स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे और कब हुई थी?

स्वामी विवेकानंद को कौन नहीं जानता, उन्होंने अध्यात्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार पूरे विश्व भर में किया। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस के साथ मिलकर स्कूल, हॉस्पिटल, विश्वविद्यालय जैसे अलग-अलग शाखाओं को विश्वभर में रामाकृष्ण मिशन के नाम से स्थापित किया।

विश्व धार्मिक सम्मेलन जो कि अमेरिका के शिकागो में हुआ था, वहां भारत की तरफ से स्वामी विवेकानंद गए थे और उन्होंने और अध्यात्म के बारे में दुनिया को एक नया नजरिया दिखाया। जिसके बाद पूरी दुनिया स्वामी विवेकानंद को दिव्य शक्ति के रूप में देखने लगी।

Swami Vivekananda ki Mrityu Kaise Hui
Image: Swami Vivekananda ki Mrityu Kaise Hui

इस बात में कोई रहस्य नहीं है कि स्वामी विवेकानंद की मृत्यु 1914 में हुई थी। मगर स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई थी इसके बारे में बहुत सारे लोगों को नहीं पता है। अगर आप स्वामी विवेकानंद से प्रभावित हैं और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो हमारे लेख के साथ अंत तक बने रहे।

स्वामी विवेकानंद महज 25 साल की आयु में गेरुआ वस्त्र धारण करके अध्यात्म के रास्ते पर चल पड़े थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को इतने बेहतरीन तरीके से लोगों के समक्ष रखा था कि उनके विचार लोगों के शरीर में ज्वाला प्रज्वलित करते थे। स्वामी विवेकानंद का कहना था –

“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक तुम्हारे लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए”।

स्वामी विवेकानंद कौन थे?

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को भारत के कोलकाता शहर में हुआ था। उनका नाम बचपन में नरेंद्र नाथ दत रखा गया था। बचपन से ही स्वामी विवेकानंद बहुत ही तीव्र बुद्धि के थे, उस जमाने में कोलकाता का पुस्तकालय भारत का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय था और अपनी स्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने महज एक रात में पूरे पुस्तकालय की किताबों को याद कर लिया था।

इसके बाद अपनी पढ़ाई को पूरा करने के बाद उन्होंने रामकृष्ण परमहंस का नाम बहुत सुना था। राम कृष्णा परमहंस देवी काली के बहुत बड़े भक्त थे। नरेंद्र नाथ 25 वर्ष की आयु में रामाकृष्ण परमहंस से मिलने और देवी-देवताओं पर कुछ तर्क करने के लिए उनके पास गए थे।

इस तर्क वार्तालाप में रामकृष्ण परमहंस समझ गए थे कि नरेंद्र उनका सबसे बड़ा शिष्य बन सकता है और महज 25 वर्ष की आयु में नरेंद्रनाथ दत्त गेरुआ वस्त्र धारण करके खुद को एक अध्यात्मिक गुरु घोषित कर दिया। स्वामी विवेकानंद पैदल ही पूरे भारत की यात्रा करने लगे और अलग-अलग जगहों पर अध्यात्म के उपदेश देने के लिए जाते थे।

जब अपने अध्यात्म के प्रचार के दौरान नरेंद्र नाथ राजस्थान पहुंचे तो राजस्थान के शेखावटी अंचल में स्थित खेतड़ी के राजा अजित सिंह ने उन्हें स्वामी विवेकानंद का नाम दिया। वहां से नरेंद्र नाथ स्वामी विवेकानंद के नाम से पूरे भारत भर में प्रचलित हो गए। इसी कुछ समय के बाद 1893 में स्वामी विवेकानंद का विश्व धर्म सम्मेलन जो कि अमेरिका के शिकागो में आयोजित हुआ था वहां बुलाया गया।

इस धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने धर्म के ऊपर सबसे बड़ा भाषण दिया और लोगों को बहुत ही सरल शब्दों में धर्म और भगवान की व्याख्या को बताया, जिसके बाद हर कोई स्वामी विवेकानंद का दीवाना हो गया था।

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई?

बता दे कि स्वामी विवेकानंद की मृत्यु 1902 में 39 वर्ष की उम्र में हुई थी। स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई इसके बारे में सटीक तौर पर किसी को नहीं पता लेकिन इतनी जानकारी हर किसी को है कि वर्ष 4 जुलाई 1902 में जब अपनी दिनचर्या के अनुसार सुबह उठकर वह 2 घंटे के लिए ध्यान मत हुए तो उसके बाद वह उठे नहीं।

स्वामी विवेकानंद उसी ध्यान के दौरान ब्रह्मनिंद्रा में समा गए। उस दिन बेलूर मठ में गंगा तट के किनारे स्वामी विवेकानंद इस समाधि बनाई गई और उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिस दिन स्वामी विवेकानंद का अंतिम संस्कार हुआ था, उस दिन से 16 वर्ष पहले उसी गंगा तट पर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का अंतिम संस्कार हुआ था।

स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई का सटीक कारण किसी को नहीं मालूम है। उनके कुछ शिष्यों के मुताबिक स्वामी को 31 से अधिक बीमारियां थी और दो बार दिल का दौरा पड़ चुका था। उस दिन ध्यान करने के दौरान तीसरी बार दिल का दौरा पड़ा और अपने ध्यान के दौरान ही स्वामी विवेकानंद ने महासमाधि ले ली।

निष्कर्ष

आज इस लेख में हमने आपको बताया स्वामी विवेकानंद की मृत्यु कैसे हुई और स्वामी विवेकानंद कौन थे। अगर आपने इस लेख को ध्यान पूर्वक पड़ा है तो अब समझ पाए होंगे कि नरेंद्र नाथ स्वामी विवेकानंद कैसे बने और क्यों विश्व भर में उन्हें सबसे बड़े आध्यात्मिक गुरु के रूप में पूजा जाता है।

अगर इस लेख में बताई गई जानकारियों को पढ़ने के बाद आप स्वामी विवेकानंद को एक नए नजरिए से देख पाए हैं। साथ ही उनके मृत्यु के कारण के बारे में समझ पाए हैं तो इसे अपने मित्रों के साथ साझा करें। साथ ही अपने सुझावों या किसी भी प्रकार के प्रश्न को कमेंट में पूछना ना भूलें।

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