जोधा अकबर की प्रेम कहानी

नमस्कार दोस्तों, आज हम आपको जोधा अकबर की प्रेम कहानी (Jodha Akbar Ki Prem Kahani) से रूबरू करवायेंगे। आपने यह कहानी जरूर फ़िल्म धारावाहिक के माध्यम से देखी होगी। यह कहानी बहुत प्रचलित है, आप इसे अंत तक पढ़िएगा।

Jodha Akbar Ki Prem Kahani
Image: Jodha Akbar Ki Prem Kahani

प्राचीन समय में राजा भारमल रहा करते थे, जो एक राजपूत शासक थे। भारमल बहुत ही प्रतापी और बहादुर शासक थे। राजा भारमल से उनकी प्रजा बहुत खुश रहती थी। राजा भारमल के विवाह के पश्चात उनको एक पुत्र की प्राप्ति हुई, जिसका नाम उन्होंने जोधाबाई रखा था। राजा और रानी अपनी पुत्री जोधाबाई से बहुत प्रेम करते थे।

जोधा बाई का जन्म सन 1 अक्टूबर 1542 ईस्वी को हुआ था। जोधा बाई दिखने में बहुत ही सुंदर और मनमोहक थी। कोई भी उनको देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता था और मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर मुगल वंश के बहुत ही प्रतापी और प्रतिभाशाली राजा था। अकबर को शिक्षा का ज्ञान नहीं था, वह अशिक्षित था। लेकिन कहा जाता है कि अकबर को सारी चीजों का ज्ञान प्राप्त था।

वह बहुत ही विद्वान प्रतिभाशाली और सभी कलाओं में निपुण था। अशिक्षित होने के बाद भी अकबर में वह सारे गुण थे, जो एक प्रतिभाशाली राजा में होते हैं। अकबर को अपनी नीति के लिए जाना जाता था। अकबर ने अपने राज्य में बहुत सारे अच्छे अच्छे कार्य किए थे, जिसकी वजह से प्रजा उन्हें महान अकबर के नाम से पुकारती थी।

अकबर सभी धर्मों का पालन किया करते था। अकबर को जोधाबाई से प्रेम करने के लिए भी जाना जाता था। जोधाबाई और अकबर की प्रेम कहानी इतिहास की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में से एक है। अकबर और जोधा बाई दोनों अपने अपने धर्मों से अलग होने के बाद भी जोधा अकबर की प्रेम कहानी एक बहुत बड़ी मिसाल बनी हुई थी। क्योंकि अकबर और जोधा की प्रेम कहानी हिंदू और मुस्लिम के धर्मों की प्रेम कहानी थी।

अकबर मुस्लिम धर्म का था और जोधा बाई हिंदू धर्म की थी। मुगलों के बादशाह अकबर जब पूरे भारत पर अपना कब्जा करना चाहता था, जिसके लिए वह अपने मुगल साम्राज्य को चारों ओर फैलाते जा रहा था। अकबर अपना दुश्मन राजपूतों को मना करता था क्योंकि राजपूत उनके मुगल साम्राज्य के बीच में आया करते थे और उनके कार्यों को असफल किया करते थे।

जिसके कारण अकबर अपना शत्रु राजपूतों को मानता था। क्योंकि राजपूतों के शासक महाराणा प्रताप थे और उन्होंने अपना वर्चस्व पूरे संसार में फैलाया हुआ था। बादशाह अकबर को राजपूतों की शक्ति का बहुत पहले से ही अंदाजा था, जिसके कारण अकबर ने कई जगहों पर राजपूतों से युद्ध करने की नीति को समाप्त कर दिया था और उसने राजपूतों से निपटने के लिए एक योजना बनाई थी।

अकबर ने पूरे भारत पर अपना शासन करने के लिए राजपूतों से समझौता करने का निर्णय लिया और कहा था कि वह उनसे युद्ध नहीं करेगा बल्कि उनसे मित्रता का हाथ आगे बढ़ाएगा। अकबर के पास बहुत सारी सेना मौजूद थी और बहुत सारा अस्त्र-शस्त्र भी था। लेकिन अकबर अपने राजा होने का कर्तव्य भली-भांति जानता था और वह यह नहीं चाहता था कि वह अपने सैनिकों की हत्या होते देखे।

जिसके लिए अकबर ने राजा भारमल की तीनों पुत्रियों को अपना बंदी बना लिया था और फिर अकबर ने राजा भारमल से उनकी पुत्री से जोधा से विवाह करने के लिए अपना प्रस्ताव रखा था। जिसके बाद राजपूत शासक भारमल को मजबूरी में अपनी पुत्री का विवाह अकबर से कराना पड़ा था और अकबर से संधि करनी पड़ी थी।

अकबर और जोधा का विवाह सन 6 फरवरी 1562 ईस्वी को हुआ था। हिंदू जाति के होने के बाद भी अकबर ने कभी भी जोधाबाई को अपना धर्म परिवर्तित करने के लिए कभी नहीं कहा था बल्कि अकबर ने जोधा बाई को हिंदू रीति रिवाज को अपनाने के लिए कहा था और अकबर ने कभी भी जोधाबाई को हिंदू धर्म की सभी तौर-तरीकों का पालन करने का आदेश दिया था।

हिंदू धर्म से पूजा पाठ करने का भी आदेश दिया था और अगर स्वयं ही जोधा बाई के साथ हिंदू धर्म के सभी रीति-रिवाजों का पालन करता था। उनके साथ पूजा पाठ में भी हाथ बटाया करता था और जिसके बाद अकबर ने अपनी राज्य में हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोगों को बराबर सम्मान देना शुरू कर दिया था। जिसके बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के लोग खुशी-खुशी मिलजुल कर रहा करते थे।

जिसको देखकर जोधा भाई भी बहुत खुश हुआ करती थी और उनका मन अकबर के प्रति धीरे-धीरे आकर्षित होता जा रहा था। जोधाबाई को अब अकबर से प्रेम होने लगा था, जोधा बाई बहुत विद्वान थी। जिसके कारण अकबर अपने सभी फैसले जोधा बाई से पूछ कर किया करता था। जिसके कारण आज सभी लोग जोधा बाई को मल्लिका ए हिंद के नाम से जानते हैं।

बादशाह अकबर जोधाबाई को बहुत प्रेम किया करते थे। वह अपनी सभी पत्नियों में जोधा बाई को बहुत अधिक प्रेम किया करते थे। जोधाबाई को सभी लोग हिंदुस्तान की रानी मां के नाम से पुकारते थे। अकबर और जोधा बाई के विवाह के पश्चात उनको तीन संतानों की प्राप्ति हुई थी लेकिन जन्म के कुछ दिनों बाद ही उनके पहले दो पुत्रों हसन और हुसैन का निधन हो गया था। जिसके बाद अकबर और जोधा बाई की तीसरी संतान सलीम का जन्म हुआ था।

जोधा बाई और अकबर अपने बेटे से बहुत प्रेम करते थे। वह अपने बेटे को अपनी जान से ज्यादा प्यार करते थे, जो आगे चलकर अकबर के बाद अकबर के राज्य का शासक बना था। मुगल साम्राज्य के शासक का निधन सन 27 अक्टूबर सन 1603 ईस्वी को आगरा से फतेहपुर सीकरी नामक स्थान पर हुआ था।

अकबर के निधन के बाद उनके बेटे सलीम ने अकबर के राजकाज को संभाला और जोधाबाई 43 साल तक महारानी के रूप में शासन किया था। 1623 ईस्वी में जोधा बाई का निधन हो गया था। जोधा बाई ने अपने निधन से पहले अपने पुत्र से कहा था कि मेरी कब्र भी अपने पिता अकबर के बगल में ही बनवाना।

जिसके बाद जोधाबाई और अकबर के बेटे सलीम ने अपनी माता के निधन के बाद उनकी कब्र अकबर के पास में ही बनवाई। अकबर और जोधा बाई की प्रेम कहानी हिंदू और मुस्लिम जाति के लिए बहुत बड़ी मिसाल कायम हुई थी। कहा जाता है कि इतिहास में किसी को भी नहीं पता है कि जोधा और अकबर की असल में क्या कहानी थी। कई लोग तो जोधा बाई को सिर्फ कहानी के रूप में ही मानते थे।

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