राम लक्ष्मण की कहानी  

नमस्कार दोस्तों आज हम आपके बीच राम लक्ष्मण की कहानी साझा करने जा रहे हैं। इस कहानी में आपको रामायण के दो पात्र रामजी व लक्ष्मणजी के विषय में विस्तार से बताया जाएगा। आप इस कहानी को अंत तक पढ़िएगा।

एक बार जब भगवान राम भगवान लक्ष्मण और माता सीता राजा दशरथ के दिए हुए आदेश का पालन करने के लिए चौदह वर्षों के वनवास के लिए निकल गए तब भगवान राम माता सीता और भगवान लक्ष्मण जी ने रास्ते में आने वाली सभी सभी नदियों गंगा, यमुना, गोमती नदी में पित्र दान करते हुए आगे की ओर चलने लगे।

जंगल पहुंचकर भगवान राम माता सीता और भगवान लक्ष्मण जी ने कंदमूल और फल खाकर जंगल में अपना जीवन यापन किया और धीरे-धीरे समय गुजरने के बाद जब कार्तिक का महीना शुरू हुआ।

तब भगवान राम ने अपने भाई लक्ष्मण जी से कहा,” जाओ जंगल से कंदमूल और फल ले आओ और लाकर उनको अपनी भाभी सीता मां को दे दो”। अपने बड़े भाई भगवान राम की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान लक्ष्मण जी जंगल से कंदमूल और फल ले आए और कंदमूल और फल लाकर माता सीता को दे दिया। भगवान राम ने अपनी पत्नी माता सीता से कहा कि,” बहुत जोर से भूख लगी है। जल्दी से यह फल और कंदमूल हम लोगों को परोस के दे दो।”

माता सीता ने कंदमूल और फल के 4 भाग किए और चार जगह परोस दिया। जिसको देखकर भगवान राम और लक्ष्मण जी ने माता सीता से कहा कि,”यहां पर तो तीन लोग हैं तो, आपने चार जगह पर क्यों परोसा है? माता सीता ने बताया कि,”यह जो चौथा हिस्सा है। वह गौमाता का है। भगवान राम और लक्ष्मण जी गौमाता को खिलाने के लिए चले जाते हैं।

ram lakshman ki kahani

जब भगवान राम और लक्ष्मण जी गौ माता को कंदमूल और फल खिलाकर वापस आते हैं। तब भगवान राम माता सीता से कहते हैं कि,” सीता तुमने भोजन करना क्यों शुरू नहीं किया? माता सीता ने बताया कि,”सबसे पहले मैं राम कथा सुनती हूं, उसके बाद ही भोजन ग्रहण करती हूं।” भगवान राम और लक्ष्मण जी ने माता सीता से कहा कि, “आप मुझे राम कथा सुना दीजिए।”

लेकिन तभी माता सीता ने भगवान राम जी से कहा कि नहीं,”आप मेरे पति हैं जिसके कारण मैं आपको यह कथा नहीं सुना सकती।” भगवान लक्ष्मण जी ने माता सीता से कहा,”आप मुझे सुना दीजिए”। जिसके बाद माता सीता ने भगवान लक्ष्मण जी से कहा,”आप मेरे देवर हैं, इस वजह से मैं आपको यह कथा नहीं सुना सकती। मैं यह कथा सिर्फ किसी औरत को ही सुना सकती हूं।”

भगवान लक्ष्मण जी ने कहा कि,”माता सीता, इस जंगल में कैसे किसी औरत को खोजेंगी? और फिर तभी भगवान लक्ष्मणजी ने अपनी माया से जंगल में ही एक नगर का निर्माण कर दिया और उस नगर में सभी चीजें सोने की थी। सभी चीजें सोने के होने के कारण उस नगर का नाम सोननगरी था। नगर में रहने वाले सभी लोग बहुत अमीर थे और उनको बात का बहुत घमंड था।

जब माता सीता इस नगर में कुएं से पानी लेने गई तब उन्होंने कुएं से पानी लेने आई कई महिलाओं से बात करने की कोशिश की। तब किसी भी महिला ने माता सीता से बात नहीं की और वहां से चली गई जिसके बाद एक छोटी सी बच्ची माता सीता के पास आई। तब माता सीता ने उस बच्ची से कहा कि,” तुम मुझसे राम कथा सुनोगी और तभी माता सीता ने कहा कि,”मेरे पति और मेरा देवर भूखे हैं। तुम मुझसे राम कथा सुन लो” लेकिन उस बच्ची ने कहा कि,” मेरी मां मेरी प्रतीक्षा कर रही हैं। मुझे जाना होगा और वह बच्ची वहां से चली गई।”

यह देखकर और उन महिलाओं के द्वारा किए हुए अपमान के कारण माता सीता को अत्यधिक क्रोध आ गया जिसके कारण माता सीता ने उस स्वर्ण नगरी को वापस से एक सामान्य नगर में परिवर्तित कर दिया। जैसे ही वह लड़की अपने घर पहुंची तब सोने की नगरी को सामान्य नगर में देख और अपने घर को सामान्य देख उसकी मां ने उससे पूछा कि यह क्या हो गया?

तब उस लड़की ने बताया कि,”एक औरत कुएं के पास बैठी है। वह मुझसे कह रही थी की राम कथा सुन लो। लेकिन मैंने नहीं सुनी। शायद उसी ने यह सब किया होगाv” उसकी मां ने उससे कहा कि,”जाओ राम कथा सुनो जाकर लेकिन अपनी मां की बात उस लड़की ने तब भी नहीं मानी और कथा सुनने से मना कर दिया, जिसके बाद उसकी बहू ने कहा,” माजी मैं राम कथा सुन लूं ,जाकर जिसके बाद माजी ने राम कथा सुनने के लिए अपनी बहू को आज्ञा दे दी।”

वह एक घड़ा लेकर कुए के पास गई और कुएं से पानी निकाल कर उसको बार-बार खाली करने लगी, जिसको देखकर माता सीता ने उससे पूछा कि,” तुम यह क्यों कर रही हो? घर जाकर कोई काम करो। तभी उस महिला ने माता सीता से कहा कि,”मैं अपने घर के सारे काम कर के आई हूं, जिसके बाद माता सीता ने उस महिला से कहा कि,”तुम मेरी राम कथा सुन लो। मेरे पति और मेरे देवर भूखे हैं। तब उस महिला ने कहा कि आप मुझे राम कथा सुनाइए।

माता सीता ने उस महिला से कहा कि, “तुमने मेरी मदद इस मृत्य लोक में की है। भगवान तुम्हारी रक्षा स्वर्ग लोक में करेगा” और माता सीता ने उस महिला को पूरी रामकथा सुना दी और उसके बाद माता सीता ने उस महिला को अपने गले का एक हार उसको उपहार के रूप में दे दिया। वह महिला अपने घर गई, तब उस उस के मटके सोने के सिक्कों से भर गए। यह देख कर घर में सभी आश्चर्य चकित हो गए।

तब उस महिला की सासू मां ने उससे पूछा की यह कैसे हो गया?, तब उस महिला ने बताया कि मैंने माता सीता से राम कथा सुनी है। शायद उसी की वजह से हुआ होगा जिसके बाद सासू मां ने अपनी बहू से कहा कि,”तुम जाकर रोज उनसे राम कथा सुनोगी? वह महिला रोज जाकर माता सीता से राम कथा सुनने लगी और एक दिन उस महिला ने माता सीता से कहा की इस कथा का उद्यापन कैसे किया जाता है। माता मुझे इसकी विधि बताइए।

माता सीता ने उस महिला से कहा कि एक नारियल ले लेना। उसके सात भाग कर देना और सात लड्डू लेना एक नारियल और एक लड्डू को मंदिर में चढ़ा देना। ऐसा करने से मंदिर को बनवाने जितना फल प्राप्त होता है और दूसरे भाग को सरोवर के किनारे गाड़ देना जिससे सरोवर बनवाने कितना लाभ होता है और तीसरे भाग को भगवत गीता में चढ़ा देना जिससे भगवत गीता का पाठ कराने कितना फल प्राप्त होता है और चौथे भाग को माता तुलसी में चढ़ा देना ।

जिससे तुलसी विवाह करने की जितना फल प्राप्त होगा। पांचवा भाग को एक कन्या को दान दे देना जिससे कन्या विवाह करवाने कितना फल प्राप्त होगा। छठवें भाग को भगवान सूरज को चढ़ा देना, जिससे  तैतीस करोड़ देवी देवताओं के भोग लगने जितना फल प्राप्त होता है।

उस महिला ने माता सीता से विधि पहुंचने के बाद उसने उद्यापन किया और फिर माता सीता के पास गई। तब माता सीता ने उस महिला से कहा कि सातवें दिन वैकुंठ से एक विमान तुमको लेने आएगा और सातवें दिन स्वर्ग से एक विमान उस महिला के पास आया जिसके बाद उस महिला ने अपनी सासू मां को बताया कि स्वर्ग से भी विमान आया है।

उसकी सासू मां ने कहा कि,”मुझे और अपने ससुर जी को भी अपने साथ ले चलो और पड़ोसियों को भी अपने साथ ले चलो। सभी लोग उस विमान में बैठ गए। उसकी नंद आई। नंद ने उस महिला से कहा मेरे को भी ले चलो। जिसके बाद उस महिला ने माता सीता से कहा कि माता इसको भी ले लो।

माता सीता ने कहा कि इसने इस धरती पर कोई भी दान नहीं किया और इसने कोई पुण्य नहीं किया है जिसके कारण मैं इसको नहीं ले सकती। तभी उस महिला ने अपनी नंद से कहा कि,”तुम कार्तिक मास में राम लक्ष्मण जी की कथा सुनना और उनका उद्यापन करना। सातवें दिन तुमको वैकुंठ से एक विमान लेने आएगा।”

फिर सभी नगर वालों ने साथ बैठकर राम लक्ष्मण जी की कथा सुनना प्रारंभ कर दिया और थोड़े ही दिनों नगर वापस से सोने की नगरी में तब्दील हो गया और सातवें दिन स्वर्ग से निर्माण आया और सभी को स्वर्ग लोक लेकर आ जिसके बाद सभी लोग भगवान राम और लक्ष्मण की जय जय कार करने लगे।

दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको यह कहानी रोचक लगी होगी। ऐसे बहुत ही कहानियां है, जो हमारी वेबसाइट में उपलब्ध हैं।आप इन्हें पढ़ सकते हैं और अपने बच्चों आदि को पढ़ा कर उनका मनोरंजन करवा सकते हैं और इस कहानी को साझा कर हमारा हौसला अफजाई कर सकते हैं और कहानी से संबंधित यदि कोई भी प्रश्न है आपका तो आप कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते हैं ।

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