हाथी और चतुर खरगोश – पंचतंत्र की कहानी

बड़े नाम की महिमा (Elephants and Hares Story In Hindi)

एक वन में चतुर्दंत नाम का हाथी रहता था, वह अपने हाथियों के समूह का सरदार था। वन में एक वर्ष बहुत ही बढ़िया अकाल पड़ा, जिसकी वजह से तालाब, झील तथा नदियां सूखने लगी। जिसकी वजह से बहुत से हाथी के बच्चे प्यासे मरने लगे और पानी ना होने की वजह से वन सूखने लगा।

तो सारा हाथियों का दल मिलकर चतुरदंत जो कि हाथियों के दल का सरदार था, उसके पास गए और कहा सरदार आप ही कुछ उपाय बताइए। अगर इस तरह ही सूखा पड़ा तो हमारा वंश खत्म हो जाएगा।

Elephants and Hares Story In Hindi
Elephants and Hares Story In Hindi

हाथियों के दल का मुखिया थोड़ा चलाक और चारों दिशाओं में भ्रमण के हुआ था, जिसकी वजह से उसको चारों दिशाओं का ज्ञान था। उसके दिमाग में एक जगह का वर्णन आया तो उसने अपने सारे दल को लेकर उस जगह चला गया।

उस जगह जाकर उन्होंने देखा कि वहां पर बहुत सारा पानी है और बहुत सारी हरी-भरी जगह है। वह खुश हो गए और उन्होंने झूम कर झील में नहाया सुबह से शाम तक उन्होंने नहाया और बाद में वापस जाने लगे, जिनके पास ही बहुत सारे खरगोश के बिल थे तो हाथी और खरगोश के बिल पर पैर रखकर चले जा रहे थे, जिसकी वजह से आधे से ज्यादा खरगोश पद मरे हो गए और कुछ खरगोश मारे गए।

यह देखकर खरगोश का मुखिया घबरा गया और कहा “अगर यह हाथियों का दल ऐसे ही आता रहा तो हमारी प्रजाति नष्ट हो जाएगी। उन्होंने मिलकर जो खरगोश मारे गए, उनके लिए मौन व्रत रखा और एक सभा बुलाई। सभी से पूछा कि अब हमें क्या करना चाहिए तो उसमें से एक खरगोश ने कहा कि हमें यह स्थान छोड़कर किसी और स्थान पर चले जाना चाहिए, जिससे हमारी जान बच सकती है। हमें इस स्थान का परित्याग ही करना पड़ेगा। कुछ ने कहा यही सर्वश्रेष्ठ नीति है।

वह बोला एक व्यक्ति का बलिदान पूरे परिवार के लिए कर देना चाहिए। एक परिवार का बलिदान पूरे गांव के लिए कर देना चाहिए और एक गांव का बलिदान एक राज्य के लिए कर देना चाहिए, एक राज्य का बलिदान एक देश के लिए कह देना चाहिए और अपनी जान बचाने के लिए इस धरती का बलिदान कर देना चाहिए, इसी में ही सर्वश्रेष्ठ नीति है।

इतने में एक खरगोश बोला यह हमारी पूर्वजों की धरती है, हमारे पूर्वजों ने यहां पर जन्म लिया और यहीं पर अपने प्राण न्योछावर किए और अपनी धरती अपने आने वाली पीढ़ी को सौंपी थी तो हमारा दायित्व होता है कि हम इस धरती को नष्ट होने से बचाएं। यह कहकर उसने कहा मैं इस जगह से नहीं जाऊंगा।

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तो खरगोश के दल का मुखिया बोला कि हमें हाथियों के सरदार से बात करनी चाहिए। क्या पता वह हमारी बात समझ जाए। यह कहकर उन्होंने कहा हमारे दल का सर्वश्रेष्ठ और चतुर दिमाग का खरगोश लंबकर्ण उनके मुख्या से बात करने के लिए जाएगा।

खरगोशों की तरफ से लंबकर्ण खरगोश हाथियों के दल के पास आया और कहा मुझे आपके सरदार से मिलना है। एक हाथियों के दल में से एक हाथी ने उसको सरदार का मार्ग बताया। खरगोश सरदार के पास पहुंचा तो गजराज ने कहा “कौन हो तुम और क्यों आए हो यहां?”

लंबकर्ण बोला यह तालाब चंद्रमा का है और मैं चंद्रमा में रहने वाला खरगोश हूं। आप मेरे तालाब को गंदा कर रहे हैं, आप यहां से चले जाइए।

तो हाथियों का सरदार गजराज बोला “मैं कैसे मान लूं कि तुम चंद्रमा के खरगोश हो और अभी चंद्रमा कहां पर है। क्या आप मुझे बता सकते हैं।” यह सुनकर खरगोश बोला आप मेरे साथ आइए मैं आपको बताता हूं और वहां हाथियों के सरदार गजराज को झील के पास लेकर गया और कहां झील में देखो तुम्हें चंद्रमा दिख जाएगा।

झील में चंद्रमा की परछाई दिख रही थी, जिसको देखकर हाथियों के सरदार को लगा कि यह तो सच में चंद्रमा का ही तलाब है और हम इस को गंदा कर रहे हैं। यह देख कर हाथियों का सरदार गजराज डर गया और उसे लगा कि अब यहां से जाना उचित है, वरना क्या पता चंद्रमा हमारे वंश को खत्म कर देगा। वह अपने झुंड को लेकर वहां से चला जाता हैं।

सीख:- हमें हमेशा धैर्य और चतुराई से काम करना चाहिए।

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इनका नाम राहुल सिंह तंवर है, इन्होंने स्नातक (रसायन, भौतिक, गणित) की पढ़ाई की है और आगे की भी जारी है। इनकी रूचि नई चीजों के बारे में लिखना और उन्हें आप तक पहुँचाने में अधिक है। इनको 3 वर्ष से भी अधिक SEO का अनुभव होने के साथ ही 3.5 वर्ष का कंटेंट राइटिंग का अनुभव है। इनके द्वारा लिखा गया कंटेंट आपको कैसा लगा, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। आप इनसे नीचे दिए सोशल मीडिया हैंडल पर जुड़ सकते हैं।

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