रावण के 10 सिर का रहस्य (रामायण की कहानी)

रावण के 10 सिर का रहस्य (रामायण की कहानी) | Raavan Ke Dus Sir Ka Rahasya Ramayan Ki Kahani

दशहरे पर एक पौराणिक परंपरा चलती आ रही है। दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। क्योंकि रामायण प्रतिक है, अहंकार का, अनैतिकता का, सत्ता एवं शक्ति के दुरुपयोग का, इन सभी चीजों का रावण प्रतीक माना गया है। रावण के 10 सिर थे, इसका रहस्य आज तक शायद आपको नहीं पता होगा। आइए लेख के द्वारा आपको इस रहस्य के बारे में जानकारी देते हैं।

रावण हमेशा से ही भगवान शिव का परम भक्त रहा है। एक समय की बात है रावण ने भगवान शिव को कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहा था। परंतु रावण के द्वारा हजारों साल तक तपस्या की गई थी, इसके बावजूद भी जब भगवान प्रसन्न नहीं हुए।

Raavan Ke Dus Sir Ka Rahasya Ramayan Ki Kahani
Raavan Ke Dus Sir Ka Rahasya Ramayan Ki Kahani

तब रावण बहुत ही अधिक निराश हो गया, जिसके पश्चात रावण ने अपना सिर भगवान शिव को अर्पण करने का निर्णय ले लिया। दूसरी तरफ भगवान शिव हमेशा की तरह अपने भगवान की भक्ति में लीन थे, जिस समय भगवान अपनी भक्ति में लीन थे।

उसी समय रावण ने अपना सिर भोलेनाथ को अर्पित कर दिया। परंतु उस समय रावण की मृत्यु नहीं हुई बल्कि उसकी जगह पर एक और सिर आ गया। ऐसे करते हुए रावण ने 9 सिर भगवान शिव के चरणों में अर्पित कर दिए।

इसके बाद जब रावण ने अपना 10वां सिर भगवान शिव को अर्पण करना चाहा तब भगवान शिव अधिक प्रसन्न हो गए और स्वयं प्रकट हो गए। इसी वाक्य के अनुसार शिव जी की कृपा रावण पर हो गई और रावण दशानन कहलाया। इसी वजह से हमेशा से ही रावण को भगवान शिव का परम भक्त माना गया था।

रावण के 10 सिर बुराइयों के प्रतीक माने जाते हैं

यह जो रावण के 10 सिर हैं यह अहंकार का प्रतीक माना जाता है। इसी के साथ रावण के 10 सिर में 10 प्रकार की बुराइयां छुपी हुई है। पहला है काम, इसके बाद क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, वासना, भ्रष्टाचार, सत्ता, एवं शक्ति का दुरुपयोग ईश्वर से विमुख होना, अनैतिकता और दसवा अहंकार का प्रतीक माना जाता है।

रावण इन 10 बुराइयों और नकारात्मक भावनाओं से ग्रस्त हो गया था, जिसकी वजह से उसका संपूर्ण ज्ञान नष्ट हो गया था। अंत में उसका विनाश होना निश्चित ही था।

एक अन्य रामायण के अनुसार

बाल्मीकि रामायण के अनुसार रावण 10 मस्तक बड़ी दाढ़ी तांबे जैसे होंठ और 20 भुजाओं के साथ रावण का जन्म हुआ था। ऐसा मानना है कि रावण कोयले के समान बिल्कुल काला था और उसकी 10 जीभ की वजह से उसके पिता ने उसका नाम दशग्रिव रखा था। इसी की वजह से रावण दशानन दशकंधन इत्यादि नामों से प्रसिद्ध हुआ था।

कई ग्रंथों के अनुसार यह भी माना जाता है कि 10 सिर केवल भ्रम है। क्योंकि भगवान शिव के परम भक्त रावण अपनी माया शक्ति के लिए भी जाने जाते थे, इसीलिए कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख किया गया है कि 10 सिर केवल एक भ्रम पैदा करने के लिए बनाए गए थे।

रावण के 10 से नहीं थे ऐसा कहा जाता है कि उनके गले में 9 मणियों की एक माला थी। इस माला की वजह से ही 10 सिर होने का भ्रम पैदा होता था और यह माला उनकी मां राक्षसी कैकसी ने दी थी।

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