मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध

Essay On My Favorite Book Panchatantra in Hindi: नमस्कार दोस्तों, यहाँ पर हम पंचतंत्र पर निबंध शेयर कर रहे हैं। यह निबन्ध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार होगा।

Essay on my favorite book Panchatantra
Essay on my favorite book Panchatantra In Hindi

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मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध | Essay On My Favorite Book Panchatantra in Hindi

मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध (250 शब्दों में)

पुस्तक पढ़ने का शौक हर आदमी को होता है। सदियों से हमारे जीवन में पुस्तकों की एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है, क्योंकि इनसे हमें सभी प्रकार की जानकारियां प्राप्त हो जाती हैं। किताबों में मुख्य रूप से किसी भी संबंधित विषय पर विभिन्न सूचनाओं और महत्वपूर्ण तथ्यों का एक संपूर्ण संग्रह किताब में मिलता है, उसको पढ़ने से हमें ज्ञान प्राप्त होता है। सभी को अपने जीवन में कोई ना कोई महत्वपूर्ण पुस्तक पसंद होती है, जो सबसे ज्यादा प्रिय होती है। मुझे भी एक पुस्तक पंचतंत्र बहुत पसंद है।

मुझे बचपन से ही किताबें पढ़ने का बहुत शौक रहा है क्योंकि जब मैं छोटा था तब से मैंने बहुत ही रोचक और प्रेरणा देने वाली किताबों को मैंने बहुत ध्यान से पढ़ा है। लेकिन सबसे अधिक मेरे जीवन को जिस पुस्तक ने प्रभावित किया, वह विष्णु शर्मा के द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘पंचतंत्र’ रही है।

इस पुस्तक में बहुत अच्छी अच्छी प्रेरणा देने वाली कहानियां है, जो बच्चों के लिए बहुत ही उपयोगी हैं इस पुस्तक में जो भी कहानियों के मुख्य पात्र हैं, वह घरेलू तथा जीव जंतु आदि हैं। इसमें बैल, सियार, शेर, हाथी, सांप, मगरमच्छ, बंदर, चूहा आदि को इस पुस्तक की कहानी में मुख्य पात्र के रूप में बनाकर उनके जीवन की सच्चाई को दिखाया गया है।

इस पुस्तक की सभी कहानियों में जीवन के बड़े रहस्य को पढ़ने को मिलता है। उनको पढ़कर हमें यह समझ आता है कि हमारे जीवन में सच्चा मित्र कौन हैं और हमारा दुश्मन कौन है, सही गलत की कैसे पहचान की जा सकती है और कठिन कार्य को आसान कैसे बुद्धि और विवेक के द्वारा किया जाता है। इसके अलावा लालची और धूर्त लोगों का हमारे जीवन में होने से किस तरीके से हमें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। यह सब बातें इस पंचतंत्र किताब में हमें पढ़ने को मिलती है।

मेरी प्रिय पुस्तक पंचतंत्र पर निबंध (800 शब्दों में)

प्रस्तावना

पुस्तकों का हमारे जीवन में सबसे ज्यादा महत्व होता है। क्योंकि यह हमें जीने की अच्छी राह दिखाती है। पहले के समय में पुस्तकें उपलब्ध नहीं होती थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया और संसाधनों का विकास हुआ तब से हमें अच्छी अच्छी पुस्तकें पढ़ने को मिल जाती हैं।

पुस्तक हमारे जीवन में सफलता दिलाने के लिए एक सच्चे मार्गदर्शक के रुप में भी काम करती है, पुस्तके ज्ञान की पूंजी होती हैं। पुस्तक में एक सच्चे मित्र और गुरु दोनों की भूमिका को अदा करती है। एक अच्छी किताब लगभग हजार दोस्त के बराबर होती है, जो कि किसी भी परिस्थिति में इंसान का साथ नहीं छोड़ती है।

इस पुस्तक मे लिखी मनोरंजक कहानियां के माध्यम से साम दाम दंड भेद आदि राजनीतिक ज्ञान भी दिया गया है। इसमें पशु पक्षी और जानवरों को मुख्य पात्र बना कर नैतिक जीवन के व्यवहारिक ज्ञान के बारे में बताया गया है।

पंचतंत्र की पुस्तक कब और किसके द्वारा लिखी?

पंचतंत्र नामक पुस्तक को पंडित विष्णु शर्मा नाम के एक विद्वान के द्वारा लिखा गया था। इस पुस्तक को लगभग 2000 साल पहले लिखा गया था। इसमें विष्णु शर्मा ने अपनी कहानी में पशुओं को पात्र बनाकर उनके माध्यम से कहानियां लिखी है। उनकी कहानी में एक राजा के 3 मंदबुद्धि बेटों को शिक्षित करने के लिए इस पुस्तक की रचना की गई। उस समय पंडित विष्णु शर्मा की उम्र लगभग 80 वर्ष के करीब थी और इस पुस्तक को सबसे पहले संस्कृत भाषा में लिखा गया था, उसके बाद इसका हिंदी में रूपांतरण किया था। लेकिन अब यह पुस्तक अनेक भाषाओं में उपलब्ध है।

इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र कैसे रखा गया?

इस पुस्तक को 5 अध्यायों (मित्र भेद, मित्र लाभ, काकोलुकियम, लब्ध प्रणाश और अपरिक्षित कारक) में लिखा गया। इस वजह से इस पुस्तक का नाम पंचतंत्र रखा गया।

इस पुस्तक की सबसे ज्यादा खासियत यह रही है कि इसमें जानवरों को पात्र बना कर बहुत ही शिक्षाप्रद बातों को इसमें लिखा गया है। इसमें मुख्यतः एक पिंगलक नाम के सिहार मंत्री के दो बेटे दमनक और करकट उनके बीच हुए संवाद और कथाओं के जरिए व्यवहारिक ज्ञान की शिक्षा सभी को दी गई है।

पंचतंत्र पुस्तक लिखने का कारण

यह पुस्तक राजा अमर शक्ति के शासनकाल के दौरान लिखी गई थी। राजा अमर शक्ति बहुत ही न्याय प्रिय और बहुत ही होशियार राजा थे। परंतु उनके जो 3 पुत्र थे, वह बहुत ही निकम्मे और मूर्ख थे। राजा अपने पुत्रों के मंदबुद्धि होने के कारण से बहुत परेशान थे तो उन्होंने अपने राज्य में यह घोषणा करवा दी थी कि जो भी उनके पुत्रों को सही रास्ते पर ला देगा अथवा सुधार देगा, उनको इनाम के रूप में जो वह चाहेंगे वह मिल जाएगा।

इसके लिए उन्होंने अपने मंत्री-गणों के बीच में इस बात को रखा। तब एक मंत्री ने उनको सुझाव दिया कि महाराज हमारे राज्य में एक बहुत विद्वान पंडित विष्णु शर्मा जी आए हुए हैं, अगर आप उनको इस कार्य को करने के लिए कहेंगे तो शायद आपके पुत्रों में सुधार आ जाएगा, क्योंकि पंडित विष्णु शर्मा ने बहुत से लोगों को अपनी विद्या के द्वारा बुद्धिमान बनाया है। क्यों ना हम भी उन पंडित जी के पास चलकर अपने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए बात करें।

तब अपने मंत्री की यह सब बातें सुनकर राजा ने पंडित विष्णु शर्मा को अपने राज्य में बुलवाया। तब विष्णु शर्मा ने राजा की सभी बातों को सुनकर कहा कि अगर महाराज में आपके तीन मूर्ख पुत्रों को शिक्षा देने में असफल रहा तो आप मुझे इसके लिए जो चाहे सजा दे सकते हैं, इन पुत्रों को शिक्षा देने के लिए मुझे लगभग 6 महीने का समय चाहिए।

पंडित विष्णु शर्मा की बातें सुनकर राजा ने अपने तीनों पुत्रों को पंडित जी के पास 6 महीने के लिए छोड़ दिया। तीनों राजकुमार पंडित विष्णु शर्मा के पास बहुत ही बुद्धिमान और शिक्षित हो गए।

पंडित विष्णु शर्मा ने उन तीनों राजकुमारों को पशु-पक्षियों की कुछ कहानियां सुनाई, जिससे उनके जीवन में इतना प्रभाव पड़ा कि वह तीनों सुधर गए। उनकी कहानियां सुनकर तीनों राजकुमारों को सही-गलत, अच्छे- बुरे की पहचान करना आ गया और वह एक अच्छे और बेहतर इंसान बन गए, उनका सारा अहंकार नष्ट हो गया था।इसको देखकर राजा बहुत ही प्रसन्न हुए।

इसके बाद पंडित विष्णु शर्मा ने एक ग्रंथ लिखने का विचार किया। उस ग्रंथ में ज्यादातर कहानियां पशु पक्षी की और हमारे समाज के बारे में लिखी गई इन कहानियों का एक ही लक्ष्य था कि ये कहानियां हमें मनोरंजन के साथ-साथ एक अच्छी शिक्षा भी प्रदान करती है।

पंचतंत्र की कहानियों से बच्चों को शिक्षा

पंचतंत्र की कहानियों से बच्चों को बहुत शिक्षा मिलती है, क्योंकि बच्चे पशु पक्षियों की कहानी सुना कर हम बच्चों को अपनी बात को आसानी से बच्चों को समझा सकते हैं। क्योंकि बच्चों को समझाना आज बहुत मुश्किल होता है। इसीलिए जानवर और पशु पक्षियों की इन कहानियों को सुनाकर हम उनको अच्छे से समझा सकते हैं। पंचतंत्र की कहानियां पढ़कर बच्चे ईमानदार बनते हैं तथा उनको सही गलत की पहचान हो जाती है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए सही राह मिल जाती है।

निष्कर्ष

पंचतंत्र की किताब हमेशा से मेरी बहुत पसंद की किताब रही हैं। क्योंकि इसकी जो कहानियां है, उनको पढ़ कर मुझे बहुत खुशी, साहस तथा जीवन जीने का सही ढंग आया है। पंचतंत्र की जितनी भी कहानियां है, वह सभी हमें किसी ना किसी रूप से एक महत्वपूर्ण अलग प्रकार की शिक्षाएं प्रदान करती हैं।

इसमें सभी कहानियां भले ही पशुओं ओर जानवरों के जीवन से जुड़ी हुई हो लेकिन ऐसा लगता है कि वो कहानियां हमारी असल जिंदगी से मिलती हुई है, हालांकि ये सब कहानियां पूर्णता काल्पनिक है, लेकिन फिर भी यह कहानियां मानव जीवन में बहुत ही शिक्षा प्रदान करती हैं।

पंचतंत्र की इस किताब में बंदर, मगरमच्छ, चूहा और हाथी और भी मनोरंजन प्रदान करने वाली बहुत अच्छी अच्छी कहानियां इसमें मौजूद हैं। इन कहानियों के माध्यम से हमारे अंदर ज्ञान का विकास होता है और हमको साहस और बुद्धि भी मिलती है।

अंतिम शब्द

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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