नरेन्द्र मोदी की “हे… सागर!!! तुम्हें मेरा प्रणाम!” कविता – Narendra Modi Poem in Hindi

Narendra Modi Poem: तमिलनाडु के प्राचीन शहर महाबलीपुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अनौपचारिक मुलाकात की। दो दिनों तक वे वहीं रहे और चीन के राष्ट्रपति को इस एतिहासिक जगह का परिचित करवाया और उनसे लम्बी वार्ता भी की।

नरेन्द्र मोदी ने मामल्लपुरम समुद्र तट पर सागर की लहरों, शांत वातावरण और सूर्य की ताजा करने वाली किरणों को देखते हुए एक कविता लिखी है और इसी दौरान वहां पर फैला कचरा साफ़ करते हुए स्वच्छता का सन्देश भी दिया।

यह Narendra Modi Ki Kavita हम आपके साथ सांझा कर रहे हैं।

नरेन्द्र मोदी की “हे… सागर!!! तुम्हें मेरा प्रणाम!” कविता – Narendra Modi Poem in Hindi

Narendra Modi ki Kavita

नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया कि “कल महाबलीपुरम में सवेरे तट पर टहलते-टहलते सागर से संवाद करने में खो गया। ये संवाद मेरा भाव-विश्व है। इस संवाद भाव को शब्दबद्ध करके आपसे साझा कर रहा हूं।”

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!
तू धीर है, गंभीर है,
जग को जीवन देता, नीला है नीर तेरा।
ये अथाह विस्तार, ये विशालता,
तेरा ये रूप निराला।

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हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

सतह पर चलता ये कोलाहल, ये उत्पात,
कभी ऊपर तो कभी नीचे।
गरजती लहरों का प्रताप,
ये तुम्हारा दर्द है, आक्रोश है
या फिर संताप ?
तुम न होते विचलित
न आशंकित, न भयभीत
क्योंकि तुममें है गहराई!

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

शक्ति का अपार भंडार समेटे,
असीमित ऊर्जा स्वयं में लपेटे।
फिर भी अपनी मयार्दाओं को बांधे,
तुम कभी न अपनी सीमाएं लांघे!
हर पल बड़प्पन का बोध दिलाते।

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

तू शिक्षादाता, तू दीक्षादाता
तेरी लहरों में जीवन का
संदेश समाता।
न वाह की चाह,
न पनाह की आस,
बेपरवाह सा ये प्रवास।

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हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

चलते-चलाते जीवन संवारती,
लहरों की दौड़ तेरी।
न रुकती, न थकती,
चरैवती, चरैवती, चरैवती का मंत्र सुनाती।
निरंतर… सर्वत्र!
ये यात्रा अनवरत,
ये संदेश अनवरत।

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

लहरों से उभरती नई लहरें।
विलय में भी उदय,
जनम-मरण का क्रम है अनूठा,
ये मिटती-मिटाती, तुम में समाती,
पुनर्जन्म का अहसास कराती।

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

सूरज तुम्हारा नाता पुराना,
तपता-तपाता,
ये जीवंत-जल तुम्हारा।
खुद को मिटाता, आसमान को छूता,
मानो सूरज को चूमता,
बन बादल फिर बरसता,
मधु भाव बिखेरता।
सुजलाम-सुफलाम सृष्टि सजाता।

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

जीवन का ये सौंदर्य,
जैसे नीलकंठ का आदर्श,
धरा का विष, खुद में समाया,
खारापन समेट अपने भीतर,
जग को जीवन नया दिलाया,
जीवन जीने का मर्म सिखाया।

हे… सागर !!!
तुम्हें मेरा प्रणाम!

-नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi)

Note: Image Credit – Narendra Modi Twitter Account

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