ईमानदारी पर 5 प्रेरणादायक कहानियाँ

Honesty Stories in Hindi: ईमानदारी का अर्थ है सच्चा होना। ईमानदारी का अर्थ है जीवन भर सच बोलने का अभ्यास विकसित करना। जो व्यक्ति अपने जीवन में ईमानदारी का अभ्यास करता है, उसका नैतिक चरित्र मजबूत होता है। एक ईमानदार व्यक्ति अच्छा व्यवहार दिखाता है, अनुशासन बनाए रखता है, सच बोलता है और समय का पाबंद होता है। एक ईमानदार व्यक्ति भरोसेमंद होता है क्योंकि वह हमेशा सच बोलता है। आज हम आपको इस आर्टिकल के दवारा हम आपको ईमानदारी पर 5 प्रेरणादायक कहानियाँ के बारे में बताएँगे, जो आपको काफी मददगार साबित होगी।

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ईमानदारी पर 5 प्रेरणादायक कहानियाँ | Honesty Stories in Hindi

लकड़हारा

एक समय की बात है एक गाँव में एक रामू नाम का गरीब लकड़हारा रहता था। रामू का घर जंगल के पास ही था। उसके पास एक लौहे की कुल्हाड़ी थी जिससे वह जंगल मे जाकर लकड़ी काटता था और शाम को काटी हुई लकड़ियों को शहर में जाकर बेचता था।

लकड़ी काटकर वह जो भी धन कमा पाता था उसी से अपने घर का गुजारा चलाया करता था। जिस जगंल में रामू लकड़ी काटता था वहाँ पर एक नदी थी। एक बार वह नदी के पास वाले पेड़ से लकड़ी काटने लगा और उसी वक़्त गलती से रामू की कुल्हाड़ी नदी में गिर जाती है।

ये देख रामू जोर-जोर से विलाप करने लगा। रामू को रोता हुआ देख, वहाँ पर नदी की देवी प्रकट हुई। उसने रामू से पूछा कि “तुम क्यों रो रहे हो?”

रामू ने बताया कि “मेरी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई है और मेरे पास दूसरी कुल्हाड़ी भी नही है। अब मैं लकड़ी कैसे काटूंगा।”

नदी की देवी कहती है कि “तुम चिंता मत करो। मैं अभी तुम्हारी कुल्हाड़ी ढूंढ लाती हूँ।”

देवी वापस जल में चली जाती है और एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर आती है वह रामू से पूछती है कि “क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”

रामू ने कहा नही, यह मेरी नही है।

देवी वापस जल में जाती है और इस बार चाँदी की कुल्हाड़ी लेकर आती है। देवी कहती है कि “क्या ये वाली तुम्हारी कुल्हाड़ी है?”

रामू फिर से उसे लेने से मना कर देता है की यह भी मेरी नही है। मेरी कुल्हाड़ी लौहे की है।

देवी फिर से जल में जाती है और इस बार वह लौहे वाली कुल्हाड़ी लेकर आती है और कहती है कि क्या ये वाली तुम्हारी है?

इस बार रामू हाँ में सिर हिलाता है। देवी रामू की ईमानदारी देखकर बहुत खुश हुई और तीनों कुल्हाड़ी उसे देती हुई बोली कि “तुम बहुत ईमानदार हो और मैं तुम्हारी ईमानदार से खुश हुई हूँ इसलिए लौहे की कुल्हाड़ी के साथ ये सोने और चाँदी की कुल्हाड़ी भी तुम्हें देना चाहती हूँ।

रामू वह तीनों कुल्हाड़ी ले लेता है और बहुत खुश होता है। रामू देवी का धन्यवाद करता है।

सीख: यदि हम ईमानदारी रखते है तो कभी हमारा नुकसान नही होता है।

गुलेल और लड़का

एक समय की बात है एक लड़का और लड़की जिनका नाम चीकू और रानी था दोनों भाई-बहिन थे। वे अपनी दादी के साथ रहते थे।

एक बार दोनों बगीचे में खेल रहे थे तभी चीकू को एक गुलेल पड़ी हुई मिली। चीकू ने उस गुलेल को उठाया और निशानेबाजी करने लगा। पहले उसने पेड़ पर निशाने लगाए तो एक भी सही नही लगा। उसी वक्त बगीचे में एक बत्तख आती है। चीकू उस बत्तख की गर्दन पर निशाना लगाता है और निशाना सही लग गया था और बत्तख की गर्दन टूट गई और वह मर गई।

रानी ने ये सब देख लिया तो चीकू ने रानी से घर मे किसी को इस बारे में ना बताने के लिए कहा।

रानी मान जाती है।

अब दोनों घर चले जाते है और दादी के साथ बैठकर खाना खाते है। दादी बच्चों से पूछती है कि “आज मेरे साथ मछली पकड़ने कौन चलेगा।”

दोनों जाना चाहते थे लेकिन किसी एक को घर का ध्यान रखने के लिए रुकना था। तो रानी चीकू की तरफ टेढ़ी आंखों से देखती है और धीरे से कहती है कि “मुझे जाने दे दादी के साथ वरना मैं बत्तख वाली बात दादी को बता दूँगी।”

चीकू बेचारा घर रुकने को तैयार हो गया।

अब अगले दिन दादी कहती है कि “आज मेरी तबीयत ठीक नही है ये बर्तन कौन धोएगा?”

रानी फिर से चीकू को डराती है तो चीकू बर्तन धोने लगता है

अब चीकू ने हिम्मत करके दादी को सब सच बताने का फैसला लिया। वह दादी के पास गया और पूरी बात उन्हें बता दी।

दादी ने कहा कि “चीकू मुझे तो सच्चाई पहले ही पता थी लेकिन मैं ये देखना चाहती थी कि तुम कितने ईमानदार हो। शाबाश तुमने खुद ही मुझे आकर बता दिया। तुम एक ईमानदार बच्चे हो।”

सीख: सच को स्वीकार करने की हिम्मत रखनी चाहिए।

राजा और बीज

एक राज्य में एक राजा राज करता था। राजा के तीन बेटे थे। अब समय आ गया था कि राजा अपना उत्तराधिकारी चुने, क्योंकि अब राजा बूढ़ा हो गया था। लेकिन उसे समझ नहीं आता है कि वो कौनसे बेटे तो राजा बनाये। इसलिए उसने एक उपाय सोचा और तीनों बेटो को अपने पास बुलाकर उत्तराधिकारी वाली बात बताई।

राजा ने तीनों को एक-एक बीज दिया और कहा कि “ये बीज आपको एक गमले में उगाना है और ठीक एक वर्ष पश्चात मैं देखूँगा की आपने बीज की कैसे रखवाली की है और उसे कितना बड़ा किया है? इसी आधार पर मै अपना उत्तराधिकारी चुनुगा।”

ऐसा कहकर राजा तीनो को जाने के लिए कहता है। अब तीनो बेटो ने बगीचे मे से एक-एक खाली गमला उठाया और अपने-अपने बीजों को उसमें बो दिया। तीनों ने खूब मेहनत की और बीज को पानी पिलाकर बड़ा करने लगे।

एक वर्ष बाद राजा तीनो को अपने पास बुलाता है और सबको अपना गमला दिखाने को कहता है। दोनों बड़े बेटे अपने गमले पिता को दिखाते है उन गमलों में बड़े से पौधे उग गए थे।

अब तीसरे बेटे की बारी आती है तो उसका गमला खाली मिलता है। राजा तीसरे बेटे को पूछता है कि उसका गमला खाली क्यों है?

तब वह जवाब देता है कि “पिताश्री मैंने बहुत कोशिश की लेकिन यह बीज अंकुरित ही नही हुआ। मैंने इसे वर्ष भर पानी पिलाया और देखभाल की।”

अब राजा कहता है कि “वक्त आ गया है कि मैं अपने उत्तराधिकारी का नाम बताऊँ”।

राजा अपने तीसरे बेटे को राजा बनाता है। तभी उसके दोनों बेटो ने आपत्ति जताई कि पिताश्री हमारे गमलों में बड़े पौधे थे लेकिन फिर भी आपने इसे राजा क्यों बनाया जबकि इसका गमला तो खाली है। ये तो अन्याय है।

तब राजा ने तीनो को पूरी बात बताई की उसने एक वर्ष पहले तीनो को उबले हुए बीज दिये थे जिनका पौधा बनाना तो असम्भव है इसलिए तीसरे बेटे का बीज नही उगा। लेकिन तुम दोनों ने तो असम्भव को सम्भव कर दिया और फिर वह हँसने लगा। राजा ने तीसरे बेटे की ईमानदार देख उसे उत्तराधिकारी बना दिया।

सीख: जो सच बोलता है वह सदैव आगे बढ़ता है।

जादुई छड़ी

एक समय की बात है एक गाँव में सेठ रहता था। सेठ के आगे 10 नौकर काम करते थे। सेठ की दुकान अच्छी चल रही थी, उसे एक ही दिक्कत थी कि आये दिन उसकी दुकान में चोरी हो जाती थी। परेशान होकर उसने एक दिन सभी नौकरो को अपने पास बुलाया और कहा कि हमारी दुकान में चोरियां हो रही है। अगर तुम मे से किसी ने ये काम किया है तो अभी सच बता दो।

लेकिन कोई भी नही बोलता है।

तो सेठ सबको अपने काम पर लगने का आदेश देता है। किसी के सच न बताने पर सेठ अपने एक रिश्तेदार को घर बुलाता है, जो कि बहुत बुद्धिमान था और उसे दुकान में होने वाली चोरी के बारे में बताता है। सेठ उससे आग्रह करता है कि तुम मुझे कोई उपाय बताओ।

रिश्तेदार सेठ से कहता है कि आप चिन्ता न करे। मैं आपकी परेशानी कल ही दूर कर दूँगा।

अगले दिन सेठ रिश्तेदार को अपनी दुकान पर ले जाता है। अब रिश्तेदार ने सभी नौकरो को बुलाया और कहा कि अगर किसी ने चोरी की है तो अभी बता दो। लेकिन इस बार भी कोई आगे नही आया।

रिश्तेदार सभी को एक-एक छड़ी देता है और कहता है कि ये एक जादुई छड़ी है। आप एक रात के लिए इसे अपने पास रखें। सुबह तक जिसने भी चोरी की होगी उसकी छड़ी 2 इंच लंबी हो जाएगी।

सब लोग छड़ी लेकर चले जाते है। इनमें एक किशन नाम का नौकर था जिसने चोरी की थी, उसने अपनी छड़ी को 2 इंच छोटा कर दिया ताकि किसी को पता न चले कि चोरी करने के कारण उसकी छड़ी 2 इंच लंबी हो गई थी।

अगली सुबह सब वापस दुकान में इक्कठे हुए।

रिश्तेदार ने सबकी छड़ी देखी सबकी छड़ी वैसी ही थी जैसी उसने दी थी। लेकिन किशन की छड़ी छोटी थी इसलिए रिश्तेदार को चोर का पता चल गया। वह सबको सच बताता है कि यह कोई जादुई छड़ी नही थी। किशन ने चोरी की इसलिए उसने पहले ही अपनी छड़ी को छोटा कर दिया ताकि छड़ी और ज्यादा ना बढ़ जाये।

अब सेठ किशन से नाराज होकर उसे दुकान से निकाल देता है।

सीख: सदैव बुद्धि से काम लेना चाहिए।

ईमानदार लड़का

एक गाँव मे एक राजू नाम का गरीब लड़का रहता था। उसके माता-पिता अत्यंत गरीब थे। राजू एक कंपनी में काम करता था। उस कंपनी का मालिक अच्छा आदमी था। लेकिन कंपनी में काम करने वाले अन्य लोग बहुत बुरे थे। वे राजू के गरीब होने के कारण उससे घृणा करते थे। वे राजू से अपना काम भी कराते थे और राजू चुपचाप उनका काम कर देता था।

एकदिन राजू के घर में कुछ काम होता है तो वह उस शाम को कंपनी से जल्दी जाता है। तभी उसके स्टाफ के कुछ लोग उसे उनका काम करने के लिए कहते है तो राजू उनसे कहता है कि आज उसे जल्दी जाना है वह कल आकर इनका काम कर देगा। तो कंपनी के लोग राजू से गुस्सा होकर उसे बुरी तरह पीट देते हैं।

अगली सुबह ये बात कम्पनी के मालिक को पता चलती है तो वह पूरे स्टाफ को एकत्रित करता है और राजू से पूछता है कि उसकी ऐसी हालत किसने की? मुझे बताओ मैं उसे नौकरी से निकाल दूँगा। तो राजू कुछ नही बताता है।

मालिक जोर लगाकर कहता है कि बताओ राजू तुम्हें किसने परेशान किया है। राजू कहता है कि किसी ने उसे परेशान नही किया। मालिक कहता है कि राजू झूठ मत बोलो और बताओ क्या हुआ था क्योंकि तुम्हारी हालत से पता चल रहा है कि तुम्हारी पिटाई हुई है। राजू कहता है कि सच में मालिक मैं ठीक हूँ मुझे कुछ नही हुआ है।

मालिक समझ जाता है कि वह झूठ बोल रहा है। मालिक मन ही मन मे राजू के बड़प्पन से खुश हुआ। और वहाँ से चला गया।

तभी उसके स्टाफ के लोगों ने उससे धन्यवाद कहा और माफी माँगी क्योंकि अगर राजू उनका नाम लेता तो मालिक उन्हें नौकरी से निकाल देता। अब जब राजू अपने घर जाने लगा तो उसके स्टॉफ ने कहा राजू अगर तुम्हारा कोई काम है तो हमे बताओ हम कर देंगे। तो राजू कहता है कि वह अपना काम खुद ही करेगा।

ये सुनकर सबके मन मे राजू के लिए और भी इज्जत बढ़ जाती है।

सीख: नेक और दयालु बने।

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