बाणभट्ट का जीवन परिचय

Banabhatta Biography in Hindi: नमस्कार दोस्तों, हम में से सभी विद्यार्थी बाणभट्ट के जीवन परिचय के बारे में तो अवश्य ही जानते होंगे, यदि आप नहीं जानते कि बाढ़ भट्ट कौन है? तो कृपया आप हमारे इस लेख के साथ बने रहे। क्योंकि इस लेख के माध्यम से आपको बाणभट्ट के विषय में संपूर्ण जानकारी बड़ी ही आसानी से प्राप्त हो जाएगी।

Banabhatta Biography in Hindi
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बाणभट्ट सातवीं शताब्दी के संस्कृत गद्य लेखक और एक बहुत ही प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। बाणभट्ट राजा हर्षवर्धन के स्थानिय कवि थे, अर्थात बाणभट्ट राजा हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे। बाणभट्ट की मृत्यु हो गई है, परंतु उनके द्वारा रचित रचनाएं आज भी संपूर्ण भारतवर्ष में बहुत ही प्रसिद्ध है। यह रचनाएं न केवल भारत में ही अपितु भारत की परंपरा पर चलने वाले कुछ अन्य देशों में भी बहुत ही प्रसिद्ध है। बाणभट्ट जी को संस्कृत साहित्य के बहुत ही महत्वपूर्ण कवियों में से एक माना जाता है।

आज के इस लेख के माध्यम से हम आपको यह बताने जा रहे है कि बाणभट्ट जी कौन है? बाणभट्ट का जन्म कब हुआ था? बाणभट्ट के ऊपर कौन सी रचना लिखी गई है?। यदि आप बाणभट्ट के जीवन परिचय से संबंधित सभी जानकारियां प्राप्त करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।

बाणभट्ट का जीवन परिचय | Banabhatta Biography in Hindi

बाणभट्ट के विषय में संपूर्ण जानकारी

नामबाणभट्ट
जन्मअब तक स्पष्ट नहीं है
जन्म स्थानस्पष्ट नहीं
पिताचित्रभानु
माताराज राज्यदेई
पेशादरबारी कवि
बाणभट्ट दरबारी कवि थेराजा हर्षवर्धन
मृत्युस्पष्टीकरण नहीं हुआ है

बाणभट्ट कौन है?

बाणभट्ट जी एक बहुत ही प्रसिद्ध कवि और लेखक हैं। बाणभट्ट को राजा हर्षवर्धन के दरबार का एक बहुत ही प्रसिद्ध कवि कहा जाता है, अर्थात बाणभट्ट राजा हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे। बाणभट्ट जी ने अनेकों प्रकार के ग्रंथों इत्यादि की रचना की है। बाणभट्ट ने अनेकों प्रकार की नाटक इत्यादि को भी लिखा है।

इतना ही नहीं भारत में रची गई यह रचनाएं संपूर्ण भारतवर्ष के साथ-साथ कुछ अन्य देशों में भी बहुत ही प्रसिद्ध है। क्योंकि इन रचनाओं में बाणभट्ट ने राजा हर्षवर्धन के गुणों का बड़ी ही अच्छी तरीके से वर्णन किया गया है।

बाणभट्ट का जन्म कब हुआ था?

बाणभट्ट जी बहुत ही प्रसिद्ध लेखक थे। यदि हम बात करें बाणभट्ट के जन्म की तिथि के बारे में तो उनकी जन्म तिथि अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है, क्योंकि उनके जन्म को लेकर अनेकों प्रकार के मत दिए जा रहे हैं, परंतु अभी तक कोई भी मत सही नहीं साबित हुआ है।

बाणभट्ट का जन्म मध्य प्रदेश के चंदरेह जिले में हुआ था, जोकि अब सीधी जिला नाम से प्रसिद्ध है। बाणभट्ट जी ने गद्य रचना के क्षेत्र में बहुत ही प्रसिद्ध स्थान प्राप्त किया है। बाणभट्ट को भी वही गद्य रचना क्षेत्र प्राप्त है जो कि कालिदास जी को प्राप्त था। जैसा कि हम जानते हैं बाणभट्ट जी को संस्कृत साहित्य में ही एक ऐसे महाकवि हैं, जिनके जीवन चरित के विषय में पर्याप्त मात्रा में जानकारी मिलती है, अन्यथा किसी भी लेखक के बारे में पूर्णता जानकारी नहीं प्राप्त होती।

बाणभट्ट जी कन्नौज और स्थानविश्वर के बहुत ही प्रसिद्ध हिंदू सम्राट हर्षवर्धन के दरबारी कवि हुआ करते थे। 21वीं सदी अलंकारिक ऊपर से लेकर के आठवीं सदी के वर्तमान में प्रमुख ग्रंथों में बाणभट्ट जी ने हर्षवर्धन की जीवन संबंधित गतिविधियों के बारे में लिखा है।

बाणभट्ट की शिक्षा

बाणभट्ट जी को प्राप्त शिक्षा के संबंध में किसी भी व्यक्ति को संपूर्ण जानकारी नहीं प्राप्त है। फिर भी उनके लेखनी के संदर्भ में ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि उनके शिक्षा का संबंध लगभग साहित्यिक रुचि ही रही होगी। बाणभट्ट जी ने किसी भी क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त की हो परंतु उन्होंने अपनी शिक्षा को काफी लगन और मेहनत से प्राप्त की है।

उनके ही लेख में ऐसा उल्लेख किया गया है कि कोई भी व्यक्ति हो उसे अपनी शिक्षा बड़े ही अच्छे तरीके से प्राप्त करनी चाहिए, भले ही वह व्यक्ति किसी भी कक्षा में पढ़ता हो।

बाणभट्ट के माता पिता कौन है?

आइए जानकारी प्राप्त करते हैं बाणभट्ट के माता-पिता के बारे में। बाणभट्ट को उनके माता-पिता के द्वारा काफी सहयोग प्राप्त हुआ था। बाणभट्ट के पिता का नाम चित्रभानु है और उनकी माता का नाम राज्य देई है।

बाणभट्ट का आरंभिक जीवन

हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि बाणभट्ट का आरंभिक जीवन बहुत ही सुखमय रुप से बीता है। क्योंकि बाणभट्ट जी राजा हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे, ऐसे में उनके जीवन को बिना किसी विवाद का होना पाया गया है। बाणभट्ट जी हर्षवर्धन के दरबार के न केवल एक प्रमुख लेखक थे, अपितु वह एक लेखक और कवि होने के साथ-साथ हर्षवर्धन के सभा के सामूहिक सभापंडित भी थे।

ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि बाणभट्ट का आरंभिक जीवन कष्टकारी रहा होगा। हर्षवर्धन बाणभट्ट को काफी पसंद करते थे, क्योंकि बाणभट्ट जी सदैव हर्षवर्धन के लिए ही लिखते थे। हर्षवर्धन के राज्य के उत्तर काल में उनके सभा कवि माने जाते थे, वह सभापति और कोई नहीं बल्कि बाणभट्ट ही थे।

महाकवि बाणभट्ट द्वारा रचित रचनाएं

बाणभट्ट की लेखनी से कई ग्रंथों और रत्नों का लेखन हुआ है, बाणभट्ट जी का महा कविता केवल हर्षचरित और कादंबरी के लिए सर्वमान्य है। बाणभट्ट की यही दो रचनाएं वर्तमान समय में काफी प्रचलित है। बाणभट्ट जी ने इन दोनों गद्य काव्य के अलावा मुकुटतडितक, चंडी शतक पार्वती परिणय जैसे अन्य रचनाएं भी बाणभट्ट के द्वारा ही रचित की गई है।

इसके अलावा बाणभट्ट जी जब अपनी अंतिम और काफी प्रसिद्ध रचना कादंबरी को लिख रहे थे, तभी इस लेख के मध्य में ही इनका देहांत हो गया। इनके पश्चात इन केले की संपूर्ण रचना इनके ही पुत्र भूषण भट्ट ने की थी, भूषण भट्ट ने इस रचना को कुछ अन्य कवियों के साथ मिलकर नहीं लिखा था। भूषण भट्ट ने इस रचना को स्वयं के मनोबल और सोचने समझने की क्षमता के साथ किया था।

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महाकवि बाणभट्ट की मृत्यु कब हुई थी?

आइए जानते हैं महाकवि बाणभट्ट की मृत्यु कब हुई थी? हम आपकी जानकारी के लिए बता दे कि बाणभट्ट की मृत्यु के संबंध में भी कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं है। क्योंकि बाणभट्ट जी का जी बहुत ही पुराने समय के कवि हुआ करते थे, इसलिए बाणभट्ट के विषय में अधिकतम जानकारी किसी भी व्यक्ति को नहीं प्राप्त होगी।

ऐसी जानकारी प्राप्त करने के लिए आपको किसी पुरातत्वविद के पास जाना होगा और उनसे इनकी मृत्यु के विषय में जानकारी प्राप्त करनी होगी।

निष्कर्ष

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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