महात्मा बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था?

Mahatma Buddh Ka Janm Kahan Hua Tha: आज के इस आर्टिकल में हम सभी लोग बौद्ध धर्म के संस्थापक और बौद्ध धर्म के प्रथम प्रचारक महात्मा गौतम बुद्ध के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। महात्मा गौतम बुद्ध के जन्म को लेकर के आज का हमारा यह लेख प्रस्तुत है।

Mahatma Buddh Ka Janm Kahan Hua Tha
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आज के इस लेख में हम सभी लोग बात करेंगे, कि महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म कहां हुआ था? चलिए बिना देर किए शुरू करते हैं अपना यह लेख और जानते हैं महात्मा गौतम बुद्ध के विषय में।

महात्मा बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ था? | Mahatma Buddh Ka Janm Kahan Hua Tha

महात्मा गौतम बुद्ध कौन थे?

महात्मा गौतम बुद्ध क्षत्रिय कुल के थे। महात्मा गौतम बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनके पिता कपिलवस्तु के राजा थे तथा उनका नाम शुद्धोधन था। महात्मा गौतम बुद्ध के माता का नाम महामाया था, जो कोलिय वंश से संबंध रखती थी। महात्मा गौतम बुद्ध के जन्म के 7 दिन बाद ही उनकी माता का निधन हो गया।

अब महात्मा गौतम बुद्ध का पालन पोषण महामाया की छोटी बहन ने किया, जिनका नाम महा प्रजापति गौतमी था। उन्होंने महात्मा गौतम बुद्ध का अच्छे से पालन पोषण किया तथा कभी भी सिद्धार्थ को अपनी माता को ना होने का दुख महसूस नहीं होने दिया। महा प्रजापति गौतमी महात्मा गौतम बुद्ध को अपने सगे बेटे की तरह मानती थी।

महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म कहां हुआ था?

ऐसा माना जाता है की महात्मा गौतम बुद्ध की माता अपने मायके देवदह जा रही थी, कपिलवस्तु तथा देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर रुक्मिनदेई नामक स्थान पर लुंबिनी नामक एक वन हुआ करता था। उसी वन में महामाया ने महात्मा गौतम बुद्ध को जन्म दिया। महात्मा गौतम बुद्ध के जन्म का सन 563 ईसा पूर्व था।

महात्मा गौतम बुद्ध के समय जन्म के समय में एक भविष्यवाणी हुई थी कि महात्मा गौतम बुद्ध किसी महान धर्म का प्रचार प्रसार करेंगे। गौतम बुद्ध का बचपन बड़े ही सुख, समृद्धि के साथ बीता। महात्मा गौतम बुद्ध को अपने बचपन में किसी भी प्रकार की परेशानियां नहीं हुई। महात्मा गौतम बुद्ध बचपन से ही बहुत दयालु तथा बहुत ही साफ मन के व्यक्ति थे। यह कोई भी काम अपने स्वार्थ के लिए नहीं करते थे।

महात्मा गौतम बुद्ध का वैवाहिक जीवन

 महात्मा गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की अवस्था में ही हो गया था। उनकी पत्नी का नाम यशोधरा था। विवाह के उपरांत महात्मा गौतम बुद्ध के 29 वर्ष की अवस्था में उनको एक पुत्र हुआ जिसका नाम राहुल था।

महात्मा गौतम बुद्ध ने पुत्र प्राप्ति के कुछ दिन बाद ही अपने पुत्र राहुल तथा पत्नी यशोधरा तथा साथ ही साथ पूरा राज त्याग कर संसार को मार्ग दिखाने निकल पड़े। वह लोगों को जीवन मरण के चक्कर से छुटकारा दिलाना चाहते थे।

महात्मा गौतम बुद्ध द्वारा बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार

बौद्ध धर्म भारत की श्रवण परंपरा से निकला हुआ एक धर्म है। महात्मा गौतम बुद्ध ने अनेक स्थानों पर बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। महात्मा गौतम बुद्ध जी के साथ इनके शिष्य भी थे। महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार सारनाथ से शुरू किया था तथा प्रथम उपदेश सारनाथ ने ही दिया था। आज भी सारनाथ में महात्मा गौतम बुद्ध की एक बहुत बहुत ही विशाल प्रतिमा स्थापित है।

गौतम बुद्धा उनके शिष्यों ने सारनाथ ही नहीं बल्कि अनेकों स्थान पर बौद्ध धर्म का प्रचार किया था। बौद्ध धर्म केवल भारत में ही नहीं बल्कि विश्व के कई देशों में विख्यात है। इस्लाम धर्म के पश्चात सबसे अधिक प्रचलित तथा तीसरा सबसे बड़ा धर्म बन चुका है। पूरे विश्व में बौद्ध धर्म के अनुयाई लगभग 29% है,जो कि पूरे विश्व के जनसंख्या का 7% है।

महात्मा गौतम बुद्ध की शिक्षा दीक्षा

एक बार महात्मा गौतम बुद्ध गया जा रहा है थे। मार्ग में तेज धूप के कारण तथा दूर तक चलने के कारण वे थक गए थे। तत्पश्चात वहां उन्हें एक पीपल का वृक्ष दिखा। महात्मा गौतम बुद्ध थोड़े से विश्राम के लिए उस पीपल के पेड़ की छाया में बैठ गए बैठे-बैठे ध्यान लगाने की कोशिश करने लगे। तत्पश्चात उन्होंने निर्णय लिया कि जब तक वह सत्य की खोज का मार्ग ना निकालेंगे वह यहां से कहीं नहीं जाएंगे।

तथा 49 दिन की कठिन तपस्या के बाद उन्हे एक दिव्य रोशनी प्रतीत हुई। यह महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन का एक नया मोड़ था। इस कठिन तपस्या के अंतर्गत उन्होंने ढूंढा की सत्य हर एक मनुष्य के साथ है। किसी मनुष्य को सत्य को बाहर ढूंढने की कोई आवश्यकता नहीं है। सत्य हमेशा उस व्यक्ति के साथ होता है, परंतु मनुष्य उसे देख नहीं पाता।

विश्राम करने के लिए वह जिस पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे थे उस पीपल के वृक्ष को वर्तमान समय में बोधि वृक्ष नाम से जाना जाता है तथा उस स्थान को बोधगया के नाम से जाना जाता है।

महात्मा गौतम बुद्ध द्वारा दिए गए उपदेश

महात्मा गौतम बुद्ध जी ने अपने जीवन में मनुष्य के हित तथा भलाई के लिए बहुत से उपदेश दिए थे, जोकि निम्नलिखित हैं।

  1. महात्मा गौतम बुद्ध जी ने लोगों की आंख से अंधविश्वास का पर्दा हटाने के लिए एक धर्म की स्थापना की थी।
  2. गौतम बुद्ध जी ने कहा था कि यह संसार दुख से भरा है और दुखों का कारण ईर्ष्या है।
  3. महात्मा गौतम बुद्ध जी ने कहा था की जिस व्यक्ति ने अपने हृदय से ईर्ष्या को त्याग दिया, वह व्यक्ति सुखी से रहता है।
  4. महात्मा गौतम बुद्ध ने जीवन और मरण की प्रक्रिया को भी दुख का कारण दया।
  5. महात्मा गौतम बुद्ध जी ने केवल दुखों को ही नहीं बताया बल्कि साथ ही साथ दुखों के कारण को भी बताया।
  6. महात्मा गौतम बुद्ध जी यह भी कहते थे कि कोई भी धर्म हो वह धर्म ऐसा होना चाहिए कि वह आपको मोक्ष प्रदान करें।

महात्मा गौतम बुद्ध का निधन

महात्मा गौतम बुद्ध का निधन 80 वर्ष की अवस्था में भारत के कुशीनगर में सन 483 ईसा पूर्व में हुआ था। महात्मा गौतम बुद्ध की मृत्यु का अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश में एक बहुत ही प्रसिद्ध है बौद्ध धर्म स्थल पर हुआ था।

FAQ

महात्मा गौतम बुद्ध कौन थे?

महात्मा गौतम बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक है।

महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म किस कुल में हुआ था?

महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था।

गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ था?

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में हुआ था।

महात्मा गौतम बुद्ध के पिता का नाम क्या था?

महात्मा गौतम बुद्ध के पिता का नाम शुद्धोधन था।

महात्मा गौतम बुद्ध के माता का क्या नाम था?

गौतम बुध की माता का नाम महामाया था।

निष्कर्ष

हम आप सभी लोगों से उम्मीद करते हैं कि आपको हमारे द्वारा लिखा गया यह महत्वपूर्ण आर्टिकल महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म कहां हुआ था?(Mahatma Buddh Ka Janm Kahan Hua Tha) पसंद आया होगा। यदि आपको हमारा यह आर्टिकल वास्तव में पसंद आया हो, तो कृपया इसे शेयर करना बिल्कुल भी ना भूले और किसी भी सुझाव के लिए हमें अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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