छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कब और कैसे हुई?

Shivaji Maharaj ki Mrityu Kaise Hui: पूरे भारत से मुगल साम्राज्य को हटाकर हिंदू साम्राज्य की स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। भारत के कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शिवाजी की मृत्यु स्वाभाविक रूप से हुई थी तो कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शिवाजी की मृत्यु साजिद के दौरान हुई थी।

शिवाजी महाराज को महाराष्ट्र के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के सबसे बड़े योद्धा और राजा के रूप में देखा जाता है। शिवाजी महाराज उस समय के मुगल शासक औरंगजेब के साथ युद्ध करते थे और बहुत सारे अपने बहादुर मंत्रियों के साथ धीरे-धीरे पूरे मुगल साम्राज्य पर अपना वर्चस्व कायम करने में कामयाब रहे।

Shivaji Maharaj ki Mrityu Kaise Hui
Image: Shivaji Maharaj ki Mrityu Kaise Hui

शिवाजी महाराज से लड़ाई के दौरान मुगल साम्राज्य बहुत कमजोर हो गया, जिस वजह से मुगल साम्राज्य के राजा औरंगजेब को महल से भागना पड़ा और कुछ समय बाद ऐसी खबर मिली कि दक्कन में दर-दर भटकते हुए औरंगजेब की मृत्यु हो गई।

50 वर्ष की आयु में छत्रपति शिवाजी की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 को हुई। शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई इस बात को लेकर आज भी इतिहासकारों के बीच मतभेद रहता है। इस वजह से आज इसमें हम शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई पर चर्चा करेंगे।

छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कब और कैसे हुई? | Shivaji Maharaj ki Mrityu Kaise Hui

छत्रपति शिवाजी महाराज कौन थे?

19 फरवरी 1830 को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र राज्य में हुआ था। छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब और उसके साथियों के खिलाफ 20 साल तक लड़ाई लड़ी। इस युद्ध में छत्रपति शिवाजी के तरफ से बड़े-बड़े योद्धा मारे गए।

मगर छत्रपति शिवाजी के वीर योद्धा उन्हें और उनके गवर्नर शाइस्ता खान और अफजल खान जैसे योद्धाओं को मारा अंत में औरंगजेब की मृत्यु भी तय की। औरंगजेब अपने जीवनी में कहता है कि मुगलिया सेना भारत की सबसे बड़ी सेना थी और 20 साल तक छत्रपति शिवाजी के खिलाफ वह लड़ते रहे, मगर हर लड़ाई में छत्रपति शिवाजी की स्थिति उनसे बेहतर ही थी।  

छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू साम्राज्य के सबसे बड़े योद्धा और राजा के रूप में देखे जाते हैं क्योंकि उन्होंने पूरे भारतवर्ष में सनातन धर्म का झंडा लहराया और मुगलिया सल्तनत को भारत से हटा कर यह हिंदू धर्म के अखंड शासन काल की स्थापना की।

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छत्रपति शिवाजी की मृत्यु कैसे हुई?

इतने महान योद्धा और राजा की मृत्यु किसी के साथ युद्ध में हो जाए, ऐसा संभव नहीं था। मगर इतिहासकारों ने इस बात पर चर्चा करना शुरू किया कि आखिर छत्रपति शिवाजी की मृत्यु कैसे हुई तो वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे छत्रपति शिवाजी की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 को रायगढ़ के किले में हुई थी।

जहां कुछ इतिहासकारों के अध्ययन के मुताबिक शिवाजी महाराज की मृत्यु स्वभाविक थी क्योंकि उनकी तबीयत खराब हो गई थी। तो कुछ लोगों का मानना है कि शिवाजी महाराज को उनके मंत्री और रानियों ने मिलकर जहर दे दिया, जिस वजह से खून की उल्टी करते हुए शिवाजी महाराज की मृत्यु हो गई थी।

यह घटना 3 अप्रैल 1680 की है जब हनुमान जयंती की खुशी पूरे रायगढ़ किले में मनाई जा रही थी। मराठा जनता के द्वारा इस त्यौहार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा था। हर कोई खुशी में मरदह और सभी रानियां तैयारियों में जुटी हुई थी।

छत्रपति के सबसे बहादुर और उनके बड़े बेटे संभाजी महाराज महल के काम से कोल्हापुर के किले में गए थे। उनके कुछ धूर्त मंत्रियों ने इसे सही समय माना और छत्रपति शिवाजी महाराज की दवाइयों में जहर मिलाकर उन्हें पिला दिया, जिसके बाद छत्रपति की तबीयत अचानक बहुत ज्यादा खराब हो गई।

मगर उनके पास कोई भी नहीं था और ऐसी परिस्थिति में छत्रपति महाराज की मृत्यु खून की उल्टी करते हुए 50 वर्ष की आयु में रायगढ़ के किले में हो गई।

निष्कर्ष

आज इसमें आपको बताया छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु कैसे हुई और छत्रपति शिवाजी महाराज कितने बड़े योद्धा थे, किस प्रकार उन्होंने पूरे भारत में सनातन धर्म का झंडा लहराया और सल्तनत उखड़ कर फेक दिया। शिवाजी महाराज के बहुत सारे बड़े-बड़े योद्धा भी उनके साथ थे।

हमेशा के लिए अमर हो गए, जिसमें तानाजी का नाम भी शामिल है। अगर इस लेख को पढ़ने के बाद अब शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य के बारे में अच्छे से समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें। साथ ही अपने सुझावों, विचार या किसी भी प्रकार के प्रश्न को कमेंट में पूछना ना भूले।

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