हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ था?

Haldighati Ka Yuddh Kab Hua Tha : हल्दीघाटी का युद्ध भारत का इतिहास में विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह एक विश्व प्रसिद्ध भारतीय प्राचीन काल का बहुत बड़ा युद्ध है, जिस के चर्चे विश्व के कोने-कोने में फैले हुए हैं। इस युद्ध के अंतर्गत भारत के शासक मुगल बादशाह अकबर और एक छोटी सी स्वतंत्र रियासत मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप ने भाग लिया था।

महाराणा प्रताप ने अकबर के द्वारा भेजे गए हर प्रस्ताव को ठुकरा दिया और हमेशा स्वतंत्रता स्वाभिमान का ही चुना। इसीलिए अकबर ने समय-समय पर तरह-तरह के युद्ध किए तथा तरह-तरह के यौद्धाओं को महाराणा प्रताप को मारने के लिए भेजा लेकिन हर बार अकबर को हार का सामना करना पड़ा।

Haldighati Ka Yuddh Kab Hua Tha
Image :Haldighati Ka Yuddh Kab Hua Tha

हल्दीघाटी का युद्ध भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और एक महत्वपूर्ण युद्ध है क्योंकि इस युद्ध में एक तरफ एक छोटी सी मेवाड़ रियासत के महाराणा प्रताप तथा दूसरी तरफ संपूर्ण भारत के शासक अकबर अपने लाखों की फौज के बल पर लड़ रहा था। इस युद्ध में अकबर ने खुद भाग नहीं लिया और ना ही अकबर हमेशा कभी युद्ध में भाग लेता था।

अकबर अपनी चतुराई से राजपूत राजाओं तथा हिंदू शासकों को अपने दरबार में जगा देता और उन्हें ही युद्ध में लड़ने के लिए भेजता था। हल्दीघाटी के युद्ध में भी अकबर ने राजपूत राजा मानसिंह को महाराणा प्रताप से युद्ध करने के लिए भेजा लेकिन महाराणा प्रताप ने उन्हें बुरी तरह हराकर भेजा।

हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ था? | Haldighati Ka Yuddh Kab Hua Tha

हल्दीघाटी युद्ध किसके बीच लड़ा गया?

हल्दीघाटी का युद्ध मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप और दिल्ली के मुगल शासक अकबर की सेना के बीच लड़ा गया था। यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और निर्णायक युद्ध था। इस युद्ध की बातें विश्व के कोने कोने में फैली हुई है। इस युद्ध पर भारत के विभिन्न इतिहासकारों ने बड़े पैमाने पर वर्णन किया है।

समय-समय पर इस युद्ध पर विभिन्न प्रकार की पुस्तकें भी जारी की गई है। अकबर हर हाल में तथा हर कीमत पर महाराणा प्रताप को झुकाना चाहता था लेकिन राणा प्रताप ने अकबर के सभी उपहार सभी आमंत्रण तथा सभी संधि और प्रस्ताव को ठुकरा कर स्वतंत्रता के साथ स्वाभिमान से रहने का फैसला किया।

हल्दी घाटी कहां पर है?

राजस्थान में प्रसिद्ध एकलिंगजी से 18 किलोमीटर की दूरी पर एक अरावली पर्वत शृंखला में खमनोर एक मिट्टी की घाटी है, जिसका कलर हल्दी की तरह है इसीलिए उसे हल्दीघाटी कहते हैं। यहां पर ही महाराणा प्रताप के साथ मेवाड़ की सेना और अकबर की लाखों की सेना के बीच युद्ध हुआ था। इसीलिए इस युद्ध को हल्दीघाटी का युद्ध कहते हैं।

हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ था?

महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर की सेना के बीच हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। इतिहासकारों के अनुसार यह युद्ध अत्यंत विनाशकारी था क्योंकि इस युद्ध में वहां की हल्दी वाली पीली जमीन खून से लाल हो गई थी।

इस युद्ध के कई वर्षों बाद भी जांच के दौरान और खुदाई के दौरान तलवारें बरामद की गई है। इस युद्ध के बाद बड़े पैमाने पर इतिहासकारों ने वर्णन किया है जिसमें बताया गया है कि यह युद्ध बहुत बड़ा युद्ध था जिसे भारत का सबसे बड़ा निर्णायक युद्ध कहा जाता है।

अकबर ने हल्दीघाटी के युद्ध में भाग नहीं लेने के बजाय अपने लाखों की सेना को राजपूत शासक मान सिंह के नेतृत्व में भेज दी। लेकिन महाराणा प्रताप ने अपने प्रिय घोड़े चेतक के आगे हाथी की सूंड बांधकर अकबर की सेना के सेनापति मानसिंह के हाथी पर चढ़ाई करके मानसिंह को हानि पहुंचाई और मान सिंह का गुरुर चूर चूर कर दिया। इस युद्ध में मुगलों की लाखों की सेना पर महाराणा प्रताप की 20000 सेना भारी पड़ी।

निष्कर्ष

विश्व प्रसिद्ध हल्दीघाटी का युद्ध भारत के इतिहास के लिए काफी ज्यादा महत्व रखता है क्योंकि इस युद्ध में एक तरफ छोटी सी रियासत मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप, तो दूसरी तरफ संपूर्ण भारत की मुगलिया सल्तनत के शासक अकबर की सेना के बीच यह युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में लाखों की संख्या में अकबर की सेना ने भाग लिया था जिसका नेतृत्व आमेर के राजा भारमल के पुत्र एवं अकबर के प्रमुख सेनापति राजा मानसिंह ने किया था।

आर्टिकल में बताया गया है कि हल्दीघाटी का युद्ध कब हुआ था? (Haldighati Ka Yuddh Kab Hua Tha)। हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित हुई होगी। अगर आपका कोई प्रश्न है तो कमेंट करके पूछ सकते हैं।

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