राधा कृष्ण की प्रेम कहानी

Radha Krishna Ki Prem Kahani: भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की कहानी कौन नहीं जानता है। भगवान श्री कृष्ण का विवाह रुकमणी जी से हुआ था, लेकिन भगवान श्री कृष्ण राधा जी से प्रेम करते थे। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण की सोलह हजार एक सौ पत्नियां थी। देवी राधा जी का विवाह बचपन में ही अयान नाम के एक सैनिक से हो गया था।

जब राधा जी छह वर्ष की उम्र में थी तब उनका विवाह करवा दिया गया था। लेकिन विवाह के एक वर्ष के पश्चात ही अयान का निधन हो गया था, जिसके बाद ही देवी राधा का मिलन भगवान श्रीकृष्ण जी से हुआ था। एक बार जब भगवान श्री कृष्ण जी के पिता नंद बाबा जी भगवान श्री कृष्ण जी को लेकर बाजार घूमने गए थे तो उस बाजार में देवी राधा और उनके पिताजी उस बाजार में आए हुए थे।

radha krishna ki prem kahani
Image: radha krishna ki prem kahani

तभी देवी राधा ने भगवान श्री कृष्ण को पहली बार देखा था और भगवान श्री कृष्ण ने देवी राधा को पहली बार देखा था। अपने पहले ही मिलन में भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा को एक दूसरे से बहुत प्रेम हो गया था। ऐसा कहा जाता है कि पिछले जन्म में भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा जी ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि हम दोनों इसी स्थान पर मिलेंगे।

जब भगवान श्री कृष्ण जी वृंदावन में बांसुरी बजाया करते थे तब बांसुरी की धुन सुनकर सभी गोपियां उनके पास आ जाया करटी थी। गोपियों के साथ-साथ बांसुरी की धुन सुनकर देवी राधा जी भी वहां पर आती थी। भगवान श्री कृष्ण की बांसुरी की धुन में देवी राधा हो जाया करते थे और बांसुरी की धुन पर नृत्य करना शुरू कर देती थी। भगवान श्री कृष्ण की देवी राधा पर पूर्णतया मोहित थे और वह देवी राधा से विवाह करना चाहते थे।

जिसके लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी माता यशोदा जी से अपने और देवी राधा के विवाह के बारे में बात हुई थी और भगवान श्री कृष्ण ने माता यशोदा से कहा था मैया मैं राधा से विवाह करना चाहता हूं। जिसके बाद माता यशोदा ने देवी राधा से विवाह करने के लिए भगवान श्री कृष्ण को मना कर दिया था और उनसे कहा था कि तुम्हारा विवाह राधा से नहीं हो सकता है।

क्योंकि तेरी राधा तुमसे छह साल बड़ी है और उनका विवाह पहले से हो चुका है। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण बहुत जिद करने लगे, जिसके बाद माता यशोदा ने नंद बाबा से भगवान श्री कृष्ण को समझाने के लिए कहा। लेकिन नंद बाबा के समझाने के बाद भी भगवान श्रीकृष्ण नहीं माने। जिसके बाद ऋषि गर्ग ने भगवान श्री कृष्ण को समझाया कि आपका विवाह नहीं हो सकता है।

क्योंकि आप का जन्म किसी और कार्य के लिए हुआ है। तब ऋषि गर्ग ने भगवान श्रीकृष्ण को बताया कि आपका जन्म इस दुनिया में धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ है। लेकिन ऋषि गर्ग की बात भी भगवान श्रीकृष्ण ने नहीं मानी और जिद करने लगे। तब ऋषि गर्ग ने भगवान श्रीकृष्ण को बताया कि आपकी माता यशोदा और आपके पिता नंद जी नहीं है बल्कि आपके माता देवकी और आप के पिता वासुदेव हैं, जो इस समय आपके मामा कंस की कारागार में बंद हैं।

यह सुनने के बाद भगवान श्री कृष्ण जी वृंदावन से मथुरा आ गए। भगवान श्री कृष्ण के मथुरा आने के बाद देवी राधा का जीवन बिना कृष्ण को देखे बहुत दुर्लभ होने लगा। भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा जी का दोबारा से मिलन कुरूक्षेत्र में हुआ था, जहां पर एक सूर्य ग्रहण के दौरान द्वारिका से भगवान श्री कृष्ण और वृंदावन से नंद के साथ देवी राधा आई थी।

देवी राधा सिर्फ भगवान श्री कृष्ण को देखने के लिए ही आई थी। भगवान श्री कृष्ण और देवी राधा का आखरी मिलन द्वारिका में ही हुआ था जब देवी राधा भगवान श्री कृष्ण से मिलने के लिए उनके महल में गई थी। तब भगवान श्रीकृष्ण अपनी आठ पत्नियों के साथ महल में उपस्थित थे।

जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने महल में देवी राधा को देखा तो वह बहुत प्रसन्न हो गए थे। देवी राधा ने भगवान श्रीकृष्ण से उन्हीं के महल में रहने का अनुरोध किया। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने देवी राधा को देविका के पद पर नियुक्त कर दिया।

देवी राधा महल में सभी कार्यों को बहुत अच्छे ढंग से देखती थी और समय मिलते ही भगवान श्री कृष्ण के दर्शन किया करती थी। एक दिन देवी राधा जी ने उदास होकर महल को छोड़ने का निर्णय लिया, जिसके बाद देवी राधा जी ने जंगल के एक गांव में अपना जीवन यापन करना शुरू कर दिया।

बिना भगवान श्री कृष्ण को देखे हुए बहुत समय हो गया। देवी राधा भगवान श्री कृष्ण के वियोग में धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगी, जिसके बाद देवी राधा जी के अंतिम समय पर भगवान श्री कृष्ण देवी राधा जी के पास आ गए और उन्होंने देवी राधा जी से कुछ मांगने के लिए कहा। जिसके बाद देवी राधा जी ने भगवान श्री कृष्ण को मना कर दिया लेकिन भगवान श्री कृष्ण के जोर देने पर देवी राधा ने भगवान श्री कृष्ण से कहा कि आप मुझे अपनी बांसुरी एक बार फिर से सुना दे।

जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने देवी राधा जी को दिन रात में बांसुरी सुनाना शुरू कर दिया और बांसुरी की धुन सुनते-सुनते एक दिन देवी राधा जी ने अपने देह को त्याग दिया। 1 दिन भगवान श्रीकृष्ण जब अपनी पत्नी वीरजा के साथ घूमने के लिए कहीं गए थे तब देवी राधा वहां पर आ गई और भगवान श्री कृष्ण को ना देख वह वीरजा से क्रोधित हो गई और वहां से चली गई।

लेकिन भगवान श्री कृष्ण जी के मित्र श्री दामा जी को देवी राधा का यह करना उचित नहीं लगा, जिसके लिए उन्होंने क्रोधित होकर देवी राधा जी को भला बुरा कहा। जिससे देवी राधा क्रोधित हो गई और उन्होंने श्री दामा जी को श्राप दे दिया कि वह अगले जन्म में शंख चूर्ण नामक राक्षस बनोगे।

जिसके बाद श्रीदामा जी ने भी क्रोधित होकर देवी राधा को यह श्राप दिया कि वह सौ सालों तक भगवान श्री कृष्ण के वियोग में रहेगी। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने देवी राधा से कहा कि तुम्हारा जन्म मनुष्य रूप में होगा तब मैं तुम्हारे साथ में ही रहूंगा।

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