नाई के चौथे भाई काने अलफूज़ की कहानी (अलिफ लैला की कहानी)

नाई के चौथे भाई काने अलफूज़ की कहानी (अलिफ लैला की कहानी)| Nayi Ke Chauthe Bhai Kane Aklooz Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani

हेलो दोस्तों नमस्कार अलिफ लैला की कहानियों की श्रृंखला में आपका स्वागत है। आज हम आपके लिए अलिफ लैला की प्रसिद्ध नाई के चौथे भाई काने अलफूज़ की कहानी को लेकर आएं है। आप इस कहानी को अंत तक पढ़िएगा।

नाई ने अपने चौथे भाई की कहानी बताना शुरू किया और कहने लगा कि सरकार मेरे चौथे भाई का नाम अलकूज था। उसे एक आंख से दिखाई देता था। एक बड़ी दुर्घटना के कारण मेरे चौथे भाई को अपनी एक आंख गंवानी पड़ गई थी। मेरा चौथा भाई क़साई का काम किया करता था जिसके कारण वह बहुत से जानवरों का मांस बेचा करता था। उसने अपने घर में भेड़ों को पाल रखा था।

Nayi Ke Chauthe Bhai Kane Aklooz Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani
Image: Nayi Ke Chauthe Bhai Kane Aklooz Ki Kahani Alif Laila Ki Kahani

उसको भेड़ों को लड़वाने का बहुत शौक था, जिससे वह खूब पैसे कमाया करता था। भेड़ों को लड़वाने के कारण पूरे शहर में उसकी बहुत अच्छी जान पहचान हो गई थी। एक दिन जब वह अपनी दुकान में बैठा था तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति उसके पास आया और उसके कहने लगा की अलकूज मेरे लिए 5 किलो बकरे का मांस पैक कर दो और उसने अलकूज को पैसे ना देकर उसने कुछ चांदी के सिक्के दिए, जिसको देखकर अलकूज ने कहा कि आप मुझे चांदी के सिक्के नहीं पैसे दीजिए।

जिसके बाद उस बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा की मेरे पास पैसे नहीं है। तुम पैसों की जगह चांदी के सिक्कों को रख लो और ऐसा कह कर वह बुजुर्ग व्यक्ति वहां से चला गया और अगले चार-पांच महीने तक लगातार वह बुजुर्ग व्यक्ति अलकूज से बकरे का मांस ले जाया करता था और पैसों की जगह वह चांदी के सिक्के दे जाया करता था।

एक दिन जब अलकूज के पास भेड़ों की कमी हो गई थी, तब उसने सोचा कि चलो कुछ नए भेड़ों को खरीद लिया जाए और एक दिन जब अलकूज भेड़ों को खरीदने के लिए जा रहा था, तब उसने अपनी गुल्लक को खुला और उससे पैसे निकालने के लिए जैसे ही उसने हाथ आगे बढ़ाया। तब उसने देखा कि उस बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा दिए हुए सभी चांदी के सिक्के एक दफ्ती के टुकड़े में बदल चुके हैं।

जिसको देखकर वह बहुत हैरान हो गया और जोर जोर से चिल्लाने लगा। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर आस-पास मौजूद सभी लोग उसकी दुकान में आ गए और पूछने लगे तुम इतना जोर जोर क्यों चिल्ला रहे हो? सभी के पूछने के पश्चात अलकूज ने उनको अपना गुल्लक दिखाएं और कहने लगा कि देखो यह मेरे साथ क्या हुआ है? और अलकूज ने उस बुजुर्ग व्यक्ति के बारे में सारी बात बताई जिसको सुनकर सभी लोग हैरानी में पड़ गए।

और बहुत ही ज्यादा आश्चर्यचकित होने लगे कि यह कैसे हो गया? लेकिन तभी अचानक से वह बुजुर्ग व्यक्ति सामने से निकलता हुआ दिखाई दे गया। जिसको देखने के बाद अलकूज ने तुरंत उसको पकड़ लिया और सभी लोगों के सामने उस बुजुर्ग व्यक्ति पर चिल्लाने लगा। जिसके बाद उस बुजुर्ग व्यक्ति ने अलकूज से कहा कि तुम मेरे साथ ठीक नहीं कर रहे हो और अपनी गलती के लिए तुम मुझसे माफी मांग लो नहीं, तो तुम्हारे लिए यह अच्छा नहीं होगा।

बुजुर्ग व्यक्ति सभी को देखकर मेरे भाई अलकूज को ही फसाने की कोशिश करने लगा और कहने लगा कि भाई लोग तुम लोग जो इससे मांस ले जाते हो वह किसी जानवर का नहीं बल्कि यह व्यक्तियों को मार कर उनका मांस तुम सब को बेचता है और वही तुम लोगों को खिलाता है। जिसके बाद उस बुजुर्ग व्यक्ति की बातें सुनकर मेरे भाई अलकूज ने कहा कि तुमने मेरे साथ धोखा किया है।

अपनी गलती मानने की जगह तो उल्टा मुझ पर ही दोस डाल रहे हो और तुमको मेरे ऊपर इतना घिनौना आरोप लगाते हुए शर्म नहीं आती। जिसके बाद उस पर एक व्यक्ति ने कहा की तुम हम सबको अपनी दुकान चेक कराओ। क्या पता तुमने अंदर आदमियों को मार कर रखा हो? जिसके बाद अलकूज ने कहा कि जो भी मेरी दुकान चेक करना चाहता है वह मेरे साथ आ जाए।

जिसके बाद सभी व्यक्ति इस बात की पुष्टि करने के लिए अलकूज की दुकान के अंदर चले गए। अंदर जाकर सभी लोगों ने देखा कि अलकूज की दुकान के अंदर एक व्यक्ति की लाश लटक रही थी ।

जिसको देखकर सभी के साथ-साथ अलकूज भी बहुत हैरान हो गया और उसको समझ में बिल्कुल नहीं आ रहा था कि, यह कैसे हो गया? और जिस बुजुर्ग व्यक्ति ने अलकूज पर यह आरोप लगाया था, वह कोई मामूली इंसान नहीं था।

वह बुजुर्ग आदमी एक बहुत बड़ा जादूगर था, जो अपने जादू से बड़े-बड़े लोगों को भ्रम में डाल देता था और वही काम उसने अलकूज और सभी लोगों के साथ किया। जिससे उनको वहां पर लटकी हुई जानवर की लाश मनुष्य की दिख रही थी।

जिसको देखने के बाद सभी को यह विश्वास हो गया कि यह बुजुर्ग व्यक्ति सही बोल रहा है और वहां पर मौजूद सभी लोगों ने बिना कुछ सोचे समझे मेरे भाई अलकूज को मारना शुरू कर दिया और मारते मारते मेरे भाई अलकूज की एक आंख को भी फोड़ दिया और उसके बाद सभी लोग मेरे भाई को काजी के पास ले गए और वहां जाकर काजी को सारी बातें बताई ।

वहाँ पर उस बुजुर्ग व्यक्ति ने अपने जादू से उस काजी को भी अपने वश में कर लिया। जिसके बाद काजी ने भी मेरे भाई को दोषी करार करते हुए पांच सौ कोड़े मारने की सजा के साथ-साथ शहर से निकालने का भी आदेश दे दिया। मेरे भाई ने बहुत कहा कि यह बुजुर्ग व्यक्ति झूठ बोल रहा है लेकिन बुजुर्ग व्यक्ति के जादू के वश में होने के कारण काजी ने भी मेरे भाई की बातों पर विश्वास नहीं किया।

कोड़े मारने के बाद मेरे भाई को शहर से निकाल दिया गया जिसके बाद वह अपनी जान बचा कर इधर-उधर छिपता फिर रहा था और अपना गुजारा करने के लिए इधर-उधर भीख मांग कर थोड़े पैसे कमा लिया करता था। जिससे वह खाना पीना खा लिया करता था और ऐसे ही अपना गुजारा किया करता था।

कई दिन भटकने के पश्चात जब है भीख मांगने के लिए इधर उधर भटक रहा था, तभी अचानक से उसको पीछे से कुछ आदमी आते हुए दिखाई दिए जिनको देखकर वह डर गया और जाकर छुप गया।

जिसके बाद उन्होंने मेरे भाई अलकूज को पकड़ लिया और कहने लगे की तुमको हम बहुत दिनों से ढूंढ रहे थे लेकिन आज तुम हमारी पकड़ में आए हो। उन आदमियों की बात सुनकर मेरा भाई बहुत डर गया और कहने लगा कि मैंने क्या किया है? तुम लोगों ने मुझे ऐसे क्यों पकड़ रखा है।

उन आदमियों ने बताया कि तुम और तुम्हारे कई दोस्तों ने मेरे साहब के घर से चोरी की है और उनका सारा धन चुरा लिया है। आदमियों की यह बात सुनकर अलकूज हक्का-बक्का रह गया और कहने लगा कि मैंने कोई चोरी नहीं की है। तुम लोगों कुछ गलतफहमी हो रही है ।

लेकिन उन आदमियों ने अलकूज की एक बात नहीं मानी और कहने लगे कि तुम और तुम्हारे कई दोस्तों के चोरी करने के बाद भी तुम्हारा पेट नहीं भरा है और तुम लोगों ने  दोबारा मेरे साहब के घर जाकर उनको जान से मारने की कोशिश की है। हम लोगों ने कल रात तुमको और तुम्हारे दोस्तों को साहब के घर के पास से भागते हुए देखा था और तुम्हारे हाथ में एक चाकू भी था।

जिससे तुम उन को मारने के लिए गए थे। इसके बाद उन लोगों ने मेरे भाई की तलाशी लेना शुरू कर दिया और थोड़ी देर में मेरे भाई के पास थे वह चाकू निकल आया, जिससे वह जानवरों को मारा करता था। चाकू को देखने के बाद उन आदमियों ने कहा कि यह तेरा सबूत है कि तुम लोगों ने ही चोरी की है और इतना कहकर वह आदमी मेरे भाई अलकूज को लेकर वहां से चले गए।

और काजी के पास ले जाकर खड़ा कर दिया और उन लोगों ने काजी को बताया कि यह और इसके कई दोस्त बहुत बड़े चोर है, जिसने हमारे साहब के घर से बहुत सारी चीजें चुराई हैं। अलकूज ने काजी से कहा कि मैं चोर नहीं हूं या लोग झूठ बोल रहे हैं लेकिन उन आदमियों ने अलकूज को ऐसा फसाया की काजी भी उनकी बातों पर यकीन करने लगा उन लोगों ने बताया।

कि अगर आपको यकीन नहीं हो रहा हो तो, आप इसकी पीठ को चेक कर सकते हैं, जिस पर कोड़ों की मार के निशान हैं। जिसके बाद काजी ने अलकूज के सारे कपड़े उतरवाकर उसकी पीठ चेक करवाई और कोडो के निशान देखकर काजी ने अलकूज की एक भी बात नहीं मानी और एक बार फिर से उसे दंड के रूप में पांचसौ कोड़े मारने की सजा दे दी और नगर से निकालने की सजा भी दी, जिसके बाद उन लोगों ने वही किया जो काजी ने कहा था।

दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको यह कहानी रोचक लगी होगी ऐसे बहुत ही कहानियां है जो हमारी वेबसाइट में उपलब्ध हैं। आप इन्हें पढ़ सकते हैं और अपने बच्चों आदि को पढ़ा कर उनका मनोरंजन करवा सकते हैं और इस कहानी को साझा कर हमारा हौसला अफजाई कर सकते हैं और कहानी से संबंधित यदि आपका कोई भी प्रश्न है, तो आप कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते हैं ।

अलिफ लैला की सम्पूर्ण कहानियों के लिए यहाँ क्लिक करें