फूलों की राजकुमारी थंबलीना की कहानी

फूलों की राजकुमारी थंबलीना की कहानी | Thumbelina Story In Hindi

एक औरत थी, जो अकेली रहती थी। एकदिन वो अपनी परी दोस्त से मिलने जंगल गई।

परी दोस्त- अरे! तुम यहाँ, आज मेरी याद कैसे आई।

औरत- दोस्त में बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ, काश मेरी कोई बच्ची होती।

परी दोस्त- तुम बहुत अच्छी और नेक दिल हो, मैं तुम्हारी मदद जरूर करूँगी। ये लो बीज इसे अपने घर ले जाकर बो देना।

औरत- लेकिन मुझे तो एक बच्ची चाहिए थी।

परी दोस्त- सब्र रखो और इसे घर ले जाकर उगा दो और देखभाल करना।

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Image: Thumbelina Story In Hindi

औरत उस बीज को अपने घर ले जाकर बगीचे में बो देती है। वह उसकी खूब देखभाल करती है और एक दिन वह बीज छोटा पौधा बन जाता है। औरत उसे रोज पानी पिलाती थी और बड़ी नाजुकता से उसी रखवाली करती थी।

फिर कुछ दिन बाद औरत देखती है कि पौधे में से एक सुंदर फूल निकला है।

औरत- वाह! कितना सुंदर है आज से पहले मैंने इतना सुंदर फूल कभी नही देखा।

औरत उस फूल को पास जाकर चूमने लगती है जैसे ही वह उसे चूमती है तो फूल की सारी पंखुड़िया खुल जाती है और बीच मे उसे एक सुंदर लड़की दिखती है।

औरत- वाह! कितनी प्यारी बच्ची है कितनी सुंदर है। इसे मैं बहुत प्यार से संभालूंगी क्योंकि ये बहुत ही नाजुक है और आज से तुम्हारा नाम “थम्बलीना” है।

वह औरत उस बच्ची को अंदर ले जाकर उसके लिए अखरोट का पलंग और फूलों की चददर बिछाती है।

आज से तुम यही रहोगी और ये तुम्हारे सोने की जगह होगी।

औरत थम्बलीना कि बहुत देखभाल करती है और थम्बलीना पूरे घर मे सुरीले स्वरों में गाना गाती हुई झूमती है।

औरत- मुझे अपनी परी दोस्त का सुक्रिया करना चाहिए।

एकदिन थम्बलीना अपने पलंग पर सो रही थी तभी एक बदमाश मेढक उसकी खिड़की पर आया।

मेढ़क- अरे वाह! ये लड़की कितनी सुंदर है इसकी और मेरी जोड़ी खूब जचेगी।

वह मेंढ़क थम्बलीना को उठाकर जंगल में ले जाता है तभी थम्बलीना कि आँख खुल जाती है वह गंदे मेंढ़क को देखकर डर जाती है और कहती है कि तुम कौन हो? और मैं यहाँ कैसे आई?

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मेंढ़क उसे कहता है कि “मैं तुमसे शादी करने वाला हूँ।”

थम्बलीना कहती है कि तुम कितने गंदे हो मैं तुमसे शादी नही करूँगी। वह मेंढ़क गुस्से में आकर थम्बलीना को तालाब में ले जाकर एक पत्ते पर खड़ा कर देता देता है। खुद वहाँ से चला जाता है।

अब थम्बलीना जोर जोर से चिल्लाने लगी “हेल्प हेल्प कोई है मुझे यहाँ से बाहर निकालो।”

उसकी आवाज सुनकर कुछ मछलियां वहाँ आई और उन्होंने थम्बलीना कि मदद की। उन्होंने पत्ते की जड़ो को तोड़ दिया जिससे वह पत्ता स्वतंत्र आगे बढ़ने लगा। थम्बलीना खुश हो गई, अब वह खुले नजारों और फूलों को देखती हुई आगे बढ़ रही थी।

थम्बलीना- वाह! क्या नजारा है, फूल, पत्तियां, और ये खुशबू।

वह किनारे पर पहुँचने वाली थी कि एक कीड़ा उसे उठाकर भाग जाता है वह उसे अपने दोस्तों के पास ले जाता है। उसके दोस्त उससे कहते है कि ये लड़की कितनी बदसूरत है तू इससे शादी करेगा छी छी।

कीड़ा उनकी बात सुनकर थम्बलीना को छोड़ देता है और वह जोर से जाकर जमीन पर गिर जाती है।

थम्बलीना खुद को बचाने के लिए वहाँ से भाग जाती है भागते भागते वह थक जाती है और रुक कर पेड़ के नीचे सो जाती है। अचानक सर्दी का तूफान आने लगता है तो थम्बलीना कि आँख खुलती है,अब थम्बलीना को बहुत सर्दी लगने लगी।

थम्बलीना- “सर्दी तो बढ़ती ही जा रही है अगर मैने अपने लिए कोई गर्म जगह नही ढुंढी तो मैं मर जाऊंगी।”

चलते चलते थम्बलीना को एक दरवाजा दिखाई देता है।

थम्बलीना- “अरे! लगता है ये कि किसी चूहे का घर है, मैं यहाँ जाकर मदद ले सकती हूँ और मुझे भूख भी लगी है शायद कुछ खाने को भी मिल जाये।”

थम्बलीना जाकर दरवाजा खटखटाती है, एक चूहा दरवाजा खोलता है, थम्बलीना उससे कहती है कि “क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ दे सकते हो, मैंने काफी समय से कुछ खाया नही है।”

चूहा कहता है कि “तुम इतनी सर्दी में बाहर क्यों खड़ी हो अंदर आ जाओ

थम्बलीना अंदर आ जाती है और चूहे का धन्यवाद करती है।

चूहा उसे कुछ खाने के लिए देता है, थम्बलीना उसे कहती है कि “आपका घर बहुत आरामदायक है”।

चूहा थम्बलीना से कहता है कि “तुम यहाँ कुछ दिनों के लिए रह सकती हो और यदि तुम मेरे घर का काम करोगी तो मैं तुम्हे हमेशा के लिए यहाँ रख लूँगा।”

थम्बलीना खुशी से वहाँ काम करने को तैयार हो जाती है, अब थम्बलीना बहुत थकी हुई थी इसलिए वह लेट जाती है।

दूसरे दिन चूहा थम्बलीना से कहता है कि “मेरा एक जवान दोस्त है जो एक दो दिन बाद यहाँ आने वाला है अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारी शादी उससे करवा दूँगा।”

अगले दिन चूहे का दोस्त आ जाता है।

थम्बलीना उन दोनों के लिए खाना बनाती है और फिर चूहा अपने दोस्त को थम्बलीना के बारे में बताता है चूहे का दोस्त थम्बलीना से शादी करने के लिए तैयार हो जाता है।

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चूहा कहता है कि “तो फिर कुछ दिनों में तुम दोनों की शादी कर देते है।”

चूहे का दोस्त अगले दिन फिर वहाँ आया तभी दरवाजे के पास एक गौरेया थी जो उसके पैर के नीचे आ गई और चूहे के दोस्त को गुस्सा आ जाता है वह गोरैया को लात मार देता है और वहाँ से चला जाता है।

तभी बेचारी गोरैया को तड़पता देख थम्बलीना उसकी सहायता कर उसे उड़ा देती है।

अब उनकी शादी का दिन नजदीक आने वाला था, थम्बलीना चूहे के दोस्त को एक निर्दयी मानती थी इसलिए उससे शादी नही करना चाहती थी, वह चितिंत होकर दरवाजे के पास खड़ी गई, तभी उड़ती हुई गोरैया वहाँ आई और थम्बलीना कि परेशानी की वजह पूछी तो थम्बलीना ने उसे बता दिया कि वह शादी नही करना चाहती है।

गोरैया ने कहा- “मैं तुम्हारी मदद करूँगी”।

वह गोरैया थम्बलीना को अपने पंखों पर बिठाकर वहाँ से दूर ले जाती है।

थम्बलीना- “वाह तुम मुझे कितनी सुंदर जगह के आई, धन्यवाद।”

गौरेया उसे एक फूलों वाले जंगल मे उतारती है। थम्बलीना बहुत थक चुकी थी इसलिए वहाँ जाकर एक फूल की पंखुड़ी पर सो गई।

कुछ देर बाद एक राजकुमार वहाँ आया और उसने देखा कि एक सुंदर लड़की सो रही थी।

राजकुमार- वाह ये कितनी सुंदर है, ये कौन है?

राजकुमार की आवाज सुनकर थम्बलीना जाग गई और उठ खड़ी हुई अपने पास एक अजनबी को देखकर वह डर गई।

राजकुमार- अरे! डरो मत मैं इस जंगल के फूलों का राजा हूँ, मैं तुम्हारी सुंदरता को देखता ही रह गया, क्या तुम मुझसे शादी करोगी

तभी वह गोरैया वहाँ आ जाती है और थम्बलीना को बताती है कि वह फूलों के राजकुमार है और बहुत ही अच्छे इंसान है।

तब थम्बलीना खुश होकर राजकुमार से शादी कर लेती है।

अब थम्बलीना खुशी से राजकुमार के साथ फूलों की रानी बनकर रहने लगी।

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