भगत सिंह पर निबंध

Essay On Bhagat Singh In Hindi: हम यहां पर भगत सिंह पर निबंध शेयर कर रहे है। इस निबंध में भगत सिंह के संदर्भित सभी माहिति को आपके साथ शेअर किया गया है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार है।

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भगत सिंह पर निबंध | Essay On Bhagat Singh In Hindi

भगत सिंह पर निबंध (200 Word)

आज भी भगत सिंह का नाम देश भर में लोकप्रिय है। भगत सिंह का नाम देश के लिए अमर शहीदों की सूची में सबसे ऊपर आता है। भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब के एक लायलपुर जिले में बंगा गांव में हुआ है। भगत सिंह का परिवार शुरुआत से ही देशभक्त सिख परिवार रहा था। उनके जीवन में उनके परिवार की देशभक्ति का प्रभाव काफी अधिक पड़ा। सरदार भगत सिंह के पापा का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था।

इनका परिवार सिख समुदाय से संबंधित था। लेकिन उन्होंने आर्य समाज के विचारों को अपना लिया था भगत सिंह ने 14 वर्ष की उम्र में क्रांतिकारी कार्यों में भाग लेना शुरू कर दिया और आजादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

जब भगत सिंह ने अपनी नौवीं की कक्षा की पढ़ाई पूरी कर ली थी, तब घर में उनकी शादी रचाने की बात की गई। ऐसे दौर पर भगत सिंह अपने गांव से कानपुर चले गए और क्रांतिकारी समारोह में अपना योगदान देना शुरू कर दिया। उसके पश्चात भगत सिंह ने ब्रिटिश शासन का बड़े ही बलपूर्वक विरोध किया और अंत में उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा फांसी पर लटका दिया गया। ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह के अंदर देश के प्रति भावना को देखते हुए एक शर्त रखी थी कि यदि भगत सिंह ब्रिटिश सरकार से माफी मांग लेता है। तो उसे फांसी की सजा से मुक्त कर दिया जाएगा। लेकिन वीर भगत सिंह ने माफी मांगने की बजाय मौत का रास्ता चुना।

भगत सिंह देश के एक वीर क्रांतिकारी थे और उन्होंने स्वतंत्रता के लिए बहुत संघर्ष किया। भगत सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन स्वतंत्रता के लिए लगा दिया और वह अंत में भी देश की स्वतंत्रता के लिए शहीद हो गए।

भगत सिंह पर निबंध (600 Word)

प्रस्तावना

भगत सिंह एक उत्कृष्ट और अप्राप्य क्रांतिकारी थें। उनका जन्म 28 सितंबर 1960 को पंजाब के दोहा जिले मैं एक चंदू जाट परिवार मैं हुआ था। वह बहुत कम उम्र में स्वतंत्रता के संघर्ष में शामिल हो गए और केवल 23 वर्ष की आयु में वह देश के लिए शहीद भी हो गए थे।

भगत सिंह बचपन के दिन

उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जो भारत के स्वतंत्रता संघर्ष में पूरी तरह से शामिल था। उनके पिता सरदार किशन सिंह और चाचा सरदार अजीत सिंह दोनों उस समय लोकप्रिय संपन्न तथा सेनानी थे। दोनों गांधीवादी विचारधारा का समर्थन करने के लिए जाने जाते थे। भगत सिंह के पिता और उनके चाचा हमेशा अंग्रेजों का विरोध करते थे, और इसी को देख देखकर भगत प्रभावित हुए इसलिए देश के प्रति निष्ठा और अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त करने की इच्छा भगत सिंह के खून में दौड़ रही थी।

भगत सिंह की शिक्षा

भगत सिंह के पिता महात्मा गांधी के बहुत बड़े समर्थक थे। जब सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों का बहिष्कार करने का आह्वान किया गया, उस समय भगत सिंह ने 13 वर्ष की आयु में स्कूल छोड़ दिया और फिर उन्हें लाहौर के नेशनल कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया। भगत सिंह ने कॉलेज में यूरोपीय क्रांतिकारी आंदोलनों के बारे में अध्ययन किया, जिससे उन्हें काफी प्रेरणा मिली।

स्वतंत्रता संग्राम में भगत सिंह की भागीदारी

भगत सिंह ने यूरोपीय राष्ट्रवादी आंदोलनों के बारे में कई बार लेख पढ़े, जिसके कारण वह 1925 में स्वतंत्रता आंदोलन के लिए प्रेरित हुए। उसके बाद भगत सिंह ने राष्ट्रीय आंदोलन के लिए नौजवान भारत सेना की स्थापना भी की। बाद में वह हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएट में शामिल हो गए। जहां उनका राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद जैसे प्रमुख क्रांतिकारियों से संपर्क हुआ। उन्होंने कीर्ति किसान पार्टी की पत्रिका के लिए योगदान देना भी शुरू किया।

उनके माता पिता चाहते थे कि उस समय वह शादी कर ले, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया उन्होंने अपने माता पिता से कहा कि वह अपना जीवन पूरा स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित करना चाहते हैं। विभिन्न क्रांतिकारी गतिविधियों में भागीदारी के कारण वह ब्रिटिश पुलिस के लिए रुचि के व्यक्ति बन गए। इसलिए पुलिस ने मई 1927 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ महीनों के बाद फिर से उन्हें जेल से रिहा कर दिया और फिर से उन्होंने खुद को समाचार पत्रों के लिए क्रांतिकारी लेख लिखने में शामिल कर लिया।

भगत सिंह के लिए महत्वपूर्ण मोड़

ब्रिटिश सरकार ने भारत के लिए स्वायत्तता पर चर्चा के लिए 1928 में साइमन कमीशन का आयोजन किया, लेकिन कई राजनीतिक संगठनों द्वारा इसका बहिष्कार किया गया। क्योंकि इस आयोग में किसी भी भारतीय प्रतिनिधि को शामिल नहीं किया गया। लाला लाजपत राय ने उसी का विरोध करते हुए एक जुलूस निकाला। भीड़ का नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। लाठीचार्ज के कारण पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से मारा। लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल भी हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ हफ्तों बाद लाला लाजपत राय जी शहीद हो गए।


इस घटना से भगत सिंह को बहुत दुख हुआ इसलिए उन्होंने लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए योजना बनाई। उन्होंने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सॉन्डर्स की हत्या कर दी। बाद में उनके सहयोगियों ने दिल्ली के केंद्रीय विधानसभा पर बमबारी की और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। भगत सिंह ने इस घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। भगत सिंह जेल में भूख हड़ताल की और फिर उसके बाद भगत सिंह को और उनके सहायकों राजगुरु और सुखदेव को भी 23 मार्च 1931 के दिन फांसी की सजा दे दी गई।

निष्कर्ष

आजादी की लड़ाई में भगत सिंह का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा था। आजादी की लड़ाई लड़ते-लड़ते भगत सिंह ने अपने प्राण देश के चरणों में न्योछावर कर दिए भगत सिंह द्वारा किए गए कार्य व आंदोलन आजादी की लड़ाई के लिए महत्वपूर्ण साबित रहे।

अंतिम शब्द

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