हस्त रेखा देखने की विधि चित्र सहित

Hast Rekha Gyan in Hindi With Picture: अपने भविष्य के बारे में जाने की रुचि हर किसी को होती हैं और भविष्य को जानने के लिए हस्त रेखा का विज्ञान बहुत ही प्रसिद्ध है। यह ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत आता है। प्रत्येक व्यक्ति के हथेली की रेखाएं भिन्न-भिन्न होती है, जिससे उन रेखाओं के ज्ञान से प्रत्येक व्यक्ति के भविष्य को बताना बहुत आसान हो जाता है।

कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जो अपना हर काम ज्योतिषी को हथेली दिखाकर ही करते हैं। हालांकि ज्योति शास्त्र रेखाओ के माध्यम से भविष्य को बयां करता है परंतु निश्चित दिन के भविष्य को नहीं बताता।

वैसे क्या हस्तरेखा पढ़ना केवल ज्योतिषी को ही आता है ऐसा नहीं है। हस्त रेखा का ज्ञान कोई भी ले सकता है। हथेली पर बनने वाली विभिन्न रेखाएं, उभरते पर्वतों और विभिन्न रेखाओं के महत्व को समझ और सीख कर कोई भी हाथ की रेखाओं को देखकर भविष्य जान सकता है।

Hast Rekha Gyan in Hindi With Picture
Image: Hast Rekha Gyan in Hindi With Picture

आप भी हस्तरेखा सीखना चाहते हैं तो बिल्कुल सही लेख पर आए हैं। क्योंकि आज के इस लेख में हम आपको हस्तरेखा देखने की विधि बताएंगे। यदि आप इस लेख को ध्यान से पढ़ेंगे और इससे प्रयास करेंगे तो आप बहुत जल्दी हस्त रेखा देखना सीख जाएंगे।

हस्त रेखा देखने की विधि चित्र सहित | Hast Rekha Gyan in Hindi With Picture

हस्तरेखा क्या होता है? (Hast Rekha in Hindi)

हस्तरेखा ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत आता एक अभिन्न अंग है। हस्तरेखा हथेली की रेखाओं को पढ़कर भविष्य बताने की कला है। हस्त रेखा के ज्ञान को काइरमैन्सी भी कहा जाता है, जिसमें काइर का अर्थ हाथ होता है और मानसी का मतलब अनुमान होता है। दुनिया का सबसे बड़ा ज्योतिशास्त्री कीरों को माना जाता है, जिन्होंने ज्योतिष शास्त्र और हस्तरेखा पर कई पुस्तकें लिखी।

भारत के कई प्रसिद्ध ज्योतिशास्त्री भी कीलों से प्रभावित हुए। इन्होंने ही सर्वप्रथम वैज्ञानिक पद्धतियों से भविष्य की गणना करने का प्रारंभ किया था। ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत हाथ की रेखाओं की संख्या, उसकी स्थिति, हाथों की उंगलियों की बनावट, हथेली की बनावट इत्यादि का अध्ययन किया जाता है।

इसी के आधार पर व्यक्ति के भविष्य को बताया जाता है, जिसमें उसके सफलता, आयु ,विवाह, संतान, भाग्य, स्वास्थ्य इत्यादि कई चीजों के बारे में बताया जा सकता है।

हस्त रेखाओं की संख्या

हथेली में आकार और स्थिति के आधार पर हस्त रेखाओं की संख्या निम्नलिखित है:

  • हृदय रेखा
  • मस्तिष्क रेखा
  • विवाह रेखा
  • यात्रा रेखा
  • भाग्य रेखा
  • संतान रेखा
  • विद्या रेखा

ह्रदय रेखा

हृदय रेखा व्यक्ति के भावनात्मक स्थिरता, गुण, स्वभाव, सामाजिक व्यवहार इत्यादि कई प्रकार की मनोवृति को व्यक्त करता है। यह रेखा हथेली की सबसे छोटी उंगली जिसे कनिष्का कहा जाता है, वहां से निकलता है और तर्जनी उंगली के मध्य तक जाता है। किसी किसी के हथेली में यह रेखा छोटी होती है तो किसी किसी की हथेली में यह रेखा लंबी होती है।

जिस व्यक्ति की हथेली में यह रेखा लंबी होती है वह शांत, सरल स्वभाव का होता है और वह जीवन में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। वहीं जिन व्यक्ति के हाथों में यह रेखा छोटी होती है, वह व्यक्ति स्वभाव से बहुत क्रूर और असंतोषी, संकालु, चिड़चिड़ा और छोटी सोच वाली होता है। ऐसे व्यक्ति जीवन में कभी भी सफलता नहीं पाते और लोगों से उन्हें उपेक्षा ही मिलते रहती हैं।

मस्तिष्क रेखा

मस्तिष्क रेखा को जीवन रेखा भी कहा जाता है। यह रेखा तर्जनी उंगली के नीचे से शुरू होती है और बाहर की ओर बढ़ती जाती है। यह रेखा किसी के हाथों में सीधी तो किसी के हाथों में नीचे की तरफ झुकी हुई दिखती है। इस रेखा के जरिए व्यक्ति के मानसिक व्यवस्था के बारे में जाना जा सकता है।

जिस व्यक्ति की हथेली में यह रेखा ज्यादा लंबी होती है वैसे व्यक्ति की मानसिक संतुलन अच्छी होती है, जिस कारण वह निर्णय लेने में भी काफी अच्छे होते हैं, उनकी स्मरण शक्ति भी अच्छी होती है। ऐसे व्यक्ति हमेशा ही कुछ ना कुछ नया सीखने की रूचि रखते हैं। वे हर कार्य को सोच समझकर करते हैं, जिस कारण उन्हें कभी भी अन्य लोगों से उपेक्षा नहीं मिलती।

ऐसे व्यक्ति भाग्य पर नहीं बल्कि मेहनत पर भरोसा करते हैं और जीवन में सफलता पाते हैं। वहीं जिन व्यक्तियों में यह रेखा छोटी होती है, वह मेहनत से ज्यादा भाग्य पर भरोसा करते हैं। जिस कारण वे भाग्य के भरोसे बैठे रहते हैं और जीवन में अधिकतर असफलता पाते हैं। ऐसे लोग निर्णयों में भी काफी जल्दबाजी करते हैं।

विवाह रेखा

विवाह रेखा को प्रेम रेखा भी कहा जाता है। यह हथेली की छोटी रेखा होती है, जो कनिष्ठा के नीचे के हिस्से में होती है। इन छोटी-छोटी रेखाओं के माध्यम से भविष्य में उसके वैवाहिक जीवन की स्थिति को देखा जाता है। ये रेखा हृदय रेखा के समांतर होती हैं। यह रेखा सूर्य पर्वत की ओर बढ़ रही हो या फिर पहुंच गई होती है तो ऐसे व्यक्ति का विवाह बहुत ही समृद्ध और संपन्न परिवार में होता है।

यदि ये रेखाएं टूटी हुई नजर आती है तो यह भविष्य में वैवाहिक जीवन में मतभेद होने की संभावना को दर्शाता है। यह छोटी-छोटी रेखाएं जितनी अधिक होती है, वैवाहिक जीवन में उतना ही ज्यादा प्रेम होता है। यदि दोनों हाथों विवाह रेखा एक समान हो तो इसका मतलब होता है कि पति पत्नी दोनों का ही वैवाहिक जीवन बहुत खुशहाल होता है और दोनों ही अपने वैवाहिक जीवन से संतुष्ट हो रहते हैं। जिन व्यक्तियों के हथेली में यह रेखा स्पष्ट होती है, वे रिश्तो को बहुत ज्यादा महत्व देते हैं।

यात्रा रेखा

हथेली में यात्रा रेखा भी होती है, जो हथेली पर तीन विभिन्न स्थानों पर होती है। जिसमें पहला चंद्रशेखर पर दूसरा मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर ऊपर की ओर जाती हुई नजर आती है। तीसरा जीवन रेखा से होते हुए निकलती है तथा उसी के सहारे चलती है।

जिनके हथेली में यह रेखा ऊपर की ओर जाती हुई प्रतीत होती है, उनके जीवन में यात्रा में वृद्धि होती है। यदि यह रेखा भाग्य रेखा से मिलकर अधिक गहरी हो जाती है तो यात्रा के अंतर्गत भाग्य में भी उन्नति होता है।

भाग्य रेखा

भाग्य रेखा हथेली में मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच से होकर नीचे की ओर बढ़ती हुई प्रतीत होती है। यह रेखा किसी व्यक्ति के हाथों में होती है तो किसी व्यक्ति के हाथों में नहीं होती है। किसी किसी व्यक्ति के हाथों में यह रेखा टूटी हुई और अस्पष्ट होती हैं। टूटी हुई और अस्पष्ट रेखा व्यक्ति के जीवन में कठिन संघर्ष को व्यक्त करता है।

वहीं जिन व्यक्तियों के हाथों में यह रेखा स्पष्ट और साफ होती है, वह बहुत भाग्यशाली होते हैं, उनका जीवन बहुत ही सरल और सुगम होता है। उन्हें जीवन में कामयाबी भी मिल जाती है। ऐसे व्यक्ति बहुत कम संघर्ष में हीं बहुत कुछ पा लेते हैं। जिन व्यक्तियों के हाथों में यह रेखा नहीं होती, वे मेहनत और कर्मवाद पर विश्वास करते हैं।

ऐसे व्यक्ति जीवन में भाग्य से नहीं बल्कि मेहनत से सफलता पाते हैं। जिन लोगों के हथेली में यह रेखा चंद्र क्षेत्र से होकर गुजरती हुई प्रतीत होती है, वे लोग जीवन में दूसरों की सहायता करते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

संतान रेखा

संतान रेखा हथेली में विवाह रेखा के अंत में ऊपर की ओर बढ़ती हुई प्रतीक आती है। जिन व्यक्तियों के हथेली में यह रेखा टेढ़ी-मेढ़ी होती है, उन्हें भविष्य में पुत्री होती है। वहीँ जिनकी हथेली में यह रेखा सीधी होती है, उन्हें पुत्र की प्राप्ति होती है। जिनकी हथेली में यह रेखा बहुत ही स्पष्ट और साफ होती है, ऐसे व्यक्तियों को उनके संतान से बहुत प्रेम और सुख प्राप्त होता है।

वहीं जिनके हाथों में यह रेखा अस्पष्ट होती है, उन्हें अपनी संतान से उपेक्षा मिलती हैं। जिन व्यक्तियों की हथेली में यह रेखा बिल्कुल भी नजर नहीं आती है, उन्हें भविष्य में संतान प्राप्ति नहीं होती है।

विद्या रेखा

यह रेखा व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को व्यक्त करता है। यह रेखा हथेली में अनामिका और मध्यमा उंगली के मध्य से गुजरती हुई नजर आती है। अनामिका उंगली की ओर यह रेखा थोड़ी सी झुकी हुई होती है। हथेली में साफ और स्पष्ट विद्या रेखा व्यक्ति के अच्छी बौद्धिक क्षमता को बताता है तथा ऐसे व्यक्ति निर्धन होने के बाद भी जीवन में उनके पास ज्ञान का धन होता है और वे अपनी बुद्धि के बलबूते सफलता प्राप्त करते हैं।

वहीँ जिन व्यक्ति के हथेली में इस रेखा पर क्रॉस का निशान होता है, वे लोग पढ़ाई में अच्छे नहीं होते हैं। उनकी बौद्धिक क्षमता बहुत कमजोर होती है।

hast rekha in hindi
Image: हस्त रेखा ज्ञान चित्र सहित (hast rekha in hindi)

उपयुक्त महत्वपूर्ण रेखाओं के अतिरिक्त भी हथेली में अन्य रेखा भी होती है, जो निम्नलिखित है:

स्वास्थ्य रेखा

स्वास्थ रेखा भविष्य में व्यक्ति की स्वास्थ स्थिति को बताता है। यह रेखा हथेली की छोटी उंगली जिसे कनिष्का कहा जाता है, वहां से प्रारंभ होकर हथेली से गुजरते हुए नीचे की ओर बढ़ती हुई प्रतीत होती हैं। जिन लोगों में यह रेखा साफ और स्पष्ट होता है, भविष्य में उनकी स्वास्थ्य स्थिति अच्छी रहती है।

वहीँ जिस व्यक्ति के हाथों में यह रेखा अस्पष्ट या कटी हुई होती है, उन्हें भविष्य में कई प्रकार के स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियों को झेलना पड़ सकता है।

सूर्य रेखा

सूर्य रेखा हथेली में चंद्र पर्वत से प्रारंभ होकर अनामिका उंगली की ओर गुजरते हुए प्रतीत होती है। यह रेखा व्यक्ति के निडर, स्वाभिमान, दृढ़ इच्छा शक्ति जैसे भावों को व्यक्त करता है। जिन व्यक्तियों के हथेली में यह रेखा होती है, वे नेतृत्व प्रिय होते हैं और अपने निर्णय पर दृढ़ रहने वाले और कभी हार ना मानने वाले व्यक्ति होते हैं।

शुक्र मुद्रिका

जो व्यक्ति विलासी, खर्चीला, कामुक और भौतिकवादी होते हैं, उनके हथेली में शुक्र मुद्रिका रेखा पाई जाती है। यह रेखा कनिष्का और अनामिका के मध्य से प्रारंभ होती है और तर्जनी और अनामिका के मध्य में चंद्राकार आकार में प्रतित होती हैं।

मंगल रेखा

जो व्यक्ति अपने निर्णय के ऊपर दृढ़ रहते हैं, हर कार्य को सोच समझकर करते हैं, अपने लक्ष्य के प्रति बहुत ही जुझारु होते हैं और तिव्र बुद्धि वाले होते हैं वैसे व्यक्ति के हथेली में मंगल रेखा पाई जाती है। यह रेखा जीवन रेखा और अंगूठे के मध्य से निकलती हुई मंगल पर्वत तक जाती है।

चन्द्र रेखा

साफ और स्पष्ट चंद्र रेखा जिन व्यक्तियों की हथेली में होती है, वे व्यवहार में बहुत कुशल और मिलनसार होते हैं। ऐसे व्यक्ति अन्य लोगों को प्रेरित करते हैं और उन्नति प्राप्त करते हैं। यह रेखा कनिष्का और अनामिका के मध्य से होकर नीचे मणिबंध तक जाती हुई प्रतीत होती है।

निकृष्ट रेखा

इस रेखा को दुख और कष्ट दाई रेखा कहा जाता है। यह चन्द्र रेखा की ओर से बढ़ती तथा स्वास्थ रेखा के साथ शुक्र स्थान में प्रवेश करती हुई प्रतीत होती है। जिन लोगों के हथेली में यह रेखा होती है, उनके जीवन में बहुत ही दुख और कष्ट होता है।

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हस्तरेखा देखते समय निम्न बातों का ध्यान रखें

  • ज्योति शास्त्र के मान्यता के अनुसार हस्तरेखा प्रातकाल नहीं देखना चाहिए ना हीं तो दोपहर या रात के समय में हाथ की रेखाओं का आंकलन करना चाहिए।
  • खाना खाने के बाद हस्तरेखा नहीं दिखाना चाहिए क्योंकि उस समय शरीर में रक्त प्रवाह तीव्र हो जाता है, जिसके कारण हाथ की रेखाएं स्पष्ट दिखाई नहीं देती है।
  • किसी भारी कार्य करने के बाद भी हाथ की रेखा नहीं देखनी चाहिए।
  • हथेली की रेखाओं का आंकलन करते समय दिमाग ठंडा और मन शांत होना चाहिए।
  • पुरुषों में दाएं हाथ और महिलाओं में बाएं हाथ में हस्तरेखा देखना चाहिए।
  • हथेली में अस्पष्ट और टूटी फूटी रेखाएं अशुभ संकेत दर्शाती है।
  • हथेली में साफ स्पष्ट रेखाएं और अत्यधिक पर्वतों का उभार अच्छे भविष्य को दर्शाता है।

हथेली पर बनने वाले पर्वत

हथेली पर बनने वाली पर्वतों का महत्व भी काफी होता है। हस्त रेखाओं में इसके जरिए भविष्य का अनुमान लगाने में मदद मिलता है। हथेली में पांच प्रकार के पर्वत होते हैं:

  • गुरु पर्वत: तर्जनी के नीचे वाले हिस्से को गुरु पर्वत कहते हैं।
  • सूर्य पर्वत: अनामिका के नीचे वाले हिस्से को सूर्य पर्वत कहते हैं।
  • शनि पर्वत: मध्यमा के नीचे स्थित भाग को शनि पर्वत कहते हैं।
  • बुध पर्वत: कनिष्ठा के नीचे वाले भाग को बुध पर्वत कहते हैं।
  • शुक्र पर्वत: अंगूठे के नीचे बने भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं।

FAQ

हस्तरेखा कला की शुरुआत कहां हुई?

हस्तरेखा कला की शुरुआत भारत से हुई परंतु यह कला धीरे-धीरे चीन, तिब्बत, मिस्र, फारस और यूरोप के अन्य देशों में फैला।

हस्तरेखा पढ़ने के लिए कौन से हाथ का प्रयोग किया जाता है?

वैसे तो हस्तरेखा पढ़ने के लिए आदमी में दाएं हाथ और महिला में बाएं हाथ का प्रयोग किया जाता है। परंतु आमतौर पर प्रमुख हाथ का चुनाव किया जाता है यानी कि जिस हाथ का प्रयोग व्यक्ति लिखने के लिए और अन्य कामों को करने के लिए ज्यादा करता है।

हस्तरेखा शास्त्र को अन्य किस नाम से जाना जाता है?

हस्तरेखा शास्त्र को काइरमैन्सी नाम से भी जाना जाता है।

ह्रदय रेखा कहां होती हैं?

हृदय रेखा हथेली की छोटी उंगली कनिष्का से निकलती है और तर्जनी उंगली के मध्य तक जाती प्रतीत होती हैं।

निष्कर्ष

आज के लेख में हमने आपको हस्तरेखा देखना चित्र सहित (Hath ki Rekha Gyan in Hindi with Picture) बताया है। हमें उम्मीद है कि इस लेख में दिए गए जानकारी की मदद से आप अच्छे से हस्तरेखा पढ़ना सीख पाएंगे।

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