पेड़ पर संस्कृत निबंध

Essay on Tree in Sanskrit: नमस्कार दोस्तों, यहां पर हमने पेड़ पर निबंध संस्कृत में (Vriksh Par Nibandh in Sanskrit) लिखा है। यह निबंध सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए मददगार साबित होगा ऐसी हम उम्मीद करते हैं। यहां पर हमने Short Tree Essay in Sanskrit के 3 से अधिक संस्कृत निबंध (Sanskrit Nibandh) शेयर किये है।

Essay on Tree in Sanskrit

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वृक्ष पर संस्कृत निबंध – Essay on Tree in Sanskrit

10 Lines on Trees in Sanskrit

5 Lines on Tree in Sanskrit

  1. वृक्षाः मनुष्यस्य जीवने अति महत्वपुर्णः सन्ति।
  2. वृक्षा अति लाभदायक सन्ति।
  3. वृक्षस्य स्वभाव सज्जन व्यक्ति इव अस्ति।
  4. वृक्षः अस्माकम् वातावरणम् शुद्धम् करोति।
  5. वृक्षः अस्माकम् बहूनि वस्तुनि ददाति यथा फल, छाया आदि।
  6. वृक्षः अस्माकम् उपरि बहवः उपकारम् करोति।
  7. वृक्षाः बहवः रोगाणाम् उपचारम् कुर्वन्ति।
  8. बहवः जनाः तेषाम् जीवन जीवीकाम् वृक्षाणाम् द्वारा चलयन्ति।
  9. वृक्षाः अस्मभयम् अतिमूल्यवान् सन्ति।

वृक्ष का महत्व संस्कृत में (Importance of Trees Written in Sanskrit) – 1

वृक्षा: अस्माकं प्रत्यक्ष: अप्रत्यक्ष: च जीवनं प्रदानं कुर्वन्ति। वृक्षा: कार्वनडाईऑक्साइड वायो: ग्रहणं कृत्वा ऑक्सीजन जनयन्ति या अस्माकं जीवनाय आवश्यकी। प्रकृत्यै धरायां मानवानां कृते दत्त: सर्वेषु उपहारेषु बहुमुल्यम् उपहारं वर्तते। वृक्षेभ्य: करणात् एव वृष्टि: भवति।

येन धरा हरितवर्ण: भवति। वृक्षा: अस्माकं परं मित्रा: सन्ति। येषां रक्षा अस्माकं प्रथम कर्तव्य:। यदा धरयां वृक्षा: एव न भविष्यन्ति तर्हि जीवनं कुत: सम्भव:? अत: सर्वान् निज जीवने १० वृक्षा: अवश्यम् एव रोपणीय:।

हिंदी में अनुवाद

वृक्ष हमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप में जीवन प्रदान करते हैं। पेड़ कार्वनडाईऑक्साइड वायु को ग्रहण करके ऑक्सीजन पैदा करते हैं जो हमारे जीवन के लिए जरुरी है। पेड़ प्रकृति के द्वारा पृथ्वी पर मनुष्यों के लिए दिए सभी उपहारों में बहुमूल्य उपहार है। पेड़ों के कारण ही वर्षा होती है।

जिससे धरती हरी हो जाती है। इनकी रक्षा करना हमारा पहल कर्तव्य है। यदि घरती पर पेड़ ही नहीं होंगे तो जीवन कहाँ सम्भव है? इसलिए सभी को अपने जीवन में 10 पेड़ अवश्य ही लगाने चाहिए।

वृक्ष पर निबंध संस्कृत में (Essay on Tree in Sanskrit) – 2

तरुः उन्नतः पादपः अस्ति। तरूणाम् रूक्षम् काष्ठकाण्डमस्ति। अनेके तरवः फलानि ददति। अनेकवृक्षाणाम् सङ्घः अरण्यम् इति कथ्यते। तरूणाम् पत्राणि CO2 जलम् च उपयुज्य O2 शर्करां च रचयन्ति। तरवः जनेभ्यः छायां यच्छन्ति। उक्तञ्च “छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे। फलान्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषाः इव।।”

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वृक्ष पर संस्कृत में निबंध (Importance of Trees in Sanskrit) – 3

वृक्षाः जनाः स्वच्छम् वायुः ददाति। वृक्षाः पर्णैः पुष्पैः च शोभन्ते। अस्य वर्णः हरितः भवति। वृक्षः CO2 ग्रहति O2 वमति। वृक्षाः प्राणरहिताः जडपदार्थाः न। तेषामपि प्राणोऽस्ति। तेऽपि रोगग्रस्ता भवन्ति। वृक्षाः पादैः पातालं स्पृश्यन्ति। वृक्षाः पादैः(मूलैः) जलं पिबन्ति। वृक्षे काकः, चटकः शयेन च तिष्ठन्ति। वृक्षेषु भ्रमराः भ्रमन्ति मधुपानं च कुर्वन्ति। वानराः वृक्षेषु कूर्दन्ति। वृक्षेण फलानि विकसन्ति। जनाः वृक्षाणां फलानि भक्षयन्ति। वृक्षाः परोपकाराय फलन्ति।

वृक्षों के नाम संस्कृत में जानने के लिए यहां पर क्लिक करें

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