दशहरा पर कविता

Poems on Dussehra in Hindi: नमस्कार दोस्तों, भारत एक त्यौहारों का देश है और यहां पर कई प्रकार के त्यौहार बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाये जाते हैं। सभी त्योहारों के पीछे कोई विशेष महत्व होता है। इन्हीं त्यौहारों में दशहरा भी एक मुख्य त्यौहार है।

यह त्यौहार हर वर्ष अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है। हिन्दू धर्म के त्यौहारों में दशहरा का त्यौहार मनाने के पीछे भी एक मुख्य कारण है। क्योंकि इस दिन से पहले मां दुर्गा ने लगातार नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया था और इस दिन इसका वध किया था। इस दिन ही भगवान श्री राम ने लंकापति रावण का भी युद्ध किया है।

Poems on Dussehra in Hindi

इस पोस्ट में हमने दशहरा पर कविता हिंदी में (poem on dussehra in hindi) शेयर की है। उम्मीद करते हैं आपको यह हिंदी कविताएं बहुत पसंद आएगी।

दशहरा पर कविताएं | Poems on Dussehra in Hindi

विजयादशमी (Poems on Vijayadasami in Hindi)

विजयादशमी विजय का, पावन है त्यौहार।
जीत हो गयी सत्य की, झूठ गया है हार।।

रावण के जब बढ़ गये, भू पर अत्याचार।
लंका में जाकर उसे, दिया राम ने मार।।

विजयादशमी ने दिया, हम सबको उपहार।
अच्छाई के सामने, गयी बुराई हार।।

मनसा-वाता-कर्मणा, सत्य रहे भरपूर।
नेक नीति हो साथ में, बाधाएँ हों दूर।।

पुतलों के ही दहन का, बढ़ने लगा रिवाज।
मन का रावण आज तक, जला न सका समाज।।

राम-कृष्ण के नाम धर, करते गन्दे काम।
नवयुग में तो राम का, हुआ नाम बदनाम।।

आज धर्म की ओट में, होता पापाचार।
साधू-सन्यासी करें, बढ़-चढ़ कर व्यापार।।

आज भोग में लिप्त हैं, योगी और महन्त।
भोली जनता को यहाँ, भरमाते हैं सन्त।।

जब पहुँचे मझधार में, टूट गयी पतवार।
कैसे देश-समाज का, होगा बेड़ा पार।।

-डॉ. रूपचंद्र शास्त्री मयंक

विजयदशमी (Dussehra Par Kavita)

जानकी जीवन, विजय दशमी तुम्हारी आज है,
दीख पड़ता देश में कुछ दूसरा ही साज है।
राघवेन्द्र ! हमेँ तुम्हारा आज भी कुछ ज्ञान है,
क्या तुम्हें भी अब कभी आता हमारा ध्यान है?

वह शुभस्मृति आज भी मन को बनाती है हरा,
देव ! तुम को आज भी भूली नहीं है यह धरा।
स्वच्छ जल रखती तथा उत्पन्न करती अन्न है,
दीन भी कुछ भेट लेकर दीखती सम्पन्न है।।

व्योम को भी याद है प्रभुवर तुम्हारी यह प्रभा!
कीर्ति करने बैठती है चन्द्र-तारों की सभा।
भानु भी नव-दीप्ति से करता प्रताप प्रकाश है,
जगमगा उठता स्वयं जल, थल तथा आकाश है।।

दुख में ही हा ! तुम्हारा ध्यान आया है हमें,
जान पड़ता किन्तु अब तुमने भुलाया है हमें।
सदय होकर भी सदा तुमने विभो ! यह क्या किया,
कठिन बनकर निज जनों को इस प्रकार भुला दिया।।

है हमारी क्या दशा सुध भी न ली तुमने हरे?
और देखा तक नहीं जन जी रहे हैं या मरे।
बन सकी हम से न कुछ भी किन्तु तुम से क्या बनी?
वचन देकर ही रहे, हो बात के ऐसे धनी!

आप आने को कहा था, किन्तु तुम आये कहां?
प्रश्न है जीवन-मरन का हो चुका प्रकटित यहाँ।
क्या तुम्हारे आगमन का समय अब भी दूर है?
हाय तब तो देश का दुर्भाग्य ही भरपूर है!

आग लगने पर उचित है क्या प्रतीक्षा वृष्टि की,
यह धरा अधिकारिणी है पूर्ण करुणा दृष्टि की।
नाथ इसकी ओर देखो और तुम रक्खो इसे,
देर करने पर बताओ फिर बचाओगे किसे?

बस तुम्हारे ही भरोसे आज भी यह जी रही,
पाप पीड़ित ताप से चुपचाप आँसू पी रही।
ज्ञान, गौरव, मान, धन, गुण, शील सब कुछ खो गया,
अन्त होना शेष है बस और सब कुछ हो गया।।

यह दशा है इस तुम्हारी कर्मलीला भूमि की,
हाय ! कैसी गति हुई इस धर्म-शीला भूमि की।
जा घिरी सौभाग्य-सीता दैन्य-सागर-पार है,
राम-रावण-वध बिना सम्भव कहाँ उद्धार है?

शक्ति दो भगवन् हमें कर्तव्य का पालन करें,
मनुज होकर हम न परवश पशु-समान जियें मरें।
विदित विजय-स्मृति तुम्हारी यह महामंगलमयी,
जटिल जीवन-युद्ध में कर दे हमें सत्वर जयी।।

-मैथिलीशरण गुप्त

यह भी पढ़े: दशहरा क्यों मनाया जाता है? (कारण, महत्व, पूजा विधि, इतिहास)

आ गया पावन दशहरा (dussehra poem in hindi)

आ गया पावन दशहरा
फिर हमे सन्देश देने
आ गया पावन दशहरा।
तुम संकटों का हो घनेरा
हो न आकुल मन ये तेरा
संकटो के तम छटेंगे
होगा फिर सुन्दर सवेरा
धैर्य का तू ले सहारा।
द्वेष कितना भी हो गहरा
हो न कलुषित मन ये तेरा
फिर ये टूटे दिल मिलेंगे
होगा जब प्रेमी चितेरा
बन शमी का पात प्यारा।
सत्य हो कितना प्रताड़ित
पर न हो सकता पराजित
रूप उसका और निखरे
जानता है विश्व सारा
बन विजय “स्वर्णिम सितारा”।

-सत्यनारायण सिंह

dussehra poem in hindi
Image: dussehra poem in hindi

सत्य की जीत (dashara per kavita)

दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत।
गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत।
सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल।
बिना रुके चलते रहें, शूल बनेंगे फूल।।
क्रोध, कपट, कटुता, कलह, चुगली अत्याचार
दगा, द्वेष, अन्याय, छल, रावण का परिवार।।
राम चिरंतन चेतना, राम सनातन सत्य।
रावण वैर-विकार है, रावण है दुष्कृत्य।।
वर्तमान का दशानन, यानी भ्रष्टाचार।
दशहरा पर करें, हम इसका संहार।।

-अजहर हाशमी

poem on dussehra in hindi
Image: poem on dussehra in hindi

यह भी पढ़े: दशहरा पर स्टेटस

दशहरा पर कविता (dashare per kavita)

है सुतिथि सिर धारी विजय दशमी।
है विजय सहचरी विजय दशमी।1।

कान्त कल कंठता दिखाती है।
है कलित किन्नरी विजय दशमी।2।

सामने ला कला बहुत सुन्दर।
है बनी सुन्दरी विजय दशमी।3।

पूत जातीय भाव पादप की।
है विकच बल्लरी विजय दशमी।4।

एक अवतार प्रीति पूता हो।
है धरा अवतरी विजय दशमी।5।

मंजु जातीयमान हिम कर की।
है शरद शर्वरी विजय दशमी।6।

दूर कर बहु अभाव भारत का।
भाव में है भरी विजय दशमी।7।

पा जिसे दुख उदधि उतर पाये।
है रुचिर वह तरी विजय दशमी।8।

जो असुर-भाव में भरे से हैं।
है उन्हें सुरसरी विजय दशमी।9।

जाति हित में शिथिल हुए जन की।
है शिथिलता हरी विजय दशमी।10।

बहु पतन शील प्राणियों की भी।
है परम हितकरी विजय दशमी।11।

आया दशहरा (hindi poem on dussehra)

विजय सत्य की हुई हमेशा,
हारी सदा बुराई है,
आया पर्व दशहरा कहता
करना सदा भलाई है.

रावण था दंभी अभिमानी,
उसने छल -बल दिखलाया,
बीस भुजा दस सीस कटाये,
अपना कुनबा मरवाया.

अपनी ही करनी से लंका
सोने की जलवाई है.

मन में कोई कहीं बुराई
रावण जैसी नहीं पले,
और अँधेरी वाली चादर
उजियारे को नहीं छले.

जिसने भी अभिमान किया है,
उसने मुँह की खायी है.

आज सभी की यही सोच है,
मेल -जोल खुशहाली हो,
अंधकार मिट जाए सारा,
घर घर में दिवाली हो.

मिली बड़ाई सदा उसी को
जिसने की अच्छाई है

उल्लास (Poems on Dussehra in Hindi)

उषा क्यों बहु अनुरंजित हुई
पहनकर अभिनंदन का साज!
प्रकृति के भव्य भाल का बिंदु
बना क्यों बाल-विभाकर आज।

किसलिए पारदमय हो गया
विमल नभतल का नील निचोल!
विहँसकर देख रही है किसे
दिग्वधू अपना घूँघट खोल।

खिल गये किसका बदन बिलोक
सरों में विलसे बहु अरबिंद!
बरसता है क्यों सुमन-समूह
प्रफुल्लित नाना पादप-वृन्द।

रत्नमय तारक-मिष क्यों हुआ
विधुमुखी रजनी-शिर का ताज!
बिछ गयी क्षिति पर चादर धुली
किसलिए कलित कौमुदी-व्याज।

वितरता फिरता है क्यों मोद
मंद-चल सुरभित सरस समीर!
मोहता है क्यों बज सब ओर
किसी मंजुल पग का मंजीर।

हँस रहे हैं सज्जित धवज लिये
आगमन से किसके आवास!
विपुल विकसित है जनता बनी
किस बिजयिनी का देख विकास।

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

हम उम्मीद करते हैं आपको यह दशहरे पर कविता (Poems on Dussehra in Hindi) पसंद आई होगी। आपको यह विजयादशमी पर कविता कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और साथ ही इन कविताओं को अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर ना भूलें। हमारा फेसबुक पेज अवश्य लाइक कर दें।

यह भी पढ़े

दशहरा पर शायरी

दशहरा पर बधाई सन्देश

दशहरा पर अनमोल विचार

दशहरा पर निबंध

इनका नाम राहुल सिंह तंवर है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 4 वर्ष से अधिक SEO का अनुभव है और 6 वर्ष से भी अधिक समय से कंटेंट राइटिंग कर रहे है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जरूर जुड़े।