अदरक की खेती कैसे करें, पूरी जानकारी

अदरक की खेती कैसे करें, पूरी जानकारी (Adrak ki Kheti Kaise Kre): नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि अदरक कि खेती (Adrak ki Kheti) के बारे में। यदि आप आप अदरक (Ginger) की खेती के बारे में जानना चाहते है तो आप सही जगह पर आये हैं। रबी की फसल काटने के बाद आप अदरक की खेती (Farming) कर सकते हैं। अदरक की मांग (Demand) बाजार में अधिक होती है। इससे आपको अच्छा मूल्य प्राप्त हो सकता है।

Adrak ki Kheti Kaise Kre

यदि आप अदरक की खेती (Adrak ki Kheti) करते है तो आप बहुत ही कम खर्चे में अधिक आमदनी कमा सकते है। यदि आप अदरक की खेती कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताये गए तरीकों (Methods) से करते है तो आपको बहुत ही अच्छी फसल प्राप्त हो सकती है। अदरक की तीन प्रकार की किस्म की खेती हमारे देश में की जाती है जो सुप्रभात, सुरुची और सुरभी है।

भारत में अदरक की खेती (Adrak ki Kheti) प्रमुख मसालों की खेती में से एक है। अदरक का उपयोग हर जगह पर होता है। अदरक का प्रयोग मसाला (Spice), औषधियों और कई प्रकार की सामग्री बनाने में किया जाता है। इसका उपयोग वैदिक काल से चला आ रहा है। अदरक का प्रयोग सर्दियों में खांसी और जुकाम के इलाज में भी किया जाता है और इसके साथ ही इसका उपयोग खुशबू बढ़ने के लिए आचार और चाय में भी किया जाता है। अदरक का प्रयोग सौन्दर्य सामग्री में भी किया जाता है।

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अदरक की खेती कैसे करें, पूरी जानकारी (Adrak ki Kheti Kaise Kre)

अदरक की खेती (Adrak ki Kheti):

भारत में कई तरह की मसालों की खेती की जाती है। इन मसालों की खेती में से अदरक की खेती प्रमुख स्थान पर आती है। वैदिक काल से अदरक का प्रयोग साग-सब्जी, आचार, चाय, चटनी और भोजन सामग्री में किया जाता है और इसके साथ ही कई प्रकार की महत्वपूर्ण ओषधियों में भी अदरक का प्रयोग होता है। अदरक को सुखाकर (Dry) सोंठ (Acne) बनाई जाती है। आजकल अदरक (Ginger) की खेती में विस्तार देखा जा रहा है।

अदरक की खेती के लिए जलवायु:

अदरक की खेती के लिए ऐसे स्थान बहुत अच्छे होते हैं जहां पर वातावरण नम हो और फसल के वृद्धि काल में 50 से 60 सेमी. वार्षिक वर्षा हो। अदरक की खेती (Ginger Farming) के लिए ऐसी भूमि होनी चाहिए जहां पर पानी नहीं ठहरता हो और छाया हो। अदरक की खेती गर्म और आद्रता (Humidity) वाले स्थानों पर की जाती है। इसकी खेती के लिए औसत तापमान 25 डिग्री सेंटीग्रेड और गर्मियों में 35 डिग्री सेंटीग्रेड अच्छा रहता है।

भूमि को चयन और तैयार करना:

आप चाहे तो किसी भी प्रकार की तरह की भूमी पर अदरक की खेती कर सकते हैं लेकिन उचित जल निकासी वाली दोमट भूमी अदरक (Ginger) की खेती के लिए उचित (Suitable) मानी जाती है। अदरक की खेती के लिए भूमी का पी. एच. (PH) मान 5.6 से 6.5 तक उपज (Yield) के लिए अच्छा रहता है। एक ही भूमी पर बार बार फसल से जनित रोग एवं कीटो में वृद्धि होती है। इसके लिए आपको फसल चक्र को अपनाना चाहिए।

इसकी खेती (Crop) के लिए मार्च-अप्रैल महीने में मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई कर खेत को धूप में खुला छोड़ दें। इसके बाद मई महीने में रोटावेटर या डिस्क हैरो से जुताई (Tillage) कर मिट्टी को भुरभुरी कर देते है। इसके बाद गोबर की सड़ी खाद आदि खेत में डालकर खेत की जुताई कर समतल कर लिया जाता है। सिंचाई के लिए खेत को छोटी-छोटी क्यारियों (Parts) में बाँट लेना चाहिये।

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अदरक की किस्म:

अदरक की किस्मों को गांठ के रंग-रूप एवं अदरक में रेशों और वानस्पतिक भागों की वृद्धि के आधार पर विभाजित किया गया है। भारत में आमतौर पर स्थानीय किस्मों का ही उत्पादन किया जाता है।

सुप्रभा

अदरक की इस किस्म में फुटाव अधिक मात्रा में होता है। इसके प्रकन्द लंबे अण्डाकार सिरों वाले, चमकीले भूरे रंग के होते हैं। जिनमें तेल 1.9 प्रतिशत, रेशा 4.4 प्रतिशत और ओलेरिओसिन 8.91 प्रतिशत मात्रा होती है सुप्रभा किस्म पर्वतीय क्षेत्रों के लिए सर्वोतम है।

सुरुची

यह अदरक की अधिक उपज देने वाली किस्म है। इसके प्रकन्द हरापन लिए पीले रंग के होते हैं जिनमें रेशा 3.8 प्रतिशत, तेल 2 प्रतिशत और ओलेरिओसिन 10% होता है। इसमें रोग कम लगते हैं।

सुरभी

इस किस्म को उत्परिवर्तन से विकसित किया गया है। यह एक अधिक उपज देने वाली किस्म हे। इसके प्रकन्दों में रेशा 4%, तेल 2.1% पाया जाता है। प्रकन्द अधिक संख्या में बनते हैं जिनका छिलका (Rind) गहरे चमकीले रंग का होता है।

अदरक की बुवाई:

अदरक की बुवाई (Sowing) फ़रवरी से लेकर मई तक की जा सकती है लेकिन इसकी अच्छी उपज के लिए मार्च से अप्रैल का समय उचित रहता है।

बुवाई की कंदों का भार प्रत्येक कन्द के 1 से 2 आखं के साथ 20 से 25 ग्राम होना उचित रहता है। बुवाई से पहले कंदों को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम या बाविस्टिन या 2.5 ग्राम मेन्कोजेब से प्रति किलोग्राम बीज को पानी में 25 से 30 मिनट डुबो कर उपचारित करना चाहिए। उसके बाद उनको छाव में सुखाकर बुवाई करनी चाहिए।

अदरक की खेती के लिए एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर, और एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच की दूरी 20 से 30 सेंटीमीटर और रोपाई के लिए 5 से 10 सेंटीमीटर तक की गहराई होनी चाहिए। इसके लिए 23 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बीज की मात्रा सही रहती है।

बुवाई (Sowing) के तुरंत बाद ऊपर से घास-फूस, पत्तियों व गोबर की खाद से भलीभांति ढक देना चाहिए। ऐसा करने से मिट्टी के अंदर नमी बनी रहती है और तेज धूप के कारण अंकुरण (Germination) पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।

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खाद एवं उर्वरक:

अदरक (Ginger) की फसल के लिए आपको कितने खाद की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए आपको मृदा की जांच करनी जरूरी है। यदि आप मृदा (Soil) की जांच नहीं कर पाते है तो आपको गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद 20-25 टन भूमी को तैयार करने से पहले मिला लेनी चाहिए। फास्फोरस एवं पोटाश की पूरी मात्रा और नाइट्रोजन की आधी मात्रा प्रकन्द लगाते समय डालना चाहिए। नाइट्रोजन की शेष बची मात्रा बुवाई के 50 से 60 दिन बाद खेत में लिया लेनी चाहिए।

सिंचाई:

अदरक की खेती में नमी (Moisture) का बराबर बना रहना बहुत ही जरूरी है। नमी बनाये रखने के लिए आपको बुवाई के बाद ही पहली सिंचाई कर लेनी चाहिए। इसके बाद आपको नमी बनाये रखने के लिए आवश्यकता के अनुसार सिंचाई (Watering) करनी होगी। आप इसके बेहतर परिणाम के लिए टपक पद्धति (Method) या ड्रिप एरीगेशन का प्रयोग किया जा सकता है।

अदरक की खुदाई:

बुवाई (Sowing) करने के बाद आप लगभग 7 से 8 महीने के बाद फसल को खोद सकते है लेकिन सोंठ के लिए फसल पकने के बाद खोदते है। अदरक की फसल पकने में 7 से 8 महीने तक का समय लेती है। जब फसल के पौधों की पतियां सूखने (Dry) लग जाये तब प्रकंदों को फावड़े, खुरपी (Khurpi) या कस्सी से खोदकर (Dig) निकाल लें।

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