दुःख दिया है और बहुत रूलाया है। मुझे माफ़ कर दो। अब कोई भी मोती मेरे लिए आपके आंसुओ से बढ़कर नही है। इतना कहकर मनु अपनी माँ को गले से लगा लेती है।

सीख: माता-पिता की तुलना किसी भी मोतियों से नहीं की जा सकती है।

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