थ्री लिटिल पिग्स स्टोरी

Three Little Pigs Story in Hindi: नमस्कार दोस्तों, आज इस पोस्ट के माध्यम से तीन सुवरों की कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं। इस कहानी के कई संस्करण प्रस्तुत किये जा चुके है। लेकिन इस पोस्ट में आपको नया संस्करण प्रस्तुत किया जा रहा है।

Three Little Pigs Story in Hindi
Image: Three Little Pigs Story in Hindi

इस कहानी में तीन नन्हे सूअर कई सारी वस्तुओं और पदार्थों से मिलाकर एक घर बनाते हैं और उस घर में रहते हैं। तभी कहीं से एक खूंखार और भूखा भेड़िया उन तीनो सूअरों को खाने के लिए आ जाता है। क्या उस भेड़िये से सुअर अपनी रक्षा कर पाते हैं, इस कहानी में जानेंगे।

थ्री लिटिल पिग्स स्टोरी | Three Little Pigs Story in Hindi

बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में एक सूअर माँ रहती थी, उसके तीन बेटे थे। एक दिन सुअर माँ ने अपने तीनों बेटों को बुलाया औऱ कहा कि बेटा अब तुम लोग इतने बड़े हो गए हो कि अब अपनी जिम्मेदारी समझ सकते हो और अब तुम लोग बाहर निकलो और देखो कि संसार कितना बड़ा है, क्या हो रहा है इस संसार मे।

तीनों सुअर माँ की बात मानकर घर से निकल पड़े, आगे चलकर उन्हेंने एक नदी पार की। दूसरे जंगल में प्रवेश कर चुके थे के साथ ही वह बहुत थक चुके थे। उन्होंने आराम करने को सोचा और एक पेड़ की छाया में आराम करने के लिए बैठ गए। वे अपने जीवन के विषय मे चर्चा करने लगे।

एक सूअर बोला अब हमें अलग-अलग हो जाना चाहिए और अपने जीवन का लक्ष्य अलग होकर तय करना चाहिए।

दूसरे सूअर को यह बात अच्छी लगी और इस बात से सहमत हो गया। परंतु तीसरे सूअर को यह बात जमी नहीं। वह इस बात से सहमत न था। उसने कहा हम एक साथ भी रह कर अपने जीवन का लक्ष्य तय कर सकते हैं। अपनी राह पर चल सकते हैं, क्यों न हम एक साथ ही रहे।

दोनों सूअरों ने पूछा “क्या यह सम्भव है।”

तीसरा बोला, “हां बिल्कुल हम एक स्थान पर तीनों अलग-अलग घर बनाएंगे, अलग-अलग अपने लक्ष्य को तय करेंगे और अलग-अलग मार्ग पर चलेंगे। हमारे खाने पीने का सामान भी अलग होगा परंतु हम एक साथ रहेंगे तो मुसीबत आने पर हम एक दूसरे की मदद भी कर सकते हैं और एक साथ खड़े रहेंगे, उस मुसीबत को हराने के लिए।

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इस बात से दोनों सूअर सहमत हो गए और उन्होंने अपने लिए घर बनाना शुरू कर दिया। पहले सूअर ने घर बनाने के लिए भूसे का इस्तेमाल किया। उसने सोचा यदि भूसे से घर बनाएंगे तो जल्दी घर बन जाएगा और मेहनत भी बहुत कम लगेगी।

उसने भूसे का घर बनाया और वह जल्दी तैयार हो गया, वह अब अपने घर में आराम से रहने लगा।

दूसरे सूअर ने सोचा थोड़ा सा मजबूत लकड़ी का घर बनाया जाए। उसने सारी लकड़िया इक्कठा की और लकड़ी का घर बनाकर रहने लगा। थोड़ी सी मेहनत और थोड़ा सा समय ज्यादा लगा लेकिन कुछ हद तक ठीक था। अब वह भी अपने घर में आराम से रहने लगा।

लेकिन तीसरे सूअर ने काफी विचार और विमर्श करने के बाद अपने घर को ईटों से बनाने का निर्णय किया और उसने अपने घर बनाने की शुरुआत कर दी। थोड़ा समय ज्यादा लगाना था और मेहनत भी अधिक लगनी थी। लेकिन वह अपने घर को मजबूत बनाना चाहता था।

उसे अपना घर बनाने में काफी दिन लग गए। यह देख कर बाकी के दोनों सुअर उसका मजाक उड़ाते थे, उसे अन्य बातों में उलझाते थे, जिससे कि वह काम न कर सके। लेकिन तीसरा सूवर अपने काम में लगा रहा और अंत तक उसने अपना ईटों का घर बना लिया।

उसका घर बाकी के दोनों चोरों के घर से अत्यंत सुंदर लग रहा था और मजबूत भी था। वे तीनों सूअर बडे मजे से और खुशी से अपने-अपने घर में रह रहे थे, उस स्थान पर वह बहुत खुश थे। उन्हें वहां पर किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं थी, उन्होंने अपने जीवन के लक्ष्य को भी तय कर लिया था और अपने काम पर भी लग गए थे। परंतु एक दिन उनके लिए संकट का दिन था। कहीं से एक भेड़िया उनके घरों की ओर टहलते हुए आ गया। उसने देखा कि तीन सूअर यहां पर हैं, यह देख कर उसके मुंह में पानी आ गया।

भेड़िया पहले सूअर के घर गया और दरवाजे से खड़े होकर आवाज दी। अंदर सुअर गहरी नींद में सो रहा था। लेकिन उसके आवाज देने से जागकर पूछा दरवाजे पर कौन है? भेड़िए ने जवाब दिया, “मुझे अंदर आने दो” सूअर समझ गया बाहर कोई जंगली और खतरनाक जानवर है। वह डर गया, उसने दरवाजा नहीं खोला।

इस बात से भेड़िया क्रोधित हुआ और उसने पहले सूअर के घर को गिराने की धमकी दी। यह सुनकर सूअर अत्यधिक डर गया। भेड़िए ने उसके भूसे के बने घर को गिरा दिया। सूअर भागता हुआ दूसरे सूअर के घर गया, जो लकड़ी का बना हुआ था और उसके घर में जाकर छुप गया।

पहला सूअर इतना डर गया था कि वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। दूसरा सूअर कुछ पूछता इसके पहले भेड़िया दूसरे सूअर के घर के दरवाजे पर आकर दरवाजा खोलने को कहता है।

दरवाजे पर भेड़िए की आवाज सुनकर पहले सूअर ने दूसरे सुअर से कहा दरवाजा मत खोलना, दरवाजे पर खतरनाक भेड़िया है, जो हमें खा जाएगा।

भेड़िया इस बार अत्यधिक क्रोधित होकर चिल्लाया “तुम क्या सोचते हो, इस लकड़ी के बने घर से तुम बच जाओगे। मैं अभी लकड़ी के घर को तोड़ दूंगा और उसके बाद मैं तुम्हें खा जाऊंगा। अभी बच पाओ तो बच लो। ऐसा कहकर वह लकड़ी के घर को तोड़ने लगा।

इसी प्रकार से दोनों सूअर भेड़िए के चंगुल से बचकर भागे और तीसरी सूअर के घर में जाकर घुस गए, उन दोनों सूअरों ने तीसरे सूअर से सारी बात बताई।

तीसरे सुअर ने कहा तुम लोग डरो मत। यह घर ईटों से बना है और अत्यंत मजबूत भी है। वह इसे तोड़ नहीं पाएगा।

अब भेड़िया तीसरे सूअर के घर के दरवाजे पर आकर कहता है कि दरवाजा खोलो तीसरा सूअर अत्यधिक निडर होकर कहता है “नहीं मैं दरवाजा नहीं खोलूंगा।”

भेड़िया जोर जोर से चिल्ला कर कहता है “तुम क्या सोचते हो, इस घर से बच जाओगे। मैं अभी इस घर को तोड़कर तुम लोगों को खा जाऊंगा।”

भेड़िए ने उस घर को फूंक मारकर उड़ाने का प्रयास किया परंतु असफल रहा। फिर उसने अपने पंजों से घर को गिराने का प्रयास किया। परंतु वह ईटों का बना है, पंजे फूंक से कहां टूट व उड़ सकता है। लेकिन भेड़िया कहां हार मानने वाला था। उसने घर में बनी चिमनी के रास्ते से घुसने की योजना बनाई।

चिमनी के रास्ते से अंदर जाने के लिए छत पर चढ़ा उसकी चलने की आवाज सूअरों को महसूस हुई। दोनों सूअर डर के मारे कांपने लगे। परंतु तीसरे सूअर ने अपनी बुद्धिमानी से एक योजना बनाई, उसने चिमनी के ऊपर पानी को उबाल कर रख दिया। पानी इतना गर्म था कि यदि कोई भी उसमें गिरता तो वह मर जाता।

भेड़िए ने जैसे ही चिमनी के रास्ते से कूदा, वह उबलते हुए पानी में जा गीरा और वह उसी स्थान पर मर गया। इस प्रकार तीसरे सूअर की बुद्धिमानी और निडरता से तीनों सूअरों की जान बची और वह अत्यधिक खुश हुए।

दोनों सूअर को बड़ा पछतावा हुआ और वह शर्मिंदा थे कि उन्होंने तीसरे सूअर का अत्यधिक मजाक बनाया था, जब वह अपने ईटों के घरों को बना रहा था और उन्होंने तीसरे सुअर से माफी मांगी। तीसरा सूअर बुद्धिमान और समझदार था, उसने दोनों सूअरों को माफ कर दिया और अपनी ईटों से बने घर में दोनों सुवरों को रहने के लिए बुला लिया। अब वह तीनो भाई आराम से अपने घर में रहने लगे और एक साथ हंसी खुशी से जीवन व्यतीत करने लगे।

इस कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें एकजुट होकर रहना चाहिए और कभी भी मेहनत से अपने आप को पीछे नहीं हटाना चाहिए। यदि तीसरा सूअर भी जल्दी से भूसे या लकड़ी का घर बनाता था तो तीनों सूअर भेड़िए का भोजन बन जाते।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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