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तुलसी माता की कहानी

नमस्कार दोस्तों कहानी की इस श्रृंखला में हम आपको तुलसी माता की कहानी से अवगत कराने जा रहे हैं। आपको इस कहानी में बुजुर्ग महिला और तुलसी माता जी के विषय में विस्तार से पता चलेगा। कृपया आप इस कहानी को अंत तक पढ़िएगा।

एक बार एक गांव में एक बुजुर्ग महिला रहा करती थी। वह बहुत ही पूजा-पाठ किया करती थी। वह रोज तुलसी मां की पूजा करती थी और वह बुजुर्ग महिला रोज तुलसी मां से कहती थी,” हे तुलसी मां, तुम मुझे बहु दे पितांबर की धोती दे। मीठा मीठा गास दे। बैकुंठ में वास दे। चटक की चाल दे। पटक की मौत दे। चंदन का काठ दे। रानी सा राज दे। दाल भात का भोजन दे। ग्यारस की मौत दे और कृष्ण जी का कांधा दें।”

वह बुजुर्ग महिला हर कार्तिक महीने में तुलसी माता की रोज पूजा करती और उनके बिडले को रोज सींचती। तुलसी माता बुजुर्ग महिला की बात सुनकर धीरे-धीरे सूखने लगी। तभी भगवान श्री कृष्ण देखा कि तुलसी माता सूख रही हैं और तभी एक दिन भगवान श्री कृष्ण तुलसी माता जी के पास प्रकट हो गए और भगवान श्री कृष्ण जी ने तुलसी माता से पूछा,” तुम क्यों सूख रही हो? सभी महिलाएं तुम्हारी पूजा करती हैं और तुमको सींचती है लेकिन फिर भी तुम सूखती जा रही हो, क्या कारण है इसका?

जिसके बाद तुलसी माता ने भगवान श्री कृष्ण जी से कहा कि,” हे प्रभु एक बुजुर्ग महिला मेरे पास रोज आती है और रोज एक ही बात बोलती है। हे तुलसी माता, सबकी दाता मैं तेरा बिड़ला सींचती हूं, तुम मुझे बहु दे पितांबर की धोती दे, मीठा मीठा गास दे, बैकुंठ में वास दे, चटक की चाल दे, पटक की मौत दे, चंदन का काठ दे, रानी सा राज दे, दाल भात का भोजन दे, ग्यारस की मौत दे और कृष्ण जी का कांधा दे।”

tulsi mata ki kahani

मैं उस बुजुर्ग महिला की सारी मनोकामनाएं पूरी कर सकती हूं। लेकिन उसकी एक मनोकामना पूरी नहीं कर सकती। मैं कृष्ण जी का कांधा कहां से दूंगी? उसको तभी भगवान श्री कृष्ण जी तुलसी माता की बात सुनकर जोर-जोर से हंसने लगे और फिर भगवान श्री कृष्ण जी ने तुलसी माता जी से कहा कि, तुम चिंता मत करो, जब वह बुजुर्ग महिला की मृत्यु होगी तब मैं स्वयं ही उसको कांधा देने आ जाऊंगा।

और तुम उस बुजुर्ग महिला से यह बता देना। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण जी तुलसी माता को यह बता कर वहां से अदृश्य हो गए और धीरे-धीरे कुछ बुजुर्ग महिला की तबीयत खराब हो गई और एक दिन जब एकादशी का दिन था तो, उस दिन उस बुजुर्ग महिला की मृत्यु हो गई ।

तभी कुछ बुजुर्ग महिला के आसपास रहने वाले सभी लोग आ गए और उन्होंने कुछ बुजुर्ग महिला की अंतिम संस्कार के लिए उसको जैसे ही उठाया तो वह बुजुर्ग महिला वहां पर किसी भी व्यक्ति से नहीं उठी। तभी वहां पर अचानक से एक बच्चा आया और सभी से कहने लगा कि,” मैं इस बुजुर्ग महिला के कान में कुछ कहूंगा, जिससे यह बुजुर्ग महिला हल्की हो जाएंगी और आप सभी लोग इनको आराम से उठा सकेगे।

यह सुनकर सभी लोग बहुत ही आश्चर्यचकित हो गए और कहने लगे ऐसा कैसे हो सकता है? और सभी लोगों ने उस बच्चे को बालक समझकर वहां से भगा दिया लेकिन वहां पर उपस्थित एक बुजुर्ग आदमी ने उस बच्चे से कहा कि,” जाओ, तुम्हें जो कुछ कहना है, वह कह लो लेकिन सभी लोगों को यह नहीं पता था कि बच्चे के रूप में भगवान श्रीकृष्ण खुद ही आएं है।

उस बुजुर्ग महिला को कांधा देने के लिए जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने उस बुजुर्ग महिला के पास गए और उनके कान में जाकर कहने लगे, माई मन की निकाल ले पितांबर की धोती ले, मीठा मीठा गास ले, बैकुंठ में वास ले, चटक की चाल ले, पटक की मौत ले, चंदन का काठ दे और अब ले कृष्ण जी का कांधा भी ले।

भगवान श्री कृष्ण के इतना बोलते हैं वह बुजुर्ग महिला हल्की हो गई और फिर भगवान श्री कृष्ण ने सभी लोगों के साथ मिलकर उस दिन महिला को कांधा दिया और उस बुजुर्ग महिला का अंतिम संस्कार किया।

जिसके बाद उस बुजुर्ग महिला को मोक्ष प्राप्त हो गया और उस बुजुर्ग महिला को स्वर्ग की प्राप्ति हुई। हिंदुओं की मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि तुलसी में माता लक्ष्मी जी का वास होता है। तुलसी जी का पेड़ लगाने से घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है और तुलसी जी की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

तुलसी जी की पूजा करने के लिए सर्वप्रथम स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहन कर सबसे पहले सूर्य भगवान को जल चढ़ाएं और उसके बाद तुलसी माता को पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके तुलसी माता को प्रणाम करना चाहिए।

फिर उसके बाद जल को तुलसी माता की जड़ों में अर्पित करें। जल को तीन बार में अर्पित करना चाहिए और चौथी बार में बचा हुआ सारा जल तुलसी माता की जड़ में अर्पित करना चाहिए और उसके बाद घी का दीपक जलाएं और तुलसी माता की पूजा करें। तुलसी माता का पेड़ लगाने के लिए सबसे सही समय कार्तिक मास रहता है और गुरुवार और शुक्रवार के दिन तुलसी माता का पेड़ लगाया जा सकता है।

माता तुलसी का पौधा घरों के आंगन में बीचोबीच उत्तर पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। तुलसी माता का पौधा दक्षिण की तरफ नहीं लगाना चाहिए और तुलसी माता के पत्ते को रविवार, एकादशी, संक्रांति, सूर्य ग्रहण, चंद्र और शाम के समय नहीं तोड़ने चाहिए और ऐसा माना जाता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी माता में दिया जलाते हैं। उनके घर में लक्ष्मी का हमेशा वास रहता है।

तुलसी का पौधा लगाने से घर में नकारात्मक शक्ति और वास्तु दोष नष्ट हो जाता है। रविवार के दिन तुलसी में कभी भी जल नहीं चढ़ाना चाहिए और और शाम के समय दीपक जलाना चाहिए और तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए।

अगर आपके घर में तुलसी का पौधा सूख गया है, तो उस तुलसी के पौधे को जड़ से निकालने के बाद गंगा जी में प्रवाह देना चाहिए और उसी जगह नहीं तुलसी का पेड़ लगाना चाहिए। तुलसी के पत्तों को कभी भी चबाकर नहीं खाना चाहिए। हमेशा उनको निकलकर खाए जाता है क्योंकि तुलसी के पत्तों में पारा धातु नामक तत्व पाया जाता है, जो हमारे दांतो के लिए हानिकारक होता है। तुलसी की पत्ती खाने से बहुत सारे रोग भी दूर रहते हैं।

दोस्तों उम्मीद करते हैं आपको यह कहानी रोचक लगी होगी। ऐसे बहुत ही कहानियां है जो हमारी वेबसाइट में उपलब्ध हैं। आप इन्हें पढ़ सकते हैं और अपने बच्चों आदि को पढ़ा कर उनका मनोरंजन करवा सकते हैं और इस कहानी को साझा कर हमारा हौसला अफजाई कर सकते हैं और कहानी से संबंधित यदि कोई भी प्रश्न है, तो आप कमेंट बॉक्स के माध्यम से पूछ सकते हैं।

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